इफिसियों 2:5
पाठ
पौलुस एक लम्बे वाक्य के बीचोंबीच खड़ा है। पहले तीन पदों में उसने हमारी हालत का जो चित्र खींचा, वह निर्दय है: अपराधों और पापों के कारण मरे हुए, संसार की रीति पर चलते हुए, "क्रोध की सन्तान।" फिर पद चार में वह मोड़ आता है, "परन्तु परमेश्वर," और पद पाँच उस मोड़ को पूरा करता है: "जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।" ध्यान दीजिए, वाक्य में कर्ता एक ही है और वह हम नहीं हैं। मरे हुओं ने कुछ नहीं किया; परमेश्वर ने जिलाया। और बीच वाक्य में ही, मानो पौलुस स्वयं को रोक न पाया हो, वह घोषणा फूट पड़ती है जिसे वह पद आठ में दोहराएगा: उद्धार अनुग्रह से है।
मूल बात
यह पद बीमारी का नहीं, मृत्यु का निदान करता है। बीमार आदमी दवा माँग सकता है; मुर्दा कुछ नहीं माँगता। पौलुस यह नहीं कहता कि हम कमज़ोर थे, भटके हुए थे या सुधार की गुंजाइश रखते थे। वह कहता है, मरे हुए थे। इससे हर उस धर्म की जड़ कट जाती है जिसमें मनुष्य पहला कदम उठाता है और परमेश्वर उसका जवाब देते हैं। यहाँ पहला कदम परमेश्वर का है, और वह भी तब, जब हम में उसे स्वीकारने की योग्यता भी नहीं थी। "जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे" वह समय-चिह्न है जो हमारी सारी शेखी चुप करा देता है। और जो शब्द इस काम का नाम है, वह "अनुग्रह" है: बिना शर्त, बिना योग्यता, बिना हिसाब। साथ ही यह जीवन अलग से नहीं मिलता, "मसीह के साथ" मिलता है। हमारा नया जीवन उधार का जीवन है, उनके पुनरुत्थान में हिस्सेदारी।
सूत्र
परमेश्वर का मुर्दों को जिलाना कोई नई बात नहीं है; यह उनकी पुरानी आदत है। आदम मिट्टी का ढेर था जब तक परमेश्वर ने उसमें साँस न फूँकी, और यहेजकेल को जिस घाटी में खड़ा किया गया वहाँ सूखी हड्डियों के सिवा कुछ न था, जिनसे कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती थी। दोनों जगह जीवन बाहर से आता है, ऊपर से, वचन के द्वारा। पौलुस इसी धारा में खड़ा है, पर एक निर्णायक फ़र्क के साथ: अब जीवन "मसीह के साथ" मिलता है। जो कब्र में से जी उठे, हम उन्हीं की जीत में घसीट लिए गए हैं। इसीलिए अगला पद कहता है कि हम "स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ" बैठाए गए। पूरी बाइबल का सूत्र यही है: परमेश्वर वहाँ से शुरू करते हैं जहाँ मनुष्य का हिसाब खत्म हो जाता है।
दर्पण
अब सच बोलिए। आपके भीतर कहीं एक खाता-बही चलती रहती है, है न? रविवार की उपस्थिति, वह सेवा जो कोई और नहीं करता, वह पाप जिससे आप बीस साल से दूर हैं, वह चंदा जो आपने चुपचाप दिया। और उसी बही के सहारे आप परमेश्वर के सामने थोड़ा सीधा खड़े होते हैं, और दूसरों के सामने थोड़ा ऊँचा। यह पद उस बही को जलाकर राख कर देता है, क्योंकि लाश की कोई उपलब्धि नहीं होती। पर ध्यान दीजिए, यही बात उस दूसरे डर को भी काट देती है जो रात में आपको जगाता है: कि आप पर्याप्त नहीं हैं, कि आपकी असफलता, आपकी लत, आपका टूटा रिश्ता आपको दायरे से बाहर कर देता है। जिसने मुर्दे को जिलाया, वह आपके खराब हफ़्ते से घबराता नहीं।
आज एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिसके बल पर आप चुपके से अपने आप को परमेश्वर के सामने स्वीकार्य मानते हैं। फिर उस कागज़ को फाड़िए और ज़ोर से कहिए: "अनुग्रह ही से मेरा उद्धार हुआ है।"
श्रोता
इफिसुस के ये पाठक ज़्यादातर अन्यजाति थे, और शहर धर्म से भरा हुआ था: अरतिमिस का विशाल मन्दिर, जादू-टोने की पोथियाँ, ताबीज़, देवताओं को खुश रखने की अनवरत कोशिश। उनकी पूरी धार्मिक शिक्षा एक ही सिद्धांत पर टिकी थी, कि देवता लेन-देन करते हैं: तुम चढ़ावा दो, वे कृपा करें। ऊपर से यह संरक्षक और आश्रित का समाज था, जहाँ हर उपकार पर कर्ज़ चढ़ जाता था और उसे चुकाना इज़्ज़त का सवाल था। ऐसे कानों में "अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है" कोई मीठा वाक्य नहीं, एक झटका था। और पद बारह उन्हें याद दिलाता है कि वे "आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।" जिनके पास कोई वाचा नहीं थी, उन्हें मुफ़्त में जीवन मिला।
