बाइबल व्याख्या

इफिसियों 5:22

बाइबल

पाठ

"हे पत्नियों, अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के।" वाक्य छोटा है, पर यह अधूरा है; मूल यूनानी में इस आयत में "अधीन रहो" क्रिया है ही नहीं, वह पिछली आयत से उधार ली गई है। इसलिए इसे अकेले पढ़ना असंभव है। पौलुस अभी-अभी कह चुके हैं: "मसीह के भय से एक दूसरे के अधीन रहो" (5:21), और यह वाक्य उसी लंबे वाक्य की एक शाखा है जो 5:18 के "पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ" से शुरू होता है। संक्षेप में: आत्मा से भरे लोग गाते हैं, धन्यवाद देते हैं, और एक दूसरे के अधीन होते हैं; और उस पारस्परिक अधीनता का पहला ठोस उदाहरण पत्नी है, जो अपने पति के प्रति यह रवैया "जैसे प्रभु के" रखती है।

मूल बात

यहाँ असली बात यह नहीं है कि घर में आदेश कौन देता है, बल्कि यह कि मसीह का शासन घर की देहली तक आता है। "जैसे प्रभु के" एक तुलना है और साथ ही एक सीमा भी: पति प्रभु नहीं है, पर उसके साथ का व्यवहार प्रभु के सामने होता है। यही कारण है कि पौलुस तुरंत पति से कहीं अधिक कठोर माँग करते हैं, "अपने आपको उसके लिये दे दिया" (5:25), जिसमें वही शब्द गूँजते हैं जो 5:2 में मसीह के बलिदान के लिए इस्तेमाल हुए थे। दूसरे शब्दों में, पूरा खंड क्रूस से बहता है। उत्पत्ति 3:16 में जो सम्बंध शाप का हिस्सा बनकर टूटा था, उसे मसीह यहाँ फिर से प्रेम और स्वेच्छा से दी गई सेवा के रूप में गढ़ते हैं। अनुग्रह पहले, आज्ञा उसके बाद।

साझा सूत्र

यह आयत अकेली खड़ी नहीं है, वह एक लंबी गूँज की कड़ी है। पौलुस कुछ ही पंक्तियों बाद उत्पत्ति 2:24 को उद्धृत करते हैं, "और वे दोनों एक तन होंगे", और फिर चौंकाने वाली बात कहते हैं: "यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूँ।" यानी विवाह सृष्टि के आरम्भ से ही किसी और चीज़ की ओर इशारा करता रहा है। भविष्यवक्ताओं ने यही चित्र उठाया था, जब परमेश्वर ने इस्राएल को अपनी दुल्हन कहा, कभी बेवफ़ा, कभी फिर से मोल ली हुई। पौलुस उस धागे को पकड़कर मसीह तक खींचते हैं, और प्रकाशितवाक्य उसे मेम्ने के विवाह-भोज में पूरा करता है। इसलिए पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ़ एक सामाजिक व्यवस्था नहीं, वह उद्धार-कथा का जीता-जागता रूपक है।

दर्पण

यहीं वह जगह है जहाँ पाठ खुरचता है। हम में से अधिकतर लोग इस आयत को हथियार की तरह इस्तेमाल होते देख चुके हैं, या फिर इसे शर्मिंदगी में दबा चुके हैं। पर ध्यान दीजिए कि पौलुस किससे बात कर रहे हैं: वे पति से नहीं कह रहे कि "अपनी पत्नी को अधीन रखो"। वे सीधे पत्नी से कहते हैं, उसे एक स्वतंत्र व्यक्ति मानकर, जो स्वयं प्रभु के सामने निर्णय लेती है। यह आयत किसी दूसरे को नियंत्रित करने का औज़ार नहीं, अपने आप को परखने का दर्पण है। और अगर आप पति हैं, तो आपका आईना आयत 25 है, जहाँ माँग आराम की नहीं, आत्म-त्याग की है। आज शाम अपने जीवनसाथी से (या घर के जिस व्यक्ति के साथ तनाव है, उससे) यह एक सवाल पूछिए: "इस हफ़्ते मैं तुम्हारा बोझ कहाँ हल्का कर सकता हूँ?" और उत्तर सुनकर सफ़ाई मत दीजिए, बस लिख लीजिए।

