3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 9

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत समय पहले एक आदमी रहता था। उसका नाम आमोस था। आमोस भेड़ें चराता था, धूप में, पहाड़ों पर।

एक दिन आमोस ने कुछ देखा। उसने परमेश्वर को देखा! परमेश्वर वेदी के पास खड़े थे। वेदी एक बड़ा पत्थर का मेज़ था। वहाँ लोग परमेश्वर को भेंट देते थे।

पर लोग परमेश्वर को भूल गए थे। वे बुरे काम करते थे। और फिर वे छिप जाते थे। जैसे कोई कुछ तोड़ दे, और भाग जाए।

तब परमेश्वर बोले। उनकी आवाज़ ज़ोर की थी।

“कोई मुझसे छिप नहीं सकता,” परमेश्वर ने कहा। “कोई गहरा गड्ढा खोदे, तो भी मैं वहाँ हूँ। कोई ऊपर आसमान तक चढ़ जाए, तो भी मैं वहाँ हूँ। कोई कर्मेल पहाड़ के पेड़ों में छिपे, मैं उसे ढूँढ़ लूँगा। कोई गहरे समुद्र में डूब जाए, मैं वहाँ भी देखता हूँ।”

परमेश्वर सब कुछ देखते हैं। सचमुच सब कुछ।

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर बहुत बड़े हैं। वे आसमान को छूते हैं। वे समुद्र का पानी उठाते हैं। वे उसे ज़मीन पर बरसा देते हैं।

परमेश्वर दुखी थे। लोग बुरा कर रहे थे। और वे कहते थे, “हमें कुछ नहीं होगा।” पर परमेश्वर सब जानते थे।

फिर परमेश्वर ने एक चलनी की बात की। चलनी में दाने हिलते हैं। हिलते हैं, हिलते हैं। और परमेश्वर ने कहा: “एक भी अच्छा दाना ज़मीन पर नहीं गिरेगा।”

एक भी नहीं। परमेश्वर अपने लोगों को कसकर थामते हैं।

जोड़ने वाला धागा

और फिर परमेश्वर ने कुछ सुंदर कहा।

“मैं दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी को फिर खड़ा करूँगा।”

दाऊद एक राजा था। उसका घर गिर गया था। टूटा हुआ, खाली, उदास। पर परमेश्वर ने कहा: “मैं उसे फिर बनाऊँगा।”

और सुनो, क्या-क्या आएगा! अंगूर के बगीचे। मीठा रस पहाड़ों से टपकेगा। नीचे बहेगा, नीचे बहेगा। बगीचे लगेंगे। फल खाए जाएँगे। और परमेश्वर के लोग कभी नहीं उखाड़े जाएँगे। कभी नहीं।

बहुत साल बाद, दाऊद के घर से एक बच्चा आया। उसका नाम यीशु था। यीशु ही वह नया घर बनाते हैं। और उस घर में तुम भी आ सकते हो।

तुम्हारे लिए

क्या तुम कभी छिपते हो? कंबल के नीचे? मेज़ के पीछे? बहुत अंधेरे में?

परमेश्वर तुम्हें वहाँ भी देखते हैं। और जानते हो क्या? वे तुम्हें ढूँढ़कर डाँटने नहीं आते। वे तुम्हें प्यार करते हैं।

कभी तुम कुछ गलत करते हो। फिर तुम्हारा पेट अजीब लगता है। तब छिपो मत। परमेश्वर से कहो: “मुझसे गलती हुई।” वे सुनते हैं। वे तुम्हें थाम लेते हैं।

तुम वह अच्छा दाना हो। तुम गिरोगे नहीं। परमेश्वर तुम्हें कसकर पकड़े हैं।

इस पर बात करें

तुम्हें छिपने की कौन-सी जगह सबसे अच्छी लगती है? और वहाँ परमेश्वर तुम्हें देखते हैं क्या?

परमेश्वर ने कहा, बहुत मीठा रस पहाड़ से बहेगा। तुम्हें कौन-सा फल सबसे मीठा लगता है?

