13 वर्ष और उससे बड़े किशोर के लिए

प्रेरितों के काम 26

किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पौलुस बंदी है। राजा अग्रिप्पा और राज्यपाल फेस्तुस के सामने खड़ा होकर वह अपनी सफ़ाई दे रहा है, मगर यह सफ़ाई कोई घबराया हुआ भाषण नहीं है। वह शांति से, सम्मान से, पर बिना डरे अपनी पूरी कहानी बताता है। वह बताता है कि वह एक कट्टर फरीसी था, अपने धर्म का सबसे खरा अनुयायी। वह छुपाता नहीं कि उसने यीशु के नाम को मिटाने के लिए क्या-क्या किया, विश्वासियों को बंदीगृह में डाला, उनकी मृत्युदंड में सहमति दी, और आराधनालयों में उन्हें सताता रहा, यहाँ तक कि दूसरे नगरों में भी जाकर उन्हें ढूँढता रहा।

फिर वह दमिश्क के रास्ते की घटना बताता है। दोपहर के समय, सूरज से भी तेज़ रोशनी, ज़मीन पर गिर पड़ना, और एक आवाज़ जो इब्रानी में कहती है, "हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?" पौलुस पूछता है, "तू कौन है?" और जवाब आता है, "मैं यीशु हूँ।" उसी क्षण से पौलुस की पूरी दिशा बदल जाती है। उसे भेजा जाता है ताकि लोगों की आँखें अंधकार से ज्योति की ओर खुलें, ताकि वे शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरें।

इसके बाद पौलुस अपनी सेवा का सार बताता है, मरे हुओं में से मसीह का जी उठना, और यह कि यही सन्देश उसने हर जगह सुनाया है। ठीक इस जगह फेस्तुस उसे बीच में रोकता है, "तू पागल है।" पौलुस शांति से उत्तर देता है, "मैं पागल नहीं, सच्चाई की बात कहता हूँ," और सीधे अग्रिप्पा की ओर मुड़ता है, "क्या तू भविष्यद्वक्ताओं का विश्वास करता है?" अग्रिप्पा टाल देता है, और अंत में सब उठकर मान लेते हैं कि पौलुस ने कुछ भी ऐसा नहीं किया जो मृत्युदंड के योग्य हो। फिर भी वह छूटता नहीं, क्योंकि उसने कैसर की दुहाई दे दी है।

What Does This Mean?

यह अध्याय एक आदमी की तस्वीर है जो सच के लिए खड़ा है, चाहे उसका सामना ठट्ठा हो या राजा की चुप्पी। पौलुस अपनी शर्मनाक कहानी छुपाता नहीं। वह यह नहीं कहता कि वह हमेशा से अच्छा इंसान था। वह मानता है कि वह अंधा था, कि उसने सताया, कि उसने पवित्र लोगों की मृत्यु में सहमति दी। और फिर भी वही आदमी अब राजा के सामने खड़ा होकर मसीह की गवाही दे रहा है।

गवाही में ज़ोर इस बात पर नहीं है कि पौलुस कितना बुद्धिमान है, बल्कि इस बात पर है कि उसने क्या देखा और सुना। फेस्तुस उसे पागल कहता है, क्योंकि पुनरुत्थान की बात तर्क से परे लगती है। पौलुस इसका खंडन नहीं करता कि यह बात असाधारण है, वह सिर्फ कहता है कि यह सच है, और यह "कोने में नहीं हुई," यानी छुपकर नहीं हुई, बल्कि खुले में।

The Common Thread

पौलुस की गवाही का केंद्र वही है जो पूरे बाइबल की कथा का केंद्र है, परमेश्वर की वह प्रतिज्ञा जो उन्होंने पूर्वजों से की थी, कि मरे हुए जी उठेंगे, कि मसीह दुःख उठाएगा और मरे हुओं में से पहला जी उठनेवाला होगा, और वह ज्योति सब जातियों तक पहुँचाएगा। यह प्रतिज्ञा यशायाह और मूसा में सदियों पहले बोली गई थी, अब वह मसीह में पूरी हो चुकी है, और पौलुस उसका जीता-जागता गवाह है।

अंधकार से ज्योति की ओर फिरना, शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरना, यह वही बड़ी कहानी है जो उत्पत्ति में शुरू हुई, जहाँ मनुष्य अंधकार में भटक गया, और जो मसीह के पुनरुत्थान में अपनी पूर्णता पाती है। पौलुस का जीवन बदलना कोई अकेली घटना नहीं है, यह उस बड़ी योजना का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर हर बंधे हुए मनुष्य को आज़ाद करना चाहते हैं, चाहे वह ज़ंजीरों में हो या अपने ही अतीत में फँसा हो।

For You

तुम्हारी कहानी में भी शायद ऐसे हिस्से हैं जिन्हें तुम छुपाना चाहते हो, गलतियाँ, वो बातें जो तुमने किसी के साथ कीं, वो सोच जिसमें तुम कभी पूरी तरह डूबे हुए थे। पौलुस दिखाता है कि परमेश्वर तुम्हारी उस कहानी को नहीं छुपाता, वह उसे तुम्हारी गवाही बना देता है। तुम्हें अपने अतीत से शर्मिंदा होने की जगह उसे ईमानदारी से बताना सीखना है, बिना खुद को बड़ा दिखाए और बिना छुपाए।

अग्रिप्पा का जवाब भी ध्यान देने लायक है। वह लगभग मान जाता है, पर पूरी तरह नहीं झुकता। बहुत से लोग तुम्हारे आसपास ऐसे ही होंगे, सुनते हैं, प्रभावित होते हैं, फिर टाल देते हैं। यह तुम्हारे विश्वास को कमज़ोर मत करने दो। कोई तुम्हें पागल भी कह सकता है, जैसे फेस्तुस ने पौलुस को कहा। सच्चाई हमेशा लोकप्रिय नहीं होती, पर उसे ज़ोर से बोलने से डर मत।

Talk About It

पौलुस अपनी सबसे शर्मनाक बातें भी खुलेआम कहता है। तुम अपनी ज़िंदगी की कौन सी बात सबसे ज़्यादा छुपाना चाहते हो, और क्यों लगता है कि परमेश्वर उसे भी इस्तेमाल कर सकते हैं?

