बाइबल व्याख्या

1 यूहन्ना 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

यूहन्ना पहले चेतावनी देते हैं: हर आत्मा पर विश्वास मत करो, उन्हें परखो, क्योंकि झूठे भविष्यद्वक्ता निकल पड़े हैं। पहचान का पैमाना यह है कि क्या वह मानती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया। फिर वे प्रेम की ओर मुड़ते हैं: परमेश्वर प्रेम है, उसने अपने पुत्र को भेजा, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है। अंत में एक तीखी कसौटी: जो अपने भाई से बैर रखता है और कहता है कि वह परमेश्वर से प्रेम करता है, वह झूठा है।

मर्म

यह अध्याय दो चीज़ों को एक साथ पकड़ता है जिन्हें हम अक्सर अलग कर देते हैं: सिद्धांत और प्रेम। एक ओर देहधारण, कि "यीशु मसीह शरीर में होकर आया है", वह चट्टान है जिस पर सच्ची और झूठी आत्माएँ टकराती हैं। दूसरी ओर प्रेम, जो केवल भावना नहीं बल्कि परमेश्वर का स्वभाव है, "परमेश्वर प्रेम है।" यूहन्ना दोनों को जोड़ते हैं क्योंकि दोनों एक ही घटना से निकलते हैं: पिता ने पुत्र को भेजा। सही सिद्धांत के बिना प्रेम भावुकता बन जाता है; प्रेम के बिना सही सिद्धांत सूखी हड्डियाँ। यहाँ धर्मशास्त्र और नैतिकता एक ही जड़ से फूटते हैं, और वह जड़ है क्रूस।

सामान्य सूत्र

देहधारण और प्रायश्चित, ये दो शब्द इस अध्याय की रीढ़ हैं। "हमारे पापों के प्रायश्चित के लिये अपने पुत्र को भेजा", यह पुराने नियम की पूरी बलिदान-व्यवस्था को अपने में समेट लेता है। लैव्यव्यवस्था का प्रायश्चित का दिन, यशायाह का दुःखी सेवक, वे सब यहाँ पूरे होते हैं। परमेश्वर का प्रेम केवल यह नहीं कि वे हमारे प्रति कोमल हैं; यह वह प्रेम है जिसने पाप का दण्ड स्वयं उठाया। और "जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं", यहाँ नई सृष्टि की झलक है: मसीह की छवि में ढाले गए लोग, वाचा के भीतर, न्याय के दिन साहस के साथ खड़े।

दर्पण

यह पाठ एक असुविधाजनक प्रश्न पूछता है: क्या आप उस व्यक्ति से प्रेम कर सकते हैं जिसे आप रोज़ देखते हैं? वह सहकर्मी जो श्रेय ले उड़ता है, वह भाई जिसने पैसों को लेकर धोखा दिया, वह पड़ोसी जिसकी राजनीति आपको जहरीली लगती है, वह जीवनसाथी जिसकी छोटी-छोटी आदतें आपको खरोंचती हैं। यूहन्ना बहुत सीधा है: अनदेखे परमेश्वर से प्रेम का दावा और देखे हुए भाई से बैर, ये एक साथ नहीं चल सकते। और भय के बारे में भी: क्या आपकी आराधना में अब भी दण्ड का डर है, कि परमेश्वर कभी भी मुँह फेर लेंगे? यूहन्ना कहते हैं, सिद्ध प्रेम इस भय को बाहर निकाल देता है। यह छूट नहीं है, यह सुरक्षा है।

मुख्य पात्र

यहाँ केंद्र में परमेश्वर स्वयं हैं, और यूहन्ना उनके बारे में एक असाधारण वाक्य कहते हैं: "परमेश्वर प्रेम है।" ध्यान दीजिए, वे यह नहीं कहते कि परमेश्वर प्रेम करते हैं, बल्कि कि वे प्रेम हैं। यह उनका सार है, उनका स्वभाव, त्रिएकता के भीतर पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का अनन्त संबंध। और यह प्रेम निष्क्रिय नहीं है। "प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम किया पर इसमें है, कि उसने हम से प्रेम किया।" पहल हमेशा उनकी है। हम प्रतिक्रिया देने वाले हैं, आरंभ करने वाले नहीं। यह परमेश्वर वह नहीं जो दूर बैठकर हमारी योग्यता तौलते हैं; यह वह परमेश्वर हैं जो पुत्र को भेजते हैं, आत्मा को देते हैं, और स्वयं हम में बने रहते हैं।

संदर्भ

यूहन्ना यह पत्री पहली सदी के अंत में लिखते हैं, संभवतः इफिसुस के आसपास की कलीसियाओं को। एक संकट खड़ा हो गया है: कुछ शिक्षक यह मानने से इनकार कर रहे हैं कि मसीह वास्तव में शरीर में आए। उनके लिए पदार्थ अशुद्ध है, इसलिए परमेश्वर उसमें प्रवेश नहीं कर सकते। ये लोग कलीसिया छोड़कर निकल गए हैं (2:19), पर अपने पीछे भ्रम छोड़ गए हैं। यूहन्ना बुज़ुर्ग हैं, संभवतः प्रेरितों में अंतिम, और वे "प्रिय बालकों" कहकर लिखते हैं, एक पिता की तरह जो जानता है कि उसके बच्चे झूठी शिक्षा के बीच फँसे हैं। इसीलिए वे कसौटी देते हैं: पहचान का चिह्न है देहधारण की स्वीकृति, और उसका फल है भाइयों के लिए ठोस प्रेम।