पहले सुननेवाले

इफिसुस के घरों में ऐसे नियम-संग्रह अनजाने नहीं थे; यूनानी-रोमी नैतिक लेखक गृहस्थी के लिए ठीक ऐसी सूचियाँ लिखते थे, पर वे हमेशा गृहस्वामी को सम्बोधित करते थे और उसे बताते थे कि पत्नी, बच्चों और दासों पर शासन कैसे करना है। पौलुस उस ढाँचे को उधार लेकर उसे भीतर से तोड़ देते हैं। पहला झटका यह कि वे पत्नी से सीधे बात करते हैं। दूसरा, और बड़ा झटका यह कि पति को तीन गुना लंबा उपदेश मिलता है, और उसमें अधिकार का एक शब्द नहीं, केवल क्रूस है। कुलुस्सियों 3:18 में यही बात संक्षेप में आती है; 1 पतरस 3:1 में वह उन स्त्रियों के लिए है जिनके पति विश्वासी नहीं थे। हर जगह सन्दर्भ अलग, पर दिशा एक: मसीह की देह के भीतर सत्ता का मतलब बदल जाता है।

बारीकी

पूरे खंड के दोनों सिरों पर एक ही शब्द खड़ा है: भय, यूनानी में "फ़ोबोस"। आयत 21 में "मसीह के भय से", और आयत 33 में "पत्नी भी अपने पति का भय माने"। यह डर नहीं, आदर है, वही श्रद्धा जो पुराने नियम में परमेश्वर के प्रति "भय" कहलाती है। पर ध्यान दीजिए कि यह कोष्ठक कहाँ से शुरू होता है: आदर का स्रोत मसीह हैं, पति नहीं। पत्नी जो देती है, वह मसीह की ओर देखते हुए देती है, और इसीलिए कोई भी पति उसे माँग नहीं सकता, केवल पा सकता है।

कठिन सवाल

फिर आयत 24 का "हर बात में" क्या करें? यह शब्द भारी है और उसे हल्का कर देना बेईमानी होगी। पर वही खंड अपनी सीमा भी खींचता है: "जैसे प्रभु के"। जहाँ पति वह माँगे जो प्रभु कभी नहीं माँगेंगे, वहाँ अधीनता उसी क्षण आज्ञा-उल्लंघन बन जाती है, क्योंकि तुलना टूट चुकी है। हिंसा, अपमान या पाप में साथ देना इस आयत का पालन नहीं, उसका उल्टा है। इसके बावजूद असहजता पूरी तरह नहीं मिटती, और शायद मिटनी भी नहीं चाहिए। पौलुस स्वयं कहते हैं, "यह भेद तो बड़ा है", मानो वे भी जानते हों कि यह चित्र हमारे हाथ में पूरी तरह नहीं समाता।

चिंतन के प्रश्न

आप इस आयत को किसके बारे में सोचकर पढ़ते हैं, अपने बारे में या अपने साथी के बारे में, और यह चुनाव आपके बारे में क्या कहता है?

यदि आपका विवाह (या आपका कोई भी करीबी रिश्ता) मसीह और कलीसिया की कहानी सुनाता है, तो इस समय वह कौन-सा अध्याय सुना रहा है?

Ephesians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ephesians

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Paul For Everyone: The Prison Letters

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Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Ephesians For You

Richard Coekin

Grace, church and spiritual battle made wonderfully practical.

Ephesians: An Introduction and Commentary

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Ephesians 5:22 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

