2 तीमुथियुस 1
पाठ
रोम की एक जेल से एक बूढ़ा कैदी अपने आत्मिक पुत्र को लिखता है। पौलुस तीमुथियुस को उसकी नानी और माँ के विश्वास की याद दिलाता है, उसे कहता है कि परमेश्वर के वरदान को फिर प्रज्वलित करे, सुसमाचार के कारण दुःख उठाने से न शरमाए, और उस "अच्छी धरोहर" की रखवाली करे जो उसे सौंपी गई है। बीच में वह रुककर उद्धार का पूरा नक्शा खोल देता है: अनादिकाल का अनुग्रह, मसीह का प्रगट होना, मृत्यु का नाश। और अंत में दो नाम जो भाग गए, और एक नाम जो जंजीरों से नहीं शरमाया।
मर्म
नौवें और दसवें पद में पौलुस साँस लेने से पहले पूरी बाइबल का सार कह देता है। उद्धार "हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है; जो मसीह यीशु में अनादिकाल से हम पर हुआ है।" ध्यान दें: अनुग्रह समय के भीतर की कोई प्रतिक्रिया नहीं है, कोई आपातकालीन योजना नहीं जो आदम के गिरने के बाद बनी। वह मसीह में सृष्टि से पहले ही हम पर हो चुका था, और इतिहास में केवल "प्रकाशित" हुआ। इसका अर्थ है कि आपके भरोसे की नींव आपके व्यवहार में नहीं, बल्कि परमेश्वर के अपने संकल्प में गड़ी है। और यही वजह है कि जेल पौलुस को हिला नहीं सकती। जो अनुग्रह अनादिकाल से चला आ रहा है, उसे रोम की जंजीरें रोक नहीं सकतीं।
सूत्र
"जिसने मृत्यु का नाश किया, और जीवन और अमरता को उस सुसमाचार के द्वारा प्रकाशमान कर दिया।" यह वाक्य पूरे पुराने नियम की सबसे गहरी दरार पर हाथ रखता है। अदन से लेकर सभोपदेशक तक मृत्यु वह दीवार है जिसके पार कोई वादा नहीं जाता; इस्राएल की प्रतिज्ञाएँ भूमि, संतान, आशीष की भाषा में थीं, और कब्र उन सबको निगल जाती थी। पौलुस कहता है कि मसीह के प्रगट होने में वह दीवार तोड़ी जा चुकी है। "जीवन की प्रतिज्ञा" (पद 1) जिस पर उसकी प्रेरिताई खड़ी है, वही वाचा की अंतिम पूर्ति है: परमेश्वर अपने लोगों का परमेश्वर बना रहेगा, कब्र के इस पार भी और उस पार भी। तीमुथियुस की नानी लोइस से लेकर पौलुस की जंजीरों तक, यह एक ही धारा है।
दर्पण
पौलुस दो बार लज्जा की बात करता है, और यह संयोग नहीं। रोम में इज्ज़त सब कुछ थी, और एक जंजीर में बंधे गुरु का शिष्य होना सामाजिक आत्महत्या थी। हमारी लज्जा के कारण बदल गए हैं, रूप नहीं। दफ्तर में जब बात धर्म पर आती है और आप विषय बदल देते हैं। रिश्तेदारी में जब किसी ने आपके विश्वास को पिछड़ापन कहा और आप मुस्कुराकर टाल गए। वह बीमार भाई जिससे मिलने जाना असुविधाजनक था, इसलिए आपने बस संदेश भेज दिया। उनेसिफुरूस ने रोम में "बड़े यत्न से ढूँढ़कर" पौलुस से भेंट की, यानी उसने जेल की गंदी गली में जाकर पूछताछ की, अपना नाम खतरे में डाला। फूगिलुस और हिरमुगिनेस ने कुछ बुरा नहीं किया; वे केवल चुपचाप हट गए। अक्सर विश्वास ऐसे ही छूटता है, इनकार से नहीं, दूरी से।
अंतर्पाठ
जब पौलुस कहता है कि मसीह ने मृत्यु का नाश किया, तो वह 1 कुरिन्थियों 15 की उसी घोषणा को दोहरा रहा है जहाँ मृत्यु को अंतिम शत्रु कहा गया है जिसका अंत होगा। फर्क यह है कि वहाँ वह भविष्य में था, यहाँ बीती बात के रूप में कहा गया है: निर्णायक प्रहार हो चुका, बस उसका पूरा असर "उस दिन" खुलेगा। और "पवित्र आत्मा के द्वारा जो हम में बसा हुआ है" यह वाक्य यहेजकेल की उस प्रतिज्ञा की गूँज है, जहाँ परमेश्वर अपने लोगों के भीतर अपना आत्मा रखने का वादा करते हैं। यानी धरोहर की रखवाली तीमुथियुस के अनुशासन पर नहीं, उसके भीतर बसे परमेश्वर पर टिकी है।
