6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

भजन संहिता 129

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

भजन 129 एक गीत है जो इस्राएल का सारा देश मिलकर गाता था। यह गीत बीते हुए दुखों को याद करने से शुरू होता है। "मेरे बचपन से लोग मुझे बार बार क्लेश देते आए हैं," इस्राएल कहता है। यानी जब से यह देश जवान था, तभी से दूसरे लोग उसे सताते आए हैं। मिस्र में गुलामी, जंगल में भटकना, दुश्मनों के हमले, यह सब उस "क्लेश" में शामिल है।

फिर एक तस्वीर आती है जो थोड़ी कठोर है। "हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया, और लम्बी-लम्बी रेखाएँ की।" सोचो एक किसान जो अपने खेत पर हल चलाता है, जमीन में गहरी रेखाएँ बनाता है। इस्राएल कहता है, "मेरी पीठ पर भी ऐसी ही गहरी रेखाएँ पड़ी हैं, जैसे किसी ने मुझे कोड़ों से मारा हो।" यह दर्द की भाषा है, लुका-छिपी नहीं।

लेकिन फिर एक मोड़ आता है। "परन्तु मुझ पर प्रबल नहीं हुए।" दुश्मन जीता नहीं। और क्यों नहीं जीता? क्योंकि "यहोवा धर्मी है; उसने दुष्टों के फंदों को काट डाला है।" यहोवा का मतलब है परमेश्वर का अपना नाम, जिससे इस्राएल उन्हें पुकारता था। परमेश्वर ने वे रस्सियाँ काट दीं जिनसे दुष्ट लोग इस्राएल को बांधना चाहते थे।

आखिरी हिस्से में गीत एक प्रार्थना बन जाता है। यह चाहता है कि सिय्योन से बैर रखनेवाले, यानी जो यरूशलेम और परमेश्वर के लोगों से नफरत करते हैं, वे लज्जित हों और पीछे हट जाएं। उनकी तुलना छत पर उगी घास से की जाती है, जो बढ़ने से पहले ही सूख जाती है। ऐसी घास से न तो कोई मुट्ठी भर पाता है, न पूलियाँ बांध पाता है, और न कोई आने-जानेवाला उसे देखकर आशीर्वाद देता है।

इसका क्या अर्थ है?

यह भजन ईमानदार है। यह यह नहीं कहता कि सब कुछ आसान था या परमेश्वर ने हर दर्द को तुरंत दूर कर दिया। पीठ पर सच में रेखाएँ पड़ी थीं। दुख सच्चा था। फिर भी इस्राएल कह सकता है कि दुश्मन "प्रबल नहीं हुए।" यह जीत नहीं है जिसमें कोई दर्द नहीं होता, बल्कि यह जीत है जिसमें परमेश्वर अंत तक साथ रहे।

ध्यान दो कि परमेश्वर को यहाँ "धर्मी" कहा गया है। इसका मतलब है कि वे न्यायी हैं, और जो गलत है उसे वे हमेशा के लिए टिकने नहीं देते। फंदे काटना एक तस्वीर है, जैसे कोई रस्सी से बंधा हो और कोई आकर वह रस्सी काट दे। परमेश्वर बंधन काटनेवाले हैं।

एक बड़ी कड़ी

यह भजन हमें यीशु मसीह की ओर भी इशारा करता है। जब यीशु मसीह को कोड़े मारे गए और क्रूस पर चढ़ाया गया, तब उनकी पीठ पर भी गहरी रेखाएँ पड़ीं, जैसे इस भजन में लिखा है। और फिर भी दुश्मन उन पर "प्रबल नहीं हुए।" मृत्यु ने उन्हें बांधकर रखना चाहा, पर परमेश्वर ने वह फंदा काट दिया और उन्हें जीवित उठाया। यह भजन सदियों पहले लिखा गया, पर इसकी सच्चाई यीशु मसीह में सबसे गहरी तरह से पूरी होती है।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हारी जिंदगी में भी कोई है जो तुम्हें तंग करता है, चिढ़ाता है, या गलत व्यवहार करता है। यह भजन तुम्हें झूठी तसल्ली नहीं देता कि "सब ठीक हो जाएगा और फिर सब दोस्त बन जाएंगे।" यह सच बोलता है कि दर्द सच्चा है। पर साथ ही यह सिखाता है कि परमेश्वर देखते हैं, और वे न्यायी हैं। तुम उनसे कह सकते हो कि "मेरी पीठ पर भी रेखाएँ हैं," और भरोसा रख सकते हो कि वे बंधन काटना जानते हैं। यह भरोसा रातोंरात हर मुश्किल खत्म नहीं करता, पर यह तुम्हें अकेला नहीं छोड़ता।