अंतर्पाठ

"परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा", यह वाक्य यूहन्ना 1:18 से गूँजता है, जहाँ यही बात कही गई और फिर जोड़ा गया कि एकलौता पुत्र ने उन्हें प्रगट किया। वहाँ प्रगटीकरण देह में हुआ; यहाँ प्रगटीकरण कलीसिया के प्रेम में जारी है। अनदेखा परमेश्वर देखे जाते हैं जब विश्वासी एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। और "प्रेम में भय नहीं होता", यह रोमियों 8:15 के साथ मिलाकर पढ़िए, जहाँ पौलुस कहते हैं कि हमें दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर से डरें, बल्कि लेपालकपन की आत्मा। एक ही सुसमाचार, दो प्रेरितों की आवाज़ों में: परमेश्वर के बच्चे न्याय के दिन काँपते हुए

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1 John 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 यूहन्ना 4 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना पहले चेतावनी देते हैं: हर आत्मा पर विश्वास मत करो, उन्हें परखो, क्योंकि झूठे भविष्यद्वक्ता निकल पड़े हैं। पहचान का पैमाना यह है कि क्या वह मानती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया। फिर वे प्रेम की ओर मुड़ते हैं: परमेश्वर प्रेम है, उसने अपने पुत्र को भेजा, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है। अंत में एक तीखी कसौटी: जो अपने भाई से बैर रखता है और कहता है कि वह परमेश्वर से प्रेम करता है, वह झूठा है।
1 यूहन्ना 4 किस विषय में है?
यह अध्याय दो चीज़ों को एक साथ पकड़ता है जिन्हें हम अक्सर अलग कर देते हैं: सिद्धांत और प्रेम। एक ओर देहधारण, कि "यीशु मसीह शरीर में होकर आया है", वह चट्टान है जिस पर सच्ची और झूठी आत्माएँ टकराती हैं। दूसरी ओर प्रेम, जो केवल भावना नहीं बल्कि परमेश्वर का स्वभाव है, "परमेश्वर प्रेम है।" यूहन्ना दोनों को जोड़ते हैं क्योंकि दोनों एक ही घटना से निकलते हैं: पिता ने पुत्र को भेजा। सही सिद्धांत के बिना प्रेम भावुकता बन जाता है; प्रेम के बिना सही सिद्धांत सूखी हड्डियाँ। यहाँ धर्मशास्त्र और नैतिकता एक ही जड़ से फूटते हैं, और वह जड़ है क्रूस।
1 यूहन्ना 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
देहधारण और प्रायश्चित, ये दो शब्द इस अध्याय की रीढ़ हैं। "हमारे पापों के प्रायश्चित के लिये अपने पुत्र को भेजा", यह पुराने नियम की पूरी बलिदान-व्यवस्था को अपने में समेट लेता है। लैव्यव्यवस्था का प्रायश्चित का दिन, यशायाह का दुःखी सेवक, वे सब यहाँ पूरे होते हैं। परमेश्वर का प्रेम केवल यह नहीं कि वे हमारे प्रति कोमल हैं; यह वह प्रेम है जिसने पाप का दण्ड स्वयं उठाया। और "जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं", यहाँ नई सृष्टि की झलक है: मसीह की छवि में ढाले गए लोग, वाचा के भीतर, न्याय के दिन साहस के साथ खड़े।
1 यूहन्ना 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह पाठ एक असुविधाजनक प्रश्न पूछता है: क्या आप उस व्यक्ति से प्रेम कर सकते हैं जिसे आप रोज़ देखते हैं?
1 यूहन्ना 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यहाँ केंद्र में परमेश्वर स्वयं हैं, और यूहन्ना उनके बारे में एक असाधारण वाक्य कहते हैं: "परमेश्वर प्रेम है।" ध्यान दीजिए, वे यह नहीं कहते कि परमेश्वर प्रेम करते हैं, बल्कि कि वे प्रेम हैं। यह उनका सार है, उनका स्वभाव, त्रिएकता के भीतर पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का अनन्त संबंध। और यह प्रेम निष्क्रिय नहीं है। "प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम किया पर इसमें है, कि उसने हम से प्रेम किया।" पहल हमेशा उनकी है। हम प्रतिक्रिया देने वाले हैं, आरंभ करने वाले नहीं। यह परमेश्वर वह नहीं जो दूर बैठकर हमारी योग्यता तौलते हैं; यह वह परमेश्वर हैं जो पुत्र को भेजते हैं, आत्मा को देते हैं, और स्वयं हम में बने रहते हैं।
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1 John 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

हमने उस प्रेम को जो परमेश्वर हमसे रखता है, जान लिया, और हमें उस पर विश्वास है।" यूहन्ना दो बातें कहता है, जानना और भरोसा करना। बहुत लोग जानते हैं कि परमेश्वर प्रेम है, पर उस पर टिकते नहीं। और फिर वह कहता है "बना रहता है", यानी प्रेम कोई पल भर की भावना नहीं, रहने की जगह है। आज तू किस जगह रह रहा है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 19

हे प्रभु, तूने पहले मुझसे प्रेम किया, जब मैं तुझे जानता भी न था। तेरे उसी प्रेम ने मेरे ठंडे दिल को पिघलाया और मुझमें प्रेम करने की शक्ति डाली। मुझे सिखा कि मैं तेरे प्रेम से भरकर दूसरों से भी सच्चा प्रेम कर सकूँ।

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