बाइबल व्याख्या

हबक्कूक 3

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

हबक्कूक की यह प्रार्थना एक गीत है, संगीत के निर्देश के साथ, पर इसका सुर कोई मीठा भजन नहीं है। नबी परमेश्वर की पुरानी कीर्ति सुनकर काँप उठता है और विनती करता है: "वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर… क्रोध करते हुए भी दया करना स्मरण कर।" फिर वह एक दर्शन खोलता है, जिसमें परमेश्वर तेमान से, पारान पर्वत से तूफान की तरह उतरते हैं, पहाड़ चकनाचूर होते हैं, समुद्र चीरा जाता है, और वे "अपनी प्रजा के उद्धार के लिये" निकलते हैं। अंत में नबी का शरीर टूट जाता है, पर उसका मुँह खुला रह जाता है: अंजीर न फले, खेत खाली रहें, तो भी वह यहोवा में आनन्दित रहेगा।

मर्म

यह अध्याय एक बहुत असहज सच्चाई सिखाता है: परमेश्वर की उपस्थिति आरामदेह नहीं होती। जब वे आते हैं, तो "उसके आगे-आगे मरी फैलती गई" और "सनातन पर्वत चकनाचूर हो गए।" जो सबसे स्थिर लगता था, वह भी उनके सामने टिक नहीं पाता। और फिर भी यही वह परमेश्वर हैं जो "अपनी प्रजा के उद्धार के लिये" निकलते हैं। बचाना और हिला देना यहाँ दो अलग काम नहीं हैं, एक ही काम के दो पहलू हैं। हबक्कूक ने अध्याय एक में शिकायत की थी कि परमेश्वर चुप हैं; अब वह देखता है कि परमेश्वर चुप नहीं, बल्कि आ रहे हैं, और उनका आना खुद एक भूकंप है। विश्वास का अर्थ यह नहीं कि हम काँपना छोड़ दें, बल्कि यह कि काँपते हुए भी हम उन्हीं की ओर मुड़े रहें।

सूत्र

पद 13 में एक शब्द है जो पूरे बाइबल की कहानी को समेट लेता है: "अपने अभिषिक्त के संग होकर उद्धार के लिये निकला।" इब्रानी में यह माशीअख, अभिषिक्त जन। हबक्कूक के समय इसका अर्थ राजा या इस्राएल की समूची प्रजा हो सकता था, पर यह शब्द आगे की ओर तनकर खड़ा है। और उसी पद में परमेश्वर "दुष्ट के घर के सिर को कुचलकर" रखते हैं, जो उत्पत्ति 3:15 की उस पुरानी प्रतिज्ञा की गूँज है कि स्त्री का वंश साँप का सिर कुचलेगा। यहाँ वह प्रतिज्ञा एक युद्धगीत बन चुकी है। मसीह के क्रूस में यही दृश्य फिर घटता है, पर उलटकर: कुचला गया सिर हमारे उद्धारकर्ता का था, और उसी कुचलने से हमारा शत्रु टूटा।

दर्पण

पद 17 को धीरे पढ़िए, क्योंकि वह आपकी सूची है। अंजीर न फले: वह प्रोजेक्ट जिस पर आपने तीन साल लगाए। खेतों में अन्न न उपजे: महीने के अंत में बचत का खाता खाली। थानों में गाय बैल न हों: वह सुरक्षा जिसके भरोसे आप रात को सोते हैं। हबक्कूक यह नहीं कहते कि ये चीज़ें बेकार हैं; वे कहते हैं कि इनके बिना भी वे जीवित रहेंगे, क्योंकि उनका आनन्द इनसे नहीं आता। और यही आपको चुभेगा। हम प्रायः परमेश्वर से प्रेम करते हैं क्योंकि वे हमारी फसल को बचाते हैं। यहाँ पूछा जा रहा है कि क्या फसल जल जाने पर भी वे आपके लिए काफी होंगे। ईमानदारी से उत्तर दीजिए, धार्मिकता से नहीं।

मुख्य पात्र

हबक्कूक को अकसर "विश्वास का नायक" कहकर सजा दिया जाता है, पर पद 16 उसे नंगा कर देता है: "मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे होंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियाँ सड़ने लगीं।" यह भक्ति का नहीं, आतंक का वर्णन है। उसका शरीर वह सच बोल रहा है जिसे उसका मन अभी संभाल रहा है। और ठीक इसी हालत में वह कहता है, "मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूँगा।" ध्यान दीजिए कि उसने काँपना बंद नहीं किया, उसने प्रतीक्षा करना शुरू किया। यही परिपक्व विश्वास का चेहरा है: भावनाएँ शांत नहीं हुईं, पर दिशा बदल गई। नबी अपनी घबराहट को झूठा नहीं कहता, वह उसे परमेश्वर के सामने रख देता है और वहीं खड़ा रहता है।

पृष्ठभूमि

पहले सुननेवाले यहूदा के लोग थे, जिनके सामने बाबुल की सेना बढ़ रही थी। उनके लिए पद 17 काव्य नहीं था; घेराबंदी का अर्थ यही होता था कि पेड़ काट दिए जाएँ, खेत रौंदे जाएँ, पशु छीन लिए जाएँ। यह भूख की तस्वीर थी, बच्चों की भूख की। और तेमान और पारान का उल्लेख उन्हें सीनै और निर्गमन की ओर ले जाता, जब परमेश्वर मिस्र से निकालने आए थे। नबी कह रहा है: जो परमेश्वर तब आए थे, वे फिर आ सकते हैं। पर वह यह भी जानता है कि उस बार भी परमेश्वर के आने में रेगिस्तान, मृत्यु और चालीस साल शामिल थे। यह सस्ता दिलासा नहीं था; यह एक इतिहास था जिसमें वे अपना दुख पहचान सकते थे।

प्रश्न

तो क्या हबक्कूक को उत्तर मिला? नहीं। उसने पद 2 में माँगा था, "वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर," और परमेश्वर ने वह समयसीमा नहीं दी। बाबुल फिर भी आया, यरूशलेम फिर भी गिरा। पुस्तक इस वादे पर खत्म नहीं होती कि सब ठीक हो जाएगा, बल्कि इस पर कि "वह मेरे पाँव हिरनों के समान बना देता है।" यानी परिस्थिति नहीं बदली, चलने की क्षमता बदली। यह हमें संतुष्ट नहीं करता, और शायद नहीं करना चाहिए। परमेश्वर ने यहाँ दुख को समझाया नहीं, उन्होंने अपने आपको दिया। कुछ प्रश्नों का उत्तर व्याख्या नहीं, उपस्थिति होती है, और हम इसे तभी स्वीकार कर पाते हैं जब और कोई चारा न बचे।

चिंतन

पद 17 की सूची में आपका अपना नाम क्या होगा: वह एक चीज़ जिसके छिन जाने पर आपको लगता है कि आपका विश्वास टूट जाएगा?

हबक्कूक काँपते हुए भी प्रतीक्षा करता है। आप अपनी घबराहट के साथ क्या करते हैं, उसे छिपाते हैं या परमेश्वर के सामने रखते हैं?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।

स्वीकारोक्ति

स्वीकारोक्ति

संत अगस्तीन

अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।

उद्देश्य भरा जीवन

उद्देश्य भरा जीवन

रिक वॉरेन

चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

भाई लॉरेन्स

रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।

जंगल का छिपने का स्थान

जंगल का छिपने का स्थान

कोरी टेन बूम

नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।

जीसस कॉलिंग

जीसस कॉलिंग

सारा यंग

प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।

एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Habakkuk 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

