3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 20

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

बाइबल क्या कहती है?

यशायाह परमेश्वर का भला सेवक था। वह टाट का खुरदुरा कपड़ा पहनता था। उसके पैरों में चमड़े की जूतियाँ थीं। एक दिन परमेश्वर ने उससे कुछ कहा। परमेश्वर ने कहा, "अपनी कमर का टाट खोल दे।" परमेश्वर ने कहा, "अपनी जूतियाँ भी उतार दे।" यशायाह ने वैसा ही किया। उसने अपना टाट उतार दिया। उसने अपनी जूतियाँ उतार दीं। अब वह नंगे पाँव चलता था। गरम धूप में। नुकीले पत्थरों पर। धूल भरी गलियों में। बिना जूतों के। और यह एक दिन की बात नहीं थी। यह तीन पूरे साल तक चला। तीन साल! बहुत, बहुत लंबा समय। लोग उसे देखते और चकित होते थे।

इसका क्या मतलब है?

परमेश्वर ने यह यूँ ही नहीं कहा था। यह एक चिन्ह था, एक तस्वीर। दूर, मिस्र नाम का देश था। दूर, कूश नाम का देश भी था। वहाँ के लोग सोचते थे, "हम ताकतवर हैं।" वे सोचते थे, "हमारे पास बचने का रास्ता है।" पर परमेश्वर ने कहा, "सुनो ध्यान से।" "जैसे यशायाह नंगे पाँव, बिना टाट चला," "वैसे ही अश्शूर का राजा आएगा।" वह मिस्र और कूश के लोगों को पकड़ेगा। वह उन्हें बिना जूतों के ले जाएगा। छोटे बच्चे भी, बूढ़े लोग भी। तब वे लोग घबरा जाएँगे। वे पूछेंगे, "अब हम किस पर भरोसा करें?"

एक ही कहानी की कड़ी

मिस्र और कूश मजबूत दिखते थे। पर वे सच में मजबूत नहीं निकले। सिर्फ परमेश्वर ही सचमुच मजबूत हैं। सिर्फ परमेश्वर पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपना बेटा भेजा। उनका नाम है यीशु मसीह। यीशु कभी किसी को धोखा नहीं देते। यीशु हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। राजा आएँ या चले जाएँ, यीशु सदा रहते हैं। उन्हीं पर हम सच में भरोसा कर सकते हैं।

तुम्हारे लिए

सोचो, तुम्हारे पैरों में जूते हैं। गरम दिन में भी, ठंडे दिन में भी। यशायाह के पास तीन साल तक जूते नहीं थे। फिर भी उसने परमेश्वर की बात मानी। बिना शिकायत किए, बिना डरे। तुम भी परमेश्वर की बात मान सकते हो। जब परमेश्वर कुछ कहें, तो सुनो। तुम भी परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हो। तुम्हारी ताकत पर नहीं, परमेश्वर की ताकत पर। परमेश्वर तुम्हें कभी नहीं छोड़ेंगे।

बात करें

यशायाह ने अपने जूते और टाट क्यों उतारे?

तुम सबसे ज्यादा किस पर भरोसा करते हो?

आओ प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, यशायाह ने आपकी बात मानी। हमें भी आपकी बात मानने में मदद दीजिए। हम अपनी ताकत पर नहीं, आप पर भरोसा करना चाहते हैं। आमीन।

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यशायाह 20 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 20 किस विषय में है?
यशायाह परमेश्वर का भला सेवक था। वह टाट का खुरदुरा कपड़ा पहनता था। उसके पैरों में चमड़े की जूतियाँ थीं। एक दिन परमेश्वर ने उससे कुछ कहा। परमेश्वर ने कहा, "अपनी कमर का टाट खोल दे।" परमेश्वर ने कहा, "अपनी जूतियाँ भी उतार दे।" यशायाह ने वैसा ही किया। उसने अपना टाट उतार दिया। उसने अपनी जूतियाँ उतार दीं। अब वह नंगे पाँव चलता था। गरम धूप में। नुकीले पत्थरों पर। धूल भरी गलियों में। बिना जूतों के। और यह एक
यशायाह 20 क्या कहता है?
परमेश्वर ने यह यूँ ही नहीं कहा था। यह एक चिन्ह था, एक तस्वीर। दूर, मिस्र नाम का देश था। दूर, कूश नाम का देश भी था। वहाँ के लोग सोचते थे, "हम ताकतवर हैं।" वे सोचते थे, "हमारे पास बचने का रास्ता है।" पर परमेश्वर ने कहा, "सुनो ध्यान से।" "जैसे यशायाह नंगे पाँव, बिना टाट चला," "वैसे ही अश्शूर का राजा आएगा।" वह मिस्र और कूश के लोगों को पकड़ेगा। वह उन्हें बिना जूतों के ले ज
यशायाह 20 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
मिस्र और कूश मजबूत दिखते थे। पर वे सच में मजबूत नहीं निकले। सिर्फ परमेश्वर ही सचमुच मजबूत हैं। सिर्फ परमेश्वर पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपना बेटा भेजा। उनका नाम है यीशु मसीह। यीशु कभी किसी को धोखा नहीं देते। यीशु हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। राजा आएँ या चले जाएँ, यीशु सदा रहते हैं। उन्हीं पर हम सच में भरोसा कर सकते हैं।
नन्हे बच्चे यशायाह 20 से क्या सीख सकते हैं?
सोचो, तुम्हारे पैरों में जूते हैं। गरम दिन में भी, ठंडे दिन में भी। यशायाह के पास तीन साल तक जूते नहीं थे। फिर भी उसने परमेश्वर की बात मानी। बिना शिकायत किए, बिना डरे। तुम भी परमेश्वर की बात मान सकते हो। जब परमेश्वर कुछ कहें, तो सुनो। तुम भी परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हो। तुम्हारी ताकत पर नहीं, परमेश्वर की ताकत पर। परमेश्वर तुम्हें कभी नहीं छोड़ेंगे।
यशायाह 20 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, यशायाह ने आपकी बात मानी। हमें भी आपकी बात मानने में मदद दीजिए। हम अपनी ताकत पर नहीं, आप पर भरोसा करना चाहते हैं। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

यशायाह तीन साल नंगे पाँव चलता रहा, सिर्फ़ इसलिए कि यहूदा देख सके कि जिस मिस्र पर वह भरोसा कर रहा है, उसका अंत क्या है। "क्या जवान क्या बूढ़े, नंगे और नंगे पाँव, नितम्ब उघाड़े हुए।" जिस सहारे पर हम गर्व करते हैं, वही एक दिन हमारी लज्जा खोल देता है। आज तेरा भरोसा किस पर टिका है, उस पर जो बंधुआ हो सकता है, या उस पर जो कभी नहीं डगमगाता?

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