नीतिवचन 7
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक पिता अपने छोटे बेटे के पास बैठा था। उसने प्यार से कहा, "मेरी बातें सुन। इनको अपने मन में रख।" बाहर अंधेरा हो रहा था। धीरे धीरे। सूरज छिप गया। फिर रात का घना अंधेरा छा गया।
पिता ने खिड़की से बाहर देखा। उसने क्या देखा? एक जवान लड़का सड़क पर चल रहा था। वह सीधा उस रास्ते जा रहा था, जहाँ उसे नहीं जाना चाहिए था।
वहाँ एक स्त्री मिली। उसकी बातें बहुत मीठी थीं। बहुत चिकनी चुपड़ी। उसने कहा, "आओ, मेरे साथ चलो। मेरे घर में नरम बिछौना है। उसमें सुगंध है।" उसकी बातें मधु जैसी लगती थीं।
पर वे बातें झूठी थीं।
इसका अर्थ क्या है?
वह जवान लड़का रुका नहीं। उसने सोचा नहीं। वह बस उसके पीछे चल दिया। जैसे एक बैल चुपचाप कसाई के पास चला जाता है। जैसे एक चिड़िया फंदे की ओर उड़ जाती है, बिना जाने कि वहाँ खतरा है।
पिता का दिल दुखा। उसने कहा, "मेरे पुत्रों, मेरी सुनो। उस रास्ते की ओर मत जाना।" क्योंकि वह रास्ता सीधा दिखता है, पर वह अंधकार की ओर ले जाता है।
समान सूत्र
परमेश्वर भी अपने बच्चों से ऐसे ही प्यार से बात करते हैं। वे कहते हैं, "मेरी बातों को सुनो, इसलिए कि तुम जीवित रहो।" परमेश्वर चाहते हैं कि हम अच्छे रास्ते पर चलें, उजियाले के रास्ते पर। यीशु मसीह ने कहा कि वे ही रास्ता हैं। जब हम उनका हाथ पकड़ते हैं, तो हम अंधेरे रास्ते पर नहीं भटकते। वे हमें सही राह दिखाते हैं।
तेरे लिए
कभी कभी कोई बात बहुत मीठी लगती है, पर वह सही नहीं होती। जैसे कोई कहे, "यह खिलौना चुरा लो, कोई नहीं देखेगा।" तब क्या करना चाहिए? रुक जाना। उस रास्ते पर नहीं जाना। परमेश्वर से पूछना, "मुझे सही रास्ता दिखाइए।" वे जरूर दिखाएँगे।
इस पर बात करें
जब कोई तुमसे कोई गलत बात करने को कहे, तब तुम क्या करोगे?
परमेश्वर हमें सही रास्ता दिखाने के लिए किसे भेजते हैं?
संग मिलकर प्रार्थना
हे परमेश्वर, आप भले हैं। मुझे सही रास्ता दिखाइए। जब अंधेरा हो, तब मेरा हाथ पकड़े रहिए। यीशु के नाम से, आमीन।
नीतिवचन 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नीतिवचन 7 किस विषय में है?
नीतिवचन 7 क्या कहता है?
नीतिवचन 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे नीतिवचन 7 से क्या सीख सकते हैं?
नीतिवचन 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
कि वे तुझको पराई स्त्री से, अर्थात् चिकनी चुपड़ी बातें बोलनेवाली अनजान स्त्री से बचाएँ।"
ध्यान दे, पिता बेटे से यह नहीं कहता कि अपने मन को कसकर बाँध ले। वह कहता है, बुद्धि को अपनी बहन कह। यानी बचाव किसी नियम से नहीं, बल्कि एक रिश्ते से आता है। जिस आवाज़ को तू रोज़ सुनता है, वही संकट की घड़ी में तुझे पुकारेगी। आज तेरे दिल में कौन सी आवाज़ सबसे जानी पहचानी है?
साँझ के समय जब दिन ढलने लगा, और रात के घोर अंधकार में।" ध्यान दे, वह लड़का दोपहर में नहीं निकला। उसने वह घड़ी चुनी जब कोई पहचान न सके। पाप को अंधेरा प्यारा है, क्योंकि अंधेरे में हम खुद से भी झूठ बोल पाते हैं। पर उस रात एक पिता खिड़की से देख रहा था। कोई तुझे भी देख रहा है, और वह प्रेम से देख रहा है। तेरी कौन सी घड़ी है जिसे तू छिपाकर रखता है?
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