आपस में बात करें

क्या तुम्हें लगता है कि कभी किसी ने तुम्हारे साथ गलत किया हो, जैसे इस्राएल के साथ हुआ? उस समय तुमने क्या महसूस किया?

यह भजन दुख को छिपाता नहीं, फिर भी भरोसा रखता है। तुम्हें क्या लगता है, क्या ये दोनों बातें एक साथ हो सकती हैं?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, आप धर्मी हैं और आप देखते हैं जब हम दुखी होते हैं। जब कोई हमें चोट पहुंचाए, तो हमें याद दिलाइए कि वह बंधन हमेशा के लिए नहीं टिकेगा। हमें सच बोलने का साहस दीजिए, और भरोसा दीजिए कि आप फंदे काटना जानते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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भजन संहिता 129 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

भजन संहिता 129 किस विषय में है?
भजन 129 एक गीत है जो इस्राएल का सारा देश मिलकर गाता था। यह गीत बीते हुए दुखों को याद करने से शुरू होता है। "मेरे बचपन से लोग मुझे बार बार क्लेश देते आए हैं," इस्राएल कहता है। यानी जब से यह देश जवान था, तभी से दूसरे लोग उसे सताते आए हैं। मिस्र में गुलामी, जंगल में भटकना, दुश्मनों के हमले, यह सब उस "क्लेश" में शामिल है।
भजन संहिता 129 क्या कहता है?
लेकिन फिर एक मोड़ आता है। "परन्तु मुझ पर प्रबल नहीं हुए।" दुश्मन जीता नहीं। और क्यों नहीं जीता? क्योंकि "यहोवा धर्मी है; उसने दुष्टों के फंदों को काट डाला है।" यहोवा का मतलब है परमेश्वर का अपना नाम, जिससे इस्राएल उन्हें पुकारता था। परमेश्वर ने वे रस्सियाँ काट दीं जिनसे दुष्ट लोग इस्राएल को बांधना चाहते थे।
भजन संहिता 129 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह भजन ईमानदार है। यह यह नहीं कहता कि सब कुछ आसान था या परमेश्वर ने हर दर्द को तुरंत दूर कर दिया। पीठ पर सच में रेखाएँ पड़ी थीं। दुख सच्चा था। फिर भी इस्राएल कह सकता है कि दुश्मन "प्रबल नहीं हुए।" यह जीत नहीं है जिसमें कोई दर्द नहीं होता, बल्कि यह जीत है जिसमें परमेश्वर अंत तक साथ रहे।
बच्चे भजन संहिता 129 से क्या सीख सकते हैं?
यह भजन हमें यीशु मसीह की ओर भी इशारा करता है। जब यीशु मसीह को कोड़े मारे गए और क्रूस पर चढ़ाया गया, तब उनकी पीठ पर भी गहरी रेखाएँ पड़ीं, जैसे इस भजन में लिखा है। और फिर भी दुश्मन उन पर "प्रबल नहीं हुए।" मृत्यु ने उन्हें बांधकर रखना चाहा, पर परमेश्वर ने वह फंदा काट दिया और उन्हें जीवित उठाया। यह भजन सदियों पहले लिखा गया, पर इसकी सच्चाई यीशु मसीह में सबसे गहरी तरह से पूरी होती है।
भजन संहिता 129 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें लगता है कि कभी किसी ने तुम्हारे साथ गलत किया हो, जैसे इस्राएल के साथ हुआ? उस समय तुमने क्या महसूस किया?

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