उत्पत्ति 11:26
पाठ
शेम से लेकर पीढ़ी दर पीढ़ी चलती हुई यह सूची एक ही लय में आगे बढ़ती है: इतने वर्ष का हुआ, तब उसने जन्म दिया, फिर इतने वर्ष और जीवित रहा। एक के बाद एक नाम, जैसे किसी पुराने बही-खाते के पन्ने पलटे जा रहे हों। और फिर अचानक लय बदलती है: "जब तक तेरह सत्तर वर्ष का हुआ, तब तक उसके द्वारा अब्राम, और नाहोर, और हारान उत्पन्न हुए।" एक नहीं, तीन बेटे। और उनमें से एक का नाम, अब्राम, यहाँ पहली बार लिखा जाता है, बिना किसी घोषणा के, बिना किसी स्वर्गदूत के, बिना किसी संकेत के कि इस नाम पर आगे चलकर पूरी दुनिया की आशा टिकेगी। पाठक को अभी कुछ पता नहीं। तेरह को भी कुछ पता नहीं।
मूल भाव
यही परमेश्वर का तरीका है, और यह हमें बेचैन करता है। ऊपर के पदों में मनुष्य आकाश से बातें करने वाली मीनार बना रहे थे ताकि "हम अपना नाम करें", और परमेश्वर उन्हें तितर-बितर कर देते हैं। ठीक उसके बाद, उसी अध्याय में, बिना किसी नाटक के, परमेश्वर एक नाम चुनते हैं जिसे वे स्वयं बड़ा करेंगे। बाबेल ईंटों से नाम बनाना चाहता था; परमेश्वर एक गर्भ से नाम बनाते हैं। उद्धार का इतिहास किसी विजय-घोषणा से नहीं, बल्कि एक साधारण वंशावली की पंक्ति से शुरू होता है, कसदियों के ऊर में, मूर्तिपूजकों के बीच, एक ऐसे परिवार में जिसकी बहू बाँझ है। अनुग्रह पहले आता है, योग्यता बाद में; बुलाहट से पहले चुनाव, और चुनाव इतना चुपचाप कि कोई सुन भी न पाए।
मुख्य धागा
इस एक पंक्ति से पूरी बाइबल की रीढ़ निकलती है। अब्राम से इसहाक, इसहाक से याकूब, याकूब से बारह गोत्र, गोत्रों से दाऊद, और दाऊद से वह जिसके विषय में मत्ती अपनी सुसमाचार-पुस्तक का पहला ही वाक्य लिखता है: यीशु मसीह, दाऊद की सन्तान, अब्राहम की सन्तान। मत्ती जानबूझकर वंशावली से शुरू करता है, क्योंकि वह जानता है कि उद्धार कोई विचार नहीं, बल्कि एक वंश है, नाम पर नाम, गर्भ पर गर्भ, जब तक कि समय पूरा न हो जाए। पद 26 उस लंबी शृंखला की वह कड़ी है जहाँ परमेश्वर पूरी मानवजाति को बचाने के लिए एक अकेले परिवार पर हाथ रखते हैं। संकुचन ही विस्तार की तैयारी है: एक आदमी चुना जाता है ताकि अन्त में बाबेल में बिखरी हुई सारी भाषाएँ एक साथ गा सकें।
दर्पण
हममें से अधिकांश लोग वंशावली की बीच वाली पंक्तियों जैसा जीवन जीते हैं। नाम, आयु, बच्चे, और फिर मौन। आप सुबह उठते हैं, बच्चों का टिफिन बनाते हैं, दफ्तर जाते हैं, बीमार माता-पिता की दवा का हिसाब रखते हैं, और रात को यह सोचकर सो जाते हैं कि इस सबका कुल जोड़ क्या है। भीतर कहीं वही बाबेली आवाज़ बैठी है: "हम अपना नाम करें।" कुछ ऐसा बना लें जो दिखे, जो याद रखा जाए, जिससे साबित हो कि हम व्यर्थ नहीं जिए। पद 26 उस आवाज़ का उत्तर नहीं देता, वह उसे अनदेखा कर देता है। तेरह को कभी पता नहीं चला कि उसके सत्तरवें वर्ष में जो हुआ, उससे इतिहास मुड़ जाएगा। आपको भी शायद न पता चले।
आज एक कागज़ पर अपने परिवार या कलीसिया के किसी एक जवान व्यक्ति का नाम लिखिए जिसका भविष्य आप नहीं जानते, और उस नाम को ज़ोर से पुकारकर दो मिनट परमेश्वर के सामने रखिए।
पृष्ठभूमि
