2 पतरस 3
पद
पतरस अपने पाठकों को उन "हँसी-उपहास करनेवालों" के बारे में चेतावनी देते हैं जो कहेंगे कि मसीह के आने की प्रतिज्ञा झूठी है, क्योंकि सब कुछ वैसा ही चल रहा है जैसा शुरू से था। पतरस जवाब देते हैं: परमेश्वर देर नहीं कर रहे, वे धीरज धर रहे हैं ताकि लोग मन फिराएँ। और उस दिन के आलोक में एक ही प्रश्न बचता है, तुम कैसे मनुष्य बनोगे?
मर्म
यह अध्याय पूरी तरह से एक नैतिक प्रश्न पर आकर टिकता है: "तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए" (पद 11)। पतरस कयामत का चित्रण डराने के लिए नहीं करते, बल्कि जीने के लिए करते हैं। यदि यह सारा भौतिक ढाँचा एक दिन पिघलने वाला है, तो जिन चीज़ों पर हम अपना जीवन खर्च करते हैं, उनका वज़न अचानक बदल जाता है। घर की सजावट, बैंक बैलेंस, करियर की सीढ़ी, ये सब पिघलती धातु हैं। जो बचेगा वह है चरित्र, भक्ति, और वे रिश्ते जिनमें हमने मन फिराव का बीज बोया। परमेश्वर की देरी दंड नहीं, दया है।
सूत्र
पतरस दो जल-प्रलयों को जोड़ते हैं, नूह का जल-प्रलय और आने वाला अग्नि-न्याय। बीच में खड़ा है क्रूस, जहाँ न्याय और धीरज एक साथ मिले। परमेश्वर की "देरी" वही धीरज है जिसने पौलुस को दमिश्क के रास्ते पर रोका, जिसने पतरस को तीन बार इनकार के बाद वापस बुलाया। पद 15 का वाक्य चौंकाने वाला है: "हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो।" यानी हर बीतता दिन जिसमें प्रभु नहीं लौटे, वह किसी के लिए बचाव का द्वार है, शायद आपके पड़ोसी के लिए, शायद आपके नाराज़ भाई के लिए। नई पृथ्वी की प्रतिज्ञा (पद 13) यशायाह की उस पुरानी आस को पूरा करती है जहाँ "धार्मिकता वास करेगी।"
दर्पण
पद 3-4 के हँसी-उपहास करनेवाले केवल नास्तिक नहीं हैं। वे वे लोग भी हैं जो कलीसिया की बेंच पर बैठकर सोचते हैं: "प्रभु आएँगे तो आएँगे, अभी तो जीवन चलाना है।" यह सोच हमारे भीतर हर सुबह घुसती है, जब हम अपने बजट में देने से पहले खर्च करते हैं, जब क्षमा को अगले हफ्ते के लिए टालते हैं, जब बच्चे को समय देने के बजाय फोन उठाते हैं। पतरस पूछते हैं, तुम्हारा कैलेंडर क्या बताता है कि तुम किसकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हो? यदि सब कुछ पिघलने वाला है, तो वह प्रोजेक्ट जिसके लिए आप परिवार को उपेक्षित कर रहे हैं, वह प्रतिष्ठा जिसके लिए झूठ बोल रहे हैं, वह कड़वाहट जिसे संजो रहे हैं, इनकी क़ीमत क्या है? "निष्कलंक और निर्दोष" (पद 14) कोई अलंकार नहीं है, यह रोज़मर्रा के छोटे निर्णयों की माँग है।
बारीकी
पद 12 में एक असाधारण शब्द छिपा है: "उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्न करना चाहिए।" रुकिए, क्या हम प्रभु के दिन को "जल्दी" ला सकते हैं? यूनानी क्रिया वही अर्थ सुझाती है, त्वरित करना, बुलाना। यह विचार बेचैन करता है। पतरस कह रहे हैं कि आपकी पवित्रता, आपकी गवाही, आपका मन फिराव, ये कहीं न कहीं परमेश्वर के समय-चक्र से जुड़े हैं। यह नियति का अंधा पहिया नहीं है। मसीही जीवन इतिहास में एक निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं, बल्कि एक सक्रिय पुकार है। जब आप किसी को क्षमा करते हैं, जब आप ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, जब आप अपने शत्रु के लिए प्रार्थना करते हैं, आप उस दिन को "जल्दी" कर रहे हैं।
