3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

विलापगीत 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

परमेश्वर की बात

एक शहर था। उसका नाम यरूशलेम था। पहले वह शहर लोगों से भरा था। हँसी की आवाज़ें थीं। बच्चे खेलते थे। बाज़ार में भीड़ थी।

पर अब? अब वह शहर बिलकुल अकेला बैठा है। कोई नहीं वहाँ। सुनसान गलियाँ। बंद फाटक।

रात में वह शहर रोता है। बहुत रोता है। आँसू उसके गालों पर बहते हैं। कोई उसे चुप कराने नहीं आता। कोई गले नहीं लगाता।

पहले जो दोस्त थे, वे भी चले गए। कुछ तो दुश्मन बन गए। कैसा दुखद!

इसका क्या अर्थ है?

यरूशलेम के लोगों ने बुरी बातें की थीं। परमेश्वर की बात नहीं मानी थी। इसलिए यह सब हुआ।

अब शहर कहता है, "हे प्रभु, मेरे दुःख पर दृष्टि कीजिए।" वह रो रहा है। बहुत ज़ोर से रो रहा है। उसका पेट दुखता है। उसका दिल टूट गया है।

क्या तुमने कभी बहुत रोया है? जब तुम गिर गए, या डर गए, या अकेले लगे? यरूशलेम भी वैसे ही रो रहा था। बहुत, बहुत रो रहा था।

पर देखो, वह किससे बात कर रहा है। वह चुपचाप नहीं रोता। वह परमेश्वर को पुकारता है। "हे यहोवा, दृष्टि कीजिए! मुझे देखिए!"

सूत्र की डोर

परमेश्वर सुन रहे थे। वे दूर नहीं थे। जब यरूशलेम रोया, परमेश्वर ने सुना।

बहुत बाद में, एक और शहर था। उसका नाम भी यरूशलेम था। वहाँ भी लोग रोए। पर वहाँ यीशु आए। यीशु भी शहर को देखकर रोए थे।

यीशु जानते हैं कैसा लगता है जब कोई अकेला हो। जब कोई रोए। इसलिए वे हमारे पास आते हैं। वे सुनते हैं। वे कभी दूर नहीं जाते।

तुम्हारे लिए

जब तुम उदास होते हो, तुम भी परमेश्वर को बुला सकते हो। जैसे यरूशलेम ने बुलाया। धीरे से कहो, "परमेश्वर, मुझे देखिए।"

वे सुनते हैं। वे कभी नहीं भूलते। वे तुम्हारे आँसू भी देखते हैं।

बात करें

तुम कब रोते हो? क्या तुम तब परमेश्वर को बुलाते हो?

यीशु भी उदास शहर को देखकर रोए थे। इससे तुम्हें कैसा लगता है?

साथ में प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, कभी-कभी हम उदास होते हैं। कभी-कभी हम रोते हैं। पर आप हमें देखते हैं। आप हमें सुनते हैं। धन्यवाद कि आप कभी दूर नहीं जाते। आमीन।

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विलापगीत 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

विलापगीत 1 किस विषय में है?
एक शहर था। उसका नाम यरूशलेम था। पहले वह शहर लोगों से भरा था। हँसी की आवाज़ें थीं। बच्चे खेलते थे। बाज़ार में भीड़ थी।
विलापगीत 1 क्या कहता है?
पहले जो दोस्त थे, वे भी चले गए। कुछ तो दुश्मन बन गए। कैसा दुखद!
विलापगीत 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्या तुमने कभी बहुत रोया है? जब तुम गिर गए, या डर गए, या अकेले लगे? यरूशलेम भी वैसे ही रो रहा था। बहुत, बहुत रो रहा था।
नन्हे बच्चे विलापगीत 1 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत बाद में, एक और शहर था। उसका नाम भी यरूशलेम था। वहाँ भी लोग रोए। पर वहाँ यीशु आए। यीशु भी शहर को देखकर रोए थे।
विलापगीत 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
वे सुनते हैं। वे कभी नहीं भूलते। वे तुम्हारे आँसू भी देखते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

उसने अपने अन्त की कुछ चिन्ता न की," यही यरूशलेम का सबसे गहरा घाव था। पाप उसके वस्त्र के आँचल पर लगा था, पर उसने कभी रुककर सोचा ही नहीं कि यह रास्ता कहाँ जाकर खत्म होगा। और जब सब गिर गया, तब भी उसकी पहली पुकार यह नहीं थी कि मुझे बचा, बल्कि "हे यहोवा, दृष्टि कर।" कभी-कभी टूटा हुआ मन बस इतना ही माँगता है कि कोई उसे देख ले। परमेश्वर वह दृष्टि कभी नहीं फेरता।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

सिय्योन अपने हाथ पसारती है, पर कोई उसे शान्ति देने वाला नहीं। यरूशलेम अपने ही आँसुओं में डूबी हुई है, और चारों ओर के लोग उसे घृणित समझते हैं। कभी-कभी दुःख की सबसे गहरी चोट यही होती है, कि जब हम हाथ बढ़ाते हैं, तो कोई थामने वाला नहीं मिलता।

पर याद रख, जब कोई मनुष्य हाथ नहीं थामता, तब भी एक है जो कहता है, "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा।" तेरे पसारे हुए हाथ स्वर्ग तक पहुँचते हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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