3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 60

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

परमेश्वर की बात

रात बहुत गहरी थी। बहुत काली। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था। कहीं कोई रोशनी नहीं।

पर तभी कुछ हुआ। दूर से एक चमक आई। धीरे धीरे, फिर तेज़, और तेज़।

परमेश्वर ने कहा, "उठ जाओ! चमक उठो! तुम्हारी रोशनी आ गई है।"

स्पष्टीकरण

यह रोशनी परमेश्वर की अपनी चमक थी। जैसे सुबह सूरज निकलता है, वैसे ही परमेश्वर का तेज चमका। चारों तरफ अंधेरा था, पर एक जगह पर रोशनी थी। वहाँ परमेश्वर खुद चमक रहे थे।

फिर दूर दूर से लोग आने लगे। बहुत सारे लोग। ऊँटों पर, जहाज़ों पर। वे सोना लाए, वे खुशबूदार चीज़ें लाए। बच्चे भी आए, छोटे छोटे बच्चे, अपने माता पिता के पास वापस।

एक माँ की तरह, वह जगह देखकर चौंक गई। उसका चेहरा चमक उठा। उसका दिल खुशी से धड़कने लगा। क्योंकि सब लोग उसके पास आ रहे थे।

इसका मतलब क्या है

पहले वह जगह उदास थी। अकेली थी। कोई उसके पास नहीं आता था। पर अब सब बदल गया।

द्वार खुले रहेंगे। दिन हो या रात, कोई द्वार बंद नहीं होगा। क्योंकि अब डरने की कोई बात नहीं। अब लोग दोस्त बनकर आ रहे हैं, दुश्मन बनकर नहीं।

परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हें फिर से सुंदर बनाऊँगा।" जो लकड़ी थी, वह सोना बन जाएगी। जो पत्थर था, वह चांदी बन जाएगा। हर चीज़ नई और चमकदार।

एक ही कहानी की कड़ी

परमेश्वर ने कहा, "सूरज अब तुम्हारी रोशनी नहीं रहेगा। चाँद भी नहीं। मैं खुद तुम्हारी रोशनी बनूँगा, हमेशा के लिए।"

यह बात यीशु मसीह की ओर इशारा करती है। यीशु ही वह असली रोशनी हैं, जो अंधेरे में आई। उनके आने से रोना बंद हो जाता है, आँसू पुँछ जाते हैं। उनके पास जो आते हैं, उनके लिए द्वार हमेशा खुला रहता है।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी अंधेरे कमरे में बत्ती जलाई है? कैसा लगा जब रोशनी आई?

यीशु भी वैसे ही हैं। जब तुम्हारा मन उदास हो, डरा हुआ हो, तब यीशु को बुलाओ। वे तुम्हारे पास रोशनी लेकर आते हैं। उनके पास जाने के लिए कोई द्वार बंद नहीं है। तुम कभी भी आ सकते हो।

बात करें

तुम्हें अंधेरे में सबसे ज़्यादा किस चीज़ से डर लगता है?

यीशु को अपने दिल की रोशनी कहना कैसा लगता है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु यीशु, आप रोशनी हैं। जब अंधेरा लगे, तब आप मेरे पास आइए। मेरा द्वार हमेशा आपके लिए खुला है। आमीन।

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यशायाह 60 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 60 किस विषय में है?
रात बहुत गहरी थी। बहुत काली। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था। कहीं कोई रोशनी नहीं।
यशायाह 60 क्या कहता है?
यह रोशनी परमेश्वर की अपनी चमक थी। जैसे सुबह सूरज निकलता है, वैसे ही परमेश्वर का तेज चमका। चारों तरफ अंधेरा था, पर एक जगह पर रोशनी थी। वहाँ परमेश्वर खुद चमक रहे थे।
यशायाह 60 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पहले वह जगह उदास थी। अकेली थी। कोई उसके पास नहीं आता था। पर अब सब बदल गया।
नन्हे बच्चे यशायाह 60 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने कहा, "सूरज अब तुम्हारी रोशनी नहीं रहेगा। चाँद भी नहीं। मैं खुद तुम्हारी रोशनी बनूँगा, हमेशा के लिए।"
यशायाह 60 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यीशु भी वैसे ही हैं। जब तुम्हारा मन उदास हो, डरा हुआ हो, तब यीशु को बुलाओ। वे तुम्हारे पास रोशनी लेकर आते हैं। उनके पास जाने के लिए कोई द्वार बंद नहीं है। तुम कभी भी आ सकते हो।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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