7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 9

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

आमोस परमेश्वर का भविष्यवक्ता था। एक दिन उसने एक दर्शन देखा। उसने प्रभु को वेदी के पास खड़ा देखा। प्रभु ने कहा, “खम्भों पर मार, जिससे छत हिल जाए।” यह इस्राएल के लोगों के लिए एक चेतावनी थी। वे परमेश्वर से दूर चले गए थे। वे झूठ बोलते थे और गरीबों पर अन्याय करते थे। इसलिए परमेश्वर कह रहे थे, “अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा।”

फिर परमेश्वर ने कुछ चौंका देने वाली बातें कहीं। “चाहे वे जमीन खोदकर नीचे छिप जाएँ, मैं उन्हें वहाँ से भी खींच लाऊँगा। चाहे वे आकाश तक चढ़ जाएँ, मैं उन्हें वहाँ से उतार लाऊँगा। चाहे वे पहाड़ पर छिप जाएँ या समुद्र की गहराई में डूब जाएँ, मेरी नजर से कोई नहीं बच सकता।” यह सुनकर डर लगता है, है न? परमेश्वर हर जगह देख सकते हैं।

लेकिन फिर परमेश्वर ने एक और बात कही, जो आराम देती है। उन्होंने कहा कि वे याकूब के पूरे घराने को नाश नहीं करेंगे। वे लोगों को छलनी में अनाज की तरह चालेंगे, पर एक भी अच्छा दाना जमीन पर नहीं गिरेगा। यानी परमेश्वर अपने लोगों में से सच्चे और भले लोगों को बचाएँगे।

और फिर कहानी में एक सुंदर मोड़ आता है। परमेश्वर कहते हैं, “मैं दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी को फिर से खड़ा करूँगा।” जैसे कोई टूटा हुआ घर होता है, वैसे ही दाऊद का राज्य गिर गया था। पर परमेश्वर वादा करते हैं कि वे उसे फिर बनाएँगे। इतना ही नहीं, उस समय पहाड़ों से नया दाखमधु टपकेगा, और लोग फिर अपने बगीचों में फल खाएँगे। वे अपनी ही जमीन में रहेंगे और फिर कभी उससे उखाड़े नहीं जाएँगे।

What Does This Mean?

यह दिखाता है कि परमेश्वर अन्याय को हल्के में नहीं लेते। जब लोग झूठ बोलते हैं और दूसरों को दुःख देते हैं, तो परमेश्वर देखते हैं और दुःखी होते हैं। पर यह भी दिखाता है कि परमेश्वर का गुस्सा आखिरी बात नहीं है। उनका प्यार आखिरी बात है। भले वे कठोर बातें कहते हैं, फिर भी वे अपने लोगों को पूरी तरह नहीं छोड़ते। वे एक टूटे हुए घर को फिर बनाने का वादा करते हैं।

The Common Thread

दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी को फिर खड़ा करने का यह वादा बहुत बड़ा है। वर्षों बाद, प्रेरितों के काम की किताब में इसी वचन का हवाला दिया गया, जब लोगों को पता चला कि गैर-यहूदी लोग भी परमेश्वर के परिवार में शामिल हो सकते हैं। यह वादा यीशु मसीह में पूरा हुआ। यीशु दाऊद के परिवार से आए। उन्होंने टूटे हुए लोगों को, चाहे वे कहीं के भी हों, फिर से जोड़ा। जैसे परमेश्वर ने गिरा हुआ घर फिर बनाया, वैसे ही यीशु टूटे हुए दिलों को फिर बनाते हैं।

For You

कभी तुमने कुछ ऐसा किया जिससे तुम्हें लगा कि अब सब कुछ बिगड़ गया? शायद तुमने झूठ बोला या किसी को दुःख दिया। परमेश्वर वह देखते हैं। पर यह कहानी कहती है कि परमेश्वर टूटी चीजों को फिर बनाना चाहते हैं। जब तुम गलती मानते हो और परमेश्वर से माफी माँगते हो, वे तुम्हें फिर से अपने पास बुलाते हैं। तुम आज किसी छोटी बात में ईमानदार बन सकते हो, जैसे परमेश्वर चाहते हैं।

Talk About It

क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर हर जगह देख सकते हैं, तब भी जब तुम अकेले होते हो?

दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी को फिर बनाने का वादा तुम्हें क्या सिखाता है परमेश्वर के प्यार के बारे में?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, आप हमारी हर बात देखते हैं, अच्छी और बुरी भी। हमें माफ कीजिए जब हम गलत करते हैं। धन्यवाद कि आप टूटी चीजों को फिर से बनाते हैं। हमें भी वैसा दिल दीजिए जो आपसे प्यार करे। यीशु के नाम में, आमीन।

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आमोस 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 9 किस विषय में है?
आमोस परमेश्वर का भविष्यवक्ता था। एक दिन उसने एक दर्शन देखा। उसने प्रभु को वेदी के पास खड़ा देखा। प्रभु ने कहा, “खम्भों पर मार, जिससे छत हिल जाए।” यह इस्राएल के लोगों के लिए एक चेतावनी थी। वे परमेश्वर से दूर चले गए थे। वे झूठ बोलते थे और गरीबों पर अन्याय करते थे। इसलिए परमेश्वर कह रहे थे, “अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा।”
आमोस 9 क्या कहता है?
लेकिन फिर परमेश्वर ने एक और बात कही, जो आराम देती है। उन्होंने कहा कि वे याकूब के पूरे घराने को नाश नहीं करेंगे। वे लोगों को छलनी में अनाज की तरह चालेंगे, पर एक भी अच्छा दाना जमीन पर नहीं गिरेगा। यानी परमेश्वर अपने लोगों में से सच्चे और भले लोगों को बचाएँगे।
आमोस 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह दिखाता है कि परमेश्वर अन्याय को हल्के में नहीं लेते। जब लोग झूठ बोलते हैं और दूसरों को दुःख देते हैं, तो परमेश्वर देखते हैं और दुःखी होते हैं। पर यह भी दिखाता है कि परमेश्वर का गुस्सा आखिरी बात नहीं है। उनका प्यार आखिरी बात है। भले वे कठोर बातें कहते हैं, फिर भी वे अपने लोगों को पूरी तरह नहीं छोड़ते। वे एक टूटे हुए घर को फिर बनाने का वादा करते हैं।
बच्चे आमोस 9 से क्या सीख सकते हैं?
कभी तुमने कुछ ऐसा किया जिससे तुम्हें लगा कि अब सब कुछ बिगड़ गया? शायद तुमने झूठ बोला या किसी को दुःख दिया। परमेश्वर वह देखते हैं। पर यह कहानी कहती है कि परमेश्वर टूटी चीजों को फिर बनाना चाहते हैं। जब तुम गलती मानते हो और परमेश्वर से माफी माँगते हो, वे तुम्हें फिर से अपने पास बुलाते हैं। तुम आज किसी छोटी बात में ईमानदार बन सकते हो, जैसे परमेश्वर चाहते हैं।
आमोस 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी को फिर बनाने का वादा तुम्हें क्या सिखाता है परमेश्वर के प्यार के बारे में?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

आमोस की पूरी किताब उखाड़ने की बात करती है। न्याय, निर्वासन, टूटा हुआ घर। और फिर आखिरी वचन: "मैं उन्हें उनकी ही भूमि में बोऊँगा, और वे अपनी उस भूमि में से जो मैंने उन्हें दी है फिर कभी उखाड़े न जाएँगे।" ध्यान दे, पौधा खुद को नहीं लगाता। परमेश्वर लगाता है, इसलिए जड़ें टिकती हैं। तू जहाँ बार बार उजड़ा है, क्या वहीं उसके हाथों पर भरोसा करेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

मेरी प्रजा में के सब पापी जो कहते हैं, 'वह विपत्ति हम तक न पहुँचेगी, न हम पर आ पड़ेगी,' वे तलवार से मारे जाएँगे।" ध्यान दे, यहाँ इनका पाप गिना नहीं गया, बस उनका वाक्य दोहराया गया। यही सबसे खतरनाक बात थी, वह लापरवाह भरोसा कि "मुझ पर कुछ नहीं आएगा।"

चेतावनी सुनकर भी हम अकसर मन में यही कहते हैं, यह मेरे लिए नहीं है। आज परमेश्वर जो तुझसे कह रहा है, उसे किसी और के नाम मत कर।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

इस्राएल को लगता था कि मिस्र से निकाला जाना उसका अपना विशेष अधिकार है। पर परमेश्वर कहता है, "क्या मैं इस्राएल को मिस्र देश से, और पलिश्तियों को कप्तोर से, और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?" वह उन जातियों के इतिहास में भी काम कर रहा था, जिन्हें इस्राएल तुच्छ समझता था। चुना जाना घमंड का नहीं, जिम्मेदारी का कारण है। तू किसे अपने से कम आंकता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

मैं भलाई के लिये नहीं, वरन् बुराई के लिये उन पर दृष्टि करूँगा।" यही आँखें जो कभी आशीष के लिये टिकी थीं, अब न्याय के लिये टिकी हैं। सोचो, बँधुआई में जाकर भी वे परमेश्वर की नज़र से बाहर न हुए। कोई दूरी उससे नहीं छिपाती। तो सवाल यह नहीं कि वह तुम्हें देखता है या नहीं, सवाल यह है कि आज उसकी दृष्टि तुम पर किस भाव से है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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