दानिय्येल 9
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
कहानी क्या कहती है
एक आदमी था। उसका नाम था दानिय्येल। दानिय्येल परमेश्वर से बहुत प्यार करता था।
एक दिन दानिय्येल एक पुरानी किताब पढ़ रहा था। परमेश्वर की किताब। और उसमें उसने कुछ खास पढ़ा।
दानिय्येल का शहर टूटा हुआ था। यरूशलेम शहर। वह उजड़ा हुआ था। खाली। दुखी।
दानिय्येल बहुत उदास हो गया। बहुत, बहुत उदास।
तो दानिय्येल घुटनों के बल बैठ गया। उसने खाना नहीं खाया। उसने एक खुरदुरा, कड़ा कपड़ा पहना। वह राख में बैठ गया। और वह प्रार्थना करने लगा।
"हे परमेश्वर," दानिय्येल ने कहा। "आप बहुत महान हैं। आप बहुत अच्छे हैं। पर हम… हमने गलत काम किए हैं। हमने माफ़ी माँगी नहीं। हमने आपकी बात नहीं सुनी।"
दानिय्येल रोया। "हे परमेश्वर, हमें माफ़ कर दीजिए। हमारे शहर को देखिए। सुनिए, प्रभु! सुनिए!"
इसका क्या मतलब है
और तब कुछ हुआ।
अचानक! एक चमकीला स्वर्गदूत आया। उसका नाम था गब्रिएल। वह उड़ते हुए आया। बहुत तेज़ी से।
गब्रिएल ने दानिय्येल को हल्के से छुआ। और उसने कहा, "दानिय्येल, सुनो। परमेश्वर ने आपकी प्रार्थना सुन ली। जैसे ही आपने प्रार्थना शुरू की, परमेश्वर ने सुन ली!"
गब्रिएल ने और भी कहा। "परमेश्वर ने आपसे बहुत प्यार करते हैं। आप उन्हें बहुत प्यारे हैं।"
बड़ी कहानी
दानिय्येल ने प्रार्थना की। और परमेश्वर ने तुरन्त सुनी।
परमेश्वर हमेशा सुनते हैं। जब हम उनसे बात करते हैं, तो वे सुनते हैं। हर बार।
और परमेश्वर ने वादा किया। एक दिन एक खास आदमी आएगा। वह सब कुछ ठीक करेगा। सब पाप, सब गलत काम, सब उदासी, वह मिटा देगा।
क्या आप जानते हैं वह कौन है? वह प्रभु यीशु हैं। यीशु आए। और यीशु ने सब कुछ ठीक किया।
आपके लिए
दानिय्येल दुखी था। तो उसने परमेश्वर से बात की।
आप भी परमेश्वर से बात कर सकते हैं। जब आप खुश हैं। जब आप उदास हैं। जब आप डरे हुए हैं।
परमेश्वर सुनते हैं। हमेशा। तुरन्त।
आप उनके प्यारे बच्चे हैं। बिल्कुल दानिय्येल की तरह।
इस पर बात करें
क्या आप जानते हैं परमेश्वर हमेशा आपकी सुनते हैं? क्या यह अच्छा नहीं है?
आप परमेश्वर से किस बारे में बात करना चाहते हैं आज?
आइए साथ में प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर,
आप सुनते हैं। हर बार। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है। मैं आपसे प्यार करता हूँ। और आप मुझसे प्यार करते हैं।
यीशु के नाम में, आमीन।
दूसरों ने क्या पाया
दानिय्येल घुटनों पर था, अपने लोगों के पाप कबूल कर रहा था। और उत्तर में परमेश्वर ने एक समय सारिणी दी: यरूशलेम फिर बसाया जाएगा, "परन्तु संकट के समय में।"
ध्यान दो, बहाली का वादा है, पर बिना कठिनाई के नहीं। परमेश्वर तुम्हारी टूटी दीवारें फिर खड़ी करेगा, मगर शायद आँसुओं के बीच। क्या तुम ऐसे उत्तर को भी उत्तर मानोगे?
दानिय्येल अपनी प्रार्थना में दो इतिहास साथ-साथ रखता है। एक तरफ, "तूने अपनी प्रजा को मिस्र देश से बलवन्त हाथ के द्वारा निकाल लिया"। दूसरी तरफ, "हमने तो पाप किया और दुष्टता की है।" वह अपनी अच्छाई गिनाकर नहीं, परमेश्वर के नाम की दुहाई देकर माँगता है। सोच, तेरी प्रार्थना किस पर टिकी है, अपने रिकॉर्ड पर या उसके स्वभाव पर?
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