12 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोर के लिए

श्रेष्ठगीत 1:2

किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समय में पीछे

कल्पना कीजिए: यरूशलेम, तीन हज़ार साल पहले। दोपहर ढल रही है। शहर की दीवारों के बाहर अंगूर की बारियाँ हैं, पत्तों पर धूल जमी है, और हवा में एक साथ तीन गंध तैर रही हैं: पकते अंगूरों की मीठी खटास, बकरियों के तम्बुओं का कसैला चमड़ा, और कहीं से आती इत्र की एक लहर। बाज़ार के किसी कोने में कोई व्यापारी अपनी शीशी खोलता है और गली भर महक जाती है। यही वह दुनिया है जिसमें यह गीत गाया गया।

और अब उस दुनिया में एक लड़की को देखिए। बहुत अमीर नहीं। उसकी त्वचा धूप से झुलसी है, क्योंकि उसे अंगूर की बारी की रखवाली करनी पड़ी। उसके हाथ काम करने वाले हाथ हैं। शहर की सजी-धजी लड़कियाँ, "यरूशलेम की पुत्रियाँ", उसे घूरती हैं और वह जानती है कि वे उसे घूर रही हैं। उसके पास कोई दहेज नहीं, कोई ऊँचा नाम नहीं।

लेकिन उसके पास एक चीज़ है जो उसे भीतर से रोशन कर रही है। कोई है, जिसका नाम सुनते ही उसकी आवाज़ बदल जाती है। और यह गीत, बाइबल की सबसे अजीब और सबसे साहसी पुस्तकों में से एक, उसी के मुँह से शुरू होता है।

ध्यान दीजिए: बाइबल की इस पुस्तक का पहला शब्द किसी राजा का नहीं, किसी भविष्यद्वक्ता का नहीं, किसी याजक का नहीं। एक जवान स्त्री का है। और वह जो कहती है, वह इतना सीधा है कि सदियों तक लोगों ने बहस की है कि यह पुस्तक बाइबल में होनी भी चाहिए या नहीं।

कहानी

वह किसी से बात कर रही है, लेकिन जिससे बात कर रही है वह अभी वहाँ नहीं है। ऐसा होता है, आपने भी किया होगा: मन में किसी से बात करना, जो सामने नहीं है।

और वह कहती है: "तू अपने मुँह के चुम्बनों से मुझे चूमे! क्योंकि तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है।"

बस इतना। कोई भूमिका नहीं, कोई शरमाना नहीं, कोई धार्मिक कवच नहीं जिसके पीछे वह छिप जाए। वह चाहती है कि उसका प्रेमी उसके पास आए। वह उसका स्पर्श चाहती है। और वह इसे शब्दों में कहने से नहीं डरती।

फिर वह समझाती है कि क्यों। इत्र की तरह। जब कोई महँगे इत्र की शीशी उँडेल देता है, तो पूरा कमरा बदल जाता है, आप उसे रोक नहीं सकते, वह हवा में फैल जाता है। "तेरा नाम उण्डेले हुए इत्र के तुल्य है।" उसका नाम भी ऐसा ही है। नाम सुनना ही काफ़ी है और भीतर कुछ खुल जाता है।

और वह अकेली नहीं जो यह महसूस करती है। "इसलिए कुमारियाँ तुझ से प्रेम रखती हैं।" दूसरी लड़कियाँ भी उसे देखती हैं। यह उसे परेशान नहीं करता; वह जानती है कि जिसे वह चाहती है, वह चाहने के लायक है।

आगे वह कहती है, "मुझे खींच ले; हम तेरे पीछे दौड़ेंगे।" यह किसी शांत, संतुलित भावना का वर्णन नहीं है। यह दौड़ना है। यह खिंच जाना है।

