3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

एस्तेर 6

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बहुत गहरी रात। राजा अपने बड़े पलंग पर लेटा था। पर उसे नींद नहीं आई। आँखें खुली रहीं। बार-बार।

राजा ने कहा, "एक किताब लाओ।" "इतिहास की पुरानी किताब।" सेवक किताब लाए। पढ़ने लगे।

उसमें एक बात लिखी थी। मोर्दकै नाम के एक आदमी ने, राजा की जान बचाई थी। दो बुरे लोग राजा को मारना चाहते थे। मोर्दकै ने यह बात पहले ही बता दी थी।

राजा ने पूछा, "मोर्दकै को इसके लिए क्या दिया गया?" सेवकों ने कहा, "कुछ भी नहीं।"

इसका क्या अर्थ है?

ठीक उसी समय, बाहर आँगन में कोई खड़ा था। वह हामान था। हामान मोर्दकै से बहुत चिढ़ता था। वह एक ऊँचा खम्भा बनवा चुका था। मोर्दकै को उस पर लटकाने की सोच रहा था।

राजा ने कहा, "आँगन में कौन है?" सेवकों ने कहा, "हामान।" राजा ने कहा, "उसे भीतर बुलाओ।"

हामान भीतर आया। मन में खुश था। राजा ने पूछा, "जिसे मैं सम्मान देना चाहूँ, उसके लिए क्या करूँ?"

हामान ने सोचा, "यह तो मेरे लिए ही पूछ रहे हैं!" उसने कहा, "उसे राजा के कपड़े पहनाइए। उसे राजा के घोड़े पर बिठाइए। सिर पर मुकुट रखिए। और नगर में उसे घुमाइए। आगे-आगे यह पुकारा जाए, 'देखो, राजा किसी को ऐसा सम्मान देते हैं!'"

राजा ने कहा, "बहुत बढ़िया!" "अब जाओ। यह सब मोर्दकै के साथ करो!"

समान सूत्र

हामान का मुँह सूख गया। पर उसे राजा की बात मानना ही था।

उसने कपड़े लाए। घोड़ा लाया। मोर्दकै को कपड़े पहनाए। घोड़े पर बिठाया। और खुद, अपने ही हाथ से, नगर में मोर्दकै को घुमाया। पुकारता हुआ चला, "देखो, ऐसा सम्मान मिलता है!"

परमेश्वर ने किसी को नहीं मारा। कोई तलवार नहीं चली। पर परमेश्वर ने रात में एक राजा को जगा दिया। एक किताब खुलवा दी। एक पन्ना पढ़वा दिया। इतनी छोटी बातों से, परमेश्वर अपने लोगों को बचाते हैं।

काम के बाद, मोर्दकै फाटक पर लौट गया। हामान अपने घर गया। सिर ढाँपे हुए। बहुत दुखी।

उसने पत्नी और मित्रों को सब कुछ बताया। उन्होंने कहा, "मोर्दकै यहूदी है। तुम उससे जीत नहीं पाओगे।"

वे बात कर ही रहे थे, कि राजा के सेवक आए। "जल्दी आओ! एस्तेर के भोज पर।"

आपके लिए

तुम भी कभी सोचते हो कि परमेश्वर देख नहीं रहे। पर परमेश्वर रात में भी जागते रहते हैं। वे छोटी बातों को याद रखते हैं। वे अपने बच्चों की रखवाली करते हैं।

बात करें

राजा को नींद क्यों नहीं आई, ऐसा तुम्हें क्या लगता है?

हामान ने सोचा था वह सम्मान पाएगा, पर मोर्दकै को मिला। यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?

प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, आप रात में भी जागते हैं। आप हमें भूलते नहीं हैं। हमारी भी रखवाली कीजिए। आमीन।

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एस्तेर 6 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

एस्तेर 6 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बहुत गहरी रात। राजा अपने बड़े पलंग पर लेटा था। पर उसे नींद नहीं आई। आँखें खुली रहीं। बार-बार।
एस्तेर 6 क्या कहता है?
ठीक उसी समय, बाहर आँगन में कोई खड़ा था। वह हामान था। हामान मोर्दकै से बहुत चिढ़ता था। वह एक ऊँचा खम्भा बनवा चुका था। मोर्दकै को उस पर लटकाने की सोच रहा था।
एस्तेर 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
राजा ने कहा, "बहुत बढ़िया!" "अब जाओ। यह सब मोर्दकै के साथ करो!"
नन्हे बच्चे एस्तेर 6 से क्या सीख सकते हैं?
काम के बाद, मोर्दकै फाटक पर लौट गया। हामान अपने घर गया। सिर ढाँपे हुए। बहुत दुखी।
एस्तेर 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हामान ने सोचा था वह सम्मान पाएगा, पर मोर्दकै को मिला। यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

उसके लिए कुछ नहीं किया गया।" पाँच साल हो गए थे। मोर्दकै ने राजा की जान बचाई, और सब भूल गए। कोई इनाम नहीं, कोई धन्यवाद नहीं।

पर जो आदमी भूल गया, वह राजा था, परमेश्वर नहीं। ठीक उसी रात, ठीक उसी पन्ने पर राजा की नींद उड़ी।

तेरी सेवा जो किसी ने नहीं देखी, वह बही में लिखी है। समय उसका है, देर उसकी नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

हामान राजा के पास मोर्दकै के लिए फाँसी मँगवाने आया था, और जब राजा ने पूछा तो उसने सोचा बात उसी के बारे में है। "जिस पुरुष की प्रतिष्ठा राजा करना चाहता है," यह कहते हुए उसके मन में अपना ही चेहरा था। अपने बारे में बड़ी सोच रखना कितना खतरनाक है। कभी सोचो, परमेश्वर की बातों में तुम कहाँ अपने आप को रख देते हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

उस रात राजा की नींद उड़ गई। "उस रात राजा की नींद उड़ गई, तब उसने आज्ञा दी कि इतिहास की पुस्तक लाई जाए।" न कोई स्वर्गदूत, न कोई चमत्कार, बस एक करवट बदलता हुआ आदमी। और उसी बेचैनी से मोर्दकै की जान बची। तेरी जिस रात नींद नहीं आती, हो सकता है परमेश्वर वहीं किसी की कहानी बदल रहा हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

राजा के घोड़े पर सवारी, नगर भर में सम्मान, और उसके बाद मोर्दकै क्या करता है? "मोर्दकै तो राजभवन के फाटक पर लौट गया।" वही पुरानी जगह, वही चौकी। आदर मिला तो सिर ऊँचा नहीं हुआ। उधर हामान "शोक करता और सिर ढाँपे हुए" घर भागा, क्योंकि उसकी पहचान लोगों की वाहवाही से बँधी थी। तेरी पहचान किससे बँधी है? जिस दिन तारीफ़ रुक जाए, क्या तू अपनी चौकी पर टिका रहेगा?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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