3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 यूहन्ना 4

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

परमेश्वर प्रेम है

The Explanation

एक छोटा बच्चा अपनी माँ की गोद में बैठा है। बाहर अंधेरा हो गया है। माँ धीरे से कहती है, "सुनो, मैं तुम्हें एक बात बताती हूँ।"

यूहन्ना नाम के एक बूढ़े दादा जी थे। वे यीशु को बहुत प्यार करते थे। उन्होंने एक चिट्ठी लिखी। उस चिट्ठी में उन्होंने लिखा, "परमेश्वर प्रेम है।"

सोचो, परमेश्वर प्रेम है! जैसे आग गरम होती है, वैसे ही परमेश्वर प्रेम है। यह उनका स्वभाव है।

यूहन्ना ने लिखा कि परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। दुनिया में भेजा। क्यों भेजा? ताकि हम जी सकें। ताकि हम जीवन पाएँ।

What Does This Mean?

यह बहुत बड़ी बात है, पर इसे छोटा करके समझते हैं। परमेश्वर ने पहले हमसे प्रेम किया। पहले हमने कुछ नहीं किया। हमने परमेश्वर से प्रेम नहीं माँगा। परमेश्वर ने खुद ही प्रेम किया।

यूहन्ना ने लिखा, "हम इसलिए प्रेम करते हैं, क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया।"

जैसे कोई तुम्हें गले लगाए, इससे पहले कि तुम कुछ भी कहो। ऐसा ही परमेश्वर ने किया।

The Common Thread

परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु सचमुच आए। शरीर के साथ, हाथ और पैर के साथ, जैसे तुम्हारे हैं। यीशु आए ताकि हमारे पापों की माफी हो सके।

यह प्रेम की सबसे बड़ी कहानी है। परमेश्वर ने अपना बेटा भेजा, क्योंकि वे हमसे प्यार करते हैं।

कभी किसी ने परमेश्वर को देखा नहीं। पर जब हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, तब परमेश्वर हमारे साथ रहते हैं। यह कैसा अजूबा है!

For You

तुम्हारे पास भी कोई है जिससे तुम प्यार करते हो। शायद तुम्हारी माँ, तुम्हारा भाई, तुम्हारा दोस्त।

यूहन्ना ने लिखा, "हम आपस में प्रेम रखें।"

आज तुम किसे गले लगा सकते हो? आज तुम किसके साथ अपना खिलौना बाँट सकते हो?

प्रेम में डर नहीं होता। जब परमेश्वर तुमसे प्रेम करते हैं, तब तुम्हें डरने की जरूरत नहीं। तुम सुरक्षित हो, जैसे माँ की गोद में।

Talk About It

परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को दुनिया में क्यों भेजा?

आज तुम किसे प्यार से गले लगा सकते हो?

Praying Together

प्यारे परमेश्वर, आप प्रेम हैं। आपने पहले हमसे प्यार किया। आपने यीशु को भेजा। हमें भी प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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1 यूहन्ना 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 यूहन्ना 4 किस विषय में है?
एक छोटा बच्चा अपनी माँ की गोद में बैठा है। बाहर अंधेरा हो गया है। माँ धीरे से कहती है, "सुनो, मैं तुम्हें एक बात बताती हूँ।"
1 यूहन्ना 4 क्या कहता है?
यूहन्ना ने लिखा कि परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। दुनिया में भेजा। क्यों भेजा? ताकि हम जी सकें। ताकि हम जीवन पाएँ।
1 यूहन्ना 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
जैसे कोई तुम्हें गले लगाए, इससे पहले कि तुम कुछ भी कहो। ऐसा ही परमेश्वर ने किया।
नन्हे बच्चे 1 यूहन्ना 4 से क्या सीख सकते हैं?
कभी किसी ने परमेश्वर को देखा नहीं। पर जब हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, तब परमेश्वर हमारे साथ रहते हैं। यह कैसा अजूबा है!
1 यूहन्ना 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रेम में डर नहीं होता। जब परमेश्वर तुमसे प्रेम करते हैं, तब तुम्हें डरने की जरूरत नहीं। तुम सुरक्षित हो, जैसे माँ की गोद में।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

हे बालकों, तुम परमेश्वर के हो और तुमने उन पर जय पाई है, क्योंकि जो तुममें है, वह उससे जो संसार में है, बड़ा है।"

ध्यान दे, यूहन्ना कहता है "जय पाई है", भविष्य में नहीं, बीत चुके काम की तरह। और यह बात उसने उन्हें बालक कहकर कही, मजबूत योद्धा कहकर नहीं। तेरी जीत तेरी ताकत पर नहीं, तुझमें बसे हुए उस एक पर टिकी है। आज डर किस बात का है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन साहस हो।" सोचो, न्याय के दिन की बात हो रही है, और यूहन्ना डर की नहीं, साहस की बात करता है। जिस परमेश्वर से तुम छिपना चाहते हो, उसी का प्रेम तुम्हें उसके सामने सिर उठाकर खड़ा करता है। और वह प्रेम कहाँ सिद्ध होता है? वहीं, जहाँ तुम आज किसी मुश्किल इंसान से प्रेम करना चुनते हो। "जैसा वह है वैसे ही संसार में हम भी हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

जो कोई यह मान लेता है कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है, परमेश्वर उसमें बना रहता है, और वह परमेश्वर में।" ध्यान दे, यह रिश्ता दोनों तरफ़ से खुलता है। सिर्फ़ तू उसमें नहीं बसता, वह भी तुझमें बसता है। जिन लोगों को यूहन्ना लिख रहा था, उनके लिए यह अंगीकार करना महँगा पड़ता था। आज तू किन जगहों पर चुप रह जाता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

प्रेम में भय नहीं होता, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय का सम्बन्ध दण्ड से होता है।" गौर कीजिए, यूहन्ना कहता है कि डर हमेशा सज़ा की आशा रखता है। अगर आप आज भी परमेश्वर के सामने आते हुए सिकुड़ जाते हैं, मानो कोई वार होने वाला है, तो सवाल यह नहीं कि उसका प्रेम कम है। सवाल यह है कि आपने उसे अपने भीतर कितनी गहराई तक उतरने दिया है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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