बाइबल व्याख्या

2 कुरिन्थियों 9

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

पौलुस यरूशलेम के गरीब विश्वासियों के लिये इकट्ठे किए जा रहे चंदे की बात कर रहे हैं, और वे कहते हैं कि इस विषय में लिखना उनके लिये "अवश्य नहीं" है, फिर भी वे पूरा एक अध्याय लिख देते हैं। वे कुरिन्थ की कलीसिया को याद दिलाते हैं कि उनके उत्साह की चर्चा उन्होंने मकिदुनिया में की है, और अब भाइयों को पहले भेज रहे हैं ताकि दान तैयार हो, "दबाव से नहीं परन्तु उदारता के फल की तरह।" इसके बाद बोने और काटने की तस्वीर आती है, हर्ष से देनेवाले पर परमेश्वर के प्रेम की बात, बीज और रोटी देनेवाले परमेश्वर का वचन, और अंत में यह अध्याय एक ऐसी साँस पर ठहर जाता है जो पैसे से कहीं आगे जाती है: "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।"

मूल मर्म

ध्यान दीजिए कि पौलुस चंदे को "अनुग्रह" की भाषा में लपेट देते हैं। वे यह नहीं कहते कि परमेश्वर आपकी उदारता का बदला चुका देंगे, वे कहते हैं कि परमेश्वर ही बीज देते हैं, और फिर उसे फलवन्त भी करते हैं। यानी देनेवाला हाथ भी पहले पाया हुआ हाथ है। यहाँ देना कोई लेन-देन नहीं, बल्कि उस धारा में उतरना है जो परमेश्वर से शुरू होती है और धन्यवाद पर समाप्त होती है: गरीब संतों की घटियाँ पूरी होती हैं, और उनके मुँह से परमेश्वर की स्तुति फूटती है। पर यह प्रश्न खुला रह जाता है, और पौलुस उसे बंद नहीं करते: अगर सब कुछ उनका ही दिया हुआ है, तो मेरे देने में "मेरा" क्या है? शायद केवल यह, कि मैं कुढ़-कुढ़ के देता हूँ या हर्ष से।

जोड़ने वाला सूत्र

अध्याय का आखिरी वाक्य अचानक पैसे की दुनिया से बाहर निकल जाता है: "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।" पौलुस यह नहीं बताते कि वह दान क्या है। वे उसे नाम नहीं देते, क्योंकि शायद नाम दे ही नहीं सकते। पर इसी पत्र में कुछ पंक्तियाँ पहले उन्होंने कहा था कि मसीह धनी होकर भी हमारे लिये कंगाल बन गए, ताकि हम उनकी कंगाली से धनी हो जाएँ। वही पैटर्न यहाँ दोहराया जा रहा है, बस छोटे पैमाने पर: कुरिन्थ के लोग अपनी थैली हल्की करते हैं ताकि यरूशलेम के भाइयों की थाली भरी रहे। पूरी मुक्ति की कहानी इसी दिशा में बहती है, ऊपर से नीचे, भरे हुए से खाली की ओर। और जो इस धारा में उतरता है, वह केवल दान नहीं देता, वह मसीह के आकार में ढलने लगता है।

दर्पण

हममें से ज़्यादातर लोग कुढ़-कुढ़ के नहीं देते, हम हिसाब लगाकर देते हैं, जो शायद उससे भी ठंडा है। थैली आगे बढ़ती है, हम अंदाज़ा लगाते हैं कि कितना उचित दिखेगा, और यह सोचते हैं कि महीने के आखिर में गाड़ी का बीमा भी आना है। पौलुस उस हिसाब को गलत नहीं कहते, वे एक और सवाल पूछते हैं: तुम्हारे भीतर क्या चल रहा है जब तुम्हारा हाथ जेब में जाता है? डर, कि कम पड़ जाएगा? दिखावा, कि कोई देख ले? या वह अजीब हल्कापन जिसे पौलुस "हर्ष" कहते हैं? यह पद हमारे बटुए से ज़्यादा हमारी असुरक्षा को उघाड़ता है। हम पकड़कर रखते हैं क्योंकि हमें भीतर से भरोसा नहीं कि बीज देनेवाला दोबारा बीज देगा।

आज ही, दिन ढलने से पहले, एक नाम लिखिए, किसी ऐसे व्यक्ति या काम का जिसे सचमुच ज़रूरत है, उसके लिये एक निश्चित रकम अभी अलग कर दीजिए, और अलग करते समय ज़ोर से कहिए: "यह बीज पहले आपका दिया हुआ था।"

