बाइबल व्याख्या

यिर्मयाह 4:17

बाइबल
यह वचन Jesus Christ’s Church द्वारा समर्पित है

पाठ

खेत के चारों ओर खड़े रखवाले। फसल पकने के दिनों में यह दृश्य हर यहूदी की आँखों में बसा था: कटनी से पहले चोरों और जानवरों से बचाने के लिए लोग खेत की चारों दिशाओं में पहरा बिठा देते थे, कोई भीतर न घुसे, कोई बाहर न निकले। यिर्मयाह कहते हैं कि अब यरूशलेम वही खेत है, और उत्तर से आती हुई सेनाएँ वही पहरेदार। "वे खेत के रखवालों के समान उसको चारों ओर से घेर रहे हैं," और इसका कारण किसी सैन्य रणनीति में नहीं, बल्कि एक रिश्ते के टूटने में छिपा है: "क्योंकि उसने मुझसे बलवा किया है, यहोवा की यही वाणी है।" घेराबंदी का असली कारण दीवारों के बाहर नहीं, भीतर था।

मर्म

ध्यान दीजिए कि परमेश्वर यह नहीं कहते कि "उन्होंने व्यवस्था तोड़ी" या "उन्होंने पाप किया।" वे कहते हैं: उसने मुझसे बलवा किया है। पहला व्यक्ति। यह किसी नियम-पुस्तिका के उल्लंघन की शिकायत नहीं, बल्कि एक ठुकराए गए प्रेमी की, एक अनसुने राजा की आवाज़ है। बाबुल की सेना यहाँ इतिहास की आकस्मिक दुर्घटना नहीं; वह उस वाचा के भीतर की प्रतिक्रिया है जिसमें इस्राएल ने स्वयं को बाँधा था। और यही इस पद की चुभन है: परमेश्वर विपत्ति से दूर खड़े दर्शक नहीं हैं, वे उसके पीछे खड़े हैं। पर यह भी सच है कि जो घेरा वे खड़ा करते हैं, वह खेत के रखवाले का घेरा है, नष्ट करने वाले का नहीं। रखवाला फसल की रखवाली करता है। न्याय भी, आश्चर्यजनक रूप से, किसी चीज़ को बचाने के लिए ही है।

सूत्र

यह घेरा यिर्मयाह के साथ ख़त्म नहीं होता। पूरे शास्त्र में एक पैटर्न चलता है: जो परमेश्वर से मुँह फेरता है, वह अंततः चारों ओर से घिर जाता है, क्योंकि जीवन का स्रोत छोड़ने पर बचने की कोई दिशा नहीं रह जाती। परन्तु इसी अध्याय में परमेश्वर एक दरार छोड़ देते हैं: "सारा देश उजाड़ हो जाएगा; तो भी मैं उसका अन्त न करूँगा।" रखवाला खेत को जलाता नहीं। और सदियों बाद एक और व्यक्ति यरूशलेम के बाहर चारों ओर से घिरा खड़ा होगा, सैनिकों से घिरा, भीड़ से घिरा, अंधकार से घिरा, पर वह बलवा करने वाला नहीं था। मसीह ने बागी की जगह लेकर वह घेराबंदी अपने ऊपर ओढ़ ली जो हमारी थी। न्याय टला नहीं, स्थान बदल गया।

दर्पण

हम सोचते हैं कि हमारी मुसीबतें बाहर से आती हैं: बॉस का रवैया, बाज़ार की हालत, वह रिश्तेदार जो बात नहीं करता, शरीर की वह रिपोर्ट जो ठीक नहीं आई। और कई बार सचमुच ऐसा ही होता है; यिर्मयाह का यह पद हर दुःख को पाप का बिल बना देने का लाइसेंस नहीं है। पर यह एक सवाल ज़रूर हमारे सामने रख देता है जिसे हम टालते हैं: क्या मेरे जीवन में कोई ऐसी जगह है जहाँ मैंने सचेत रूप से परमेश्वर से "नहीं" कहा है, और फिर उसके नतीजों को दुर्भाग्य का नाम दे दिया है? यिर्मयाह की पुकार सीधी है: "हे यरूशलेम, अपना हृदय बुराई से धो, कि तुम्हारा उद्धार हो जाए।" आज कागज़ के एक टुकड़े पर वह एक बात लिखिए जिसमें आप जानते हैं कि आप परमेश्वर की नहीं सुन रहे, फिर उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए: "प्रभु, यह मेरा बलवा है," और कागज़ फाड़ दीजिए।

बारीकी

"चारों ओर से" के पीछे इब्रानी शब्द है सावीव, और यिर्मयाह की पुस्तक में यह शब्द जैसे एक धड़कन बन जाता है। वे बार-बार "चारों ओर भय" की बात करते हैं; यह उनका हस्ताक्षर-वाक्य है, इतना कि बाद में विरोधी उन्हीं का मज़ाक उड़ाने के लिए यही नाम उन्हें दे देते हैं। एक शब्द में पूरी मनोदशा बँधी है: वह अनुभव जब खतरा किसी एक दिशा से नहीं आता, बल्कि हर खिड़की से झाँकता है। घिरे हुए नगर की सबसे बड़ी यातना तलवार नहीं, विकल्पहीनता है। और यही इस पद की क्रूर दया भी है, क्योंकि जिसके पास भागने की कोई दिशा नहीं बची, उसके पास ऊपर देखने की एक दिशा अब भी बची है।

