बाइबल व्याख्या

इफिसियों 5:26

बाइबल

पाठ

पौलुस पतियों से कह रहा है कि वे अपनी पत्नियों से प्रेम करें, और उदाहरण के तौर पर मसीह की ओर इशारा करते हैं। पर वाक्य वहीं नहीं रुकता। मसीह ने अपने आप को कलीसिया के लिये दे दिया, और उस देने का एक उद्देश्य था: "कि उसको वचन के द्वारा जल के स्नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए।" यह आयत मसीह के बलिदान का लक्ष्य बताती है, एक धुली हुई, अलग की गई दुल्हन।

केंद्रीय सत्य

यहाँ दो क्रियाएँ हैं जो अलग-अलग दिशाओं में काम करती हैं: शुद्ध करना और पवित्र बनाना। पहली सफ़ाई है, मैल हटाना; दूसरी समर्पण है, किसी को परमेश्वर के लिये अलग रख देना। यूनानी शब्द हगिआज़ो का अर्थ केवल "नैतिक रूप से अच्छा बनाना" नहीं, बल्कि "अपने लिये चुन लेना, अपने उपयोग में ले लेना" है। मन्दिर के बर्तन इसी अर्थ में पवित्र थे। तो मसीह का क्रूस केवल अपराधबोध मिटाने का साधन नहीं है; वह स्वामित्व का दावा है। वह गंदगी धोते हैं ताकि हम किसी और के काम न आएँ, केवल उनके। अनुग्रह यहाँ नरम कम्बल नहीं, बल्कि मालिकाना हक़ है। जो धोया गया है, वह अब अपना नहीं रहा।

जोड़ने वाला सूत्र

पुराने नियम में दुल्हन को नहलाने की तस्वीर परिचित है। यहेजकेल के सोलहवें अध्याय में परमेश्वर एक परित्यक्त, ख़ून में लिपटी बच्ची को उठाते हैं, उसे धोते हैं, तेल मलते हैं, वस्त्र पहनाते हैं और वाचा बाँधते हैं। इस्राएल की पूरी कहानी वहीं से चलती है: एक ऐसी दुल्हन जो अपने आप को सुंदर नहीं बना सकती थी। पौलुस उसी छवि को उठाकर कलीसिया पर रख देते हैं। और "जल के स्नान" में याजकों के अभिषेक की गूँज भी है, जिन्हें सेवा से पहले धोया जाता था। बपतिस्मा इसी वाचा का दृश्य चिह्न है। इसलिए आयत 32 में पौलुस कहते हैं, "यह भेद तो बड़ा है"; विवाह सिर्फ़ उपमा नहीं, वाचा की छाया है।

दर्पण

"वचन के द्वारा" शब्द यहाँ आकस्मिक नहीं है। मसीह हमें केवल भावना से नहीं, बोले गए सत्य से धोते हैं। इसका मतलब है कि हमारी शुद्धि वहाँ होती है जहाँ हम शास्त्र को अपने ऊपर बोलने देते हैं, और यही वह जगह है जहाँ हम सबसे ज़्यादा बचकर निकलते हैं। हम उपदेश सुनते हैं और उसे दूसरों पर लागू करते हैं। हम अपने पैसे के फ़ैसलों, अपने फ़ोन की आदतों, दफ़्तर में बोले गए आधे-सच पर वचन को आने नहीं देते। कई बार हम अपनी गंदगी से इतने परिचित हो जाते हैं कि उसे स्वभाव कह देते हैं। पर जिसे मसीह ने अपने लिये अलग किया है, वह स्वभाव के हवाले नहीं छोड़ा जाता। आज घर पर इफिसियों 5:25 से 27 तक ज़ोर से पढ़िए, और जहाँ "कलीसिया" लिखा है, वहाँ अपना नाम बोलिए।

शास्त्र की गूँज

इसी अध्याय की आठवीं आयत को साथ रखिए: "तुम तो पहले अंधकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो।" पौलुस वही तर्क दोहरा रहे हैं, पहले परमेश्वर का कार्य, फिर हमारा चलना। शुद्धि हमारी कोशिश का इनाम नहीं, हमारी पहचान की नींव है। दूसरी गूँज तीतुस की पत्री में है, जहाँ पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर ने हमें हमारे धर्म के कामों से नहीं, बल्कि नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नए बनाने से बचाया। दोनों जगह "स्नान" शब्द वही है, और दोनों जगह कर्ता हम नहीं हैं। यह अंतर छोटा नहीं। धर्म हमेशा हमें अपने आप को धोने भेजता है; सुसमाचार कहता है, तुम्हें धोया जा चुका है, अब उसी के अनुसार जियो।