संदर्भ

यह चंदा पौलुस के जीवन का एक बड़ा, वर्षों लंबा प्रोजेक्ट था: यूनानी कलीसियाओं से यरूशलेम के गरीब विश्वासियों के लिये पैसा। कुरिन्थ, अखाया प्रांत का समृद्ध बंदरगाह शहर, एक साल पहले उत्साह से तैयार हुआ था, पर फिर बात ठंडी पड़ गई। बीच में पौलुस और इस कलीसिया के रिश्ते में कड़वाहट आई थी, आरोप लगे थे, और पैसे के मामले में संदेह सबसे जल्दी उठता है। इसीलिए वे भाइयों को पहले भेजते हैं, अकेले पैसा छूने से बचते हैं, और साफ कहते हैं कि यह "दबाव से नहीं" होना चाहिए। एक प्रेरित जो अपनी प्रतिष्ठा दाँव पर लगाकर लिखता है कि कहीं हम लज्जित न हों: यह मंच से बोलती आवाज़ नहीं, यह एक ऐसे आदमी की आवाज़ है जो जोखिम उठा रहा है।

श्रोताओं का चेहरा

कुरिन्थ के लोग संरक्षक-व्यवस्था में जीते थे। धनी आदमी सार्वजनिक दान देता था, और बदले में उसका नाम पत्थर पर खुदता था, सम्मान मिलता था, वफादारी मिलती थी। देना एक सौदा था, इज़्ज़त की मुद्रा में चुकाया जाने वाला। पौलुस उसी भाषा से शुरू करते हैं, घमण्ड, लज्जा, तैयारी, और फिर उसे पलट देते हैं: धन्यवाद देनेवालों का मुँह दानी की ओर नहीं, परमेश्वर की ओर उठता है। पत्थर पर किसी का नाम नहीं खुदेगा। और एक बात और, जो हमें अक्सर नहीं सुनाई देती: यह गैर-यहूदी पैसा यहूदी विश्वासियों के पास जा रहा था, उन लोगों के पास जो अब तक इन्हें संदेह से देखते थे। यह चंदा एक दीवार गिराने का प्रयास था।

अन्तर्पाठ

पद 9 में पौलुस भजन 112:9 उठाते हैं: "उसने बिखेरा, उसने गरीबों को दान दिया, उसकी धार्मिकता सदा बनी रहेगी।" भजन में यह उस मनुष्य का चित्र है जो परमेश्वर का भय मानता है, और "बिखेरना" शब्द किसान की छवि है, मुट्ठी खोलकर फेंकना, गिनकर नहीं। पौलुस इसे उदारता का धर्मशास्त्र बना देते हैं: जो बिखेरता है, वह घटता नहीं। और पद 10 में यशायाह 55:10 की गूँज है, जहाँ आकाश से उतरा पानी बोनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी देता है। वहाँ बात परमेश्वर के वचन की थी, यहाँ पौलुस उसी छवि को हमारे हाथों तक खींच लाते हैं। वही परमेश्वर जो वचन बरसाते हैं, वही रोटी देते हैं, वही उदारता उगाते हैं।

चिंतन

"परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है" को पढ़ते हुए आपके भीतर पहली प्रतिक्रिया क्या उठती है, आनंद या दोष-भाव? और वह प्रतिक्रिया आपके परमेश्वर-चित्र के बारे में क्या कहती है?

पौलुस उस दान को नाम नहीं देते जो "वर्णन से बाहर" है। अगर आपको आज उसे नाम देना पड़े, तो आप क्या कहेंगे, और क्यों कहना कठिन लगता है?

