1 तीमुथियुस 1
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी था, उसका नाम था पौलुस। पौलुस के पास एक कलम थी। और एक पत्र। वह लिख रहा था।
पौलुस एक बेटे को पत्र लिख रहा था। बेटे का नाम था तीमुथियुस। तीमुथियुस पौलुस का सच्चा बेटा नहीं था। पर पौलुस उससे बहुत प्यार करता था। जैसे एक पिता।
तीमुथियुस दूर एक शहर में रहता था। उस शहर का नाम था इफिसुस। वहाँ कुछ लोग गलत बातें सिखा रहे थे। पौलुस चाहता था तीमुथियुस उन्हें रोके। और सच्ची बात सिखाए।
पौलुस ने लिखा, "तुझे अनुग्रह और दया, और शान्ति मिलती रहे।"
फिर पौलुस को अपनी पुरानी बात याद आई।
इसका क्या अर्थ है?
बहुत पहले, पौलुस एक बुरा आदमी था। वह गुस्से में लोगों को सताता था। जो लोग यीशु से प्यार करते थे, पौलुस उन्हें दुखी करता था।
पर फिर, यीशु आए। यीशु पौलुस पर गुस्सा नहीं हुए। यीशु ने पौलुस पर दया की।
पौलुस ने लिखा, "मुझ पर दया हुई।"
पौलुस बहुत हैरान था। बहुत खुश भी। यीशु ने उसे नया बना दिया।
एक ही धागा
पौलुस ने एक बड़ी बात लिखी। सुनो ध्यान से।
"मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया।"
यीशु इसलिए आए। बुरे लोगों को बचाने के लिए। थके हुए लोगों को। गिरे हुए लोगों को।
पौलुस ने कहा, "इनमें सबसे बड़ा मैं हूँ।" फिर भी यीशु ने उसे प्यार किया।
यीशु आज भी ऐसे ही हैं। वे हर बच्चे को प्यार करते हैं। भले वो कैसा भी हो।
तेरे लिए
क्या तुमने कभी कुछ गलत किया? शायद किसी को धक्का दिया। या झूठ बोला?
पौलुस ने भी गलत किया। पर यीशु ने उसे नहीं छोड़ा।
तुम भी यीशु के पास जा सकते हो। वे तुम्हें भी प्यार करते हैं। ठीक वैसे जैसे पौलुस को किया।
पौलुस ने तीमुथियुस से कहा, विश्वास को थामे रह। जैसे हाथ से किसी की उँगली पकड़े रहते हैं। मजबूती से।
बात करें
तुम्हें क्या लगता है, यीशु पौलुस से गुस्सा थे या खुश?
क्या यीशु तुम्हें भी उतना ही प्यार करते हैं, जितना पौलुस को किया?
साथ में प्रार्थना
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप मुझे प्यार करते हैं। जब मैं कुछ गलत करूँ, तो मुझ पर भी दया करना। जैसे आपने पौलुस पर की। आमीन।
1 तीमुथियुस 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 तीमुथियुस 1 किस विषय में है?
1 तीमुथियुस 1 क्या कहता है?
1 तीमुथियुस 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 1 तीमुथियुस 1 से क्या सीख सकते हैं?
1 तीमुथियुस 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यह जानते हुए कि व्यवस्था धर्मी जन के लिए नहीं," पौलुस लिखता है। नियम उसके लिए बना है जो अपने घाव को पहचानता ही नहीं। जो मसीह में धर्मी ठहरा, उसके सिर पर व्यवस्था अब लटकी तलवार नहीं है। पर खुद से पूछो: मैं आज भी डर के मारे परमेश्वर की सेवा करता हूँ, या उस प्रेम के कारण जिसने मुझे छुड़ाया?
विश्वास और उत्तम विवेक को रखे रह।" पौलुस दोनों को एक साथ जोड़ता है, क्योंकि विवेक को बार-बार दबाने वाला आदमी एक दिन विश्वास भी नहीं बचा पाता। जहाज़ अचानक नहीं डूबता। पहले वह छोटी सी आवाज़ चुप कराई जाती है जो कहती है, यह ठीक नहीं। आज तुझसे भीतर कौन सी बात कही जा रही है, जिसे तू अनसुना करता आया है?
पौलुस कहता है, "मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का आभारी हूँ, जिसने मुझे सामर्थ्य दी, कि उसने मुझे विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिए ठहराया।" ध्यान दे, यीशु ने उसे विश्वासयोग्य समझा, तब जब वह कलीसिया को सता रहा था। तेरी योग्यता उसकी नज़र से शुरू होती है, तेरे रिकॉर्ड से नहीं। और जिस काम के लिए वह बुलाता है, उसी के लिए सामर्थ्य भी वही देता है।
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