इफिसियों 5:22 का क्या अर्थ है?
"हे पत्नियों, अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के।" वाक्य छोटा है, पर यह अधूरा है; मूल यूनानी में इस आयत में "अधीन रहो" क्रिया है ही नहीं, वह पिछली आयत से उधार ली गई है। इसलिए इसे अकेले पढ़ना असंभव है। पौलुस अभी-अभी कह चुके हैं: "मसीह के भय से एक दूसरे के अधीन रहो" (5:21), और यह वाक्य उसी लंबे वाक्य की एक शाखा है जो 5:18 के "पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ" से शुरू होता है। संक्षेप में: आत्मा से भरे लोग गाते हैं, धन्यवाद देते हैं, और एक दूसरे के अधीन होते हैं; और उस पारस्परिक अधीनता का पहला ठोस उदाहरण पत्नी है, जो अपने पति के प्रति यह रवैया "जैसे प्रभु के" रखती है।
इफिसियों 5:22 किस विषय में है?
यह आयत अकेली खड़ी नहीं है, वह एक लंबी गूँज की कड़ी है। पौलुस कुछ ही पंक्तियों बाद उत्पत्ति 2:24 को उद्धृत करते हैं, "और वे दोनों एक तन होंगे", और फिर चौंकाने वाली बात कहते हैं: "यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूँ।" यानी विवाह सृष्टि के आरम्भ से ही किसी और चीज़ की ओर इशारा करता रहा है। भविष्यवक्ताओं ने यही चित्र उठाया था, जब परमेश्वर ने इस्राएल को अपनी दुल्हन कहा, कभी बेवफ़ा, कभी फिर से मोल ली हुई। पौलुस उस धागे को पकड़कर मसीह तक खींचते हैं, और प्रकाशितवाक्य उसे मेम्ने के विवाह-भोज में पूरा करता है। इसलिए पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ़ एक सामाजिक व्यवस्था नहीं, वह उद्धार-कथा का जीता-जागता रूपक है।
इफिसियों 5:22 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसुस के घरों में ऐसे नियम-संग्रह अनजाने नहीं थे; यूनानी-रोमी नैतिक लेखक गृहस्थी के लिए ठीक ऐसी सूचियाँ लिखते थे, पर वे हमेशा गृहस्वामी को सम्बोधित करते थे और उसे बताते थे कि पत्नी, बच्चों और दासों पर शासन कैसे करना है। पौलुस उस ढाँचे को उधार लेकर उसे भीतर से तोड़ देते हैं। पहला झटका यह कि वे पत्नी से सीधे बात करते हैं। दूसरा, और बड़ा झटका यह कि पति को तीन गुना लंबा उपदेश मिलता है, और उसमें अधिकार का एक शब्द नहीं, केवल क्रूस है। कुलुस्सियों 3:18 में यही बात संक्षेप में आती है; 1 पतरस 3:1 में वह उन स्त्रियों के लिए है जिनके पति विश्वासी नहीं थे। हर जगह सन्दर्भ अलग, पर दिशा एक: मसीह की देह के भीतर सत्ता का मतलब बदल जाता है।
इफिसियों 5:22 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
फिर आयत 24 का "हर बात में" क्या करें? यह शब्द भारी है और उसे हल्का कर देना बेईमानी होगी। पर वही खंड अपनी सीमा भी खींचता है: "जैसे प्रभु के"। जहाँ पति वह माँगे जो प्रभु कभी नहीं माँगेंगे, वहाँ अधीनता उसी क्षण आज्ञा-उल्लंघन बन जाती है, क्योंकि तुलना टूट चुकी है। हिंसा, अपमान या पाप में साथ देना इस आयत का पालन नहीं, उसका उल्टा है। इसके बावजूद असहजता पूरी तरह नहीं मिटती, और शायद मिटनी भी नहीं चाहिए। पौलुस स्वयं कहते हैं, "यह भेद तो बड़ा है", मानो वे भी जानते हों कि यह चित्र हमारे हाथ में पूरी तरह नहीं समाता।
इफिसियों 5:22 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि आपका विवाह (या आपका कोई भी करीबी रिश्ता) मसीह और कलीसिया की कहानी सुनाता है, तो इस समय वह कौन-सा अध्याय सुना रहा है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ephesians 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

जो सब कुछ प्रकट करता है, वह ज्योति है।" रोशनी का काम शर्मिंदा करना नहीं, दिखाना है। जो घाव पट्टी के नीचे अंधेरे में छिपा रहता है, वही सड़ता है। खोलने में दर्द होता है, पर भरना वहीं से शुरू होता है। जिस बात को तू सालों से किसी के सामने नहीं लाया, क्या मसीह की रोशनी में उसे रखने का साहस आज तुझमें है? वह तुझे उजागर करने नहीं, चंगा करने आता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

पौलुस लोभ को व्यभिचार और अशुद्धता के साथ एक ही पंक्ति में रख देता है: "कोई लोभी मनुष्य, जो मूर्तिपूजक के बराबर है।" हमें लोभ भला सा लगता है, मेहनत, बचत, थोड़ी और चाह। पर जिस चीज़ को पाने के लिए तू रात भर जागता है, वही तेरे मन की गद्दी पर बैठी है। आज खुद से पूछ: मेरा दिल किसके आगे झुकता है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 2

पिता, मुझे ऐसा प्रेम करना सिखा जो देता है, गिनता नहीं। मसीह ने अपने आप को मेरे लिए दे दिया, और मैं अक्सर थोड़ा सा भी देने में कंजूस हो जाता हूँ। मेरे दिल को नरम कर, ताकि मेरी छोटी बातें भी तेरे सामने मीठी सुगंध बनें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

पौलुस पूरी बात समेटते हुए लिखता है, "तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे।" हर एक। यानी दूसरों के विवाह पर नज़र रखना छोड़ो, अपने घर की ओर देखो। और "अपने समान" का मतलब है, उसकी थकान तुम्हारी थकान बने, उसका अपमान तुम्हें चुभे। और आदर भी कोई महसूस करता है, तभी वह आदर है।

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