1 शमूएल 30
छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
दाऊद और उसके लोग घर लौट रहे थे। वे थके थे। पर जब वे सिकलग पहुँचे, तो क्या देखा?
सब कुछ जला हुआ था। घर काले काले। धुआँ उड़ रहा था।
दाऊद की पत्नियाँ कहाँ थीं? बच्चे कहाँ थे? कोई नहीं था। बुरे लोग आए थे। सब को पकड़ कर ले गए थे।
दाऊद बहुत रोया। उसके सब साथी भी रोए। वे इतना रोए, कि फिर रो भी न सके।
दाऊद का मन बहुत दुखी था। बहुत भारी। उसके साथी भी गुस्से में थे।
पर दाऊद ने क्या किया? वह बैठ नहीं गया। वह परमेश्वर यहोवा की ओर गया।
उसने एपोद लाने को कहा। और उसने परमेश्वर से पूछा, "क्या मैं उनका पीछा करूँ?"
परमेश्वर ने कहा, "पीछा कर। तू उन्हें पकड़ेगा। तू सब कुछ छुड़ा लाएगा।"
इससे क्या समझ मिलता है?
दाऊद उठा। वह अपने लोगों को लेकर चला। रास्ता बहुत लंबा था। रास्ते में एक आदमी मिला, वह भूखा था, बहुत कमज़ोर। दाऊद के लोगों ने उसे रोटी दी, पानी दिया, अंजीर दी। तब उसमें जान आई।
उस आदमी ने बताया, बुरे लोग कहाँ गए हैं। दाऊद और उसके साथी वहाँ पहुँचे।
वहाँ क्या दिखा? बुरे लोग खा रहे थे, पी रहे थे, नाच रहे थे। उन्हें पता नहीं था कि दाऊद आ रहा है।
दाऊद ने उन पर हमला किया। सारे दिन, सारी रात। और सब कुछ वापस मिल गया।
दाऊद की पत्नियाँ मिल गईं। सब बच्चे मिल गए। कोई भी नहीं खोया।
समान सूत्र
दाऊद ने जो कुछ पाया, वह सब लोगों को बाँट दिया। उन्हें भी, जो थके होने के कारण रुक गए थे। उसने कहा, "सब को बराबर भाग मिलेगा।"
दाऊद राजा नहीं बना था, पर वह अपने लोगों का ध्यान रखता था। वह उनको बचाता था, उनको खिलाता था, उनको सब लौटा देता था।
आगे एक और राजा आया, यीशु मसीह। वे भी अपने लोगों को बचाते हैं। वे भी थके हुओं को नहीं भूलते। वे भी सब कुछ लौटा देते हैं, जो खो गया है।
तेरे लिए
कभी तू भी दुखी होता है? कभी कुछ खो जाता है, और तेरा मन भारी हो जाता है?
दाऊद दुखी हुआ, पर वह परमेश्वर के पास गया। तू भी परमेश्वर के पास जा सकता है। वे तेरी सुनते हैं।
बातचीत के लिए:
जब दाऊद को घर जला हुआ दिखा, तब उसे कैसा लगा होगा?
दाऊद ने दुखी होकर पहले क्या किया, परमेश्वर से बात की या भाग गया?
प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, कभी मैं भी दुखी होता हूँ। दाऊद की तरह, मुझे भी आप के पास आना है। आप मेरी सुनते हैं। धन्यवाद, कि आप मुझे कभी नहीं भूलते। आमीन।
1 शमूएल 30 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 शमूएल 30 किस विषय में है?
1 शमूएल 30 क्या कहता है?
1 शमूएल 30 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 1 शमूएल 30 से क्या सीख सकते हैं?
1 शमूएल 30 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
दाऊद घर लौटा था, आराम की आस लेकर। पर जो मिला वह राख थी: "जब दाऊद और उसके जन उस नगर में पहुँचे, तब क्या देखते हैं, कि वह आग से फुँका गया है, और उनकी स्त्रियाँ और बेटे-बेटियाँ बन्दी कर लिए गए हैं।" कभी-कभी परमेश्वर का चुना हुआ जन भी जली हुई दीवारों के सामने खड़ा रह जाता है। रोना यहाँ पाप नहीं था, दाऊद भी रोया। पर वह वहीं नहीं रुका, उसने अपने परमेश्वर में खुद को दृढ़ किया। तेरी राख के सामने तू आज क्या करेगा?
लड़ाई जीतने के बाद भी दिल का असली हाल तब खुलता है, जब बाँटने की बारी आती है। "ये लोग हमारे संग नहीं चले थे, इस कारण हम उन्हें अपने छुड़ाए हुए माल में से कुछ न देंगे।" वे दो सौ लोग थके थे, चलने लायक नहीं। और थके हुए भाई को इनाम से बाहर करना कितना आसान लगता है। दाऊद ने वह माल अपना नहीं, यहोवा का दिया हुआ माना। तू जो पाया है, उसे किसका कहता है?
दाऊद अभी अभी एक बड़े खतरे से बचकर लौटा था। तीन दिन की थकी हुई यात्रा, और मन में यही कि अब घर पहुँचकर चैन मिलेगा। पर वहाँ राख के सिवा कुछ न था, "और सिकलग को मारकर फूँक दिया है।"
कभी कभी जिस जगह को हम सुरक्षित समझते हैं, वहीं सबसे गहरी चोट लगती है। दाऊद ने उस राख पर बैठकर रोना नहीं छिपाया, पर उसने परमेश्वर से पूछना भी नहीं छोड़ा। तेरी राख भी उससे बात करने की जगह बन सकती है।
सिकलग जलकर राख, पत्नियाँ और बच्चे बंदी, और अपने ही साथी पथराव की बात कर रहे हैं। दाऊद के पास रोने तक की ताकत नहीं बची थी। फिर भी लिखा है, "परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बाँधा।"
ध्यान दे, किसी ने आकर उसे सांत्वना नहीं दी। कभी-कभी तेरे आसपास कोई नहीं होगा जो तुझे संभाले। उस घड़ी परमेश्वर तुझसे यही पूछता है, क्या तू मुझमें अपना हियाव बाँधेगा?
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