पहले श्रोता

इफिसुस में रहने वाले लोग एक ऐसे शहर में थे जहाँ अरतिमिस का विशाल मन्दिर खड़ा था और धार्मिक स्नान, शुद्धिकरण की रस्में, मन्नतें रोज़ की बात थीं। वहाँ शुद्धता ख़रीदी जाती थी, अनुष्ठानों से कमाई जाती थी। और उस समाज में दुल्हन का विवाह से पहले स्नान एक जानी-पहचानी रस्म थी, जिसे आमतौर पर दुल्हन का परिवार करवाता था। पौलुस की बात यहाँ चौंकाने वाली रही होगी: दूल्हा स्वयं दुल्हन को नहला रहा है। जो लोग ग़ैर-यहूदी थे, अशुद्ध कहलाते थे, मन्दिर के आँगन से बाहर रखे जाते थे, उनसे कहा जा रहा है कि तुम मसीह की अपनी दुल्हन हो, उन्हीं के हाथों धुली हुई।

मुख्य पात्र

इस आयत का मुख्य पात्र मसीह हैं, और वे यहाँ अजीब तरह से सक्रिय हैं। वे देते हैं, धोते हैं, अलग करते हैं, और आयत 27 में खड़ी भी वही करते हैं। कहीं भी दुल्हन से यह नहीं कहा जाता कि पहले अपने आप को प्रस्तुत करने लायक़ बना ले। यह प्रेम भावुक नहीं है; यह झुककर मैल छूने वाला प्रेम है। और इसका लक्ष्य अपने लिये सुख नहीं, बल्कि दूसरे की महिमा है: बिना कलंक, बिना झुर्री। पौलुस इसी को पतियों के सामने रखते हैं, जो उस ज़माने में अपनी पत्नियों के मालिक माने जाते थे। मसीह का स्वामित्व सेवा के रूप में आता है। यही परमेश्वर का चरित्र है, और यही उनके राज्य का ढंग।

चिंतन

आपके जीवन का कौन सा हिस्सा आप "यही तो मैं हूँ" कहकर वचन की पहुँच से बाहर रखते आए हैं?

यदि मसीह ने आपको अपने लिये अलग किया है, तो इस सप्ताह आपका कौन सा निर्णय इस बात को नज़रअंदाज़ कर रहा है कि आप अब अपने नहीं हैं?

Ephesians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ephesians

John Stott

God's new society: Stott at his very best on church and calling.

Paul For Everyone: The Prison Letters

N.T. Wright

Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Ephesians For You

Richard Coekin

Grace, church and spiritual battle made wonderfully practical.

Ephesians: An Introduction and Commentary

Francis Foulkes

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Ephesians

Klyne Snodgrass

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Ephesians 5:26 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

