श्रेष्ठगीत 5
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या: श्रेष्ठगीत अध्याय 5
स्पष्टीकरण
यह अध्याय एक कविता है, जो दो प्रेमियों के बीच की बातचीत बताती है, दुल्हा और दुल्हन। दुल्हा आता है और कहता है कि वह अपने बगीचे में आ गया है, उसने गन्धरस (एक सुगंधित वस्तु) और मधु खाया है, दूध और दाखमधु पिया है। यह खुशी और मिलन की भाषा है।
फिर कहानी बदल जाती है। दुल्हन सोती है, पर उसका मन जागता रहता है। रात में उसका प्रेमी द्वार खटखटाता है। वह कहता है, "मेरे लिये द्वार खोल, क्योंकि मेरा सिर ओस से भीगा है।" पर दुल्हन आलसी हो जाती है। वह सोचती है, मैंने अपने कपड़े उतार दिए हैं, पाँव धो लिए हैं, अब फिर से उठना कितना कठिन है। जब तक वह उठकर द्वार खोलती है, तब तक उसका प्रेमी जा चुका होता है।
दुल्हन बहुत दुखी हो जाती है। वह उसे ढूँढ़ने निकलती है, पुकारती है, पर कोई उत्तर नहीं मिलता। इतना ही नहीं, नगर के पहरेदार उसे मारते हैं और उसकी चादर छीन लेते हैं। यह बहुत दर्दनाक और कठोर दृश्य है।
फिर वह यरूशलेम की स्त्रियों से विनती करती है कि अगर उन्हें उसका प्रेमी मिले तो उससे कह दें कि वह प्रेम में रोगी है, यानी उसका दिल प्रेम की पीड़ा से भरा है। वे पूछती हैं कि आखिर उसका प्रेमी ऐसा खास क्यों है। इसके जवाब में दुल्हन एक लंबा, सुंदर वर्णन देती है, उसका सिर सोने जैसा, उसकी आँखें कबूतर जैसी, उसके होंठ सोसन फूल जैसे। अंत में वह कहती है, "यही मेरा प्रेमी और यही मेरा मित्र है।"
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय प्रेम की खुशी के साथ-साथ प्रेम की तकलीफ भी दिखाता है। दुल्हन ने एक गलती की, वह आलस्य के कारण उठने में देर कर देती है, और उसका प्रेमी चला जाता है। क्या वह जानबूझकर ऐसा करता है, पाठ यह नहीं बताता। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका सीधा जवाब बाइबल नहीं देती, और यह ठीक है कि हम इसे खुला छोड़ दें।
यहाँ कुछ गहरा दिखाई देता है, प्रेम में कभी-कभी हमसे चूक हो जाती है। हम जिसे प्यार करते हैं उसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते, और फिर पछताते हैं। दुल्हन का दर्द असली है, उसकी खोज असली है। यह कविता हमें सिखाती है कि प्रेम केवल मीठी भावना नहीं, बल्कि कभी-कभी इंतज़ार और पीड़ा भी होती है।
बड़ी कहानी से संबंध
पूरी बाइबल में परमेश्वर अपने लोगों से एक वाचा, यानी एक पक्का वादा, बाँधते हैं, जैसे एक दूल्हा अपनी दुल्हन से बाँधता है। कई जगह परमेश्वर अपने लोगों को ऐसे प्रेम से बुलाते हैं। जब दुल्हन द्वार खोलने में देर करती है, तो यह हमें याद दिलाता है कि हम भी कभी-कभी परमेश्वर की पुकार सुनकर भी सुस्त रह जाते हैं। हम सोचते हैं, अभी नहीं, बाद में।
प्रकाशितवाक्य 3:20 में प्रभु यीशु मसीह भी द्वार खटखटाने की बात कहते हैं, "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ।" यह वही तस्वीर है। परमेश्वर हमारे दिल का द्वार खटखटाते हैं, और हमें चुनना है कि हम उठकर खोलें या सोते रहें। यह अध्याय हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम उस खटखटाहट को पहचानते हैं जब वह आती है।
आपके लिए
क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपको बुलाया, और आपने सोचा, "थोड़ी देर बाद," और फिर वह मौका चला गया? दुल्हन की कहानी हमें याद दिलाती है कि प्रेम माँग करता है, जल्दी उठने की, तैयार रहने की। यह केवल इंसानी रिश्तों पर नहीं, परमेश्वर के साथ हमारे रिश्ते पर भी लागू होता है। कभी-कभी हमें लगता है कि प्रार्थना या परमेश्वर की बात सुनना "अभी असुविधाजनक है", जैसे दुल्हन को फिर से कपड़े पहनना कठिन लगा। पर जो देर करता है, वह कभी-कभी खो भी देता है, कम से कम कुछ समय के लिए। अच्छी बात यह है कि दुल्हन हार नहीं मानती, वह ढूँढ़ती रहती है। हमारा परमेश्वर के साथ रिश्ता भी ऐसा ही हो सकता है, भले हम चूक जाएँ, हम फिर से उन्हें ढूँढ़ सकते हैं।
आपस में बात करें
क्या तुम्हें लगता है कि दुल्हन का आलस्य समझ में आने वाली गलती थी, या वह सच में गलत थी? क्यों?
