2 राजाओं 12
पाठ
"जब तक यहोयादा याजक योआश को शिक्षा देता रहा, तब तक वह वही काम करता रहा जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है।" यह "जब तक" पूरे अध्याय पर छाया की तरह पड़ा हुआ है। सात साल का बचाया हुआ राजकुमार अब सिंहासन पर है, चालीस साल राज करता है, और मंदिर की टूट-फूट सुधारने का बड़ा काम शुरू करता है। पर याजक तेईसवें वर्ष तक कुछ नहीं करते; तब यहोयादा एक सन्दूक बनाता है जिसके ढक्कन में छेद है, पैसा इकट्ठा होता है, कारीगर ईमानदारी से काम करते हैं। और फिर, जब अराम का हजाएल यरूशलेम की ओर मुँह करता है, वही राजा मंदिर का सारा सोना निकालकर उसे भेज देता है। अंत में उसके अपने कर्मचारी उसे मार डालते हैं।
मर्म
यह अध्याय परमेश्वर के बारे में एक असहज बात कहता है: वे केवल भव्य क्षणों के नहीं, रोज़मर्रा की मरम्मत के भी परमेश्वर हैं। लकड़ी, गढ़े हुए पत्थर, बढ़ई, राजमिस्त्री। कोई चमत्कार नहीं, कोई भविष्यवक्ता नहीं, बस टपकती छत और खर्च का हिसाब। पर उससे भी गहरी बात यह है कि पाठ योआश की धार्मिकता को शर्त के साथ बाँध देता है। वह "ठीक" करता रहा, पर किसके सहारे? और सुधार अधूरा रह गया: "तो भी ऊँचे स्थान गिराए न गए।" परमेश्वर बाहरी व्यवस्था से प्रभावित नहीं होते। वे पूछते हैं कि आज्ञाकारिता की जड़ कहाँ है, अपने भीतर या किसी और की रीढ़ में।
सूत्र
मंदिर इस कहानी में दो बार दिखता है: पहले मरम्मत होते हुए, फिर लूटे जाते हुए, और लूटने वाला कोई शत्रु नहीं, वही राजा है जिसने उसे सुधारा था। यही यहूदा के इतिहास का दुखद ढर्रा है, और यही बताता है कि पत्थरों का घर कभी अंतिम उत्तर नहीं था। जब यीशु मसीह ने अपने शरीर को मंदिर कहा और कहा कि इसे ढा दो, तीन दिन में खड़ा कर दूँगा, तो उन्होंने वह किया जो योआश ने उलटा किया था। योआश ने शांति खरीदने के लिए पवित्र वस्तुएँ दे दीं; मसीह ने शांति बनाने के लिए स्वयं को दे दिया। और वे ऐसे राजा हैं जिन्हें किसी यहोयादा की बैसाखी नहीं चाहिए, क्योंकि उनकी आज्ञाकारिता उधार की नहीं थी।
आईना
पूछिए अपने आप से: आपका यहोयादा कौन है? वह पादरी, वह मित्र, वह जीवनसाथी, वह पिता जिसकी उपस्थिति में आप स्वाभाविक रूप से अच्छे बन जाते हैं। यदि कल वह न रहे, तो आपका विश्वास कितने दिन खड़ा रहेगा? दूसरा प्रश्न और चुभता है: तेईस वर्ष। आप भी जानते हैं कि क्या टूटा हुआ है। वह बातचीत जो आपने पत्नी के साथ टाल रखी है, वह कर्ज़ जिसका सामना आप नहीं करते, वह माफ़ी जो गले में अटकी है। नीयत नेक है, आदेश दिया जा चुका है, और फिर भी सालों बीत जाते हैं। और तीसरा: जब डर सिर पर आता है, तो आप सबसे पहले क्या बेच देते हैं? नौकरी बचाने के लिए ईमानदारी, इज़्ज़त बचाने के लिए सच्चाई। हजाएल हट जाता है, पर मंदिर खाली हो चुका होता है।
मुख्य पात्र
योआश एक बचाया हुआ बच्चा है। खून की उस रात से छिपाकर निकाला गया, मंदिर के कमरों में पला, याजक के हाथों गढ़ा गया। ऐसे व्यक्ति में एक खास तरह की भलाई होती है, सच्ची पर उधार की। वह मंदिर से प्रेम करता है क्योंकि वही उसका घर था, और वह याजकों की ढिलाई पर सचमुच नाराज़ होता है: "भवन में जो कुछ टूटा फूटा है, उसे तुम क्यों नहीं सुधारते?" यह गुस्सा असली है। पर जिस आदमी का चरित्र किसी और के भरोसे बना हो, वह दबाव में खोखला निकलता है। जो सोना उसने इकट्ठा करवाया, वही उसने डर के मारे बाहर भेज दिया। और जिन कर्मचारियों के बीच वह जीवन भर रहा, उन्हीं ने उसे मिल्लो के भवन में मार डाला।
