बाइबल व्याख्या

उत्पत्ति 17:12

बाइबल

पाठ

आठ दिन का बच्चा कुछ नहीं समझता, कुछ नहीं चुनता, कुछ नहीं कमाता, और ठीक उसी पर परमेश्वर अपनी वाचा का चिन्ह रखवाते हैं। पद 12 कहता है कि अब्राहम के घराने में हर पुरुष का खतना आठवें दिन हो, "पीढ़ी-पीढ़ी में", और केवल उसके अपने वंश का ही नहीं, बल्कि "जो तेरे घर में उत्पन्न हुआ हो, अथवा परदेशियों को रूपा देकर मोल लिया जाए, ऐसे सब पुरुष भी।" यानी जो खून से अब्राहम का नहीं है, जो खरीदा हुआ दास है, जो दूसरी जाति से आया है, वह भी उसी चिन्ह के नीचे आता है। एक ही आज्ञा में समय (आठवाँ दिन), स्थायित्व (पीढ़ी-पीढ़ी) और दायरा (घर के सब पुरुष) तय कर दिए गए हैं।

मूल बात

यहाँ परमेश्वर वाचा का चिन्ह उस पर रखते हैं जो अभी बोल तक नहीं सकता। शिशु की सहमति नहीं माँगी जाती, उसका विश्वास नहीं परखा जाता, उसकी योग्यता नहीं तौली जाती। पहल पूरी तरह परमेश्वर की है, और मनुष्य उस पहल में जन्म लेता है, उसे बनाता नहीं। यही अनुग्रह का ढाँचा है: पहले परमेश्वर का वचन, फिर मनुष्य का उत्तर। दूसरी बात उतनी ही चुभने वाली है। "परदेशियों को रूपा देकर मोल लिया जाए" वाला व्यक्ति भी इसी चिन्ह को पाता है। वाचा का घेरा जीव-वैज्ञानिक वंश से बड़ा है; वह घराने का घेरा है, सम्बन्ध का घेरा है। परमेश्वर जिस परिवार को बना रहे हैं, उसमें प्रवेश का द्वार रक्त नहीं, बुलाहट है। और यह चिन्ह देह पर काटा जाता है, शब्दों में नहीं: वाचा कागज़ पर नहीं, माँस पर लिखी जाती है, ताकि भूलना असम्भव हो।

जोड़ने वाला सूत्र

आठवाँ दिन यहाँ यूँ ही नहीं चुना गया। सप्ताह पूरा होता है, और उसके बाद जो दिन आता है वह नई शुरुआत का दिन है। उसी आठवें दिन मरियम का पुत्र खतना के लिए लाया गया और उसका नाम यीशु रखा गया (लूका 2:21) : जिस चिन्ह की माँग परमेश्वर ने अब्राहम के घराने से की थी, उसे परमेश्वर का पुत्र स्वयं अपनी देह में लेता है, आज्ञा के नीचे आकर, उनके लिए जो आज्ञा तोड़ चुके थे। और पद 12 का दूसरा हिस्सा और भी दूर तक जाता है। "परदेशियों को रूपा देकर मोल लिया जाए" वह व्यक्ति भी चिन्ह पाता है। नया नियम इसी भाषा को उठाता है: हम चाँदी से नहीं, मसीह के लहू से मोल लिए गए, और मसीह में विश्वासी को "हाथ से न किया गया खतना" मिलता है (कुलुस्सियों 2:11)। चाकू की जगह क्रूस, और घराने में प्रवेश खून से नहीं, उनके लहू से।

दर्पण

यह पद आपके भीतर की उस सूची पर उँगली रखता है जिसमें आप तय करते हैं कि परमेश्वर के परिवार में असली कौन है। जो बचपन से कलीसिया में है, जो सही तरह गवाही दे सकता है, जो आपके वंश और आपकी जाति का है। अब्राहम के घर में जो दास चाँदी देकर खरीदा गया था, उसके पास न वंशावली थी, न चुनाव, न योग्यता, और फिर भी वही चिन्ह उसकी देह पर था। दूसरी तरफ यह पद उस डर को भी छूता है जो माता-पिता के भीतर रहता है: मेरा बच्चा अभी कुछ समझता नहीं, क्या वह परमेश्वर के दायरे के बाहर है? पद 12 का उत्तर है, आठ दिन का शिशु भी वाचा के भीतर है, क्योंकि वाचा उसकी समझ पर नहीं, परमेश्वर के वचन पर टिकी है।

आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जो आपके घर या दैनिक दायरे में है पर "आपके अपने" नहीं है, और नाम लेकर ज़ोर से उसके लिए प्रार्थना कीजिए।

कठिन प्रश्न

खरीदे हुए दास से पूछा नहीं गया। उस पर यह चिन्ह लगाया गया, और अगले पद के अनुसार जो खतनारहित रहेगा वह "अपने लोगों में से नाश किया जाए।" यह हमारी आधुनिक चेतना से टकराता है, और इसे चिकना कर देना बेईमानी होगी। पाठ दासता को न सही ठहराता है न नष्ट करता है; वह उस समय की सामाजिक संरचना के भीतर काम करता है, पर उसी संरचना में एक बीज डाल देता है, क्योंकि जिस दास को स्वामी के समान चिन्ह मिलता है वह अब केवल सम्पत्ति नहीं रहता, वह वाचा का साझेदार बन जाता है। यही बीज सदियों बाद फूटता है जब मसीह में न दास रहता है न स्वतंत्र। फिर भी यह पद असहज रहता है, और शायद रहना ही चाहिए।

पृष्ठभूमि

अब्राहम निन्यानवे वर्ष का है, एक तम्बू में रहने वाला कुलपति जिसके घराने में सैकड़ों लोग हैं: सेवक, चरवाहे, उनके परिवार, खरीदे हुए दास। प्राचीन पूर्व में "घर" एक भावनात्मक इकाई नहीं, एक आर्थिक और राजनीतिक इकाई थी, और उसका मुखिया पूरे समूह के लिए बोलता था। खतना उस दुनिया में अनोखा नहीं था; मिस्र और कनान में भी होता था, पर वहाँ वह किशोरावस्था या विवाह से जुड़ा एक पुरुषत्व का संस्कार था। परमेश्वर उसे आठवें दिन पर ले जाते हैं, यानी वहाँ जहाँ न शक्ति है, न उपलब्धि, न प्रजनन क्षमता। और यह सब उस आदमी से कहा जा रहा है जो पद 8 के अनुसार उसी देश में "परदेशी होकर" रहता है।

मुख्य पात्र

इस पूरे अध्याय में बोलने वाला एक ही है: परमेश्वर। और जो परमेश्वर यहाँ प्रकट होते हैं वे अमूर्त नहीं हैं। वे तारीख तय करते हैं, देह चुनते हैं, घराने की सीमा खींचते हैं और उसे तुरंत चौड़ा कर देते हैं। वे नाम बदलते हैं, अब्राम को अब्राहम, सारै को सारा, क्योंकि वाचा में आना अपनी पहचान परमेश्वर के हाथ में सौंपना है। सबसे उल्लेखनीय यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर स्वयं को एक विशेष परिवार के माँस से जोड़ने को तैयार हैं। यही स्वभाव अंत में देहधारण तक ले जाता है: जो परमेश्वर अब्राहम के घराने की देह पर अपना चिन्ह रखते हैं, वही एक दिन स्वयं देह धारण करके हमारे बीच बस जाते हैं।

मनन के प्रश्न

आपके भीतर की किस अनकही सूची से आप तय करते हैं कि परमेश्वर के घराने में कौन "सचमुच" भीतर है, और पद 12 उस सूची को कहाँ तोड़ता है?

यदि आपकी वाचा में जगह आपके निर्णय से नहीं, बल्कि परमेश्वर की पहल से बनी है, तो आपकी आत्मिक असफलताओं के दिनों में यह बात व्यावहारिक रूप से क्या बदलती है?