और बीच में, अचानक, ईमानदारी का एक कठोर वाक्य: "मैं काली तो हूँ परन्तु सुन्दर हूँ।" मुझे घूरो मत। मैं धूप से झुलस गई हूँ। मेरे भाइयों ने मुझसे काम कराया और मैं अपनी ही बारी की रखवाली नहीं कर पाई। इस लड़की के पास खुद के बारे में शिकायतें हैं, घाव हैं, ऐसी बातें हैं जो वह छिपाना चाहती। और उसी सब के बीच वह कहती है: मैं सुन्दर हूँ, और मुझे चाहा गया है।

गहराई में

पहले पद में लिखा है "श्रेष्ठगीत"। इब्रानी में यह शब्द है "शीर हा-शीरीम", यानी "गीतों का गीत"। इब्रानी भाषा में सर्वोच्चता कहने का यही तरीका है: "राजाओं का राजा" यानी सबसे बड़ा राजा, "पवित्र स्थानों का पवित्र स्थान" यानी सबसे पवित्र जगह। तो इस पुस्तक का नाम ही घोषणा है: सब गीतों में सबसे ऊँचा गीत। और वह सबसे ऊँचा गीत किस बारे में है? परमेश्वर के नियम के बारे में नहीं, लड़ाइयों के बारे में नहीं। प्रेम के बारे में। शरीर वाले, चाहत वाले, इंसानी प्रेम के बारे में।

यह हमें असहज करता है, और अच्छा है कि करता है। क्योंकि हमने कहीं यह सीख लिया है कि आत्मा पवित्र है और शरीर संदिग्ध है, कि भक्ति ऊँची चीज़ है और चाहत नीची। बाइबल यह नहीं सिखाती। बाइबल के पहले पन्नों पर परमेश्वर एक शरीर बनाते हैं और कहते हैं कि वह अच्छा है। और यहाँ, पवित्रशास्त्र के बीचोंबीच, एक पूरी पुस्तक है जिसमें दो लोग एक-दूसरे की देह की सुन्दरता का बखान करते हैं और परमेश्वर उस गीत को अपनी किताब में रहने देते हैं। यह अपने आप में एक सन्देश है।

अब उस तुलना पर ध्यान दीजिए: "तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है।" उस संस्कृति में दाखमधु उत्सव का प्रतीक था। ब्याह में, दावत में, खुशी के दिनों में दाखमधु पिया जाता था। वह भारीपन को हल्का करता, हँसी खोलता, संकोच घोलता। लड़की कह रही है: तेरा प्रेम उससे भी बढ़कर है। जो नशा दाखमधु देता है, तू उससे ज़्यादा देता है, और तेरा दिया हुआ नशा सुबह पछतावा नहीं छोड़ता।

लेकिन यहाँ एक बात है जो आसानी से छूट जाती है। वह यह नहीं कहती, "तेरा चुम्बन दाखमधु से उत्तम है।" वह कहती है, "तेरा प्रेम।" वह शारीरिक स्पर्श चाहती है, हाँ, खुलकर चाहती है, लेकिन वह उसे किसी व्यक्ति से अलग नहीं करती। चुम्बन एक प्रेम का चिन्ह है, वह प्रेम स्वयं नहीं। आज की दुनिया इस अन्तर को लगातार मिटाती है: स्पर्श उपलब्ध है, शरीर उपलब्ध है, स्क्रीन पर सब कुछ उपलब्ध है, और व्यक्ति कहीं नहीं है। यह गीत उलटा चलता है। पूरे गीत में वह उसका नाम लेती है, उसकी आवाज़ ढूँढ़ती है, पूछती है कि तू दोपहर को अपनी भेड़-बकरियों को कहाँ बैठाता है। वह उसे जानना चाहती है, फिर छूना चाहती है। चाहत यहाँ किसी चीज़ की भूख नहीं, किसी व्यक्ति की प्यास है।

