3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

2 तीमुथियुस 3

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक था लड़का, नाम था तीमुथियुस। उसकी एक दादी थी। नाम था लोइस।

दादी लोइस के पास एक किताब थी। बहुत खास किताब। उसमें परमेश्वर की बातें लिखी थीं।

दादी हर दिन तीमुथियुस को गोद में बिठाती। और वह किताब पढ़ती। धीरे धीरे, प्यार से।

तीमुथियुस छोटा था। बहुत छोटा। पर वह सुनता था। ध्यान से सुनता था।

पौलुस नाम के एक चाचा थे। वे तीमुथियुस से बहुत प्यार करते थे। वे उसे पत्र लिखते थे।

पौलुस ने लिखा, "तुमने वह किताब बचपन से जानी है।" यह सच था। तीमुथियुस छोटा था जब उसने वह किताब सीखी।

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस ने तीमुथियुस को एक बात कही। उसने कहा, कुछ लोग बुरे काम करेंगे। वे झूठ बोलेंगे। वे अपने माता पिता की बात नहीं मानेंगे। वे किसी से प्यार नहीं करेंगे।

यह सुनकर तीमुथियुस डर सकता था। पर पौलुस ने एक और बात कही। एक अच्छी बात।

उसने कहा, "तुम जो सीखा है, उस पर मजबूती से खड़े रहो।"

तीमुथियुस के पास वह खास किताब थी। पवित्रशास्त्र। परमेश्वर की अपनी किताब।

पौलुस ने कहा, यह किताब परमेश्वर की ओर से आई है। यह सिखाती है। यह ठीक रास्ता दिखाती है। यह सुधारती है।

जैसे दादी लोइस तीमुथियुस को गोद में बिठाकर सिखाती थी, वैसे ही परमेश्वर अपनी किताब से हमें सिखाते हैं।

समान सूत्र

पौलुस ने लिखा, यह किताब बुद्धिमान बनाती है। किस बात के लिए बुद्धिमान? यीशु मसीह पर विश्वास करने के लिए।

तो यह किताब सिर्फ बातें नहीं बताती। यह हमें यीशु के पास ले जाती है।

परमेश्वर ने कभी किसी को अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी किताब दी। उन्होंने अपने बेटे यीशु को भेजा।

पौलुस पर भी बुरे दिन आए। दुखों में। पर उसने कहा, "प्रभु ने मुझे उन सबसे छुड़ाया।"

परमेश्वर अपने बच्चों को कभी नहीं छोड़ते। न तीमुथियुस को, न पौलुस को, न तुम्हें।

तेरे लिए

क्या तुम्हारे पास भी कोई है, जो तुम्हें परमेश्वर की बातें सुनाता है? माँ, पापा, दादी, नानी?

तीमुथियुस उस किताब को ध्यान से सुनता था। तुम भी सुन सकते हो।

जब कोई तुम्हें बाइबल की कहानी सुनाए, तुम भी गोद में बैठ जाना। और ध्यान से सुनना। जैसे तीमुथियुस सुनता था।

बात करें

तुम्हें बाइबल की कहानियाँ कौन सुनाता है?

तीमुथियुस को उसकी दादी से क्या मिला?

संग साथ प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

धन्यवाद आपकी किताब के लिए।

धन्यवाद उनके लिए, जो मुझे आपकी बातें सुनाते हैं।

मुझे भी ध्यान से सुनने में मदद करें।

आमीन।

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2 तीमुथियुस 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 तीमुथियुस 3 किस विषय में है?
एक था लड़का, नाम था तीमुथियुस। उसकी एक दादी थी। नाम था लोइस।
2 तीमुथियुस 3 क्या कहता है?
पौलुस नाम के एक चाचा थे। वे तीमुथियुस से बहुत प्यार करते थे। वे उसे पत्र लिखते थे।
2 तीमुथियुस 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
तीमुथियुस के पास वह खास किताब थी। पवित्रशास्त्र। परमेश्वर की अपनी किताब।
नन्हे बच्चे 2 तीमुथियुस 3 से क्या सीख सकते हैं?
तो यह किताब सिर्फ बातें नहीं बताती। यह हमें यीशु के पास ले जाती है।
2 तीमुथियुस 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हारे पास भी कोई है, जो तुम्हें परमेश्वर की बातें सुनाता है? माँ, पापा, दादी, नानी?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पौलुस कहता है, "पर तूने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम और धीरज में मेरा अनुसरण किया है।" देख, सूची में चमत्कार नहीं हैं। उपदेश के ठीक बाद चाल चलन आता है, क्योंकि तीमुथियुस ने पौलुस को सिर्फ मंच पर नहीं, रास्ते की धूल में भी देखा था। तुझे कोई रोज़ देख रहा है। वह क्या सीख रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

पौलुस यह बात ऐसे समय में लिख रहा है जब झूठे शिक्षक बढ़ रहे थे, और वह तीमुथियुस को याद दिलाता है कि बचपन से जो वचन उसने सुना, वही उसे थामे रखेगा। ध्यान दीजिए कि "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र" केवल उपदेश के लिये नहीं, "समझाने, और सुधारने" के लिये भी लाभदायक है। हम अकसर वे पन्ने खोलते हैं जो सांत्वना देते हैं, और वे टाल देते हैं जो हमें आईना दिखाते हैं। पर सुधारा जाना भी परमेश्वर का प्रेम ही है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस की सूची यहीं से शुरू होती है, "क्योंकि मनुष्य स्वार्थी, धन का लोभी" होंगे। सब कुछ गलत दिशा में मुड़े प्रेम से निकलता है। और उसी सूची के बीच एक छोटा सा शब्द रखा है, "कृतघ्न"। जो धन्यवाद देना भूल जाता है, वह धीरे धीरे खुद को ही केंद्र बना लेता है। आज रुककर पूछो, पिछली बार तुमने सच्चे मन से किसका धन्यवाद माना था?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

यन्ने और यम्ब्रेस ने मूसा से बहस नहीं की, उन्होंने उसकी नकल की। उन्होंने भी लाठी डाली, उन्होंने भी सर्प बनाया। सत्य का सबसे बड़ा विरोध कभी-कभी इनकार नहीं, नकल होता है। पौलुस कहता है ये "विश्वास के विषय में निकम्मे हैं।" सोच, तेरी सेवा असली है या बस दिखने में मिलती-जुलती?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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