3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 यूहन्ना 3

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक पापा था। उसका एक छोटा बच्चा था। पापा उससे बहुत प्यार करता था। वह उसे गोद में उठाता था। वह उसे कहता था, "तुम मेरे हो।"

परमेश्वर भी ऐसे ही हैं। वे हमारे पापा जैसे हैं। बाइबल कहती है, "देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ।" हम परमेश्वर के बच्चे हैं। सच में!

परमेश्वर का यह क्या अर्थ है?

एक दिन यीशु फिर आएँगे। तब हम उन्हें देखेंगे। बिलकुल पास से। और जो हम उन्हें देखेंगे, हम उनके जैसे हो जाएँगे। कैसा अच्छा दिन होगा वह!

यीशु आए थे इस दुनिया में। वे बिलकुल भले थे। उनमें कोई पाप नहीं था। एक भी नहीं। वे आए ताकि हमारे बुरे काम दूर कर दें। जैसे मम्मी गंदे कपड़े धो देती है, वैसे ही यीशु हमें साफ करते हैं।

एक धागा जो जुड़ा है

क्या तुमने कभी झगड़ा किया अपने भाई या बहन से? यूहन्ना कहता है, कैन नाम का एक आदमी था। वह अपने भाई से जलता था। यह बहुत बुरी बात थी।

पर यीशु ने अलग किया। बाइबल कहती है, "हमने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए।" यीशु ने अपनी जान दे दी। हमारे लिए। यह सबसे बड़ा प्रेम है। किसी और ने ऐसा नहीं किया।

और अब यीशु चाहते हैं, हम भी एक दूसरे से प्रेम करें। सच्चा प्रेम। सिर्फ शब्दों से नहीं। बाइबल कहती है, "हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।"

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारे पास एक खिलौना है? और तुम्हारे दोस्त के पास नहीं है? तुम उसे दे सकते हो। वह भी प्रेम है। सच्चा प्रेम।

जब तुम किसी को गले लगाते हो, जब तुम बाँटते हो अपनी रोटी, जब तुम कहते हो "मुझे माफ करो", यह सब प्रेम है। परमेश्वर यह देखते हैं। वे खुश होते हैं।

परमेश्वर हमारे मन से भी बड़े हैं। वे सब जानते हैं। जब हम डरते हैं, वे हमें जानते हैं। जब हम गलती करते हैं, वे फिर भी हमें प्यार करते हैं।

तुम आज किसे थोड़ा प्रेम दिखा सकते हो?

तुम्हें कब पता चलता है कि परमेश्वर तुम्हें अपना बच्चा कहते हैं?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप हमारे पापा हैं। आपने हमें बहुत प्यार किया। यीशु ने अपनी जान दी। हमारे लिए। हमें भी सिखाइए प्रेम करना। अपने भाई-बहन से, अपने दोस्तों से। आमीन।

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1 यूहन्ना 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 यूहन्ना 3 किस विषय में है?
एक पापा था। उसका एक छोटा बच्चा था। पापा उससे बहुत प्यार करता था। वह उसे गोद में उठाता था। वह उसे कहता था, "तुम मेरे हो।"
1 यूहन्ना 3 क्या कहता है?
एक दिन यीशु फिर आएँगे। तब हम उन्हें देखेंगे। बिलकुल पास से। और जो हम उन्हें देखेंगे, हम उनके जैसे हो जाएँगे। कैसा अच्छा दिन होगा वह!
1 यूहन्ना 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्या तुमने कभी झगड़ा किया अपने भाई या बहन से? यूहन्ना कहता है, कैन नाम का एक आदमी था। वह अपने भाई से जलता था। यह बहुत बुरी बात थी।
नन्हे बच्चे 1 यूहन्ना 3 से क्या सीख सकते हैं?
और अब यीशु चाहते हैं, हम भी एक दूसरे से प्रेम करें। सच्चा प्रेम। सिर्फ शब्दों से नहीं। बाइबल कहती है, "हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।"
1 यूहन्ना 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम किसी को गले लगाते हो, जब तुम बाँटते हो अपनी रोटी, जब तुम कहते हो "मुझे माफ करो", यह सब प्रेम है। परमेश्वर यह देखते हैं। वे खुश होते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

यूहन्ना पहचान का कोई गुप्त चिह्न नहीं देता। वह कहता है, "इसी से परमेश्वर की सन्तान, और शैतान की सन्तान जाने जाते हैं; जो कोई धार्मिकता के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता।" यानी घर लौटकर, कलीसिया में बैठकर, उस भाई के सामने जिससे मन खट्टा है, वहीं तेरी असली पहचान खुलती है। किसका नाम अभी तेरे मन में आया?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है।" यूहन्ना कोई नरमी नहीं दिखाता। हमने सोचा था कि जब तक हाथ साफ हैं, हम ठीक हैं। पर परमेश्वर मन के भीतर देखता है, वहाँ जहाँ हम किसी का नाम सुनते ही कड़वे हो जाते हैं। आज एक चेहरा तेरे मन में आया होगा। उसी से शुरू कर।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी।" यूहन्ना यहाँ रुककर देखने को कहता है, जैसे कोई आपकी ठोड़ी पकड़कर आपका मुँह ऊपर उठा दे। और ध्यान दो, वह "कहलाएँ" पर नहीं रुकता, जोड़ता है, "और हम हैं भी।" यह कोई उपाधि नहीं, आपकी सच्चाई है। संसार आपको न पहचाने, तो अचरज क्यों? उसने पिता को भी नहीं पहचाना।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

और जो कुछ हम माँगते हैं, वह हमें उससे मिलता है; क्योंकि हम उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, और जो उसे भाता है वही करते हैं।"

यह कोई सौदा नहीं है कि आज्ञा मानो तो मनचाही चीज़ मिलेगी। इससे ठीक पहले यूहन्ना कहता है कि हमारा मन हमें दोषी न ठहराए। जो रोज़ पिता को भाने वाला काम करता है, उसकी माँग भी धीरे धीरे बदल जाती है। वह वही माँगने लगता है जो पिता देना चाहता है।

आज तेरी प्रार्थना क्या बता रही है, तेरी इच्छा या उसकी?

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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