और एक बात और। कलीसिया ने सदियों तक इस गीत को परमेश्वर और उनके लोगों के प्रेम की तस्वीर के रूप में भी पढ़ा है। यह गलत नहीं है, बशर्ते हम पहले पाठ को मिटा न दें। भविष्यद्वक्ताओं ने खुद यह भाषा इस्तेमाल की: इस्राएल परमेश्वर की दुल्हन है, और नए नियम में मसीह की कलीसिया उनकी दुल्हन कहलाती है। इसका अर्थ यह है कि जब आप इस लड़की की तड़प सुनते हैं, तो आप एक धुँधले आईने में यह भी देख रहे हैं कि परमेश्वर के साथ रिश्ता कैसा हो सकता है। न ठंडा कर्तव्य, न डर से निभाया गया नियम, बल्कि खिंचाव। "मुझे खींच ले; हम तेरे पीछे दौड़ेंगे।"

आईना

यह पद हमारे बारे में क्या कहता है? कि चाहना पाप नहीं है। आपके भीतर जो तड़प है, किसी को चाहने की, किसी के लिए चाहे जाने की, छुए जाने की, जाने जाने की, वह किसी गड़बड़ी का लक्षण नहीं है। वह इंसान होने का लक्षण है, और परमेश्वर ने आपको वैसे ही बनाया है। जो लोग आपसे कहते हैं कि सच्चा विश्वासी बनने के लिए आपको भावनाशून्य हो जाना है, वे बाइबल नहीं पढ़ रहे। इस पुस्तक की लड़की परमेश्वर की किताब में अपनी चाहत के साथ खड़ी है और परमेश्वर ने उसका मुँह बन्द नहीं किया।

लेकिन यही आईना दूसरी तरफ़ भी दिखाता है। वह अपनी चाहत को कहीं भी नहीं उँडेलती। वह एक व्यक्ति के लिए है, एक नाम के लिए, एक ऐसे रिश्ते के लिए जो आगे इसी गीत में विवाह और वफ़ादारी की भाषा में बदल जाता है। हमारी पीढ़ी की त्रासदी यह नहीं है कि हम बहुत ज़्यादा चाहते हैं। यह है कि हम बहुत सस्ते में समझौता कर लेते हैं। एक स्क्रीन, एक अनजान चैट, आधी रात का एक खोखला संदेश। यह गीत हमारी चाहत को दबाता नहीं, उसे ऊँचा उठाता है और कहता: तुम इससे बेहतर के लिए बने हो।

और परमेश्वर के बारे में यह क्या कहता है? कि वे शरीर, सुन्दरता और आनन्द के दुश्मन नहीं हैं। वे उन्हीं के आविष्कारक हैं। जो परमेश्वर एक लड़की के चुम्बन की चाह को अपनी पवित्र पुस्तक में जगह देते हैं, वे संकोची परमेश्वर नहीं हैं। वे जीवन के पक्ष में हैं।

और सबसे गहरी बात यह: उस लड़की का आत्मविश्वास कहाँ से आता है? उसकी अपनी सुन्दरता से नहीं। वह जानती है कि वह झुलसी हुई है, घूरी जाती है, उसका अपना परिवार उससे प्रसन्न नहीं था, और वह अपनी ही बारी की रखवाली करने में चूक गई। फिर भी वह कहती है, "मैं सुन्दर हूँ।" क्यों? क्योंकि किसी ने उसे चुना, और उसका चुनाव उसकी कमी से बड़ा है।

यहाँ आपको सुसमाचार सुनाई देना चाहिए। मसीह में परमेश्वर ने ठीक ऐसे ही लोगों को चुना: झुलसे हुए, घूरे गए, अपनी ही ज़िन्दगी की रखवाली में नाकाम लोग। और उनका चुनना हमें बदल देता है। हमारा आत्ममूल्य दर्पण से नहीं आता, न फ़ॉलोअर्स से, न परफ़ॉर्मेंस से। वह उस आवाज़ से आता है जो कहती है, "तू सुन्दरी है, हे मेरी प्रिय।"

इस पर बात करें

आपके घर या कलीसिया में शरीर, चाहत और सेक्स के बारे में किस लहज़े में बात होती है: चुप्पी, चेतावनी, या आदर? यह गीत उस लहज़े को कैसे चुनौती देता है?

"तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है।" ईमानदारी से: आज आप अपनी सबसे गहरी तड़प को कहाँ बुझाने की कोशिश करते हैं, और वह कितने समय तक टिकती है?

यह लड़की अपने घावों को छिपाए बिना कह पाती है, "मैं सुन्दर हूँ।" आप अपने बारे में जो सबसे बुरी बात मानते हैं, क्या आप उसे परमेश्वर के चुनाव के सामने रखकर वही वाक्य कह सकते हैं? अगर नहीं, तो क्या रोक रहा है?

चुनौती

इस हफ़्ते दो काम कीजिए, और दोनों असहज होंगे।

पहला: सात दिन के लिए वह एक चीज़ बन्द कर दीजिए जिसके ज़रिए आप अपनी तड़प को सस्ते में शान्त करते हैं। आप जानते हैं वह क्या है। कोई ऐप, कोई चैट, कोई देर रात की आदत, कोई ऐसा रिश्ता जो आपको इस्तेमाल करता है। बन्द करने से जो खालीपन उठेगा, उससे भागिए मत। उसे महसूस कीजिए। वह खालीपन आपको बता रहा है कि आप किसके लिए बने हैं।

दूसरा: श्रेष्ठगीत पूरा पढ़िए, आठों अध्याय, एक बैठक में। ज़्यादा समय नहीं लगेगा। पेंसिल लेकर हर वह जगह निशान लगाइए जहाँ प्रेमी एक-दूसरे का नाम या पहचान बताते हैं, सिर्फ़ शरीर नहीं। फिर लिखिए कि आप कैसा प्रेम चाहते हैं, और कैसा प्रेम देने वाला व्यक्ति आप बनना चाहते हैं। उसे रख लीजिए। पाँच साल बाद पढ़िए।

मिलकर प्रार्थना

परमेश्वर, आपने मुझे तड़प के साथ बनाया, और आप उससे शरमाते नहीं। इसलिए मैं भी आपके सामने उसे छिपाऊँगा नहीं।

आप जानते हैं कि मैं किसके लिए भूखा हूँ, और आप जानते हैं कि मैंने उस भूख को कहाँ-कहाँ गलत जगह ले जाकर बुझाने की कोशिश की है। मुझे माफ़ कीजिए, और मुझे सस्ते सौदों से बचाइए।

मुझे सिखाइए कि चाहना पवित्र हो सकता है। मुझे वह धीरज दीजिए जो इंतज़ार कर सकता है, और वह साहस जो किसी को सचमुच जानने की मेहनत करता है।

और जब मैं आईने में देखकर खुद को नकार दूँ, तब आपकी आवाज़ मुझे सुनाई दे, वह आवाज़ जो मुझ झुलसे हुए को चुनती है और सुन्दर कहती है।

आप मेरे लिए हर उस चीज़ से उत्तम हैं जिसकी मैं चाह करता हूँ। मुझे अपनी ओर खींचिए, और मैं आपके पीछे दौड़ूँगा।

यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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श्रेष्ठगीत 1:2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