अंतर्पाठ
भजन 90:4 का हवाला (पद 8) मूसा की प्रार्थना से आता है, जहाँ मानव जीवन घास की तरह क्षणिक बताया गया है। पतरस इसे उलट देते हैं: हमारी अधीरता परमेश्वर के समय की समझ की कमी है। दूसरी ओर, यीशु का अपना दृष्टान्त, वह चोर जो रात में आता है (मत्ती 24), यहाँ पद 10 में सीधे गूँजता है। यीशु ने यह इसलिए नहीं कहा कि हम डर में जिएँ, बल्कि इसलिए कि हम जागे रहें। जागरण भय नहीं है, यह ध्यान है, वह जो पत्नी के चेहरे पर थकान देख लेती है, वह जो कर्मचारी के अनकहे बोझ को भाँप लेती है।
संदर्भ
पतरस यह पत्री अपने जीवन के अंत में लिख रहे हैं, संभवतः रोम से, नीरो के अत्याचार की छाया में। पहली पीढ़ी के प्रेरित मर रहे हैं, और दूसरी पीढ़ी में यह प्रश्न उठ रहा है, "प्रभु ने कहा था वे जल्दी आएँगे, कहाँ हैं वे?" यह केवल दार्शनिक प्रश्न नहीं था, यह चरवाहे का दर्द था। लोग विश्वास से डगमगा रहे थे। साथ ही, यूनानी दर्शन में यह विचार आम था कि ब्रह्मांड शाश्वत और अपरिवर्तनीय है। पतरस दोनों मोर्चों पर लड़ रहे हैं, बाहर के दार्शनिकों के विरुद्ध और भीतर के थके हुए विश्वासियों के लिए। पद 16 में पौलुस का उल्लेख दिखाता है कि उस समय पहले से ही प्रेरितिक पत्रियों को "पवित्रशास्त्र" के स्तर पर पढ़ा जा रहा था।
चिंतन
*यदि प्रभु की देरी सचमुच किसी के उद्धार के लिए है, तो मेरे जीवन में वह "कोई" कौन है, और मैं उसके लिए क्
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2 Peter 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
इसलिए, हे प्रियों, जब तुम इन बातों की प्रतीक्षा करते हो, तो यत्न करो कि तुम शान्ति से उसके सामने निष्कलंक और निर्दोष ठहरो।" पतरस प्रतीक्षा को आलस नहीं, मेहनत कहता है। तू जिसकी राह देख रहा है, वही तेरे आज के फैसलों को गढ़ता है। और ध्यान दे, वह कहता है शान्ति से, घबराहट से नहीं। उस दिन से डरकर नहीं, उस दिन की आस में जीना है।
वे तो जान-बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा आकाश प्राचीनकाल से वर्तमान है।" ध्यान दो, पतरस यह नहीं कहता कि उन्हें पता नहीं था। उन्हें पता था, पर उन्होंने भूलना चुना। कुछ सच्चाइयाँ हम इसलिए भुला देते हैं क्योंकि याद रखने पर जीवन बदलना पड़ेगा। आज खुद से पूछो: कौन सी बात है जो तुम जानते हो, पर याद नहीं करना चाहते?
पिता, कई बार मैं सोचता हूँ कि आप देर क्यों कर रहे हैं, पर आपका ठहरना असल में आपकी दया है। आप किसी को छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए समय देते हैं। मुझे भी वही धीरज दीजिए, अपने लिए और उनके लिए भी जो अभी दूर हैं। आपके इंतज़ार में मेरा भरोसा बना रहे।
पिता, मुझे भूलने की आदत है। जो बातें तेरे भेजे हुए जनों ने कहीं और जो आज्ञा तूने प्रभु यीशु के द्वारा दी, उन्हें मेरे मन में ताज़ा रख। मैं भीड़ भरे दिनों में भी तेरी आवाज़ पहचान सकूँ, और उसी पर चलता रहूँ।
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