नहेम्याह 7
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक शहर था। नाम था यरूशलेम। उसकी दीवार टूटी हुई थी। पर अब नहीं। अब दीवार बन गई थी। ऊँची और मजबूत।
नहेम्याह बहुत खुश थे। उन्होंने दरवाजे लगाए। बड़े-बड़े फाटक। फिर उन्होंने कुछ लोगों को चुना। द्वारपाल। वे दरवाजों की रखवाली करते थे। कुछ लोग गाना गाते थे। वे गवैये थे।
नहेम्याह ने अपने भाई को बुलाया। उसका नाम हनानी था। और एक और आदमी, हनन्याह। नहेम्याह ने कहा, "तुम शहर की देखभाल करो।" हनन्याह भला आदमी था। वह परमेश्वर से डरता था। यानी वह परमेश्वर को बहुत मानता था।
नहेम्याह ने कहा, "सुनो। जब तक सूरज तेज़ न चमके, फाटक मत खोलना। और रात को अच्छी तरह बन्द करना।" शहर बड़ा था। पर उसमें घर कम थे। लोग भी कम थे।
इसका मतलब क्या है?
तब परमेश्वर ने नहेम्याह के मन में एक बात डाली। नहेम्याह ने सोचा, "आओ, सब लोगों को इकट्ठा करें। गिनें कि कौन-कौन यहाँ है।"
नहेम्याह को एक पुरानी किताब मिली। उसमें नाम लिखे थे। बहुत सारे नाम। परोश के घराने के लोग। शपत्याह के घराने के लोग। हर एक परिवार का नाम लिखा था। हर एक की गिनती लिखी थी।
क्यों? क्योंकि हर एक व्यक्ति मायने रखता था। कोई भूला नहीं गया। कोई छूटा नहीं। सबका नाम याद रखा गया।
याजक भी थे। गवैये भी थे। द्वारपाल भी थे। ऊँट भी थे, गधे भी थे, घोड़े भी थे। सब कुछ गिना गया।
कुछ लोगों ने सोने-चाँदी का दान दिया। ताकि शहर फिर से सुन्दर बने। हर एक ने अपनी तरफ से कुछ दिया।
समान सूत्र
परमेश्वर हर एक नाम जानते हैं। जैसे नहेम्याह ने हर परिवार का नाम लिखा, वैसे ही परमेश्वर हमारा नाम भी जानते हैं। वे हमें भूलते नहीं। कभी नहीं।
बाद में यीशु आए। उन्होंने भी हर एक व्यक्ति को अनमोल माना। छोटे बच्चे को भी। गरीब को भी। यीशु किसी को नहीं भूलते।
तुम्हारे लिए
तुम्हारा भी एक नाम है। परमेश्वर तुम्हारा नाम जानते हैं। वे तुम्हें देखते हैं। तुम जहाँ भी हो, वे तुम्हें याद रखते हैं।
जैसे नहेम्याह ने दरवाजों की रखवाली की, वैसे ही परमेश्वर तुम्हारी रखवाली करते हैं। रात में भी। दिन में भी।
बातचीत के लिए
तुम्हारा नाम क्या है? क्या तुम्हें पता है कि परमेश्वर तुम्हारा नाम जानते हैं?
नहेम्याह ने दरवाजों की रखवाली की। परमेश्वर तुम्हारी रखवाली कैसे करते हैं?
साथ में प्रार्थना
प्यारे परमेश्वर, आप मेरा नाम जानते हैं। आप मुझे कभी नहीं भूलते। धन्यवाद कि आप मेरी रखवाली करते हैं। आमीन।
नहेम्याह 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहेम्याह 7 किस विषय में है?
नहेम्याह 7 क्या कहता है?
नहेम्याह 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे नहेम्याह 7 से क्या सीख सकते हैं?
नहेम्याह 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हारीफ की सन्तान, एक सौ बारह।" बस इतना ही। न कोई कहानी, न कोई करतब। फिर भी परमेश्वर ने इन एक सौ बारह लोगों को गिना और उनका नाम अपनी किताब में लिखवा दिया। लौटने वालों की भीड़ में वे खो नहीं गए। तुम भी सोचते हो कि तुम्हारा जीवन बहुत साधारण है, किसी को दिखता नहीं। पर जो गिनती करता है, उसकी नज़र में तुम एक संख्या नहीं, एक नाम हो।
निर्वासन से लौटे कुछ याजकों के साथ ऐसा हुआ: "इन्होंने अपनी-अपनी वंशावली का पत्र और वंशावलियों में ढूँढ़ा, परन्तु न पाया, इसलिए वे अशुद्ध ठहरकर याजकपद से निकाले गए।" नाम था, पर प्रमाण खो गया था। कितनी बार तुम भी भीतर से ऐसा ही महसूस करते हो, कि तुम्हारा होना साबित नहीं हो पाता। पर ध्यान दो, उन्हें लोगों में से नहीं निकाला गया, सिर्फ सेवा रुकी, और वह भी तब तक जब तक सही याजक न आए। वह याजक आ चुका है, और तुम्हारा नाम उसकी किताब में है।
नहेमायाह 7:14 में लिखा है, "जक्कई की सन्तान सात सौ साठ।" यह सिर्फ एक नाम और एक संख्या है, पर परमेश्वर ने इसे अपनी पवित्र पुस्तक में दर्ज किया। बेबीलोन से लौटा हर परिवार गिना गया, कोई भूला नहीं गया।
तू सोचता होगा कि तेरी ज़िंदगी में कुछ खास नहीं। पर जिसने जक्कई के वंश को नाम से जाना, वह तुझे भी जानता है। तेरी वापसी, तेरा संघर्ष, तेरा नाम, सब उसकी किताब में लिखा है।
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