श्रेष्ठगीत 1:2 किस विषय में है?
कल्पना कीजिए: यरूशलेम, तीन हज़ार साल पहले। दोपहर ढल रही है। शहर की दीवारों के बाहर अंगूर की बारियाँ हैं, पत्तों पर धूल जमी है, और हवा में एक साथ तीन गंध तैर रही हैं: पकते अंगूरों की मीठी खटास, बकरियों के तम्बुओं का कसैला चमड़ा, और कहीं से आती इत्र की एक लहर। बाज़ार के किसी कोने में कोई व्यापारी अपनी शीशी खोलता है और गली भर महक जाती है। यही वह दुनिया है जिसमें यह गीत गाया गया।
श्रेष्ठगीत 1:2 क्या कहता है?
फिर वह समझाती है कि क्यों। इत्र की तरह। जब कोई महँगे इत्र की शीशी उँडेल देता है, तो पूरा कमरा बदल जाता है, आप उसे रोक नहीं सकते, वह हवा में फैल जाता है। "तेरा नाम उण्डेले हुए इत्र के तुल्य है।" उसका नाम भी ऐसा ही है। नाम सुनना ही काफ़ी है और भीतर कुछ खुल जाता है।
श्रेष्ठगीत 1:2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
लेकिन यहाँ एक बात है जो आसानी से छूट जाती है। वह यह नहीं कहती, "तेरा चुम्बन दाखमधु से उत्तम है।" वह कहती है, "तेरा प्रेम।" वह शारीरिक स्पर्श चाहती है, हाँ, खुलकर चाहती है, लेकिन वह उसे किसी व्यक्ति से अलग नहीं करती। चुम्बन एक प्रेम का चिन्ह है, वह प्रेम स्वयं नहीं। आज की दुनिया इस अन्तर को लगातार मिटाती है: स्पर्श उपलब्ध है, शरीर उपलब्ध है, स्क्रीन पर सब कुछ उपलब्ध है, और व्यक्ति कहीं नहीं है। यह गीत उलटा चलता है। पूरे गीत में वह उसका नाम लेती है, उसकी आवाज़ ढूँढ़ती है, पूछती है कि तू दोपहर को अपनी भेड़-बकरियों को कहाँ बैठाता है। वह उसे जानना चाहती है, फिर छूना चाहती है। चाहत यहाँ किसी चीज़ की भूख नहीं, किसी व्यक्ति की प्यास है।
किशोर श्रेष्ठगीत 1:2 से क्या सीख सकते हैं?
आपके घर या कलीसिया में शरीर, चाहत और सेक्स के बारे में किस लहज़े में बात होती है: चुप्पी, चेतावनी, या आदर? यह गीत उस लहज़े को कैसे चुनौती देता है?
श्रेष्ठगीत 1:2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
मुझे सिखाइए कि चाहना पवित्र हो सकता है। मुझे वह धीरज दीजिए जो इंतज़ार कर सकता है, और वह साहस जो किसी को सचमुच जानने की मेहनत करता है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

मेरा प्रेमी मेरे लिये मेंहदी के फूलों का गुच्छा है, जो एनगदी की दाख की बारियों में होता है।" एनगदी रेगिस्तान के बीच का एक नखलिस्तान है, चारों ओर सूखी चट्टानें और नमक, और वहीं बीच में फूल खिलते हैं। तेरी ज़िंदगी का सूखापन प्रभु की मिठास को मिटा नहीं सकता। वह वहीं महकता है जहाँ तुझे लगा था कुछ नहीं उगेगा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

उसने पूछा था, "तू अपनी भेड़-बकरियों को कहाँ चराता है?" और उत्तर मिला, "भेड़-बकरियों के खुरों के चिन्हों पर चल।" कोई स्वर्गीय आवाज़ नहीं, कोई चमत्कार नहीं। बस पहले चलने वालों के पैरों के निशान।

कभी-कभी परमेश्वर तुझे यही कहता है। जो विश्वासी तुझसे पहले इस रास्ते से गुज़रे, उनकी पगडंडी देख। चरवाहा वहीं मिलेगा, जहाँ उसका झुंड है।

तू अकेले रास्ता खोजने की कोशिश क्यों कर रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

मेरा प्रेमी मेरे लिये गन्धरस की गुथली सी है, जो मेरी छातियों के बीच में पड़ी रहती है।" गन्धरस महँगा था, और उसकी महक तब फैलती जब वह देह की गर्मी से पिघलता। वह उसे हाथ में नहीं, हृदय से सटाकर रखती है, रातभर। सोचो, तुम मसीह को कहाँ रखते हो? हाथ की दूरी पर, या इतने पास कि तुम्हारी हर साँस में उसकी सुगन्ध हो?

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