बाइबल व्याख्या

निर्गमन 25:14

बाइबल

पाठ

बबूल की लकड़ी के वे डंडे, जो सोने से मढ़े गए थे, केवल सजावट नहीं थे। परमेश्वर मूसा से कहते हैं कि उन्हें सन्दूक के दोनों ओर लगे कड़ों में डाल दिया जाए, और इसका कारण साफ बताया जाता है: "जिससे उनके बल सन्दूक उठाया जाए।" यानी जिस पेटी में साक्षीपत्र रखा जाएगा, जिसके ढकने पर परमेश्वर मूसा से बात करेंगे, वह कभी हाथों से नहीं पकड़ी जाएगी। उसे उठाया तो जाएगा, पर दूर से, डंडों के सहारे, कंधों पर। और अगली आयत और आगे जाती है: ये डंडे कभी निकाले न जाएँ।

मूल बात

यहाँ दो बातें एक साथ कही जा रही हैं, और वे आपस में टकराती नहीं, बल्कि एक-दूसरे को थामे हुए हैं। पहली: परमेश्वर अपने लोगों के बीच रहना चाहते हैं, इतना कि उन्होंने अपने निवास का नक्शा खुद बनवाया। दूसरी: वे किसी के हाथ में पकड़ में आने वाले परमेश्वर नहीं हैं। सन्दूक उठाया जा सकता है, पर छुआ नहीं जा सकता। पास तो आना है, पर अपनी शर्तों पर नहीं। यही अनुग्रह और पवित्रता का वह जोड़ है जो पूरी बाइबल में चलता है। जो परमेश्वर रेगिस्तान में उतर आते हैं, वे वही हैं जिनके आगे चप्पल उतारनी पड़ती है। और जो इस फर्क को मिटा देता है, वह निकटता नहीं पाता, वह केवल एक छोटा-सा परमेश्वर गढ़ लेता है जिसे वह अपनी सुविधा से रख सके।

सूत्र

डंडे इसलिए कभी नहीं निकाले जाते क्योंकि यह सन्दूक एक चलते हुए लोगों का सन्दूक है। परमेश्वर ने कोई पत्थर का मन्दिर नहीं माँगा, बल्कि एक ऐसा निवास जो हर सुबह उठकर आगे बढ़ सके। आयत 8 में यही वादा है: "वे मेरे लिये एक पवित्रस्थान बनाएँ, कि मैं उनके बीच निवास करूँ।" निवास, पर रेगिस्तान में; उपस्थिति, पर यात्रा में। यही धागा यूहन्ना तक खिंचता है, जहाँ वचन देह बनकर हमारे बीच डेरा डालता है, शब्दशः तम्बू गाड़ता है। मसीह में परमेश्वर इतने पास आते हैं कि उन्हें छुआ जा सकता है, और फिर भी वे हमारी पकड़ में नहीं आते; जी उठने के बाद मरियम से वे कहते हैं, मुझे थामे मत रह। निकटता बढ़ी है, पर परमेश्वर हमारे कब्ज़े में नहीं आए।

आईना

ईमानदारी से पूछिए: आपके जीवन में परमेश्वर कहाँ एक ऐसी चीज़ बन गए हैं जिसे आप सँभालते हैं? जब आप रविवार की तैयारी करते हैं और पवित्र बातें आपके लिए सामग्री बन जाती हैं; जब प्रार्थना एक तकनीक बन जाती है जिससे मनचाहा परिणाम निकलना चाहिए; जब आप अपने परिवार के फैसले पहले कर लेते हैं और बाद में उन पर आशीष की मुहर माँगते हैं। हाथ से पकड़ने का मतलब यही है: मैं तय करूँगा कि यह कहाँ जाएगा। डंडे उस हाथ को रोकते हैं। और वही डंडे एक राहत भी हैं, क्योंकि जिस चीज़ को आप थाम नहीं सकते, उसे थामने की ज़िम्मेदारी भी आपकी नहीं। आज एक काम कीजिए: उस एक मामले का नाम कागज़ पर लिखिए जिसे आप "परमेश्वर के लिए" करते हुए भी असल में खुद चला रहे हैं, और उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए, "यह आपका है; मैं इसे अपने हाथ से नहीं, कंधे पर उठाऊँगा।"

