3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 9

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

सुनो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ। बहुत समय पहले की बात है। परमेश्वर के लोग थे। उनका नाम था इस्राएल। परमेश्वर उनसे बहुत प्यार करते थे।

परमेश्वर ने उन्हें एक सुन्दर देश दिया था। वहाँ खेत थे। खेतों में गेहूँ उगता था। अंगूर उगते थे। मीठे अंजीर भी उगते थे। सब कुछ बहुत अच्छा था।

पर देखो, क्या हुआ। इस्राएल के लोग परमेश्वर को भूल गए। वे कहने लगे, "हमें परमेश्वर की ज़रूरत नहीं।" वे दूसरी मूरतों के पास गए। वे झुक गए लकड़ी और पत्थर के सामने।

परमेश्वर ने यह देखा। परमेश्वर बहुत उदास हुए। बहुत, बहुत उदास।

परमेश्वर ने होशे नाम के एक आदमी को भेजा। होशे परमेश्वर के लिए बोलता था। होशे ने कहा, "लोगो, सुनो! तुम परमेश्वर को भूल गए हो। लौट आओ! जल्दी लौट आओ!"

पर लोगों ने नहीं सुना। उन्होंने कान बंद कर लिए।

What Does This Mean?

परमेश्वर के लोग परमेश्वर को भूल गए। यह बहुत दुख की बात है।

सोचो, अगर तुम्हारे पापा तुम्हारे लिए एक बड़ा सुन्दर उपहार लाएँ। और तुम पापा को "थैंक्यू" न कहो। और उपहार भी फेंक दो। पापा को कैसा लगेगा? उदास, बहुत उदास।

परमेश्वर ने इस्राएल को सब कुछ दिया। खेत, फल, रोटी, घर। पर लोगों ने कहा, "थैंक्यू परमेश्वर" नहीं कहा। वे भूल गए किसने यह सब दिया।

परमेश्वर चाहते थे कि लोग वापस आएँ। परमेश्वर ने उन्हें बार-बार बुलाया। परमेश्वर का दिल प्यार से भरा था।

The Common Thread

परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते। कभी नहीं।

लोग भूल गए, पर परमेश्वर नहीं भूले। बहुत सालों बाद परमेश्वर ने यीशु को भेजा। यीशु आए इस दुनिया में। यीशु आए हमें बुलाने। यीशु ने कहा, "आओ, मेरे पास आओ।"

यीशु आज भी बुलाते हैं। तुम्हें भी बुलाते हैं। "आओ, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"

For You

तुम्हारे पास भी बहुत कुछ है। एक घर। एक बिस्तर। रोटी। मम्मी-पापा। ये सब परमेश्वर की देन हैं।

रोज़ सुबह तुम आँखें खोलते हो। यह परमेश्वर का उपहार है। रोज़ रात तुम सो जाते हो। परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करते हैं।

"थैंक्यू परमेश्वर" कहना अच्छा है। खाने से पहले। सोने से पहले। परमेश्वर सुनते हैं। परमेश्वर मुस्कुराते हैं जब तुम धन्यवाद कहते हो।

Talk About It

परमेश्वर ने तुम्हें क्या-क्या अच्छी चीज़ें दी हैं?

आज तुम परमेश्वर को "थैंक्यू" किस बात के लिए कहोगे?

Praying Together

प्यारे परमेश्वर, आप बहुत अच्छे हैं। आपने मुझे बहुत कुछ दिया है। मम्मी, पापा, खाना, घर। थैंक्यू, परमेश्वर। मैं आपको नहीं भूलूँगा। यीशु के नाम से, आमीन।

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होशे 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 9 किस विषय में है?
सुनो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ। बहुत समय पहले की बात है। परमेश्वर के लोग थे। उनका नाम था इस्राएल। परमेश्वर उनसे बहुत प्यार करते थे।
होशे 9 क्या कहता है?
परमेश्वर ने यह देखा। परमेश्वर बहुत उदास हुए। बहुत, बहुत उदास।
होशे 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सोचो, अगर तुम्हारे पापा तुम्हारे लिए एक बड़ा सुन्दर उपहार लाएँ। और तुम पापा को "थैंक्यू" न कहो। और उपहार भी फेंक दो। पापा को कैसा लगेगा? उदास, बहुत उदास।
नन्हे बच्चे होशे 9 से क्या सीख सकते हैं?
लोग भूल गए, पर परमेश्वर नहीं भूले। बहुत सालों बाद परमेश्वर ने यीशु को भेजा। यीशु आए इस दुनिया में। यीशु आए हमें बुलाने। यीशु ने कहा, "आओ, मेरे पास आओ।"
होशे 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
रोज़ सुबह तुम आँखें खोलते हो। यह परमेश्वर का उपहार है। रोज़ रात तुम सो जाते हो। परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

क्योंकि उनकी रोटी उनकी भूख ही मिटाएगी, वह यहोवा के भवन में न आएगी।" कैसी दुखभरी बात है। रोटी तो मिलती रही, पेट भी भरता रहा, पर वह परमेश्वर तक कभी न पहुँची। सोचो, तुम्हारी कमाई, तुम्हारा भोजन, तुम्हारा दिन, क्या ये सिर्फ तुम्हें भरते हैं, या उसके सामने भी रखे जाते हैं? भूख मिटना और आशीष पाना, दोनों एक बात नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

होशे अपने ही लोगों के लिए यह भयानक प्रार्थना करता है, "उन्हें गिरने वाला गर्भ और सूखी छातियाँ दे।" यह श्राप नहीं, टूटे दिल की पुकार है। इस्राएल ने बाल की पूजा में उर्वरता ढूँढी थी, तो होशे कहता है कि जिस चीज़ में उन्होंने अपना भरोसा रखा, वही उनसे छिन जाए।

कभी-कभी परमेश्वर हमारी वही मूरतें तोड़ता है जिन पर हम टिके हैं, ताकि हम फिर से उसकी ओर लौटें। क्या आज कोई ऐसी चीज़ है जिससे तुम अपना पेट भरने की कोशिश कर रहे हो, जबकि रोटी सिर्फ़ उसी के हाथ में है?

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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