इफिसियों 5:26 का क्या अर्थ है?
पौलुस पतियों से कह रहा है कि वे अपनी पत्नियों से प्रेम करें, और उदाहरण के तौर पर मसीह की ओर इशारा करते हैं। पर वाक्य वहीं नहीं रुकता। मसीह ने अपने आप को कलीसिया के लिये दे दिया, और उस देने का एक उद्देश्य था: "कि उसको वचन के द्वारा जल के स्नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए।" यह आयत मसीह के बलिदान का लक्ष्य बताती है, एक धुली हुई, अलग की गई दुल्हन।
इफिसियों 5:26 किस विषय में है?
पुराने नियम में दुल्हन को नहलाने की तस्वीर परिचित है। यहेजकेल के सोलहवें अध्याय में परमेश्वर एक परित्यक्त, ख़ून में लिपटी बच्ची को उठाते हैं, उसे धोते हैं, तेल मलते हैं, वस्त्र पहनाते हैं और वाचा बाँधते हैं। इस्राएल की पूरी कहानी वहीं से चलती है: एक ऐसी दुल्हन जो अपने आप को सुंदर नहीं बना सकती थी। पौलुस उसी छवि को उठाकर कलीसिया पर रख देते हैं। और "जल के स्नान" में याजकों के अभिषेक की गूँज भी है, जिन्हें सेवा से पहले धोया जाता था। बपतिस्मा इसी वाचा का दृश्य चिह्न है। इसलिए आयत 32 में पौलुस कहते हैं, "यह भेद तो बड़ा है"; विवाह सिर्फ़ उपमा नहीं, वाचा की छाया है।
इफिसियों 5:26 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इसी अध्याय की आठवीं आयत को साथ रखिए: "तुम तो पहले अंधकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो।" पौलुस वही तर्क दोहरा रहे हैं, पहले परमेश्वर का कार्य, फिर हमारा चलना। शुद्धि हमारी कोशिश का इनाम नहीं, हमारी पहचान की नींव है। दूसरी गूँज तीतुस की पत्री में है, जहाँ पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर ने हमें हमारे धर्म के कामों से नहीं, बल्कि नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नए बनाने से बचाया। दोनों जगह "स्नान" शब्द वही है, और दोनों जगह कर्ता हम नहीं हैं। यह अंतर छोटा नहीं। धर्म हमेशा हमें अपने आप को धोने भेजता है; सुसमाचार कहता है, तुम्हें धोया जा चुका है, अब उसी के अनुसार जियो।
इफिसियों 5:26 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस आयत का मुख्य पात्र मसीह हैं, और वे यहाँ अजीब तरह से सक्रिय हैं। वे देते हैं, धोते हैं, अलग करते हैं, और आयत 27 में खड़ी भी वही करते हैं। कहीं भी दुल्हन से यह नहीं कहा जाता कि पहले अपने आप को प्रस्तुत करने लायक़ बना ले। यह प्रेम भावुक नहीं है; यह झुककर मैल छूने वाला प्रेम है। और इसका लक्ष्य अपने लिये सुख नहीं, बल्कि दूसरे की महिमा है: बिना कलंक, बिना झुर्री। पौलुस इसी को पतियों के सामने रखते हैं, जो उस ज़माने में अपनी पत्नियों के मालिक माने जाते थे। मसीह का स्वामित्व सेवा के रूप में आता है। यही परमेश्वर का चरित्र है, और यही उनके राज्य का ढंग।
इफिसियों 5:26 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि मसीह ने आपको अपने लिये अलग किया है, तो इस सप्ताह आपका कौन सा निर्णय इस बात को नज़रअंदाज़ कर रहा है कि आप अब अपने नहीं हैं?
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Ephesians 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

जो सब कुछ प्रकट करता है, वह ज्योति है।" रोशनी का काम शर्मिंदा करना नहीं, दिखाना है। जो घाव पट्टी के नीचे अंधेरे में छिपा रहता है, वही सड़ता है। खोलने में दर्द होता है, पर भरना वहीं से शुरू होता है। जिस बात को तू सालों से किसी के सामने नहीं लाया, क्या मसीह की रोशनी में उसे रखने का साहस आज तुझमें है? वह तुझे उजागर करने नहीं, चंगा करने आता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

पौलुस लोभ को व्यभिचार और अशुद्धता के साथ एक ही पंक्ति में रख देता है: "कोई लोभी मनुष्य, जो मूर्तिपूजक के बराबर है।" हमें लोभ भला सा लगता है, मेहनत, बचत, थोड़ी और चाह। पर जिस चीज़ को पाने के लिए तू रात भर जागता है, वही तेरे मन की गद्दी पर बैठी है। आज खुद से पूछ: मेरा दिल किसके आगे झुकता है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 2

पिता, मुझे ऐसा प्रेम करना सिखा जो देता है, गिनता नहीं। मसीह ने अपने आप को मेरे लिए दे दिया, और मैं अक्सर थोड़ा सा भी देने में कंजूस हो जाता हूँ। मेरे दिल को नरम कर, ताकि मेरी छोटी बातें भी तेरे सामने मीठी सुगंध बनें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

पौलुस पूरी बात समेटते हुए लिखता है, "तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे।" हर एक। यानी दूसरों के विवाह पर नज़र रखना छोड़ो, अपने घर की ओर देखो। और "अपने समान" का मतलब है, उसकी थकान तुम्हारी थकान बने, उसका अपमान तुम्हें चुभे। और आदर भी कोई महसूस करता है, तभी वह आदर है।

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