सपन्याह 1
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
बहुत पुरानी बात है। यहूदा देश में एक राजा था। उसका नाम योशिय्याह था। उस देश में सपन्याह नाम का एक आदमी रहता था। एक शांत दिन, परमेश्वर ने सपन्याह से बात की। परमेश्वर की आवाज़ शांत थी, पर बहुत गंभीर थी। परमेश्वर ने कहा, "मैं देख रहा हूँ।" रात में लोग अपनी छतों पर चढ़ जाते थे। वे आकाश के तारों को देखते थे। वे तारों के आगे झुक जाते थे, जैसे तारे ही उनके परमेश्वर हों। कुछ लोग परमेश्वर की शपथ खाते, पर साथ ही दूसरे देवता की भी शपथ खाते। परमेश्वर की खोज करने वाला कोई नहीं था। परमेश्वर ने यह सब देखा। उनकी आँखें कभी बंद नहीं होती। कुछ भी उनसे छिपा नहीं रहता, न घर के भीतर, न छत के ऊपर।
What Does This Mean?
परमेश्वर बहुत दुखी हुए। लोगों ने उन्हें ढूँढ़ा ही नहीं। परमेश्वर ने कहा, एक दिन आएगा। उस दिन सब कुछ दिखेगा, जो छिपा हुआ था। बाज़ार में रोने की आवाज़ होगी। पहाड़ों पर धमाके सुनाई देंगे। जो लोग सोचते थे, चाँदी और सोना उन्हें बचा लेगा, वे गलत थे। कोई सोना उस दिन काम नहीं करेगा। परमेश्वर ने कहा, "उस दिन सब घबरा जाएँगे।" यह सुनकर डर लगता है, है ना। पर परमेश्वर ने एक और बात भी कही। सुनो ध्यान से। परमेश्वर ने कहा, "मेरे सामने शान्त रहो।" जैसे कोई बच्चा माँ की गोद में शांत होकर बैठ जाता है, वैसे ही परमेश्वर चाहते हैं कि लोग उनके पास शांत होकर आएँ।
The Common Thread
परमेश्वर हमेशा चाहते हैं कि लोग उन्हें ढूँढ़ें। वे छिपे नहीं रहते। वे बोलते हैं, वे बुलाते हैं। बहुत बाद में परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु ने कहा, मेरे पास आओ। यीशु दूर नहीं भागे। वे पास आए, ताकि हर बच्चा उन्हें ढूँढ़ सके, और पा सके। यीशु के पास आने से डर नहीं लगता। वहाँ प्यार मिलता है, और शांति भी मिलती है।
For You
जब तुम रात में डरते हो, तो कौन तुम्हें पकड़ लेता है? माँ या पापा, ना। परमेश्वर भी वैसे ही पास आते हैं। तुम भी उन्हें ढूँढ़ सकते हो। बस उनसे बात करो। वे सुनते हैं। तुम शांत होकर बैठ सकते हो, और परमेश्वर से कह सकते हो, "मैं यहाँ हूँ।" वे तुमसे मुँह नहीं फेरेंगे।
Talk About It
परमेश्वर ने सपन्याह से क्या कहा? तुम परमेश्वर के पास कैसे आ सकते हो?
Praying Together
प्रभु यीशु, आप हमें देखते हैं। हम आपको ढूँढ़ना चाहते हैं। हमें शांत होकर आपके पास बैठना सिखाइए। हमें अपने पास रखिए। आमीन।
सपन्याह 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
सपन्याह 1 किस विषय में है?
सपन्याह 1 क्या कहता है?
सपन्याह 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे सपन्याह 1 से क्या सीख सकते हैं?
सपन्याह 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
वे अंधों के समान चलेंगे, क्योंकि उन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।" सबसे डरावनी बात यह नहीं कि सज़ा आई, बल्कि यह कि लोग टटोलते हुए चलने लगे। पाप आँखें नहीं निकालता, वह धीरे धीरे दिशा छीन लेता है। जिन्होंने कहा था कि यहोवा न भला करेगा न बुरा, वे अब रास्ता ही नहीं पहचान पा रहे। आज अपने आप से पूछिए, क्या मुझे अब भी साफ़ दिखता है कि परमेश्वर मुझे किधर बुला रहा है?
जो दण्डवत् करते हुए यहोवा की शपथ खाते हैं और मिल्कोम की भी शपथ खाते हैं।" ये लोग मंदिर छोड़कर नहीं गए थे। उनके होंठों पर परमेश्वर का नाम था, बस साथ में एक और नाम भी जुड़ गया था। यही हमारा तरीका भी है। प्रार्थना भी करते हैं, और चुपके से पैसे, पहचान या किसी इंसान पर भरोसा भी टिकाए रखते हैं। परमेश्वर आधा दिल नहीं माँगता। तेरी छत पर आज क्या रखा है?
उस दिन मैं उन सभों को जो डेवढ़ी को लाँघते हैं, और अपने स्वामी के घर को उपद्रव और छल से भर देते हैं, दण्ड दूँगा।" गौर कर, दोष सिर्फ लाँघने वालों पर नहीं, उस घर पर भी जो ऐसी कमाई से भरता रहा। तेरे घर में जो आता है, वह किस रास्ते से आया? कभी हम चुप रहकर भी उस छल के हिस्सेदार बन जाते हैं।
जितने परदेशी वस्त्र पहने हुए हैं" उनको भी दण्ड मिलेगा, परमेश्वर कहते हैं। बात कपड़ों की नहीं थी, बल्कि इस निशानी की कि दिल किस ओर झुक चुका है। यहूदा के हाकिमों ने पहले बाहर से आस-पास की जातियों जैसा दिखना चाहा, फिर भीतर से भी वैसे ही हो गए। और न्याय सबसे पहले उन्हीं से शुरू हुआ जो आगे चलते थे। तुमने आजकल क्या पहन रखा है?
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