3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

दानिय्येल 6

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

एक देश में एक राजा था। उसका नाम दारा था। राजा दारा को दानिय्येल बहुत पसंद था। दानिय्येल एक अच्छा, सच्चा आदमी था। वह हर दिन तीन बार घुटने टेकता था। वह परमेश्वर से बात करता था। खिड़की खुली रहती थी। वह वहीं बैठकर प्रार्थना करता था।

पर कुछ लोग दानिय्येल से जलते थे। वे चाहते थे उसे नुकसान पहुँचाएँ। वे राजा के पास गए। उन्होंने कहा, “एक नियम बनाओ। तीस दिन तक कोई भी सिर्फ आपसे प्रार्थना करे। और किसी से नहीं।” राजा ने वह नियम बना दिया।

पर दानिय्येल को यह पता चला। फिर भी वह डरा नहीं। वह अपने कमरे में गया। खिड़की के पास घुटने टेके। और प्रार्थना की, जैसे हमेशा करता था। एक बार। दो बार। तीन बार।

वे बुरे लोग देखने आए। उन्होंने दानिय्येल को प्रार्थना करते देखा। वे दौड़े राजा के पास। “दानिय्येल ने आपकी बात नहीं मानी!” राजा बहुत दुखी हुआ। उसने दानिय्येल को बचाने की बहुत कोशिश की। पर नियम बदला नहीं जा सकता था।

शाम हुई। सिपाही दानिय्येल को ले गए। एक बड़ी माँद के पास, जहाँ शेर रहते थे। उन्होंने उसे उसमें डाल दिया। एक बड़ा पत्थर लगाकर दरवाज़ा बंद किया। राजा घर गया। उसने कुछ नहीं खाया। उसे रातभर नींद नहीं आई।

What Does This Mean?

सुबह हुई। सूरज निकला। राजा दौड़ता हुआ माँद के पास आया। उसने ज़ोर से पुकारा, “दानिय्येल! क्या तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें बचा पाया?”

और सुनो, अंदर से आवाज़ आई! “हे राजा, मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेजा। उसने शेरों के मुँह बंद कर दिए।” शेर पास ही बैठे थे। पर उन्होंने दानिय्येल को छुआ भी नहीं। एक भी खरोंच नहीं थी उस पर।

राजा बहुत खुश हुआ। उसने दानिय्येल को बाहर निकाला।

The Common Thread

परमेश्वर ने दानिय्येल को शेरों की माँद में भी छोड़ा नहीं। वे उसके साथ थे, अंधेरे में भी। यीशु ने भी कहा था, “मैं तुम्हारे साथ हूँ।” परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों के पास रहते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए।

For You

तुम भी परमेश्वर से बात कर सकते हो। सुबह, दोपहर, शाम। जैसे दानिय्येल करता था। तुम्हें डरने की ज़रूरत नहीं। परमेश्वर तुम्हारी सुनते हैं।

Talk About It

दानिय्येल शेरों की माँद में डरा क्यों नहीं?

तुम परमेश्वर से कब बात करते हो?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, आप दानिय्येल के साथ थे। आप मेरे साथ भी हैं। मुझे भी आपसे बात करना अच्छा लगता है। धन्यवाद कि आप मुझे सुनते हैं। आमीन।

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दानिय्येल 6 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

दानिय्येल 6 किस विषय में है?
एक देश में एक राजा था। उसका नाम दारा था। राजा दारा को दानिय्येल बहुत पसंद था। दानिय्येल एक अच्छा, सच्चा आदमी था। वह हर दिन तीन बार घुटने टेकता था। वह परमेश्वर से बात करता था। खिड़की खुली रहती थी। वह वहीं बैठकर प्रार्थना करता था।
दानिय्येल 6 क्या कहता है?
पर दानिय्येल को यह पता चला। फिर भी वह डरा नहीं। वह अपने कमरे में गया। खिड़की के पास घुटने टेके। और प्रार्थना की, जैसे हमेशा करता था। एक बार। दो बार। तीन बार।
दानिय्येल 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
शाम हुई। सिपाही दानिय्येल को ले गए। एक बड़ी माँद के पास, जहाँ शेर रहते थे। उन्होंने उसे उसमें डाल दिया। एक बड़ा पत्थर लगाकर दरवाज़ा बंद किया। राजा घर गया। उसने कुछ नहीं खाया। उसे रातभर नींद नहीं आई।
नन्हे बच्चे दानिय्येल 6 से क्या सीख सकते हैं?
और सुनो, अंदर से आवाज़ आई! “हे राजा, मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेजा। उसने शेरों के मुँह बंद कर दिए।” शेर पास ही बैठे थे। पर उन्होंने दानिय्येल को छुआ भी नहीं। एक भी खरोंच नहीं थी उस पर।
दानिय्येल 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर ने दानिय्येल को शेरों की माँद में भी छोड़ा नहीं। वे उसके साथ थे, अंधेरे में भी। यीशु ने भी कहा था, “मैं तुम्हारे साथ हूँ।” परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों के पास रहते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

यह वचन सुनकर राजा बहुत उदास हुआ, और दानिय्येल को बचाने के उपाय सोचने लगा; और सूर्य के अस्त होने तक उसके बचाने का यत्न करता रहा।"

पूरे साम्राज्य का राजा, और फिर भी बेबस। जो कानून उसने अपनी बड़ाई सुनने के लालच में हस्ताक्षरित किया था, वही अब उसके अपने मित्र को खा रहा था। सूरज ढलता रहा, और वह कुछ न कर सका।

अपनी शान के लिए कही गई एक बात कल किसे जंजीर पहना देगी, यह हम आज नहीं जानते। सोच लीजिए, फिर बोलिए।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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