इफिसियों 2:8
पाठ
इफिसुस के किसी घर में, दीये की रोशनी में, यह पत्र ऊँचे स्वर में पढ़ा जा रहा है। सुननेवालों में बुनकर हैं, दास हैं, कुछ धनी व्यापारी भी; कुछ ही महीने पहले तक इनमें से अनेक अरतिमिस के मन्दिर में चढ़ावा चढ़ाते थे, तौल-तौलकर देवताओं को खुश करने की कोशिश करते थे। और अब पढ़नेवाला यह वाक्य पढ़ता है: "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है"। सार यह है: तुम्हारा बचाया जाना तुम्हारी कमाई नहीं, तुम्हारी उपलब्धि नहीं, तुम्हारे धार्मिक परिश्रम का फल नहीं। यह ऊपर से आया हुआ उपहार है, और विश्वास वह खुला हाथ है जिसमें वह उपहार रखा जाता है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि पौलुस ने यह वाक्य कहाँ रखा है। ठीक पहले उसने कहा था कि हम "अपराधों के कारण मरे हुए थे"। मुर्दा आदमी अपने उठने में सहयोग नहीं करता। वह न हाथ बढ़ाता है, न आधा रास्ता चलकर आता है। इसलिए जब वचन कहता है "यह तुम्हारी ओर से नहीं", तो यह विनम्रता का शिष्टाचार नहीं, तथ्य का कथन है। अनुग्रह उद्धार का साधन नहीं, उसका स्रोत है; विश्वास उसका मूल्य नहीं, उसे ग्रहण करने का माध्यम है। और "दान" शब्द निर्णायक है: उपहार वही है जिसके लिए देनेवाले के पास कारण हो, लेनेवाले के पास नहीं। इसका अर्थ यह है कि आपके सबसे बुरे दिन आपकी स्थिति परमेश्वर के सामने कमज़ोर नहीं करते, और आपके सबसे भक्तिपूर्ण दिन उसे मज़बूत नहीं करते। यह डरावना भी है और मुक्तिदायक भी।
मुख्य सूत्र
यह वाक्य पौलुस की खोज नहीं, परमेश्वर की पुरानी आदत है। अब्राहम के पास कोई वंश नहीं था, कोई योग्यता नहीं, और परमेश्वर ने उसे वाचा दी। इस्राएल मिस्र में ईंटें बना रहा था, छुड़ाए जाने की कोई कीमत चुकाने की हालत में नहीं, और परमेश्वर ने उसे निकाल लाया। भविष्यद्वक्ताओं ने बार-बार यही कहा कि परमेश्वर अपने ही नाम के कारण क्षमा करते हैं, इसलिए कि उनका स्वभाव ऐसा है, न इसलिए कि हमारा रिकॉर्ड अच्छा है। क्रूस पर यही धारा अपने गहरेपन तक पहुँचती है: वहाँ दान की कीमत चुकानेवाला देनेवाला स्वयं है। और इसी अध्याय में आगे पौलुस यही सिद्धांत समाज पर लागू करता है, कि "मसीह के लहू के द्वारा निकट हो गए हो"। जो अनुग्रह से जीता है, वह दूसरों को दूर नहीं रख सकता।
आईना
यहाँ चुभने वाली बात यह है कि हम अनुग्रह पर विश्वास करते हैं और साथ ही चुपचाप हिसाब भी रखते हैं। जिस सप्ताह प्रार्थना नियमित रही, आप परमेश्वर के सामने आत्मविश्वास से खड़े होते हैं; जिस सप्ताह आप चिड़चिड़े रहे, बच्चों पर चिल्लाए, वही पुराना पाप फिर हार गया, आप भीतर ही भीतर खुद को सज़ा देकर योग्य बनने की कोशिश करते हैं। यह अनुग्रह नहीं, अरतिमिस के मन्दिर की वही तराज़ू है, केवल नया नाम पहनकर। और यही तराज़ू हम दूसरों पर भी लगाते हैं: उस रिश्तेदार पर, उस सहकर्मी पर, जिसे हमने मन ही मन "अभी लायक नहीं" घोषित कर दिया है।
आज कागज़ पर वे दो या तीन बातें लिखिए जिनसे आप चुपके-चुपके परमेश्वर का पक्ष कमाते हैं। सूची के ऊपर लिखिए: "दान"। फिर उस कागज़ को फाड़कर फेंक दीजिए।
मुख्य पात्र
इस वाक्य का मुख्य पात्र न पौलुस है, न विश्वास करनेवाला मनुष्य; मुख्य पात्र देनेवाला है। पौलुस ने पद 4 में उसका परिचय दिया: वे "दया का धनी" हैं, और उनका प्रेम "बड़ा" है। यूनानी में "दान" शब्द है दोरोन, वह उपहार जो त्योहार पर, बिना मोल-भाव, बिना बदले की अपेक्षा दिया जाता है। परमेश्वर को यहाँ एक ऐसे पिता के रूप में देखिए जो मरे हुए बच्चे के पास झुकता है और उसे जीवित करता है, और फिर उठाकर अपने साथ बिठा लेता है। यह भावुक उदारता नहीं; पद 7 कहता है कि इसका उद्देश्य है कि वे "आनेवाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए"। परमेश्वर हमारे उद्धार को अपने चरित्र का सार्वजनिक प्रमाण बनाते हैं।
