7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

सपन्याह 2

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

सपन्याह भविष्यद्वक्ता थे। परमेश्वर ने उनके द्वारा एक कड़ा संदेश भेजा। पहले अध्याय में यहूदा के लोगों को चेतावनी मिली थी। अब दूसरे अध्याय में परमेश्वर आस-पास के देशों की भी बात करते हैं।

अध्याय की शुरुआत में सपन्याह लोगों से कहते हैं, "इकट्ठे हो!" वे चाहते हैं कि लोग रुकें, सोचें, और परमेश्वर की ओर लौटें। समय कम है। परमेश्वर के क्रोध का दिन आने वाला है, और वह दिन भूसी की तरह जल्दी उड़ जाएगा। पद 3 में एक कोमल आवाज़ सुनाई देती है: "हे पृथ्वी के सब नम्र लोगों, उसको ढूँढ़ते रहो।" जो लोग परमेश्वर की आज्ञा मानते हैं, उनके लिए एक आशा है, कि शायद वे उस भयानक दिन में सुरक्षित रहें।

फिर परमेश्वर चार दिशाओं के देशों की बात करते हैं। पश्चिम में पलिश्ती लोगों के शहर हैं, जैसे गाज़ा और अश्कलोन। वे इस्राएल के पुराने दुश्मन थे। पूर्व में मोआब और अम्मोन हैं। ये देश परमेश्वर की प्रजा का मज़ाक उड़ाते थे और घमंड करते थे। दक्षिण में कूश है, और उत्तर में शक्तिशाली अश्शूर देश, जिसकी राजधानी नीनवे थी।

नीनवे उस समय की सबसे बड़ी नगरी थी। वह सोचती थी, "मैं ही हूँ, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं।" कितना घमंड! परन्तु परमेश्वर कहते हैं कि यह गर्वीली नगरी उजाड़ हो जाएगी। जहाँ कभी राजा रहते थे, वहाँ जंगली जानवर बसेरा करेंगे। खिड़कियों में उल्लू बोलेंगे। जो लोग वहाँ से गुज़रेंगे, वे ताली बजाकर हैरान होंगे कि इतनी बड़ी नगरी का यह हाल कैसे हुआ।

What Does This Mean?

यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर पूरी दुनिया के परमेश्वर हैं। वे केवल इस्राएल के परमेश्वर नहीं हैं। वे हर देश, हर राजा, हर नगर को देखते हैं। जब लोग घमंड करते हैं, दूसरों को दुख देते हैं, या परमेश्वर को भूल जाते हैं, तो वे यह सब जानते हैं।

यह भी दिखाता है कि परमेश्वर न्यायी हैं। जब मोआब और अम्मोन ने उनकी प्रजा का मज़ाक उड़ाया, तो परमेश्वर ने कहा, "वह मेरे कानों तक पहुँची है।" वे सुनते हैं। कुछ भी छिपा नहीं रहता।

परन्तु इसी कठोर अध्याय के बीच में एक कोमल वाक्य छिपा है: "उसको धार्मिकता से ढूँढ़ो, नम्रता से ढूँढ़ो।" परमेश्वर नम्र लोगों को नहीं भूलते। जो अपने आप को छोटा समझते हैं और परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, वे शरण पाते हैं।

The Common Thread

बाइबल की बड़ी कहानी में यह अध्याय एक ज़रूरी हिस्सा है। परमेश्वर हमेशा से चाहते थे कि सब देश उन्हें जानें। पद 11 में लिखा है, "जाति-जाति के सब द्वीपों के निवासी अपने-अपने स्थान से उसको दण्डवत् करेंगे।" यह एक बड़ी भविष्यवाणी है। एक दिन हर देश से लोग परमेश्वर की उपासना करेंगे।

यह वादा यीशु मसीह में पूरा हुआ। यीशु सिर्फ इस्राएल के लिए नहीं आए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आए। और वे स्वयं नम्र थे। उन्होंने कहा था, "मैं मन में दीन हूँ।" जो नम्र होकर उनके पास आते हैं, वे परमेश्वर के क्रोध से बचाए जाते हैं, क्योंकि यीशु ने क्रूस पर हमारे लिए वह दंड सहा।

पद 7 में एक और सुंदर बात है: परमेश्वर अपनी प्रजा की "सुधि लेकर उनकी समृद्धि को लौटा लाएगा।" न्याय के बीच भी परमेश्वर अपने लोगों को याद रखते हैं।

For You

तुम शायद सोचो, "मेरा गाज़ा या नीनवे से क्या लेना-देना?" पर देखो, नीनवे ने कहा था, "मैं ही हूँ।" यह घमंड की भाषा है। कभी-कभी हमारे मन में भी ऐसी आवाज़ आती है, "मैं सबसे अच्छा हूँ। मुझे किसी की ज़रूरत नहीं।" स्कूल में, दोस्तों के बीच, खेल में, यह घमंड धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

सपन्याह कहते हैं, नम्र बनो। परमेश्वर को ढूँढो। नम्र होने का मतलब कमज़ोर होना नहीं है। इसका मतलब है सच बोलना कि "परमेश्वर, मुझे आपकी ज़रूरत है।"

और एक बात, अगर कोई तुम्हारा मज़ाक उड़ाता है क्योंकि तुम यीशु पर विश्वास करते हो, तो याद रखो, परमेश्वर सुनते हैं। वे भूलते नहीं।

Talk About It

नीनवे ने सोचा, "मैं ही हूँ।" तुम्हारे मन में कब-कब ऐसे विचार आते हैं, और उस समय क्या करना चाहिए?

