बाइबल व्याख्या

1 थिस्सलुनीकियों 5

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

पौलुस थिस्सलुनीके के विश्वासियों को लिख रहे हैं कि प्रभु का दिन चोर की तरह अचानक आएगा, पर वे अंधकार में नहीं, ज्योति की सन्तान हैं, इसलिए जागते रहें। फिर एक के बाद एक छोटी-छोटी आज्ञाओं की झड़ी लगती है: आनन्दित रहो, प्रार्थना करते रहो, आत्मा को न बुझाओ, हर बात में धन्यवाद करो। अंत में एक आशीर्वाद: शान्ति का परमेश्वर स्वयं तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे।

मूल बात

"जागते और सावधान रहें" — यह इस अध्याय की धड़कन है। पर ध्यान दीजिए कि पौलुस डर नहीं फैला रहे। वे यह नहीं कहते कि प्रभु के आने से घबराओ; वे कहते हैं कि तुम पहले से ज्योति के हो। पहचान पहले, आचरण बाद में। "परमेश्वर ने हमें क्रोध के लिये नहीं, परन्तु इसलिए ठहराया कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार प्राप्त करें।" यहाँ पूरा सुसमाचार सिमटा हुआ है। जागना कोई तनावग्रस्त सतर्कता नहीं है, यह उस व्यक्ति की स्वाभाविक अवस्था है जो जानता है कि वह किस का है। चोर आए तो आए; घर के मालिक का बेटा अंधेरे से नहीं डरता।

समग्र सूत्र

प्रभु का दिन — यह वाक्यांश पुराने नियम से आता है, भविष्यद्वक्ताओं की भारी आवाज़ से। वहाँ यह न्याय का दिन था, अंधकार का दिन। पर मसीह में यह दिन दो हिस्सों में बँट गया है: वह पहले ही एक बार आ चुके, और फिर आएँगे। बीच का यह समय अजीब है, प्रतीक्षा का समय, जिसमें हम पहले से ज्योति के हैं पर अभी पूरी ज्योति में नहीं। पौलुस जिस "उद्धार की आशा का टोप" की बात करते हैं, वह यशायाह से उधार है, जहाँ परमेश्वर स्वयं यह कवच पहनते हैं। मसीह में जो कवच परमेश्वर ने पहना था, अब वह हमें पहनाया गया है। यही सूत्र है: उनका कार्य हमारा वस्त्र बन जाता है।

दर्पण

रुकिए यहाँ: "जब लोग कहते होंगे, कुशल है, और कुछ भय नहीं।" यह वाक्य चुभता है। क्योंकि हम इसी में जीते हैं, है ना? EMI चल रही है, बच्चों की पढ़ाई की योजना बनी है, बीमा है, नौकरी है, सब कुशल है। और इसी "कुशल है" के बीच पौलुस एक तेज़ चाकू रख देते हैं। वे यह नहीं कह रहे कि योजना बनाना गलत है; वे पूछ रहे हैं कि क्या आपकी सुरक्षा की भावना उन चीज़ों पर टिकी है जो एक क्षण में गिर सकती हैं। "आत्मा को न बुझाओ" — यह भी दर्पण है। हम में से कितनी बार आत्मा कुछ कहती है, और हम व्यस्तता के कारण, या शर्म के कारण, या इस डर से कि लोग क्या कहेंगे, उस चिंगारी पर पानी डाल देते हैं।

विवरण

"आत्मा को न बुझाओ। भविष्यद्वाणियों को तुच्छ न जानो। सब बातों को परखो; जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।" इन तीन वाक्यों को एक साथ पढ़िए, यह एक नाज़ुक संतुलन है। एक तरफ खुलापन: आत्मा को दबाओ मत, जो परमेश्वर से आता है उसे तुच्छ मत जानो। दूसरी तरफ विवेक: सब कुछ परखो। पौलुस न तो हर आत्मिक अनुभव को गले लगाते हैं, न ही हर चीज़ पर संदेह करते हैं। वे कहते हैं: सुनो, फिर तौलो, फिर पकड़ो। यह पका हुआ विश्वास है। बच्चे या तो सब मान लेते हैं या सब अस्वीकार कर देते हैं; प्रौढ़ विश्वासी सुनते हैं, परखते हैं, और जो सोना है उसे थामे रहते हैं।