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Genesis

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The Message of Genesis 1-11

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The Message of Genesis 12-50

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Genesis: Beginning and Blessing

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Genesis 17:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

उत्पत्ति 17:12 का क्या अर्थ है?
आठ दिन का बच्चा कुछ नहीं समझता, कुछ नहीं चुनता, कुछ नहीं कमाता, और ठीक उसी पर परमेश्वर अपनी वाचा का चिन्ह रखवाते हैं। पद 12 कहता है कि अब्राहम के घराने में हर पुरुष का खतना आठवें दिन हो, "पीढ़ी-पीढ़ी में", और केवल उसके अपने वंश का ही नहीं, बल्कि "जो तेरे घर में उत्पन्न हुआ हो, अथवा परदेशियों को रूपा देकर मोल लिया जाए, ऐसे सब पुरुष भी।" यानी जो खून से अब्राहम का नहीं है, जो खरीदा हुआ दास है, जो दूसरी जाति से आया है, वह भी उसी चिन्ह के नीचे आता है। एक ही आज्ञा में समय (आठवाँ दिन), स्थायित्व (पीढ़ी-पीढ़ी) और दायरा (घर के सब पुरुष) तय कर दिए गए हैं।
उत्पत्ति 17:12 किस विषय में है?
आठवाँ दिन यहाँ यूँ ही नहीं चुना गया। सप्ताह पूरा होता है, और उसके बाद जो दिन आता है वह नई शुरुआत का दिन है। उसी आठवें दिन मरियम का पुत्र खतना के लिए लाया गया और उसका नाम यीशु रखा गया (लूका 2:21) : जिस चिन्ह की माँग परमेश्वर ने अब्राहम के घराने से की थी, उसे परमेश्वर का पुत्र स्वयं अपनी देह में लेता है, आज्ञा के नीचे आकर, उनके लिए जो आज्ञा तोड़ चुके थे। और पद 12 का दूसरा हिस्सा और भी दूर तक जाता है। "परदेशियों को रूपा देकर मोल लिया जाए" वह व्यक्ति भी चिन्ह पाता है। नया नियम इसी भाषा को उठाता है: हम चाँदी से नहीं, मसीह के लहू से मोल लिए गए, और मसीह में विश्वासी को "हाथ से न किया गया खतना" मिलता है (कुलुस्सियों 2:11)। चाकू की जगह क्रूस, और घराने में प्रवेश खून से नहीं, उनके लहू से।
उत्पत्ति 17:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जो आपके घर या दैनिक दायरे में है पर "आपके अपने" नहीं है, और नाम लेकर ज़ोर से उसके लिए प्रार्थना कीजिए।
उत्पत्ति 17:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
अब्राहम निन्यानवे वर्ष का है, एक तम्बू में रहने वाला कुलपति जिसके घराने में सैकड़ों लोग हैं: सेवक, चरवाहे, उनके परिवार, खरीदे हुए दास। प्राचीन पूर्व में "घर" एक भावनात्मक इकाई नहीं, एक आर्थिक और राजनीतिक इकाई थी, और उसका मुखिया पूरे समूह के लिए बोलता था। खतना उस दुनिया में अनोखा नहीं था; मिस्र और कनान में भी होता था, पर वहाँ वह किशोरावस्था या विवाह से जुड़ा एक पुरुषत्व का संस्कार था। परमेश्वर उसे आठवें दिन पर ले जाते हैं, यानी वहाँ जहाँ न शक्ति है, न उपलब्धि, न प्रजनन क्षमता। और यह सब उस आदमी से कहा जा रहा है जो पद 8 के अनुसार उसी देश में "परदेशी होकर" रहता है।
उत्पत्ति 17:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके भीतर की किस अनकही सूची से आप तय करते हैं कि परमेश्वर के घराने में कौन "सचमुच" भीतर है, और पद 12 उस सूची को कहाँ तोड़ता है?
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Genesis 17 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

जब अब्राहम का खतना हुआ तब वह निन्यानवे वर्ष का था।"

निन्यानवे साल। उम्र का वह पड़ाव जहाँ इंसान कहता है, अब मुझसे कुछ नया नहीं होगा। पर उसी दिन, उसी शरीर में, अब्राहम ने परमेश्वर की बात मानी। देर नहीं की, बहाना नहीं बनाया।

तू किस बात के लिए खुद को बहुत बूढ़ा, बहुत थका हुआ, बहुत देर हो चुका मान बैठा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

परमेश्वर ने वाचा मुफ़्त में दी, पर उसका एक चिन्ह भी ठहराया: "जो पुरुष खतनारहित रहे... उसने मेरी वाचा को तोड़ा है।" चिन्ह से इनकार करना वाचा से इनकार करना था। सोच, तेरे जीवन पर परमेश्वर के अपनेपन का कोई चिन्ह दिखता है? या वाचा सिर्फ़ मन में छिपी बात बनकर रह गई है?

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