7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

रोमियों 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पौलुस एक आदमी था जिसे परमेश्वर ने एक खास काम के लिए चुना था। पहले वह परमेश्वर के लोगों को सताता था, पर अब वह यीशु मसीह का दास बन गया था। वह एक पत्र लिख रहा है, एक बहुत लंबा और महत्वपूर्ण पत्र, रोम शहर में रहने वाले परमेश्वर के प्यारे लोगों के लिए।

पौलुस के पास एक खबर है, जैसे कोई दूत तेज़ घोड़े पर सवार होकर राजा का संदेश लाता है। यह खबर नई नहीं है। परमेश्वर ने बहुत पहले ही अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा इसका वादा किया था। खबर यह है कि परमेश्वर का पुत्र, यीशु मसीह, दाऊद राजा के परिवार से जन्मा। और जब वह मरे हुओं में से जी उठा, तब सबको दिख गया कि वह सचमुच परमेश्वर का पुत्र है, बड़ी सामर्थ्य के साथ।

पौलुस रोम के लोगों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता है, क्योंकि उनका विश्वास हर जगह की बात बन गई है। वह हर दिन प्रार्थना में उनको याद करता है और उनसे मिलने की बड़ी इच्छा रखता है। वह कहता है, "मैं सुसमाचार से नहीं लजाता।" यानी वह इस खबर को छिपाता नहीं, बल्कि हर किसी को बताना चाहता है, चाहे वह यहूदी हो या यूनानी, बुद्धिमान हो या साधारण। क्योंकि यह खबर परमेश्वर की सामर्थ्य है, जो हर विश्वास करनेवाले को बचाती है।

फिर पौलुस एक बहुत दुखद बात बताता है। कुछ लोग थे जो परमेश्वर को जानते थे। आकाश देखकर, तारे देखकर, पेड़-पौधे और पशु-पक्षी देखकर, वे समझ सकते थे कि कोई महान परमेश्वर है जिसने यह सब बनाया। पर उन्होंने परमेश्वर का धन्यवाद नहीं किया। उन्होंने अपने मन में सोचा, "हमें परमेश्वर की जरूरत नहीं," और वे पत्थर और लकड़ी की मूर्तियाँ बनाने लगे, पक्षियों और जानवरों की शक्ल की। सोचो, जिसने आकाश और सूरज बनाया, उसकी जगह उन्होंने एक चिड़िया की मूरत को पूजना शुरू कर दिया!

जब उन्होंने परमेश्वर की तरफ पीठ फेर ली, तो उनका मन अंधेरे से भर गया। परमेश्वर ने उन्हें उनकी अपनी इच्छा पर छोड़ दिया। और तब बुरी बातें बढ़ने लगीं: झूठ, ईर्ष्या, हत्या, चुगली, माता-पिता की बात न मानना, निर्दयता। पौलुस यह सब सूची में गिनाता है, जैसे कोई एक-एक करके पत्थर उलटकर दिखाए कि नीचे कितना कीचड़ है।

What Does This Mean?

पौलुस दो बातें साथ रख रहा है। एक तरफ सबसे अच्छी खबर है: परमेश्वर का पुत्र आया, मर गया, और जी उठा, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे उसे बचाया जाए। दूसरी तरफ यह सच्चाई है कि जब लोग परमेश्वर से मुँह मोड़ लेते हैं, तो उनका दिल अंधेरा हो जाता है और बुराई बढ़ती जाती है। यह डराने के लिए नहीं लिखा गया, बल्कि इसलिए कि हम समझें कि परमेश्वर के बिना जीवन कितना टूटा-फूटा हो जाता है।

The Common Thread

यह पूरी कहानी यीशु मसीह की ओर इशारा करती है। परमेश्वर ने बहुत पहले वादा किया था कि वे अपना पुत्र भेजेंगे। यीशु दाऊद के परिवार से आया, मरा, और जी उठा। यही खबर, यही सुसमाचार, परमेश्वर की सामर्थ्य है जो हर उस व्यक्ति को बचाती है जो विश्वास करता है, चाहे वह कोई भी हो। जहाँ लोगों ने सृष्टिकर्ता को छोड़कर मूरतों को पूजा, वहीं यीशु आया ताकि हमें वापस असली परमेश्वर के पास ले आए।

For You

क्या तुम कभी किसी अच्छी खबर को छिपा कर रखते हो, क्योंकि तुम्हें डर लगता है कि लोग क्या सोचेंगे? पौलुस नहीं लजाया। तुम भी अपने दोस्त को बता सकते हो कि यीशु मसीह जी उठा है। और जब तुम सूरज, चाँद, फूल या अपने कुत्ते को देखो, तो परमेश्वर का धन्यवाद करना मत भूलना, क्योंकि उन्हीं ने यह सब बनाया है।

Talk About It

अगर तुम पौलुस की जगह होते और लोग तुम्हारी बात का मज़ाक उड़ाते, तो क्या तुम फिर भी यीशु के बारे में बताते?