प्रश्न
चौदहवें पद में तीमुथियुस को धरोहर की रखवाली करनी है, और बारहवें पद में परमेश्वर पौलुस की धरोहर की रखवाली करते हैं। यूनानी शब्द पाराथेके का अर्थ है वह अमानत जो किसी के हाथ में सौंपी जाती है। तो असली रखवाला कौन है? पाठ इस तनाव को सुलझाता नहीं। और यह असुविधाजनक है, क्योंकि पाँच पद बाद हम पढ़ते हैं कि आसिया के सब लोग पौलुस से फिर गए। यदि परमेश्वर रखवाली करते हैं, तो फूगिलुस का क्या हुआ? पौलुस उत्तर नहीं देता, वह केवल प्रार्थना करता है कि उनेसिफुरूस पर "उस दिन" दया हो। शायद यही ईमानदार जगह है जहाँ हमें खड़ा रहना है: सुरक्षा का वचन आलस्य का बहाना नहीं, और सतर्कता की पुकार भय का कारण नहीं। दोनों हाथ एक ही अमानत पर हैं।
संदर्भ
यह पौलुस के जीवन के अंतिम पत्रों में से एक है, लगभग साठ के दशक के मध्य में, नीरो के रोम से। पहली कैद के मुकाबले अब हालात बदल चुके हैं: वह किराए के घर में नहीं, जंजीरों में है, और साफ जानता है कि निकलना नहीं है। तीमुथियुस इफिसुस में है, एक जवान अगुवा, स्वभाव से कोमल, आँसुओं वाला (पद 4), एक यूनानी पिता और यहूदी माँ का बेटा, जो दोनों दुनियाओं के बीच खड़ा है। उसके ऊपर एक ऐसी कलीसिया की जिम्मेदारी है जहाँ झूठी शिक्षा फैल रही है और जहाँ मुख्य प्रेरित का नाम अब बदनामी बन गया है। इसी कमजोर लड़के के हाथ में पौलुस पूरा सुसमाचार सौंपकर कहता है: प्रज्वलित कर दे।
चिंतन
आप किन जगहों पर "चुपचाप हट जाने" के रास्ते पर हैं, बिना कभी विश्वास का इनकार किए?
यदि आपका उद्धार अनादिकाल के अनुग्रह पर टिका है और आपके कामों पर नहीं, तो इस हफ्ते की किसी एक चिंता में यह सच व्यावहारिक रूप से क्या बदलता है?
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2 Timothy 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
2 तीमुथियुस 1 का क्या अर्थ है?
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2 Timothy 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पौलुस जेल में है, जंजीरों में, और फिर भी उसकी रातें किसी और के नाम से भरी हैं: "अपनी प्रार्थनाओं में रात दिन तुझे लगातार स्मरण करता हूँ।" दुख आदमी को अपने भीतर समेट लेता है, पर यहाँ उल्टा हुआ। सोचो, तुम्हारी आखिरी कठिन रात में किसका नाम तुम्हारे होंठों पर था?
पौलुस जंजीरों में बैठा है, और फिर भी लिखता है, "मैं उसे जिस पर मैंने विश्वास किया है, जानता हूँ।" ध्यान दे, उसने यह नहीं कहा कि मुझे सब कुछ मालूम है। उसे अपने हालात की समझ नहीं थी, पर अपने प्रभु की पहचान थी। तेरे पास भी शायद जवाब न हों। पर क्या तू उसे जानता है, जिसके हाथ में तेरी धरोहर सुरक्षित है?
पौलुस जंजीरों में था, वह उनेसिफुरुस को कुछ भी लौटा नहीं सकता था। बस इतना ही कह सका, "प्रभु करे कि उस दिन उस पर प्रभु की दया हो।" सोचो, जिस इंसान ने तुम्हें थका हुआ पाकर ताज़गी दी थी, उसके लिए तुम्हारी प्रार्थना ही सबसे बड़ा धन्यवाद है। क्या आज किसी का नाम तुम्हारे होंठों पर है?
तू जानता है, कि आसिया के सब लोग मुझ से फिर गए हैं, जिनमें फूगिलुस और हिरमुगिनेस हैं।" पौलुस ने जिन्हें मसीह तक पहुँचाया था, वही जंजीरों के दिनों में दूर खड़े रहे। उसने नाम तक लिख दिए, क्योंकि दर्द असली था। क्या तुम किसी ऐसे को जानते हो जो अभी अकेला पड़ा है? आज उसके पास जाओ, नाम भूलने के लिए नहीं, साथ देने के लिए।
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