मुख्य पात्र
इस वाक्य का नायक हम नहीं, परमेश्वर हैं, और पौलुस उनका वर्णन व्यापारी की भाषा में करता है: "दया का धनी।" धनी वह है जिसके पास इतना हो कि खर्च करने से घटे नहीं। परमेश्वर की दया कम पड़ने वाली पूँजी नहीं है जिसे सोच-समझकर बाँटना पड़े। और उसका कारण भी वे स्वयं में ही ढूँढ़ते हैं, "अपने उस बड़े प्रेम के कारण जिससे उसने हम से प्रेम किया।" हमारे भीतर कुछ भी आकर्षक नहीं था; प्रेम का स्रोत प्रेमी में था, प्रिय में नहीं। यह परमेश्वर क्रोध की सन्तान को देखकर मुँह नहीं फेरते, बल्कि उसी क्षण, उसी हालत में, हाथ बढ़ाते हैं। यही उनका स्वभाव है, कोई अपवाद नहीं।
प्रश्न
अगर हम सचमुच मरे हुए थे, तो पद आठ का "विश्वास के द्वारा" क्या है? क्या विश्वास हमारा छोटा-सा योगदान है, वह एक प्रतिशत जिस पर हम अन्ततः घमण्ड कर सकें? पौलुस इस दरवाज़े को तुरन्त बन्द कर देता है: "यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।" पर इससे बेचैनी खत्म नहीं होती, क्योंकि विश्वास करता कौन है? मैं ही तो करता हूँ, कोई और मेरी जगह नहीं करता। बाइबल यहाँ दोनों बातें साथ रखती है और उन्हें सुलझाती नहीं। शायद यही ईमानदारी है: जब आप विश्वास करते हैं, वह सचमुच आपका विश्वास होता है, और फिर भी मुड़कर देखने पर आप जानते हैं कि वह भी आपको दिया गया था। इसे समझाइए मत, इसके लिए धन्यवाद दीजिए।
मनन
आपकी अपनी "खाता-बही" में सबसे ऊपर कौन-सी उपलब्धि लिखी है, और उसे छोड़ना आपको इतना कठिन क्यों लगता है?
अगर आपका नया जीवन "मसीह के साथ" मिला है, तो आज का कौन-सा निर्णय इस बात को दिखाएगा कि वह जीवन आपका अपना नहीं, उधार का है?
Ephesians में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
God's new society: Stott at his very best on church and calling.
Paul For Everyone: The Prison Letters
Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.
Grace, church and spiritual battle made wonderfully practical.
Ephesians: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Ephesians 2:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इफिसियों 2:5 का क्या अर्थ है?
इफिसियों 2:5 किस विषय में है?
इफिसियों 2:5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसियों 2:5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इफिसियों 2:5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ephesians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि मैं जो पहले दूर था, अब मसीह यीशु में उसके लहू के द्वारा निकट हो गया हूँ। धन्यवाद कि अब मुझे तेरे सामने आने से डरना नहीं पड़ता, क्योंकि दूरी मिटाने की कीमत यीशु ने अपने लहू से चुकाई।
जिसमें सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।" ध्यान दे, पौलुस कहता है "बनती जाती है", बन चुकी नहीं। तू अभी अधूरा लगता है, तो यही तो सच है। और एक पत्थर अकेले मन्दिर नहीं बनता। जिन लोगों से तू दूरी बनाए रखता है, परमेश्वर उन्हीं के साथ तुझे जोड़कर अपना घर खड़ा कर रहा है।
जिनमें तुम पहले इस संसार की रीति पर... चलते थे।" ध्यान दे, पौलुस ने "चलते थे" कहा, "चलते हो" नहीं। वह बहाव जो तुझे बहाए लिए जा रहा था, अब तेरे पीछे है। पर सच कह, क्या कुछ पुरानी आदतें अब भी तुझे खींचती हैं? मसीह ने तुझे उस धारा से निकाला है। अब बहने की नहीं, चलने की बारी है।
ताकि वह आनेवाले युगों में मसीह यीशु में हम पर दया के द्वारा अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।" सोचो, परमेश्वर ने तुम्हें सिर्फ बचाया ही नहीं, उसने तुम्हें अपने अनुग्रह का नमूना बना दिया। जो कल तक अपराधों में मरा हुआ था, वही अब युगों तक यह गवाही देगा कि उसकी दया कितनी बड़ी है। तुम्हारी कहानी उसकी महिमा का सबूत है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें