3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

भजन संहिता 141

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

शाम हो गई थी। सूरज धीरे धीरे डूब रहा था। आसमान नारंगी और गुलाबी हो गया था। हवा ठंडी थी, और चारों ओर शांति थी। दाऊद अकेला बैठा था। उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए। बिलकुल वैसे जैसे कोई धुआँ धीरे धीरे ऊपर उठता है। दाऊद ने कहा, "हे यहोवा, मैंने आपको पुकारा है। जल्दी आइए! जब मैं पुकारूँ, तब मेरी बात सुनिए।" उसकी प्रार्थना धीरे धीरे ऊपर गई। जैसे सुगंधित धूप की खुशबू ऊपर जाती है।

फिर दाऊद ने अपना मुँह छुआ। उसने कहा, "हे यहोवा, मेरे मुँह पर पहरा बैठाइए। मेरे होठों के द्वार की रखवाली कीजिए।" जैसे कोई दरवाज़े पर पहरेदार खड़ा रहता है, वैसे ही दाऊद चाहता था कि उसका मुँह बुरी बातें न बोले।

इसका क्या मतलब है?

दाऊद जानता था, कुछ लोग बुरा काम करते थे। उनका खाना देखने में बहुत स्वादिष्ट लगता था। पर दाऊद ने कहा, "मैं उनके साथ नहीं बैठूँगा। मैं उनका खाना नहीं खाऊँगा।" दाऊद परमेश्वर के पास ही रहना चाहता था। और अगर कोई भला आदमी उसे समझाता, डाँटता भी, तो दाऊद कहता, "ठीक है। यह तो जैसे सिर पर तेल डालने जैसा अच्छा लगता है।" वह मना नहीं करता था।

एक ही धागा

दाऊद ने अपनी आँखें परमेश्वर की ओर ही लगाई रखीं। उसने कहा, "हे यहोवा प्रभु, मेरी आँखें आपकी ओर ही लगी हैं। मैं आपके पास शरण लेता हूँ।" बुरे लोगों ने उसके लिए फंदा बनाया था, बिलकुल जैसे शिकारी किसी पंछी के लिए जाल बिछाता है। पर दाऊद को डर नहीं लगा, क्योंकि परमेश्वर उसकी रक्षा करने वाले थे। बहुत बाद में, यीशु मसीह भी ऐसे ही परमेश्वर की ओर देखते रहे। उन्होंने भी शाम को प्रार्थना की। उन्होंने भी अपने पिता पर भरोसा रखा, ठीक तब जब बुरे लोग उनके लिए जाल बिछाते थे।

तुम्हारे लिए

जब तुम शाम को सोने जाते हो, तुम भी अपने दोनों हाथ ऊपर उठा सकते हो। धीरे से कह सकते हो, "परमेश्वर, मेरी बात सुनिए।" तुम अपने मुँह पर हाथ रख सकते हो और कह सकते हो, "परमेश्वर, मुझे अच्छी बातें बोलने में मदद कीजिए।" परमेश्वर तुम्हारी ओर भी कान लगाते हैं। बिलकुल वैसे ही जैसे उन्होंने दाऊद की सुनी।

बात करो

तुम शाम को परमेश्वर से क्या कहना चाहोगे? तुम्हारा मुँह अच्छी बातें बोले, इसके लिए तुम परमेश्वर से क्या माँगोगे?

साथ में प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, शाम हो गई है। मैं आपको पुकारता हूँ। मेरी बात सुनिए। मेरे मुँह की रखवाली कीजिए। मुझे बुरी बातों से बचाइए। मेरी आँखें आपकी ओर ही लगी रहें। आमीन।

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भजन संहिता 141 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

भजन संहिता 141 किस विषय में है?
शाम हो गई थी। सूरज धीरे धीरे डूब रहा था। आसमान नारंगी और गुलाबी हो गया था। हवा ठंडी थी, और चारों ओर शांति थी। दाऊद अकेला बैठा था। उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए। बिलकुल वैसे जैसे कोई धुआँ धीरे धीरे ऊपर उठता है। दाऊद ने कहा, "हे यहोवा, मैंने आपको पुकारा है। जल्दी आइए! जब मैं पुकारूँ, तब मेरी बात सुनिए।" उसकी प्रार्थना धीरे धीरे ऊपर गई। जैसे सुगंधित धूप की खुशबू ऊपर जाती है।
भजन संहिता 141 क्या कहता है?
फिर दाऊद ने अपना मुँह छुआ। उसने कहा, "हे यहोवा, मेरे मुँह पर पहरा बैठाइए। मेरे होठों के द्वार की रखवाली कीजिए।" जैसे कोई दरवाज़े पर पहरेदार खड़ा रहता है, वैसे ही दाऊद चाहता था कि उसका मुँह बुरी बातें न बोले।
भजन संहिता 141 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दाऊद जानता था, कुछ लोग बुरा काम करते थे। उनका खाना देखने में बहुत स्वादिष्ट लगता था। पर दाऊद ने कहा, "मैं उनके साथ नहीं बैठूँगा। मैं उनका खाना नहीं खाऊँगा।" दाऊद परमेश्वर के पास ही रहना चाहता था। और अगर कोई भला आदमी उसे समझाता, डाँटता भी, तो दाऊद कहता, "ठीक है। यह तो जैसे सिर पर तेल डालने जैसा अच्छा लगता है।" वह मना नहीं करता था।
नन्हे बच्चे भजन संहिता 141 से क्या सीख सकते हैं?
दाऊद ने अपनी आँखें परमेश्वर की ओर ही लगाई रखीं। उसने कहा, "हे यहोवा प्रभु, मेरी आँखें आपकी ओर ही लगी हैं। मैं आपके पास शरण लेता हूँ।" बुरे लोगों ने उसके लिए फंदा बनाया था, बिलकुल जैसे शिकारी किसी पंछी के लिए जाल बिछाता है। पर दाऊद को डर नहीं लगा, क्योंकि परमेश्वर उसकी रक्षा करने वाले थे। बहुत बाद में, यीशु मसीह भी ऐसे ही परमेश्वर की ओर देखते रहे। उन्होंने भी शाम को प्रार्थना की। उन्होंने भी अपने पिता पर भरोसा रखा, ठीक तब जब बुरे लोग उनके लिए जाल बिछाते थे।
भजन संहिता 141 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम शाम को सोने जाते हो, तुम भी अपने दोनों हाथ ऊपर उठा सकते हो। धीरे से कह सकते हो, "परमेश्वर, मेरी बात सुनिए।" तुम अपने मुँह पर हाथ रख सकते हो और कह सकते हो, "परमेश्वर, मुझे अच्छी बातें बोलने में मदद कीजिए।" परमेश्वर तुम्हारी ओर भी कान लगाते हैं। बिलकुल वैसे ही जैसे उन्होंने दाऊद की सुनी।

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