क्या कभी तुमने महसूस किया कि परमेश्वर तुम्हारे दिल का द्वार खटखटा रहे हैं, पर तुमने जवाब देने में देर कर दी?
साथ में प्रार्थना
हे प्रभु, आप हमारे दिल का द्वार खटखटाते हैं, पर हम अक्सर सुस्त हो जाते हैं। हमें जल्दी उठने और आपकी आवाज़ पहचानने की समझ दीजिए। जब हम चूक जाएँ, तो हमें ढूँढ़ने की हिम्मत दीजिए, जैसे दुल्हन ने ढूँढ़ा। आमीन।
श्रेष्ठगीत 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
श्रेष्ठगीत 5 किस विषय में है?
श्रेष्ठगीत 5 क्या कहता है?
श्रेष्ठगीत 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे श्रेष्ठगीत 5 से क्या सीख सकते हैं?
श्रेष्ठगीत 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
वह उसे ढूँढ़ती फिरी, रात में पहरुओं ने उसे मारा, और फिर भी उसके मुँह से यही निकला, "उसका रूप लबानोन और देवदारों के समान उत्तम है।" घाव अभी ताज़े थे, पर प्रशंसा कम नहीं हुई। जब मसीह दूर लगे, तब तेरे होठों पर क्या आता है? शिकायत, या उसकी सुंदरता का बखान? सच्चा प्रेम अंधेरे में भी उसे उत्तम कहता है।
वह उठी तो देर हो चुकी थी, पर किवाड़ की मूठ पर गन्धरस लगा था। उसका प्रेमी आया था, उसने दरवाज़े को छुआ था, और अपनी महक छोड़ गया था।
कभी तुम्हें भी लगता होगा कि तुमने परमेश्वर की दस्तक सुनकर भी उठने में देर कर दी। पर ध्यान से देखो, उसके आने के निशान अब भी तुम्हारे हाथों पर हैं। वह चुपचाप आया था, और तुम्हें प्यार करता रहा, तब भी जब तुम उठ न सके।
वह बिस्तर में थी, आराम में थी, और दरवाज़ा खोलने में देर कर रही थी। तब "मेरे प्रेमी ने छेद से अपना हाथ बढ़ाया, और मेरा मन उसके लिये उमड़ उठा।" उसने ज़बरदस्ती दरवाज़ा नहीं तोड़ा, बस हाथ बढ़ाया। परमेश्वर भी ऐसे ही करता है। पर जब वह उठी, तो वह जा चुका था। आज तेरे मन पर वह हाथ कहाँ लगा है? देर मत कर।
जब दूसरी स्त्रियों ने पूछा कि तेरा प्रेमी औरों से बढ़कर क्यों है, तब वह अभी-अभी रात में भटककर, पहरुओं से पिटकर लौटी थी। और उसी हालत में उसके मुँह से निकला, "मेरा प्रेमी गोरा और लाल सा है, वह दस हज़ार में उत्तम है।" घाव खाकर भी वह उसकी बड़ाई कर सकी। तेरी चोट तेरी गवाही को चुप करा देती है, या और गहरा कर देती है?
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