अंतर-पाठ

"जैसा रात को चोर आता है" — यीशु ने स्वयं यह छवि इस्तेमाल की थी (मत्ती 24)। पौलुस उसी शब्दावली में बात कर रहे हैं, मानो प्रभु की आवाज़ अभी भी उनके कानों में गूँज रही हो। और "उद्धार की आशा का टोप" — यशायाह 59 में यह परमेश्वर के अपने कवच का हिस्सा है, जब वे न्याय करने आते हैं। पौलुस उसी चित्र को इफिसियों 6 में और विस्तार से खोलेंगे। जो परमेश्वर पहनते हैं, वही वे अपने लोगों को पहनाते हैं। यही अनुग्रह की अर्थव्यवस्था है।

संदर्भ

थिस्सलुनीके एक बंदरगाह शहर था, रोमी साम्राज्य की सड़क पर। वहाँ की मंडली नई थी, शायद कुछ ही महीने पुरानी, और पौलुस को जल्दी वहाँ से निकलना पड़ा था। इन विश्वासियों में कई अन्यजाति थे जो अभी-अभी मूर्तिपूजा छोड़कर आए थे। उन्हें सताया जा रहा था, और उनके कुछ भाई मर चुके थे। एक बड़ा प्रश्न उन्हें कचोट रहा था: प्रभु के लौटने से पहले जो मर गए, उनका क्या? पौलुस अध्याय 4 में इसका उत्तर देते हैं, और अध्याय 5 में उस उत्तर को व्यावहारिक जीवन में उतारते हैं। "चाहे जागते हों, चाहे सोते हों, सब मिलकर उसी के साथ जीएँ" — यहाँ "सोना" मृत्यु का कोमल रूपक है। जो चले गए, वे भी उसी के हैं।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन-सा कोना है जहाँ आप कह रहे हैं "कुशल है, और कुछ भय नहीं," पर सच में वहाँ आपकी नींव किस पर टिकी है?

पिछले कुछ हफ्तों में आत्मा ने आप में कोई चिंगारी जलाई थी, जिसे आपने अनजाने में बुझा दिया? वह क्या थी?

1 Thessalonians में और गहराई से जानें

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The Message of Thessalonians

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Hope, holiness and the return of Christ for a young church.

1 and 2 Thessalonians: An Introduction and Commentary

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A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Thessalonians