संदर्भ
यह नौवीं सदी ईसा पूर्व है। उत्तर में येहू ने खून से सत्ता ली है, दक्षिण में अतल्याह ने दाऊद के वंश का लगभग सफाया कर दिया था और योआश अकेला बचा था। अराम का हजाएल उस समय की सबसे भारी सैन्य ताकत है; गत का गिरना यरूशलेम के लिए साफ़ चेतावनी थी। मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं, राष्ट्रीय खज़ाना भी था, इसलिए उसका सोना कूटनीति की मुद्रा बन जाता है। याजक-वर्ग की अपनी आमदनी थी, अपने "जान-पहचान के लोग", और राजा का हस्तक्षेप उनके अधिकार-क्षेत्र में सेंध था। सन्दूक का समाधान चतुर है: पैसा किसी के निजी हाथ से नहीं गुज़रता, और मरम्मत आखिरकार शुरू होती है।
अंतर्पाठ
यहोयादा का बनाया वह सन्दूक इतिहास में फिर दिखता है: सदियों बाद यीशु मसीह मंदिर के भंडार के सामने बैठकर देखते रहे कि लोग क्या डाल रहे हैं, और एक विधवा की दो दमड़ियाँ सबसे बड़ी ठहरीं। जो व्यवस्था बेईमानी रोकने के लिए बनी थी, वही जगह बनी जहाँ परमेश्वर ने दिल को तौला। दूसरी गूँज 2 इतिहास 24 से आती है, जहाँ बताया गया है कि यहोयादा की मृत्यु के बाद योआश ने उसी के बेटे जकर्याह को मंदिर के आँगन में पथराव करवा दिया। तब जाकर समझ आता है कि अध्याय 12 का ठंडा अंत, अपने ही सेवकों के हाथों हत्या, कोई अकारण दुर्घटना नहीं थी।
चिंतन
आपके जीवन में कौन सी "टूट-फूट" है जिसका आदेश आप वर्षों से दे रहे हैं पर मरम्मत शुरू नहीं हुई, और आप किससे कहेंगे कि वह इस सप्ताह आपसे इसका हिसाब पूछे?
यदि आपके जीवन का यहोयादा कल हट जाए, तो आपकी आज्ञाकारिता में क्या बचेगा, और वह जड़ आप आज कैसे गहरी कर सकते हैं?
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2 Kings 12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
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2 राजाओं 12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Kings 12 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
मंदिर की मरम्मत का पैसा मरम्मत में ही लगा, और "दोषबलि और पापबलि का रुपया यहोवा के भवन में न लाया जाता था, वह याजकों का होता था।" हर पैसे की अपनी जगह थी, कोई घालमेल नहीं। परमेश्वर का काम भी तब सुंदर होता है जब हिसाब साफ हो। आज तेरे हाथ में जो आया है, क्या वह उसी जगह जा रहा है जहाँ जाना चाहिए?
हे प्रभु, जो जीवन अच्छी शुरुआत से शुरू होता है वह कभी बीच में भटक जाता है, यह सोचकर मेरा मन कांपता है। मुझे अंत तक तेरे पीछे चलने की सच्चाई दे। जब अपने ही मुझे चोट पहुँचाएँ, तब भी मेरा भरोसा तुझ पर बना रहे, क्योंकि तू ही सदा रहता है।
मंदिर में आया चंदा सबसे पहले चाँदी के कटोरों पर नहीं लगा, बल्कि "राजमिस्त्रियों और पत्थर गढ़नेवालों को" दिया गया, और लकड़ी और गढ़े हुए पत्थर मोल लेने में। पहले दरार भरी गई, सजावट बाद में। तेरे जीवन में भी शायद परमेश्वर पहले वही टूटी जगह ठीक करना चाहता है जिसे तू पर्दे से ढक कर रखता है।
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