एज्रा 2
पाठ
बाबेल की बँधुआई से छूटे हुए लोगों की एक लम्बी सूची: कौन-कौन लौटा, किस परिवार से, कितने। जरुब्बाबेल और येशुअ के साथ चलनेवाली यह भीड़ बयालीस हजार तीन सौ साठ की थी, और उसके साथ दास-दासियाँ, गायक, घोड़े, ऊँट और छः हजार सात सौ बीस गदहे। बीच में एक कठोर टिप्पणी: कुछ लोग अपनी वंशावली सिद्ध न कर सके, और कुछ याजक इसीलिए याजकपद से हटा दिए गए। अन्त में मुखिया लोग स्वेच्छा से मन्दिर के लिये सोना-चाँदी देते हैं, और सब अपने-अपने नगर में बस जाते हैं।
मूल बात
यह अध्याय पढ़ने में रजिस्टर जैसा लगता है, परन्तु यह परमेश्वर की स्मरणशक्ति का दस्तावेज़ है। सत्तर वर्ष पहले जो लोग जंजीरों में बाबेल ले जाए गए थे, वे गुमनाम भीड़ बन गए थे; साम्राज्यों के पास व्यक्तियों के लिये जगह नहीं होती, केवल संख्याओं के लिये। परन्तु यहाँ नाम फिर लिखे जाते हैं, परोश, शपत्याह, आरह, नतोपा और अनातोत के लोग। परमेश्वर अपने लोगों को थोक में नहीं बचाते। वे घराने-घराने, गाँव-गाँव गिनते हैं, और गदहों तक का हिसाब रखते हैं। कृपा अमूर्त भावना नहीं, वह नामों और पतों में उतरती है। जो परमेश्वर निर्वासन में भूले नहीं गए, वे वापसी में भी हर परिवार को पहचानते हैं।
जोड़नेवाला सूत्र
यह सूची एक अधूरी वापसी है। बयालीस हजार लोग, जब कि मिस्र से निकलनेवाले छः लाख थे। न कोई राजा, न ऊरीम और तुम्मीम धारण करनेवाला याजक। पद 63 खुलकर स्वीकार करता है कि कुछ प्रश्नों का उत्तर देने वाला कोई नहीं है, "जब तक ऊरीम और तुम्मीम धारण करनेवाला कोई याजक न हो"। यही खालीपन आगे की ओर इशारा करता है: एक ऐसा याजक चाहिए जो अन्तिम रूप से परमेश्वर की इच्छा बता सके, और एक ऐसा राजा जो दाऊद के सिंहासन पर स्थिर रहे। मत्ती अपने सुसमाचार की शुरुआत भी वंशावली से करते हैं, और उसमें बँधुआई का उल्लेख कर के यीशु तक पहुँचते हैं। एज्रा 2 की अधूरी सूची वहाँ पूरी होती है।
आत्मदर्पण
पद 62 आपको चुभेगा, और चुभना चाहिए। कुछ लोगों ने अपने नाम खोजे, "परन्तु वे न मिले।" कल्पना कीजिए: आप हज़ार मील चले, अपना घर छोड़ा, और पहुँचकर पता चला कि रजिस्टर में आपका नाम नहीं है। यह डर आपके भीतर भी बैठा है, अलग रूप में। जब चर्च में किसी की गिनती होती है और आपकी नहीं; जब आपका भाई या पड़ोसी आत्मिक रूप से "स्थापित" दिखता है और आप हर सुबह शून्य से शुरू करते हैं; जब आप सोचते हैं कि मेरा परिवार, मेरा अतीत, मेरी असफलताएँ मुझे भीतर आने का हक नहीं देतीं। दूसरी ओर, यह अध्याय आपके गर्व को भी छूता है। परोश की सन्तान दो हजार से ऊपर, गिब्बार के लोग पंचानबे। संख्या आपको महत्व नहीं देती; लौट आना आपको देता है। और वे पंचानबे लोग भी उसी सूची में हैं।
संदर्भ
समय लगभग 538 ईसा पूर्व। फारस का राजा कुस्रू बाबेल को हरा चुका है और उसकी नीति बेबीलोनी नीति से उलटी है: वह निर्वासित समुदायों को घर भेजता है, ताकि वे अपने देवताओं की उपासना कर के साम्राज्य के लिये प्रार्थना करें। यहूदा तब एक छोटा, टूटा हुआ प्रान्त है; यरूशलेम खण्डहर, मन्दिर राख। बाबेल में लौटने वाले अल्पसंख्यक थे; अधिकांश यहूदी वहीं रह गए, जहाँ व्यापार और सुरक्षा थी। इसलिए यह सूची स्वयंसेवकों की सूची है, उन लोगों की जिन्होंने आराम छोड़कर मलबा चुना। ध्यान दें कि इसमें दास-दासियाँ भी गिने गए हैं और नतीन, अर्थात् मन्दिर के निम्न श्रेणी के सेवक भी। सामाजिक सीढ़ी का सबसे नीचला पायदान भी दर्ज है।