अन्तर्पाठ

सदियों बाद दाऊद यही सन्दूक यरूशलेम लाना चाहता है, और वह उसे एक नई गाड़ी पर रखता है। इरादा नेक है, जोश सच्चा है, पर तरीका परमेश्वर का नहीं। बैल लड़खड़ाते हैं, उज्जा हाथ बढ़ाकर सन्दूक थामता है, और वहीं मर जाता है (2 शमूएल 6)। वह कहानी क्रूर लगती है जब तक आप निर्गमन 25:14 को याद न करें। डंडे इसीलिए थे। गाड़ी तेज़ है, सुविधाजनक है, आधुनिक है; कंधा धीमा है और थका देता है। दूसरी बार दाऊद सही करता है, और तब आनंद मनाया जाता है। परमेश्वर की सेवा में नीयत काफ़ी नहीं होती; वे खुद बताते हैं कि उनके पास कैसे आया जाता है।

बारीकी

ध्यान दीजिए कि डंडे किस चीज़ के हैं: "बबूल की लकड़ी", वही लकड़ी जिससे सन्दूक बना है, और उन्हें भी सोने से मढ़ा जाता है। बबूल रेगिस्तान का पेड़ है, काँटेदार, टेढ़ा, सख्त, वही जो उस बंजर ज़मीन पर उग सकता है जहाँ इस्राएल भटक रहा था। परमेश्वर का सिंहासन लेबनान के देवदार से नहीं, आसपास की झाड़ी से बनता है, और फिर उस पर शुद्ध सोना चढ़ता है। उठाने के औज़ार कोई मामूली सामान नहीं; वे उतने ही पवित्र हैं जितना सन्दूक। जो आपको ढोने का काम मिला है, वह निचले दर्जे का काम नहीं है। रेगिस्तानी लकड़ी, सोने से मढ़ी हुई, और कभी अलग न की जाने वाली।

पृष्ठभूमि

यह सीनै पर्वत का दृश्य है, वाचा बाँधे जाने के तुरन्त बाद, जब मूसा चालीस दिन ऊपर है और नीचे लोग इंतज़ार कर रहे हैं। सुनने वाले मिस्र से निकले दास हैं, तम्बुओं में रहने वाली भीड़, जिनके पास ज़मीन नहीं है। मिस्र में उन्होंने जुलूस देखे थे: याजक कंधों पर डंडों के सहारे देवताओं की नाव ढोते थे, और उस नाव के भीतर मूर्ति होती थी। यहाँ रूप वही है, पर भीतर कोई मूर्ति नहीं, केवल साक्षीपत्र, परमेश्वर के शब्द। और सारा सामान स्वेच्छा से दी गई भेंटों से बनता है, उसी लूट से जो वे मिस्र से लाए थे। गुलामी की कमाई अब परमेश्वर के निवास की दीवार बनती है।

चिंतन

आपके विश्वास में वह "गाड़ी" कौन-सी है, यानी वह तेज़ और सुविधाजनक तरीका जिससे आप पवित्र चीज़ों को सँभालना चाहते हैं?

डंडे कभी नहीं निकाले जाते, क्योंकि यात्रा कभी खत्म नहीं मानी जाती। आपने कहाँ मान लिया है कि आप पहुँच चुके हैं?

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The Message of Exodus

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Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.

Exodus For You

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An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.

