हबक्कूक 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी था। उसका नाम था हबक्कूक। वह डर गया था। बहुत डर गया था।
उसने परमेश्वर से बात की। उसने कहा, "हे प्रभु, मैंने आपकी शक्ति के बारे में सुना। मैं काँप गया।"
फिर हबक्कूक ने एक तस्वीर देखी। परमेश्वर आ रहे थे। उनकी चमक आकाश में फैली हुई थी। सूरज जैसी रोशनी। हाथों से किरणें निकल रही थीं।
परमेश्वर बहुत बड़े थे। इतने बड़े कि पहाड़ हिल गए। पहाड़, जो हज़ारों साल से खड़े थे। वे भी काँप गए। पानी भी डर गया। समुद्र ने अपनी लहरें ऊपर उठाईं।
परमेश्वर घोड़ों पर सवार थे। रथों पर चढ़े हुए। वे किसी को बचाने आ रहे थे।
इसका क्या मतलब है?
परमेश्वर अपने लोगों को बचाने आए थे। उन्होंने अपने लोगों को दुष्टों से छुड़ाया। जैसे कोई पिता अपने बच्चे को खतरे से निकाल लाए।
हबक्कूक ने यह सब सुना। उसका दिल धड़कने लगा। उसके होंठ काँपे। उसके पैर लड़खड़ाए।
पर वह घबराया नहीं रहा। वह शांत हो गया। उसने सोचा, "मैं उस दिन का इंतज़ार करूँगा।"
समान सूत्र
परमेश्वर अपने लोगों को बचाते हैं। यह वही परमेश्वर हैं। बाद में उन्होंने अपना बेटा भेजा। उसका नाम यीशु था।
यीशु भी बचाने आए। जैसे हबक्कूक ने देखा कि परमेश्वर लोगों को छुड़ाते हैं, वैसे ही यीशु हमें छुड़ाने आए। वे हमारे लिए लड़े। उन्होंने हमें बचाया।
तुम्हारे लिए
अब सुनो, यह हिस्सा सबसे सुंदर है।
हबक्कूक ने कहा, "अगर पेड़ों में फल न हों, अगर खेतों में कुछ न उगे, अगर भेड़ें न हों, तो भी…"
तो भी क्या? तो भी वह खुश रहेगा! क्योंकि परमेश्वर उसके साथ हैं।
जब सब कुछ अच्छा न हो, तब भी परमेश्वर के कारण खुश रहा जा सकता है। जैसे हिरन पहाड़ों पर उछलता है, वैसे ही परमेश्वर हमें मज़बूत पैर देते हैं। हम गिरते नहीं। परमेश्वर हमें ऊँचे स्थानों पर ले जाते हैं।
तुम्हें कब डर लगता है? अंधेरे में? अकेले में? तब परमेश्वर की याद करो। वे तुम्हारे साथ हैं।
बात करें
क्या तुम्हें कभी किसी चीज़ से डर लगा है?
हबक्कूक ने कहा, फल न हों तो भी वह खुश रहेगा, क्यों?
साथ में प्रार्थना
हे प्रभु, आप बहुत बड़े हैं। आप मुझे बचाते हैं। जब मुझे डर लगे, मुझे याद दिलाइए कि आप साथ हैं। मुझे भी हिरन जैसे मज़बूत पैर दीजिए। आमीन।
हबक्कूक 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
हबक्कूक 3 किस विषय में है?
हबक्कूक 3 क्या कहता है?
हबक्कूक 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे हबक्कूक 3 से क्या सीख सकते हैं?
हबक्कूक 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यह सुनते ही मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे।" हबक्कूक का शरीर डर से हिल रहा है, फिर भी वह इंतज़ार करना चुनता है। ध्यान दे, उसने काँपना बंद नहीं किया, उसने भागना बंद किया। विश्वास का मतलब यह नहीं कि तेरे घुटने मज़बूत हों; इसका मतलब है कि काँपते घुटनों के साथ भी तू परमेश्वर के समय की बाट जोहता रहे।
शिग्योनोत की रीति पर हबक्कूक नबी की प्रार्थना।" दो अध्याय तक जो आदमी परमेश्वर से लड़ता रहा, "हे यहोवा, मैं कब तक तेरी दुहाई दूँ," वही अब अपने सवालों को गीत का सुर दे रहा है। उसका दर्द खत्म नहीं हुआ, पर वह उसे गाने लगा। तेरी शिकायत भी प्रार्थना बन सकती है। उसे दबा मत, उसे परमेश्वर के सामने रख दे।
मैंने कूशान के तम्बुओं को क्लेश में पड़े देखा; मिद्यान देश के पर्दे थरथराने लगे।" हबक्कूक उस समय बाबेल के डर में जी रहा था, और परमेश्वर उसे याद दिलाता है कि जब वह चलता है तो जाति जाति के तम्बू काँप उठते हैं। तेरे डर की चीज़ें भी बस कपड़े के पर्दे हैं। सवाल यह है, तू किसकी आहट सुनकर काँपता है?
ध्यान दे, हबक्कूक यह नहीं कहता कि परमेश्वर सिर्फ़ बदला लेने निकला। वह कहता है, "तू अपनी प्रजा के उद्धार के लिये निकला।" कँपते पहाड़, बिजली, तूफ़ान, यह सब डराने के लिए नहीं था, बचाने के लिए था।
तेरी ज़िंदगी में जो हलचल है, क्या हो सकता है कि परमेश्वर वहाँ भी तुझे बचाने ही निकला हो?
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