तुम अपने चारों ओर परमेश्वर के बनाए हुए कौन-कौन से काम देख सकते हो, जिनके लिए तुम धन्यवाद दे सकते हो?

Praying Together

प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप जी उठे और हमें बचाने आए। हमें डर मत लगने दीजिए आपके बारे में बताने से। हमारी आँखें खोलिए ताकि हम आपके बनाए हर काम में आपको देख सकें और आपका धन्यवाद करें। आमीन।

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रोमियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रोमियों 1 किस विषय में है?
पौलुस एक आदमी था जिसे परमेश्वर ने एक खास काम के लिए चुना था। पहले वह परमेश्वर के लोगों को सताता था, पर अब वह यीशु मसीह का दास बन गया था। वह एक पत्र लिख रहा है, एक बहुत लंबा और महत्वपूर्ण पत्र, रोम शहर में रहने वाले परमेश्वर के प्यारे लोगों के लिए।
रोमियों 1 क्या कहता है?
पौलुस रोम के लोगों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता है, क्योंकि उनका विश्वास हर जगह की बात बन गई है। वह हर दिन प्रार्थना में उनको याद करता है और उनसे मिलने की बड़ी इच्छा रखता है। वह कहता है, "मैं सुसमाचार से नहीं लजाता।" यानी वह इस खबर को छिपाता नहीं, बल्कि हर किसी को बताना चाहता है, चाहे वह यहूदी हो या यूनानी, बुद्धिमान हो या साधारण। क्योंकि यह खबर परमेश्वर की सामर्थ्य है, जो हर विश्वास करनेवाले को बचाती है।
रोमियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
जब उन्होंने परमेश्वर की तरफ पीठ फेर ली, तो उनका मन अंधेरे से भर गया। परमेश्वर ने उन्हें उनकी अपनी इच्छा पर छोड़ दिया। और तब बुरी बातें बढ़ने लगीं: झूठ, ईर्ष्या, हत्या, चुगली, माता-पिता की बात न मानना, निर्दयता। पौलुस यह सब सूची में गिनाता है, जैसे कोई एक-एक करके पत्थर उलटकर दिखाए कि नीचे कितना कीचड़ है।
बच्चे रोमियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
यह पूरी कहानी यीशु मसीह की ओर इशारा करती है। परमेश्वर ने बहुत पहले वादा किया था कि वे अपना पुत्र भेजेंगे। यीशु दाऊद के परिवार से आया, मरा, और जी उठा। यही खबर, यही सुसमाचार, परमेश्वर की सामर्थ्य है जो हर उस व्यक्ति को बचाती है जो विश्वास करता है, चाहे वह कोई भी हो। जहाँ लोगों ने सृष्टिकर्ता को छोड़कर मूरतों को पूजा, वहीं यीशु आया ताकि हमें वापस असली परमेश्वर के पास ले आए।
रोमियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम पौलुस की जगह होते और लोग तुम्हारी बात का मज़ाक उड़ाते, तो क्या तुम फिर भी यीशु के बारे में बताते?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।" ध्यान दो, पौलुस यह नहीं कहता कि धर्मी जन विश्वास से बचाया जाएगा, बल्कि जीवित रहेगा। यानी हर सुबह, हर बिल दिखने पर, हर जाँच रिपोर्ट पर, यही साँस लेनी है। और परमेश्वर की धार्मिकता "विश्वास से और विश्वास के लिये" प्रकट होती है, एक कदम भरोसे का, फिर अगला। तुम्हारा आज का कदम कौन सा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

पौलुस यहाँ सिर्फ किसी एक पाप की सूची नहीं बना रहा। पीछे मुड़कर देखो: जड़ यह है कि मनुष्य ने "परमेश्वर की सच्चाई को झूठ से बदल डाला।" जब परमेश्वर हटता है, तो जगह खाली नहीं रहती, वहाँ हमारी अपनी इच्छाएँ बैठ जाती हैं और मालिक बन जाती हैं। इसलिए पूछ: मेरे जीवन में किस छोटी चीज़ को मैंने परमेश्वर की जगह दे दी है?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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