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2 Corinthians 9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 कुरिन्थियों 9 का क्या अर्थ है?
पौलुस यरूशलेम के गरीब विश्वासियों के लिये इकट्ठे किए जा रहे चंदे की बात कर रहे हैं, और वे कहते हैं कि इस विषय में लिखना उनके लिये "अवश्य नहीं" है, फिर भी वे पूरा एक अध्याय लिख देते हैं। वे कुरिन्थ की कलीसिया को याद दिलाते हैं कि उनके उत्साह की चर्चा उन्होंने मकिदुनिया में की है, और अब भाइयों को पहले भेज रहे हैं ताकि दान तैयार हो, "दबाव से नहीं परन्तु उदारता के फल की तरह।" इसके बाद बोने और काटने की तस्वीर आती है, हर्ष से देनेवाले पर परमेश्वर के प्रेम की बात, बीज और रोटी देनेवाले परमेश्वर का वचन, और अंत में यह अध्याय एक ऐसी साँस पर ठहर जाता है जो पैसे से कहीं आगे जाती है: "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।"
2 कुरिन्थियों 9 किस विषय में है?
अध्याय का आखिरी वाक्य अचानक पैसे की दुनिया से बाहर निकल जाता है: "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।" पौलुस यह नहीं बताते कि वह दान क्या है। वे उसे नाम नहीं देते, क्योंकि शायद नाम दे ही नहीं सकते। पर इसी पत्र में कुछ पंक्तियाँ पहले उन्होंने कहा था कि मसीह धनी होकर भी हमारे लिये कंगाल बन गए, ताकि हम उनकी कंगाली से धनी हो जाएँ। वही पैटर्न यहाँ दोहराया जा रहा है, बस छोटे पैमाने पर: कुरिन्थ के लोग अपनी थैली हल्की करते हैं ताकि यरूशलेम के भाइयों की थाली भरी रहे। पूरी मुक्ति की कहानी इसी दिशा में बहती है, ऊपर से नीचे, भरे हुए से खाली की ओर। और जो इस धारा में उतरता है, वह केवल दान नहीं देता, वह मसीह के आकार में ढलने लगता है।
2 कुरिन्थियों 9 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही, दिन ढलने से पहले, एक नाम लिखिए, किसी ऐसे व्यक्ति या काम का जिसे सचमुच ज़रूरत है, उसके लिये एक निश्चित रकम अभी अलग कर दीजिए, और अलग करते समय ज़ोर से कहिए: "यह बीज पहले आपका दिया हुआ था।"
2 कुरिन्थियों 9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
कुरिन्थ के लोग संरक्षक-व्यवस्था में जीते थे। धनी आदमी सार्वजनिक दान देता था, और बदले में उसका नाम पत्थर पर खुदता था, सम्मान मिलता था, वफादारी मिलती थी। देना एक सौदा था, इज़्ज़त की मुद्रा में चुकाया जाने वाला। पौलुस उसी भाषा से शुरू करते हैं, घमण्ड, लज्जा, तैयारी, और फिर उसे पलट देते हैं: धन्यवाद देनेवालों का मुँह दानी की ओर नहीं, परमेश्वर की ओर उठता है। पत्थर पर किसी का नाम नहीं खुदेगा। और एक बात और, जो हमें अक्सर नहीं सुनाई देती: यह गैर-यहूदी पैसा यहूदी विश्वासियों के पास जा रहा था, उन लोगों के पास जो अब तक इन्हें संदेह से देखते थे। यह चंदा एक दीवार गिराने का प्रयास था।
2 कुरिन्थियों 9 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है" को पढ़ते हुए आपके भीतर पहली प्रतिक्रिया क्या उठती है, आनंद या दोष-भाव? और वह प्रतिक्रिया आपके परमेश्वर-चित्र के बारे में क्या कहती है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

2 Corinthians 9 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस यरूशलेम के गरीब विश्वासियों के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा था, और वह उस दान को "प्रमाण" कहता है: "क्योंकि इस सेवा से प्रमाण लेकर वे परमेश्वर की महिमा प्रकट करते हैं कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान लेकर उसके अधीन हो गए हो।"

सोचिए, आपका खुला हाथ इस बात का सबूत बन जाता है कि आपने सुसमाचार को सचमुच मान लिया है। और उसका नतीजा तारीफ नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा है। आज आपकी जेब आपके विश्वास के बारे में क्या गवाही दे रही है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।"

पौलुस यरूशलेम के गरीब विश्वासियों के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा था, फिर भी किसी पर दबाव नहीं डाला। परमेश्वर को तेरी राशि से ज़्यादा तेरे मन का भाव प्यारा है। आज जो तू देता है, क्या वह कुढ़ते हुए देता है, या खुशी से?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 6

पिता, धन्यवाद कि आपने बोने और काटने का नियम ठहराया, "जो बहुत बोता है वह बहुत काटेगा भी।" धन्यवाद कि मेरे हाथ में देने के लिए कुछ है, और जो मैं खुले मन से बाँटता हूँ वह खोया नहीं जाता, बल्कि आपके हाथों में बीज बनकर फल लाता है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जो कुछ मेरे हाथ में है वह तेरा ही दिया हुआ है। मुझे ऐसा दिल दे जो किसी की कमी देखकर चुप न रहे, बल्कि खुलकर बाँटे। और जब किसी की जरूरत पूरी हो, तो मेरी नहीं, तेरी ही स्तुति हो। धन्यवाद की एक लहर तुझ तक पहुँचे।

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