मिलकर प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, आप मुझे हर जगह देखते हैं। अंधेरे में भी। कंबल के नीचे भी। मुझे कसकर पकड़े रहिए। मैं आपका दाना हूँ। धन्यवाद। आमीन।

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आमोस 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 9 किस विषय में है?
बहुत समय पहले एक आदमी रहता था। उसका नाम आमोस था। आमोस भेड़ें चराता था, धूप में, पहाड़ों पर।
आमोस 9 क्या कहता है?
परमेश्वर बहुत बड़े हैं। वे आसमान को छूते हैं। वे समुद्र का पानी उठाते हैं। वे उसे ज़मीन पर बरसा देते हैं।
आमोस 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
और सुनो, क्या-क्या आएगा! अंगूर के बगीचे। मीठा रस पहाड़ों से टपकेगा। नीचे बहेगा, नीचे बहेगा। बगीचे लगेंगे। फल खाए जाएँगे। और परमेश्वर के लोग कभी नहीं उखाड़े जाएँगे। कभी नहीं।
नन्हे बच्चे आमोस 9 से क्या सीख सकते हैं?
कभी तुम कुछ गलत करते हो। फिर तुम्हारा पेट अजीब लगता है। तब छिपो मत। परमेश्वर से कहो: “मुझसे गलती हुई।” वे सुनते हैं। वे तुम्हें थाम लेते हैं।
आमोस 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, आप मुझे हर जगह देखते हैं। अंधेरे में भी। कंबल के नीचे भी। मुझे कसकर पकड़े रहिए। मैं आपका दाना हूँ। धन्यवाद। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

आमोस की पूरी किताब उखाड़ने की बात करती है। न्याय, निर्वासन, टूटा हुआ घर। और फिर आखिरी वचन: "मैं उन्हें उनकी ही भूमि में बोऊँगा, और वे अपनी उस भूमि में से जो मैंने उन्हें दी है फिर कभी उखाड़े न जाएँगे।" ध्यान दे, पौधा खुद को नहीं लगाता। परमेश्वर लगाता है, इसलिए जड़ें टिकती हैं। तू जहाँ बार बार उजड़ा है, क्या वहीं उसके हाथों पर भरोसा करेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

मेरी प्रजा में के सब पापी जो कहते हैं, 'वह विपत्ति हम तक न पहुँचेगी, न हम पर आ पड़ेगी,' वे तलवार से मारे जाएँगे।" ध्यान दे, यहाँ इनका पाप गिना नहीं गया, बस उनका वाक्य दोहराया गया। यही सबसे खतरनाक बात थी, वह लापरवाह भरोसा कि "मुझ पर कुछ नहीं आएगा।"

चेतावनी सुनकर भी हम अकसर मन में यही कहते हैं, यह मेरे लिए नहीं है। आज परमेश्वर जो तुझसे कह रहा है, उसे किसी और के नाम मत कर।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

इस्राएल को लगता था कि मिस्र से निकाला जाना उसका अपना विशेष अधिकार है। पर परमेश्वर कहता है, "क्या मैं इस्राएल को मिस्र देश से, और पलिश्तियों को कप्तोर से, और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?" वह उन जातियों के इतिहास में भी काम कर रहा था, जिन्हें इस्राएल तुच्छ समझता था। चुना जाना घमंड का नहीं, जिम्मेदारी का कारण है। तू किसे अपने से कम आंकता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

मैं भलाई के लिये नहीं, वरन् बुराई के लिये उन पर दृष्टि करूँगा।" यही आँखें जो कभी आशीष के लिये टिकी थीं, अब न्याय के लिये टिकी हैं। सोचो, बँधुआई में जाकर भी वे परमेश्वर की नज़र से बाहर न हुए। कोई दूरी उससे नहीं छिपाती। तो सवाल यह नहीं कि वह तुम्हें देखता है या नहीं, सवाल यह है कि आज उसकी दृष्टि तुम पर किस भाव से है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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