3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

यिर्मयाह 44

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

स्पष्टीकरण

मिस्र देश बहुत गरम था। वहाँ रेत थी, नदी थी, बड़े-बड़े घर थे। उन घरों में यहूदी लोग रहते थे। वे अपने देश यहूदा से भाग आए थे। शहर में धुआँ उठता था। पतली, सफेद लकीरें आसमान तक जाती थीं। लोग छोटी मूर्तियों के आगे धूप जलाते थे। वे कहते थे, "यह हमारी रानी है।" पर वह रानी सुन नहीं सकती थी। बोल भी नहीं सकती थी। यहोवा, सच्चे परमेश्वर, यह सब देख रहे थे। वे दुखी थे।

परमेश्वर ने यिर्मयाह से कहा, "जाओ, उनसे बात करो।" यिर्मयाह गया। वह भीड़ के बीच खड़ा हुआ। पुरुष खड़े थे, स्त्रियाँ खड़ी थीं। सब सुन रहे थे। यिर्मयाह ने ऊँची आवाज़ में कहा, "यहोवा कहते हैं, यरूशलेम क्यों उजड़ गया? क्योंकि वहाँ लोग धूप जलाते थे, दूसरे देवताओं के लिए। अब तुम भी वही काम यहाँ कर रहे हो।"

लोग शांत नहीं हुए। स्त्रियाँ आगे आईं। उन्होंने कहा, "नहीं। हम नहीं सुनेंगे। हम अपनी रानी के लिए रोटी बनाएँगे, धूप जलाएँगे। जब हम ऐसा करते थे, हमारा पेट भरा रहता था।"

यिर्मयाह का मन भारी हुआ। उसने फिर कहा, "परमेश्वर सब देखते हैं। वे भूलते नहीं।"

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर ने कहा, "मैं अपना बड़ा नाम लेकर कहता हूँ। अब मिस्र में कोई मेरा नाम लेकर कसम नहीं खाएगा।" यह सुनकर सन्नाटा छा गया। परमेश्वर चाहते थे कि उनके लोग सिर्फ उनकी तरफ देखें। छोटी मूर्तियों की तरफ नहीं। धुएँ की तरफ नहीं। सिर्फ परमेश्वर की तरफ। वे इतने प्रेम करते थे, कि यह बात उन्हें बहुत दुख देती थी।

समान सूत्र

परमेश्वर ने पहले भी कहा था, "मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मुझ पर भरोसा करो।" बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने कहा, "मुझे देखो। मुझ पर भरोसा करो।" किसी मूर्ति पर नहीं, किसी और चीज़ पर नहीं। परमेश्वर आज भी अपने बच्चों को अपने पास बुलाते हैं।

आपके लिए

तुम्हारे घर में कोई मूर्ति नहीं है। पर कभी-कभी तुम किसी और चीज़ पर बहुत भरोसा करते हो। अपने खिलौने पर, या मीठी चीज़ पर। परमेश्वर कहते हैं, "मेरी तरफ देखो।" वे तुम्हें प्यार करते हैं। वे तुम्हारी बात सुनते हैं।

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तुम्हें सबसे ज़्यादा भरोसा किस पर है?

क्या तुम परमेश्वर से बात कर सकते हो, जैसे तुम अपने पापा से बात करते हो?

एक साथ प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आप ही सच्चे हैं। आप मुझे प्यार करते हैं। मैं सिर्फ आपकी तरफ देखना चाहता हूँ। आमीन।

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यिर्मयाह 44 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यिर्मयाह 44 किस विषय में है?
मिस्र देश बहुत गरम था। वहाँ रेत थी, नदी थी, बड़े-बड़े घर थे। उन घरों में यहूदी लोग रहते थे। वे अपने देश यहूदा से भाग आए थे। शहर में धुआँ उठता था। पतली, सफेद लकीरें आसमान तक जाती थीं। लोग छोटी मूर्तियों के आगे धूप जलाते थे। वे कहते थे, "यह हमारी रानी है।" पर वह रानी सुन नहीं सकती थी। बोल भी नहीं सकती थी। यहोवा, सच्चे परमेश्वर, यह सब देख रहे थे। वे दुखी थे।
यिर्मयाह 44 क्या कहता है?
लोग शांत नहीं हुए। स्त्रियाँ आगे आईं। उन्होंने कहा, "नहीं। हम नहीं सुनेंगे। हम अपनी रानी के लिए रोटी बनाएँगे, धूप जलाएँगे। जब हम ऐसा करते थे, हमारा पेट भरा रहता था।"
यिर्मयाह 44 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने कहा, "मैं अपना बड़ा नाम लेकर कहता हूँ। अब मिस्र में कोई मेरा नाम लेकर कसम नहीं खाएगा।" यह सुनकर सन्नाटा छा गया। परमेश्वर चाहते थे कि उनके लोग सिर्फ उनकी तरफ देखें। छोटी मूर्तियों की तरफ नहीं। धुएँ की तरफ नहीं। सिर्फ परमेश्वर की तरफ। वे इतने प्रेम करते थे, कि यह बात उन्हें बहुत दुख देती थी।
नन्हे बच्चे यिर्मयाह 44 से क्या सीख सकते हैं?
तुम्हारे घर में कोई मूर्ति नहीं है। पर कभी-कभी तुम किसी और चीज़ पर बहुत भरोसा करते हो। अपने खिलौने पर, या मीठी चीज़ पर। परमेश्वर कहते हैं, "मेरी तरफ देखो।" वे तुम्हें प्यार करते हैं। वे तुम्हारी बात सुनते हैं।
यिर्मयाह 44 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, आप ही सच्चे हैं। आप मुझे प्यार करते हैं। मैं सिर्फ आपकी तरफ देखना चाहता हूँ। आमीन।

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