अन्तर्पाठ
एज्रा 2 का लगभग यही रजिस्टर नहेम्याह 7 में दुबारा आता है, कुछ संख्याओं के अन्तर के साथ। यह दोहराव लापरवाही नहीं; यह दिखाता है कि यह सूची समुदाय के लिये कितनी कीमती थी, जैसे किसी परिवार में पुरखों की तस्वीर दो बार फ्रेम कराई जाती है। दूसरा प्रतिध्वनि प्रकाशितवाक्य की "जीवन की पुस्तक" है। दोनों जगह एक ही तर्क है: भीतर होना नाम लिखे जाने पर निर्भर करता है, न कि अपनी योग्यता पर। परन्तु फर्क भी देखिए। एज्रा में मनुष्य रजिस्टर खोजते हैं और खाली हाथ लौटते हैं; मसीह में परमेश्वर स्वयं नाम लिखते हैं, और उस लेखनी को कोई मिटा नहीं सकता।
एक बारीकी
पद 61 पर रुकिए। बर्जिल्लै नाम के याजकों की सन्तान ने "गिलादी बर्जिल्लै की एक बेटी को ब्याह लिया और उसी का नाम रख लिया था।" किसी ने ससुर का नाम अपना लिया, क्योंकि वह नाम बड़ा था, ज़मीन उसकी थी, प्रतिष्ठा उसकी थी। और ठीक यही चतुराई पीढ़ियों बाद उसके वंशजों को महँगी पड़ी: कागज़ों में उनका असली घराना गुम हो गया। यह अजीब तरह से आधुनिक है। हम भी उधार की पहचान पहनते हैं, बड़े नाम, बड़े संगठन, ऊँचे पद, और सोचते हैं कि इससे हमारा स्थान पक्का होगा। परमेश्वर के घर में उधार की पहचान काम नहीं आती। वहाँ केवल वही चलता है जो आप सचमुच हैं, और जिसे परमेश्वर ने सचमुच बुलाया है।
चिन्तन
आप किस नाम या पहचान के सहारे अपने आप को "भीतर" महसूस कराते हैं, और वह छिन जाए तो क्या बचेगा?
यह जानना कि परमेश्वर आपको भीड़ के रूप में नहीं, नाम लेकर जानते हैं, आज आपके किस डर को शान्त करता है?
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Ezra 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
एज्रा 2 का क्या अर्थ है?
एज्रा 2 किस विषय में है?
एज्रा 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
एज्रा 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
एज्रा 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ezra 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, आपने "अनातोत के मनुष्य एक सौ अट्ठाईस" को भी नाम और गिनती देकर लिखवाया। धन्यवाद कि आपकी नज़र में छोटे कस्बे के लोग भी भूले नहीं जाते। मेरा घर, मेरा छोटा सा परिवार, मेरी गिनती भी आपके पास सुरक्षित है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ।
सना की सन्तान तीन हजार छह सौ तीस।" बस एक नाम, एक गिनती। पूरी बाइबल में इनके बारे में और कुछ नहीं लिखा, कोई कहानी नहीं, कोई वीरता नहीं। फिर भी यह लौटने वालों की सूची का सबसे बड़ा घराना है। सोचो, परमेश्वर ने इन्हें गिना और लिख रखा। तेरा नाम भी किसी अखबार में न आए, तो क्या हुआ? जो घर लौटता है, वह उसकी सूची में दर्ज हो जाता है।
पिता, आपकी नज़र में हर छोटी चीज़ गिनी जाती है, यहाँ तक कि लौटते हुए लोगों के ऊँट और गधे भी। मेरे पास जो थोड़ा सा है, वह भी आप जानते हैं। जो कुछ मुझे घर की ओर ले चलने के लिए चाहिए, वह आप देते रहिए, और मुझे भरोसा रखना सिखाइए।
पिता, बर्जिल्लै की सन्तान के नाम भले ही वंशावली में खो गए, पर आपकी आँखों से कोई नहीं छूटा। धन्यवाद कि आप मुझे नाम लेकर जानते हैं, और मेरी पहचान किसी काग़ज़ी सूची पर नहीं, आपके अनुग्रह पर टिकी है। जब लोग मुझे भूल जाते हैं, आप याद रखते हैं।
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