3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 8

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

सुनो। बहुत, बहुत पहले एक आदमी था। उसका नाम था होशे।

परमेश्वर ने होशे से बात की। परमेश्वर ने कहा, "नरसिंगा बजा!"

नरसिंगा एक बड़ा सींग का बाजा है। उसमें ज़ोर से फूँक मारते हैं। तूऊऊऊ! बहुत तेज़ आवाज़। जब वह बजता था, सब लोग रुक जाते थे। सब कान लगाकर सुनते थे।

क्यों बजाना था? क्योंकि परमेश्वर उदास थे। बहुत उदास।

आओ, देखो। वहाँ क्या रखा है?

एक बछड़ा। सोने का बछड़ा। चमचम चमकता हुआ। एक कारीगर ने उसे बनाया। ठक, ठक, ठक। हथौड़े से ठोंक-ठोंक कर।

और लोग उस बछड़े के सामने झुकते थे। वे कहते थे, "यह हमारा परमेश्वर है!"

पर वह बछड़ा देख नहीं सकता था। सुन नहीं सकता था। बोल नहीं सकता था। वह सिर्फ़ सोने का था। ठंडा और चुप।

परमेश्वर ने कहा, "वह परमेश्वर नहीं है। एक कारीगर ने उसे बनाया है।"

इसका क्या अर्थ है?

अब सुनो, आगे क्या हुआ।

लोगों ने परमेश्वर से कहा, "हे हमारे परमेश्वर, हम तुझे जानते हैं।"

उनके मुँह से अच्छे शब्द निकले। पर उनका मन दूर था। बहुत दूर।

परमेश्वर ने कहा, "मैंने तुम्हारे लिये बहुत सारी बातें लिखीं। ढेर सारी! पर तुम उन्हें पढ़ते ही नहीं।"

सोचो। परमेश्वर ने चिट्ठी जैसी बातें लिखीं। पर लोगों ने उन्हें एक तरफ़ रख दिया।

वे बड़े-बड़े घर बनाते रहे। ऊँची-ऊँची दीवारें बनाते रहे। और जो उन्हें बनाया था, उसी को भूल गए।

परमेश्वर ने कहा, "तुमने हवा बोई है।"

हवा बोना? सोचो ज़रा। कोई खेत में हवा बोए। फिर वहाँ कुछ नहीं उगता। कोई रोटी नहीं। पेट खाली। मन खाली।

परमेश्वर का मन बहुत दुखा। वे नाराज़ भी हुए।

पर सुनो। परमेश्वर ने एक और बात भी कही। एक सुंदर बात।

उन्होंने कहा, "मैं उनको इकट्ठा करूँगा।"

देखा? परमेश्वर ने अपने लोगों को छोड़ा नहीं। वे उन्हें फिर से इकट्ठा करना चाहते थे। जैसे चरवाहा अपनी भेड़ों को बुलाता है। आओ! आओ! घर आओ!

जोड़ने वाला धागा

परमेश्वर ने बहुत साल बाद यीशु मसीह को भेजा।

यीशु मसीह चरवाहे की तरह हैं। वे भेड़ों को इकट्ठा करते हैं। वे खोई हुई भेड़ को ढूँढ़ते हैं।

यीशु मसीह सोने के बछड़े जैसे नहीं हैं। वे चुप नहीं हैं। वे देखते हैं। वे सुनते हैं। वे बोलते हैं।

वे तुम्हें नाम से बुलाते हैं। और वे तुमसे प्यार करते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम्हारे पास भी बहुत सुंदर चीज़ें हैं। कोई नरम भालू। कोई लाल गाड़ी। कोई चमकीली गेंद।

वे सब अच्छी हैं। तुम उनसे खेल सकते हो।

पर वे तुमसे बात नहीं कर सकतीं। वे तुम्हें गले नहीं लगा सकतीं।

परमेश्वर कर सकते हैं। वे सुनते हैं जब तुम बोलते हो। हर बार।

तो आज परमेश्वर से बात करो। बस थोड़ा-सा। वे बहुत खुश होंगे।

इस पर बात करो

सोने का बछड़ा क्या नहीं कर सकता था? और परमेश्वर क्या कर सकते हैं?

तुम आज परमेश्वर से क्या कहना चाहते हो?

मिलकर प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप सुनते हैं। हर बार।

धन्यवाद कि आप मुझे जानते हैं।

धन्यवाद कि आप मुझे बुलाते हैं।

मैं आपका हूँ।

आमीन।

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होशे 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 8 किस विषय में है?
परमेश्वर ने होशे से बात की। परमेश्वर ने कहा, "नरसिंगा बजा!"
होशे 8 क्या कहता है?
पर वह बछड़ा देख नहीं सकता था। सुन नहीं सकता था। बोल नहीं सकता था। वह सिर्फ़ सोने का था। ठंडा और चुप।
होशे 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने कहा, "मैंने तुम्हारे लिये बहुत सारी बातें लिखीं। ढेर सारी! पर तुम उन्हें पढ़ते ही नहीं।"
नन्हे बच्चे होशे 8 से क्या सीख सकते हैं?
देखा? परमेश्वर ने अपने लोगों को छोड़ा नहीं। वे उन्हें फिर से इकट्ठा करना चाहते थे। जैसे चरवाहा अपनी भेड़ों को बुलाता है। आओ! आओ! घर आओ!
होशे 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हारे पास भी बहुत सुंदर चीज़ें हैं। कोई नरम भालू। कोई लाल गाड़ी। कोई चमकीली गेंद।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

एप्रैम ने वेदियाँ घटाई नहीं, बढ़ाई थीं। "एप्रैम ने पाप करने के लिए बहुत सी वेदियाँ बनाईं।" बाहर से यह भक्ति दिखती है, परमेश्वर की नज़र में यह पाप का ढेर था। कभी हम भी ऐसा करते हैं, मन बदलने के बजाय धार्मिक काम बढ़ा देते हैं। एक और सेवा, एक और उपवास, पर वही पुराना दिल। सोच, तेरी वेदियाँ तुझे उसके पास ले जा रही हैं, या उससे छिपा रही हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

इस्राएल ने भलाई को मन से उतार दिया है, शत्रु उसका पीछा करेगा।" ध्यान दो, यहाँ भलाई ने इस्राएल को नहीं छोड़ा, इस्राएल ने भलाई को ठुकराया। परमेश्वर वहीं खड़ा था, पर उन्होंने मुँह फेर लिया।

आज खुद से पूछ, कहीं तू भी उस आवाज़ को टालता तो नहीं जो तुझे सही राह दिखाती है? जिसे हम धीरे धीरे मन से उतारते हैं, एक दिन उसकी कमी हमें अकेला कर देती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

एक कारीगर ने उसे बनाया, और वह परमेश्वर नहीं है; सामरिया का बछड़ा टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।" जिस बछड़े के सामने वे झुकते थे, वह उन्हीं के हाथों की मेहनत थी। सोचिए, अपनी ही बनाई चीज़ से सहारा माँगना। आज भी हम जो कमाते हैं, जो पद बनाते हैं, उसी से पूछते हैं, क्या मैं सुरक्षित हूँ? पर जो टूट सकता है, वह बचा नहीं सकता।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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