हबक्कूक 3 का क्या अर्थ है?
हबक्कूक की यह प्रार्थना एक गीत है, संगीत के निर्देश के साथ, पर इसका सुर कोई मीठा भजन नहीं है। नबी परमेश्वर की पुरानी कीर्ति सुनकर काँप उठता है और विनती करता है: "वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर... क्रोध करते हुए भी दया करना स्मरण कर।" फिर वह एक दर्शन खोलता है, जिसमें परमेश्वर तेमान से, पारान पर्वत से तूफान की तरह उतरते हैं, पहाड़ चकनाचूर होते हैं, समुद्र चीरा जाता है, और वे "अपनी प्रजा के उद्धार के लिये" निकलते हैं। अंत में नबी का शरीर टूट जाता है, पर उसका मुँह खुला रह जाता है: अंजीर न फले, खेत खाली रहें, तो भी वह यहोवा में आनन्दित रहेगा।
हबक्कूक 3 किस विषय में है?
पद 13 में एक शब्द है जो पूरे बाइबल की कहानी को समेट लेता है: "अपने अभिषिक्त के संग होकर उद्धार के लिये निकला।" इब्रानी में यह माशीअख, अभिषिक्त जन। हबक्कूक के समय इसका अर्थ राजा या इस्राएल की समूची प्रजा हो सकता था, पर यह शब्द आगे की ओर तनकर खड़ा है। और उसी पद में परमेश्वर "दुष्ट के घर के सिर को कुचलकर" रखते हैं, जो उत्पत्ति 3:15 की उस पुरानी प्रतिज्ञा की गूँज है कि स्त्री का वंश साँप का सिर कुचलेगा। यहाँ वह प्रतिज्ञा एक युद्धगीत बन चुकी है। मसीह के क्रूस में यही दृश्य फिर घटता है, पर उलटकर: कुचला गया सिर हमारे उद्धारकर्ता का था, और उसी कुचलने से हमारा शत्रु टूटा।
हबक्कूक 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
हबक्कूक को अकसर "विश्वास का नायक" कहकर सजा दिया जाता है, पर पद 16 उसे नंगा कर देता है: "मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे होंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियाँ सड़ने लगीं।" यह भक्ति का नहीं, आतंक का वर्णन है। उसका शरीर वह सच बोल रहा है जिसे उसका मन अभी संभाल रहा है। और ठीक इसी हालत में वह कहता है, "मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूँगा।" ध्यान दीजिए कि उसने काँपना बंद नहीं किया, उसने प्रतीक्षा करना शुरू किया। यही परिपक्व विश्वास का चेहरा है: भावनाएँ शांत नहीं हुईं, पर दिशा बदल गई। नबी अपनी घबराहट को झूठा नहीं कहता, वह उसे परमेश्वर के सामने रख देता है और वहीं खड़ा रहता है।
हबक्कूक 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
तो क्या हबक्कूक को उत्तर मिला? नहीं। उसने पद 2 में माँगा था, "वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर," और परमेश्वर ने वह समयसीमा नहीं दी। बाबुल फिर भी आया, यरूशलेम फिर भी गिरा। पुस्तक इस वादे पर खत्म नहीं होती कि सब ठीक हो जाएगा, बल्कि इस पर कि "वह मेरे पाँव हिरनों के समान बना देता है।" यानी परिस्थिति नहीं बदली, चलने की क्षमता बदली। यह हमें संतुष्ट नहीं करता, और शायद नहीं करना चाहिए। परमेश्वर ने यहाँ दुख को समझाया नहीं, उन्होंने अपने आपको दिया। कुछ प्रश्नों का उत्तर व्याख्या नहीं, उपस्थिति होती है, और हम इसे तभी स्वीकार कर पाते हैं जब और कोई चारा न बचे।
हबक्कूक 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
हबक्कूक काँपते हुए भी प्रतीक्षा करता है। आप अपनी घबराहट के साथ क्या करते हैं, उसे छिपाते हैं या परमेश्वर के सामने रखते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Habakkuk 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

यह सुनते ही मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे।" हबक्कूक का शरीर डर से हिल रहा है, फिर भी वह इंतज़ार करना चुनता है। ध्यान दे, उसने काँपना बंद नहीं किया, उसने भागना बंद किया। विश्वास का मतलब यह नहीं कि तेरे घुटने मज़बूत हों; इसका मतलब है कि काँपते घुटनों के साथ भी तू परमेश्वर के समय की बाट जोहता रहे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

शिग्योनोत की रीति पर हबक्कूक नबी की प्रार्थना।" दो अध्याय तक जो आदमी परमेश्वर से लड़ता रहा, "हे यहोवा, मैं कब तक तेरी दुहाई दूँ," वही अब अपने सवालों को गीत का सुर दे रहा है। उसका दर्द खत्म नहीं हुआ, पर वह उसे गाने लगा। तेरी शिकायत भी प्रार्थना बन सकती है। उसे दबा मत, उसे परमेश्वर के सामने रख दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

मैंने कूशान के तम्बुओं को क्लेश में पड़े देखा; मिद्यान देश के पर्दे थरथराने लगे।" हबक्कूक उस समय बाबेल के डर में जी रहा था, और परमेश्वर उसे याद दिलाता है कि जब वह चलता है तो जाति जाति के तम्बू काँप उठते हैं। तेरे डर की चीज़ें भी बस कपड़े के पर्दे हैं। सवाल यह है, तू किसकी आहट सुनकर काँपता है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 3

परमेश्वर, तू दूर के पहाड़ों से भी मेरी ओर आता है, और तेरी महिमा आकाश को ढँक लेती है। जब मेरा मन डरा हुआ हो, तब मुझे याद दिला कि तू पास है। मेरा जीवन भी तेरी स्तुति से भर जाए, जैसे यह सारी धरती तेरे गुण गाती है।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

कंपनी?