कसदियों का ऊर कोई पिछड़ा गाँव नहीं था। फरात नदी के निचले हिस्से में बसा यह नगर व्यापार, लेखन और चन्द्रदेवता की पूजा का केंद्र था, जिसके बीचोंबीच पकी ईंटों की विशाल सीढ़ीदार मीनार खड़ी थी, ठीक वैसी ही जैसी अध्याय के आरम्भ में बनाई जा रही थी। तेरह उसी संसार का आदमी था, और बाद की परंपरा साफ कहती है कि वह दूसरे देवताओं की सेवा करता था। यानी अब्राम मंदिर की छाया में जन्मा, धूप और मन्नत की गंध के बीच। जिस समाज में पिता का नाम, कुल का नाम और नगर का देवता ही पहचान थे, वहाँ परमेश्वर एक ऐसे व्यक्ति को चुनते हैं जिसे बाद में यह सब छोड़ना पड़ेगा। चुनाव योग्यता का पुरस्कार नहीं, बल्कि अनुग्रह का हस्तक्षेप है।
एक बारीकी
ध्यान दीजिए कि क्रम क्या है: "अब्राम, और नाहोर, और हारान।" अगला ही पद दोहराता है कि हारान ने लूत को जन्म दिया, और उसके बाद हारान अपने पिता के जीवित रहते ही मर जाता है। इससे संकेत मिलता है कि हारान सबसे बड़ा रहा होगा, फिर भी सूची अब्राम से शुरू होती है। बाइबल की वंशावलियाँ अक्सर जन्म-क्रम नहीं, महत्त्व-क्रम बताती हैं। यह छोटी-सी उलटफेर पूरे उत्पत्ति की आदत है: हाबिल के आगे कैन नहीं, इसहाक के आगे इश्माएल नहीं, याकूब के आगे एसाव नहीं। जन्म का अधिकार परमेश्वर के चुनाव को नहीं बाँधता। और ठीक इसी के साथ पद 30 का धक्का आता है: "सारै तो बाँझ थी।" जिस नाम को सबसे आगे रखा गया, उसी के पास कोई भविष्य नहीं।
शास्त्र की गूँज
पद 4 की गूँज सबसे तेज़ है: "इस प्रकार से हम अपना नाम करें।" बाईस पद बाद परमेश्वर एक ऐसे आदमी का नाम लिखते हैं जिससे अगले ही अध्याय में वे कहेंगे कि वे उसका नाम बड़ा करेंगे। मनुष्य ऊपर चढ़कर नाम बनाना चाहता है; परमेश्वर नीचे उतरकर नाम देते हैं, पहले न्याय के लिए (पद 5, 7) और फिर बुलाहट के लिए। दूसरी गूँज लूका के सुसमाचार में है, जहाँ यीशु की वंशावली उलटी दिशा में चलती हुई तेरह और नाहोर और शेम से होकर आदम तक, और आदम से परमेश्वर तक पहुँचती है। वही सूखी-सी सूची जिसे हम जल्दी-जल्दी पढ़कर छोड़ देते हैं, अन्त में क्रूस तक ले जाती है।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन में वह कौन-सी "ईंट" है जिससे आप चुपचाप अपना नाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और क्या होगा यदि परमेश्वर उसे अधूरा छोड़ने दें?
यदि आपका नाम किसी वंशावली की बीच वाली पंक्ति में ही रह जाए, तो क्या आपकी आज की आज्ञाकारिता फिर भी वैसी ही रहेगी?
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Genesis 11:26 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
उत्पत्ति 11:26 का क्या अर्थ है?
उत्पत्ति 11:26 किस विषय में है?
उत्पत्ति 11:26 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
उत्पत्ति 11:26 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
उत्पत्ति 11:26 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Genesis 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, कभी मैं भी रास्ते में ही रुक जाता हूँ। निकलता तो पूरे मन से हूँ, पर हारान जैसी किसी आरामदेह जगह पर बस बैठ जाता हूँ। मुझे फिर से चलने की हिम्मत दे, और वहाँ तक ले चल जहाँ तूने मुझे बुलाया है।
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