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1 Thessalonians 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 थिस्सलुनीकियों 5 का क्या अर्थ है?
पौलुस थिस्सलुनीके के विश्वासियों को लिख रहे हैं कि प्रभु का दिन चोर की तरह अचानक आएगा, पर वे अंधकार में नहीं, ज्योति की सन्तान हैं, इसलिए जागते रहें। फिर एक के बाद एक छोटी-छोटी आज्ञाओं की झड़ी लगती है: आनन्दित रहो, प्रार्थना करते रहो, आत्मा को न बुझाओ, हर बात में धन्यवाद करो। अंत में एक आशीर्वाद: शान्ति का परमेश्वर स्वयं तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे।
1 थिस्सलुनीकियों 5 किस विषय में है?
प्रभु का दिन — यह वाक्यांश पुराने नियम से आता है, भविष्यद्वक्ताओं की भारी आवाज़ से। वहाँ यह न्याय का दिन था, अंधकार का दिन। पर मसीह में यह दिन दो हिस्सों में बँट गया है: वह पहले ही एक बार आ चुके, और फिर आएँगे। बीच का यह समय अजीब है, प्रतीक्षा का समय, जिसमें हम पहले से ज्योति के हैं पर अभी पूरी ज्योति में नहीं। पौलुस जिस "उद्धार की आशा का टोप" की बात करते हैं, वह यशायाह से उधार है, जहाँ परमेश्वर स्वयं यह कवच पहनते हैं। मसीह में जो कवच परमेश्वर ने पहना था, अब वह हमें पहनाया गया है। यही सूत्र है: उनका कार्य हमारा वस्त्र बन जाता है।
1 थिस्सलुनीकियों 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
"आत्मा को न बुझाओ। भविष्यद्वाणियों को तुच्छ न जानो। सब बातों को परखो; जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।" इन तीन वाक्यों को एक साथ पढ़िए, यह एक नाज़ुक संतुलन है। एक तरफ खुलापन: आत्मा को दबाओ मत, जो परमेश्वर से आता है उसे तुच्छ मत जानो। दूसरी तरफ विवेक: सब कुछ परखो। पौलुस न तो हर आत्मिक अनुभव को गले लगाते हैं, न ही हर चीज़ पर संदेह करते हैं। वे कहते हैं: सुनो, फिर तौलो, फिर पकड़ो। यह पका हुआ विश्वास है। बच्चे या तो सब मान लेते हैं या सब अस्वीकार कर देते हैं; प्रौढ़ विश्वासी सुनते हैं, परखते हैं, और जो सोना है उसे थामे रहते हैं।
1 थिस्सलुनीकियों 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
थिस्सलुनीके एक बंदरगाह शहर था, रोमी साम्राज्य की सड़क पर। वहाँ की मंडली नई थी, शायद कुछ ही महीने पुरानी, और पौलुस को जल्दी वहाँ से निकलना पड़ा था। इन विश्वासियों में कई अन्यजाति थे जो अभी-अभी मूर्तिपूजा छोड़कर आए थे। उन्हें सताया जा रहा था, और उनके कुछ भाई मर चुके थे। एक बड़ा प्रश्न उन्हें कचोट रहा था: प्रभु के लौटने से पहले जो मर गए, उनका क्या?
1 थिस्सलुनीकियों 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पिछले कुछ हफ्तों में आत्मा ने आप में कोई चिंगारी जलाई थी, जिसे आपने अनजाने में बुझा दिया? वह क्या थी?
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1 Thessalonians 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 7

पिता, मुझे जगाए रखिए। मन को उन चीज़ों में डूबने से बचाइए जो अंधेरे में खींच ले जाती हैं और सोच को धुंधला कर देती हैं। मैं आपके उजाले का बच्चा हूँ, इसलिए होश में, साफ़ दिल से और आपकी ओर देखते हुए जीना चाहता हूँ। आज मुझे सँभाले रखिए।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

पौलुस यह नहीं कहता कि तुम ज्योति की सन्तान बन जाओ, वह कहता है, "क्योंकि तुम सब ज्योति की सन्तान, और दिन की सन्तान हो।" यह तुम्हारा काम नहीं, तुम्हारी पहचान है। रात अब तुम्हारा पता नहीं रही। तो फिर अंधेरे में छिपाकर रखी वह एक बात क्यों पाल रहे हो, जो तुम्हारे घर की नहीं है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

देखो, कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो, आपस में और सब से भी।" ध्यान दो, पौलुस उस कलीसिया से यह कह रहा है जो सता ली जा रही थी। बदला लेने का हक उनके पास था, फिर भी उन्हें भलाई में तत्पर रहने को कहा गया। जिसने तुम्हें चोट पहुँचाई, आज उसके लिए तुम्हारे हाथ में क्या है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

इसलिए हम औरों के समान सोते न रहें, पर जागते और सावधान रहें।"

सोना बुरा नहीं, पर यहाँ बात उस नींद की है जिसमें आदमी जीते जी सब कुछ भूल जाता है। पौलुस कहता है, तू अंधकार की संतान नहीं, तू ज्योति की संतान है। जागना किसी डर से नहीं, बल्कि इस उम्मीद से कि जो आनेवाला है वह तेरा प्रभु है।

आज अपने आप से पूछ: मेरे दिल का कौन सा हिस्सा सो गया है? वहीं से जागना शुरू कर।

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