अग्रिप्पा सच सुनता है पर फैसला नहीं लेता। तुम्हारी ज़िंदगी में ऐसा कब हुआ है कि तुम सच के करीब आए पर पूरी तरह नहीं झुके?

Praying Together

प्रभु, हमारे पास भी ऐसी बातें हैं जिन्हें हम छुपाना चाहते हैं। हमें यह हिम्मत दें कि हम अपनी पूरी कहानी में आपके काम को देख सकें। जब कोई हमें हमारे विश्वास के लिए ठट्ठा करे, तो हमें पौलुस जैसी शांति और साहस दें। हमें सच बोलने की और सच पर पूरी तरह भरोसा करने की शक्ति दें, आधे मन से नहीं। आमीन।

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प्रेरितों के काम 26 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रेरितों के काम 26 किस विषय में है?
पौलुस बंदी है। राजा अग्रिप्पा और राज्यपाल फेस्तुस के सामने खड़ा होकर वह अपनी सफ़ाई दे रहा है, मगर यह सफ़ाई कोई घबराया हुआ भाषण नहीं है। वह शांति से, सम्मान से, पर बिना डरे अपनी पूरी कहानी बताता है। वह बताता है कि वह एक कट्टर फरीसी था, अपने धर्म का सबसे खरा अनुयायी। वह छुपाता नहीं कि उसने यीशु के नाम को मिटाने के लिए क्या-क्या किया, विश्वासियों को बंदीगृह में डाला, उनकी मृत्युदंड में सहमति दी, और आराधनालयों में उन्हें सताता रहा, यहाँ तक कि दूसरे नगरों में भी जाकर उन्हें ढूँढता रहा।
प्रेरितों के काम 26 क्या कहता है?
इसके बाद पौलुस अपनी सेवा का सार बताता है, मरे हुओं में से मसीह का जी उठना, और यह कि यही सन्देश उसने हर जगह सुनाया है। ठीक इस जगह फेस्तुस उसे बीच में रोकता है, "तू पागल है।" पौलुस शांति से उत्तर देता है, "मैं पागल नहीं, सच्चाई की बात कहता हूँ," और सीधे अग्रिप्पा की ओर मुड़ता है, "क्या तू भविष्यद्वक्ताओं का विश्वास करता है?
प्रेरितों के काम 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
गवाही में ज़ोर इस बात पर नहीं है कि पौलुस कितना बुद्धिमान है, बल्कि इस बात पर है कि उसने क्या देखा और सुना। फेस्तुस उसे पागल कहता है, क्योंकि पुनरुत्थान की बात तर्क से परे लगती है। पौलुस इसका खंडन नहीं करता कि यह बात असाधारण है, वह सिर्फ कहता है कि यह सच है, और यह "कोने में नहीं हुई," यानी छुपकर नहीं हुई, बल्कि खुले में।
किशोर प्रेरितों के काम 26 से क्या सीख सकते हैं?
अंधकार से ज्योति की ओर फिरना, शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरना, यह वही बड़ी कहानी है जो उत्पत्ति में शुरू हुई, जहाँ मनुष्य अंधकार में भटक गया, और जो मसीह के पुनरुत्थान में अपनी पूर्णता पाती है। पौलुस का जीवन बदलना कोई अकेली घटना नहीं है, यह उस बड़ी योजना का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर हर बंधे हुए मनुष्य को आज़ाद करना चाहते हैं, चाहे वह ज़ंजीरों में हो या अपने ही अतीत में फँसा हो।
प्रेरितों के काम 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अग्रिप्पा का जवाब भी ध्यान देने लायक है। वह लगभग मान जाता है, पर पूरी तरह नहीं झुकता। बहुत से लोग तुम्हारे आसपास ऐसे ही होंगे, सुनते हैं, प्रभावित होते हैं, फिर टाल देते हैं। यह तुम्हारे विश्वास को कमज़ोर मत करने दो। कोई तुम्हें पागल भी कह सकता है, जैसे फेस्तुस ने पौलुस को कहा। सच्चाई हमेशा लोकप्रिय नहीं होती, पर उसे ज़ोर से बोलने से डर मत।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

राजा के सामने खड़ा पौलुस अपनी जान की भीख नहीं माँगता, वह उल्टा सवाल पूछता है: "तुम लोगों के मन में यह बात क्यों विश्वास के योग्य नहीं समझी जाती कि परमेश्वर मरे हुओं को जिलाता है?" ज़ंजीरों में बँधा कैदी, और सवाल तख्त पर बैठे आदमी से। तू भी ठहरकर सोच, तेरे जीवन का कौन सा हिस्सा तूने मरा हुआ मानकर छोड़ दिया है? परमेश्वर वहीं से शुरू करना जानता है।

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