पद 3 कहता है, "सम्भव है तुम शरण पाओ।" परमेश्वर "निश्चय" के बजाय "सम्भव है" क्यों कहते हैं?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, आप पूरी दुनिया के परमेश्वर हैं। आप सब कुछ देखते और सुनते हैं। मुझे घमंडी होने से बचाइए। मुझे नम्र दिल दीजिए ताकि मैं आपको ढूँढूँ। यीशु के लिए धन्यवाद, जो मेरी शरण हैं। आमीन।

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सपन्याह 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

सपन्याह 2 किस विषय में है?
सपन्याह भविष्यद्वक्ता थे। परमेश्वर ने उनके द्वारा एक कड़ा संदेश भेजा। पहले अध्याय में यहूदा के लोगों को चेतावनी मिली थी। अब दूसरे अध्याय में परमेश्वर आस-पास के देशों की भी बात करते हैं।
सपन्याह 2 क्या कहता है?
नीनवे उस समय की सबसे बड़ी नगरी थी। वह सोचती थी, "मैं ही हूँ, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं।" कितना घमंड! परन्तु परमेश्वर कहते हैं कि यह गर्वीली नगरी उजाड़ हो जाएगी। जहाँ कभी राजा रहते थे, वहाँ जंगली जानवर बसेरा करेंगे। खिड़कियों में उल्लू बोलेंगे। जो लोग वहाँ से गुज़रेंगे, वे ताली बजाकर हैरान होंगे कि इतनी बड़ी नगरी का यह हाल कैसे हुआ।
सपन्याह 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परन्तु इसी कठोर अध्याय के बीच में एक कोमल वाक्य छिपा है: "उसको धार्मिकता से ढूँढ़ो, नम्रता से ढूँढ़ो।" परमेश्वर नम्र लोगों को नहीं भूलते। जो अपने आप को छोटा समझते हैं और परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, वे शरण पाते हैं।
बच्चे सपन्याह 2 से क्या सीख सकते हैं?
पद 7 में एक और सुंदर बात है: परमेश्वर अपनी प्रजा की "सुधि लेकर उनकी समृद्धि को लौटा लाएगा।" न्याय के बीच भी परमेश्वर अपने लोगों को याद रखते हैं।
सपन्याह 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
और एक बात, अगर कोई तुम्हारा मज़ाक उड़ाता है क्योंकि तुम यीशु पर विश्वास करते हो, तो याद रखो, परमेश्वर सुनते हैं। वे भूलते नहीं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

यह उनके अहंकार के कारण उन पर पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की प्रजा की निन्दा की।" मोआब और अम्मोन ने परमेश्वर पर नहीं, उसके लोगों पर ताने मारे थे। पर परमेश्वर ने उसे अपने ऊपर लिया। सोचो, जब कोई तुम्हें नीचा दिखाता है, तब भी तुम अकेले नहीं खड़े होते। और यह भी सोचो: तुम्हारी हँसी किसके ऊपर है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

हे निर्लज्ज जाति, इकट्ठी हो, इकट्ठी हो" यह बुलावा उन्हीं को है जिनमें लज्जा तक नहीं बची थी। परमेश्वर उन्हें छोड़ नहीं देता, बल्कि पुकारता है। क्रोध का दिन आने से पहले वह समय देता है, समेटने का, लौटने का। तेरे भीतर जो बिखरा पड़ा है, उसे आज ही उसके सामने रख। कल का भरोसा किसने दिया?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

नीनवे उस समय की सबसे बड़ी ताकत थी, दजला नदी के किनारे बसी, दीवारों से घिरी, अजेय दिखती हुई। पर भविष्यद्वक्ता कहता है, "वह अपना हाथ उत्तर की ओर बढ़ाकर अश्शूर को नाश करेगा, और नीनवे को उजाड़कर मरुभूमि के समान सूखा देगा।" जो नगर पानी पर बैठा था, वही रेगिस्तान बन गया।

तेरी सुरक्षा किस दीवार पर टिकी है? जो चीज़ें कभी नहीं गिरेंगी, ऐसा तू मानता है, उन्हें एक बार फिर गिनकर देख।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

तीन बार वही पुकार, "इससे पहले, इससे पहले, इससे पहले।" परमेश्वर का हृदय यहाँ दिखता है: वह न्याय की घोषणा करने से पहले लौटने का समय देता है। पर दिन भूसी की तरह उड़ जाते हैं। जिस बात को तू "बाद में सुधार लूँगा" कहकर टाल रहा है, वह टलती नहीं, बस पास आती जाती है। आज ही उसके सामने बैठ जा।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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