Exodus: An Introduction and Commentary

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Exodus

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Exodus 25:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 25:14 का क्या अर्थ है?
बबूल की लकड़ी के वे डंडे, जो सोने से मढ़े गए थे, केवल सजावट नहीं थे। परमेश्वर मूसा से कहते हैं कि उन्हें सन्दूक के दोनों ओर लगे कड़ों में डाल दिया जाए, और इसका कारण साफ बताया जाता है: "जिससे उनके बल सन्दूक उठाया जाए।" यानी जिस पेटी में साक्षीपत्र रखा जाएगा, जिसके ढकने पर परमेश्वर मूसा से बात करेंगे, वह कभी हाथों से नहीं पकड़ी जाएगी। उसे उठाया तो जाएगा, पर दूर से, डंडों के सहारे, कंधों पर। और अगली आयत और आगे जाती है: ये डंडे कभी निकाले न जाएँ।
निर्गमन 25:14 किस विषय में है?
डंडे इसलिए कभी नहीं निकाले जाते क्योंकि यह सन्दूक एक चलते हुए लोगों का सन्दूक है। परमेश्वर ने कोई पत्थर का मन्दिर नहीं माँगा, बल्कि एक ऐसा निवास जो हर सुबह उठकर आगे बढ़ सके। आयत 8 में यही वादा है: "वे मेरे लिये एक पवित्रस्थान बनाएँ, कि मैं उनके बीच निवास करूँ।" निवास, पर रेगिस्तान में; उपस्थिति, पर यात्रा में। यही धागा यूहन्ना तक खिंचता है, जहाँ वचन देह बनकर हमारे बीच डेरा डालता है, शब्दशः तम्बू गाड़ता है। मसीह में परमेश्वर इतने पास आते हैं कि उन्हें छुआ जा सकता है, और फिर भी वे हमारी पकड़ में नहीं आते; जी उठने के बाद मरियम से वे कहते हैं, मुझे थामे मत रह। निकटता बढ़ी है, पर परमेश्वर हमारे कब्ज़े में नहीं आए।
निर्गमन 25:14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
सदियों बाद दाऊद यही सन्दूक यरूशलेम लाना चाहता है, और वह उसे एक नई गाड़ी पर रखता है। इरादा नेक है, जोश सच्चा है, पर तरीका परमेश्वर का नहीं। बैल लड़खड़ाते हैं, उज्जा हाथ बढ़ाकर सन्दूक थामता है, और वहीं मर जाता है (2 शमूएल 6)। वह कहानी क्रूर लगती है जब तक आप निर्गमन 25:14 को याद न करें। डंडे इसीलिए थे। गाड़ी तेज़ है, सुविधाजनक है, आधुनिक है; कंधा धीमा है और थका देता है। दूसरी बार दाऊद सही करता है, और तब आनंद मनाया जाता है। परमेश्वर की सेवा में नीयत काफ़ी नहीं होती; वे खुद बताते हैं कि उनके पास कैसे आया जाता है।
निर्गमन 25:14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह सीनै पर्वत का दृश्य है, वाचा बाँधे जाने के तुरन्त बाद, जब मूसा चालीस दिन ऊपर है और नीचे लोग इंतज़ार कर रहे हैं। सुनने वाले मिस्र से निकले दास हैं, तम्बुओं में रहने वाली भीड़, जिनके पास ज़मीन नहीं है। मिस्र में उन्होंने जुलूस देखे थे: याजक कंधों पर डंडों के सहारे देवताओं की नाव ढोते थे, और उस नाव के भीतर मूर्ति होती थी। यहाँ रूप वही है, पर भीतर कोई मूर्ति नहीं, केवल साक्षीपत्र, परमेश्वर के शब्द। और सारा सामान स्वेच्छा से दी गई भेंटों से बनता है, उसी लूट से जो वे मिस्र से लाए थे। गुलामी की कमाई अब परमेश्वर के निवास की दीवार बनती है।
निर्गमन 25:14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
डंडे कभी नहीं निकाले जाते, क्योंकि यात्रा कभी खत्म नहीं मानी जाती। आपने कहाँ मान लिया है कि आप पहुँच चुके हैं?
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Exodus 25 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

सोने की मेज में छल्ले इसलिए लगाए गए कि "मेज उनसे उठाई जाए।" यानी परमेश्वर की उपस्थिति की रोटी वाली मेज जंगल में साथ चलने के लिए बनी थी, एक जगह जमी रहने के लिए नहीं। तेरी ज़िंदगी भी अभी ठहरी हुई नहीं है, तू रास्ते में है। पर जो मेज तुझे खिलाती है, वह भी डंडों पर तेरे साथ चल रही है। उजाड़ में भी तेरा भोजन छूटा नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 39

वह सारे सामान समेत किक्कार भर शुद्ध सोने का बने।" एक किक्कार, लगभग चौंतीस किलो सोना, और वह भी ठोस। भीतर से खोखला नहीं, ऊपर से मुलम्मा चढ़ा हुआ नहीं। जो दीवट पवित्रस्थान में रोशनी देता था, वह भीतर तक असली था। परमेश्वर तुम्हारी चमक नहीं तौलता, तुम्हारा भीतर तौलता है। लोगों को दिखने वाली सेवा के नीचे क्या है? सोना, या सिर्फ परत?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 6

पिता, धन्यवाद कि आपने अपने निवास के लिये दीपक का तेल और सुगन्ध द्रव्य भी मँगवाए। आप उजियाले और सुगन्ध के परमेश्वर हैं। धन्यवाद कि मेरे छोटे से जीवन का तेल और मेरी थोड़ी सी सुगन्ध भी आपकी उपस्थिति में स्थान पाती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

फिर बबूल की लकड़ी का एक सन्दूक बनाना" (निर्गमन 25:10)। सोचो, परमेश्वर ने अपनी उपस्थिति के लिए जंगल में उगने वाली उसी काँटेदार, साधारण लकड़ी को चुना, जो उन्हें रेगिस्तान में ही मिल सकती थी। जो कुछ तेरे पास इस उजाड़ समय में है, वही उसके काम आता है। तुझे पहले सुंदर बनने की जरूरत नहीं, वह भीतर से सोना चढ़ाना जानता है।

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