संदर्भ
इफिसुस रोमी एशिया का सबसे रौनकदार शहर था: बन्दरगाह, बाज़ार, और अरतिमिस का वह विशाल मन्दिर जिसके इर्द-गिर्द पूरी अर्थव्यवस्था घूमती थी। धर्म वहाँ लेन-देन था। चढ़ावा दो, मन्नत मानो, ताबीज़ खरीदो, देवी प्रसन्न रहेगी। जादू-टोने की किताबें इस शहर की पहचान थीं। इसी माहौल से निकले लोग अब मसीही मंडली में बैठे हैं, और उनके साथ वे यहूदी विश्वासी भी हैं जो जीवन भर व्यवस्था, खतना और शुद्धता के नियमों में योग्यता का हिसाब सीखते आए हैं। दोनों तरफ के लोगों की धार्मिक भाषा में "कमाना" गहराई तक बैठा है। पौलुस, जो स्वयं कैद में है और जिसके पास दिखाने के लिए कोई सफलता नहीं, उन्हें एक ऐसा उद्धार सुनाता है जिसमें कोई चढ़ावा बाकी नहीं बचा।
अन्य वचनों की गूँज
यीशु की वह कहानी इसी वाक्य का चित्र है जिसमें फरीसी मन्दिर में खड़ा होकर अपने उपवास और दसवाँश गिनाता है, और चुंगी लेनेवाला दूर खड़ा, आँखें झुकाए, केवल दया माँगता है; घर धर्मी ठहराकर वही लौटता है जिसके हाथ खाली थे। और रोमियों में पौलुस अब्राहम का उदाहरण देकर वही तर्क देता है: जो मज़दूरी है वह अनुग्रह नहीं, और जो अनुग्रह है वह मज़दूरी नहीं। इसके विपरीत खड़ा है पद 9 का चेतावनी-स्वर, "ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे"। यानी अनुग्रह केवल हमें बचाता नहीं, हमारी शेखी भी तोड़ता है। और फिर पद 10 आता है, ताकि कोई यह न सोचे कि अनुग्रह आलस्य का बहाना है: दान पाया हुआ जीवन काम करता है, कमाने के लिए नहीं, धन्यवाद में।
चिंतन के प्रश्न
पिछले महीने में किस क्षण आपने भीतर से महसूस किया कि आप परमेश्वर के प्रेम के "लायक" नहीं रहे, और उस पल में आपने क्या कमाने की कोशिश की?
यदि आपका उद्धार पूरी तरह दान है, तो आपके जीवन में वह व्यक्ति कौन है जिसे आप अभी भी योग्यता की तराज़ू पर तौल रहे हैं?
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Ephesians 2:8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इफिसियों 2:8 का क्या अर्थ है?
इफिसियों 2:8 किस विषय में है?
इफिसियों 2:8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसियों 2:8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इफिसियों 2:8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ephesians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, तू उन तक भी आया जो तुझसे बहुत दूर खड़े थे, और उन तक भी जो पास थे। मैं अक्सर खुद को दूर महसूस करता हूँ, फिर भी तेरी शांति की आवाज़ मुझ तक पहुँचती है। मुझे सुनने दे, और तेरे पास लौटने का साहस दे।
पिता, मुझे याद है कि एक समय मैं दूर था, बाहर खड़ा, तेरे लोगों में गिना भी नहीं जाता था। पर तूने मुझे भुलाया नहीं। यह याद मुझे घमंडी होने से बचाए और नरम बनाए, ताकि मैं भी किसी को बाहर का न समझूँ।
उस समय तुम मसीह से अलग... और आशाहीन और जगत में परमेश्वर रहित थे।" पौलुस चाहता है कि तुम अपना पुराना पता याद रखो। जहाँ कोई वादा नहीं था, कोई घर नहीं था। यह याद इसलिए नहीं कि तुम शर्मिंदा रहो, बल्कि इसलिए कि आज जो तुम्हारे पास है वह तुमने कमाया नहीं, वह तुम्हें दिया गया है। कभी सोचा है, अगर मसीह न मिलते तो आज तुम कहाँ खड़े होते?
जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है।" कोने का पत्थर वह होता है जिससे हर दीवार की सीधाई नापी जाती है। अगर वह टेढ़ा हो, पूरी इमारत टेढ़ी हो जाती है। सोच, तेरी ज़िंदगी में किस चीज़ से तू नाप रहा है, लोगों की राय से, अपनी समझ से, या मसीह से? तू अकेली ईंट नहीं है, तू एक घर का हिस्सा है जिसे परमेश्वर खुद जोड़ रहा है।
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