अंतर्पाठ

व्यवस्थाविवरण के अंतिम अध्यायों में वाचा की शर्तें साफ़ रखी गई थीं: यदि इस्राएल मुँह फेरेगा, तो शत्रु आकर उनके नगरों को घेर लेंगे और दीवारें गिरेंगी। यिर्मयाह कुछ नया नहीं कह रहे; वे उस पुराने दस्तावेज़ को ऊँची आवाज़ में पढ़ रहे हैं जिस पर इस्राएल के पुरखों ने हामी भरी थी। और फिर लूका के सुसमाचार में यीशु उसी यरूशलेम को देखकर रोते हैं और कहते हैं कि शत्रु उसे चारों ओर से घेर लेंगे, क्योंकि उसने अपने दर्शन के समय को न पहचाना। छह सौ साल बाद वही दृश्य, वही शब्द, वही आँसू। फ़र्क यह है कि अब रोने वाला केवल नबी नहीं, स्वयं परमेश्वर का पुत्र है।

पृष्ठभूमि

यह लगभग सातवीं सदी ईसा पूर्व के अंतिम वर्षों की बात है। अश्शूर का साम्राज्य ढह रहा है, बाबुल उठ रहा है, और उत्तर के रास्ते से हर बड़ी सेना यहूदा पर टूटती है, इसलिए "उत्तर की दिशा" यहाँ केवल दिशासूचक नहीं, आतंक का पर्याय है। यरूशलेम में दरबारी नीति मिस्र और बाबुल के बीच झूल रही है, और मंदिर की मौजूदगी लोगों को एक झूठी सुरक्षा देती है: परमेश्वर का भवन यहाँ है, तो नगर कैसे गिरेगा? नबी भी यही दोहरा रहे हैं, और यिर्मयाह इसी पर तड़पकर कहते हैं कि प्रजा को "शान्ति मिलेगी" कहकर धोखा दिया गया है। इस माहौल में एक अकेला आदमी खड़ा होकर कहता है कि रखवाले आ रहे हैं, और कोई उसकी नहीं सुनता।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन-सी "चारों ओर से घिरी" स्थिति है जिसे आप अब तक केवल बाहरी दुर्भाग्य मानते आए हैं, और क्या होगा यदि आप उसे परमेश्वर के सामने ईमानदारी से खोलकर रख दें?

यदि न्याय भी रखवाली का एक रूप हो सकता है, तो परमेश्वर आपके जीवन की किस चीज़ को बचाने के लिए आपको रोक रहे होंगे?

Jeremiah में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Jeremiah

Christopher Wright

Walks with the weeping prophet and the God whose word will not fail.

Jeremiah and Lamentations: An Introduction and Commentary

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Jeremiah, Lamentations

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Jeremiah 4:17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यिर्मयाह 4:17 का क्या अर्थ है?
खेत के चारों ओर खड़े रखवाले। फसल पकने के दिनों में यह दृश्य हर यहूदी की आँखों में बसा था: कटनी से पहले चोरों और जानवरों से बचाने के लिए लोग खेत की चारों दिशाओं में पहरा बिठा देते थे, कोई भीतर न घुसे, कोई बाहर न निकले। यिर्मयाह कहते हैं कि अब यरूशलेम वही खेत है, और उत्तर से आती हुई सेनाएँ वही पहरेदार। "वे खेत के रखवालों के समान उसको चारों ओर से घेर रहे हैं," और इसका कारण किसी सैन्य रणनीति में नहीं, बल्कि एक रिश्ते के टूटने में छिपा है: "क्योंकि उसने मुझसे बलवा किया है, यहोवा की यही वाणी है।" घेराबंदी का असली कारण दीवारों के बाहर नहीं, भीतर था।
यिर्मयाह 4:17 किस विषय में है?
यह घेरा यिर्मयाह के साथ ख़त्म नहीं होता। पूरे शास्त्र में एक पैटर्न चलता है: जो परमेश्वर से मुँह फेरता है, वह अंततः चारों ओर से घिर जाता है, क्योंकि जीवन का स्रोत छोड़ने पर बचने की कोई दिशा नहीं रह जाती। परन्तु इसी अध्याय में परमेश्वर एक दरार छोड़ देते हैं: "सारा देश उजाड़ हो जाएगा; तो भी मैं उसका अन्त न करूँगा।" रखवाला खेत को जलाता नहीं। और सदियों बाद एक और व्यक्ति यरूशलेम के बाहर चारों ओर से घिरा खड़ा होगा, सैनिकों से घिरा, भीड़ से घिरा, अंधकार से घिरा, पर वह बलवा करने वाला नहीं था। मसीह ने बागी की जगह लेकर वह घेराबंदी अपने ऊपर ओढ़ ली जो हमारी थी। न्याय टला नहीं, स्थान बदल गया।
यिर्मयाह 4:17 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
"चारों ओर से" के पीछे इब्रानी शब्द है सावीव, और यिर्मयाह की पुस्तक में यह शब्द जैसे एक धड़कन बन जाता है। वे बार-बार "चारों ओर भय" की बात करते हैं; यह उनका हस्ताक्षर-वाक्य है, इतना कि बाद में विरोधी उन्हीं का मज़ाक उड़ाने के लिए यही नाम उन्हें दे देते हैं। एक शब्द में पूरी मनोदशा बँधी है: वह अनुभव जब खतरा किसी एक दिशा से नहीं आता, बल्कि हर खिड़की से झाँकता है। घिरे हुए नगर की सबसे बड़ी यातना तलवार नहीं, विकल्पहीनता है। और यही इस पद की क्रूर दया भी है, क्योंकि जिसके पास भागने की कोई दिशा नहीं बची, उसके पास ऊपर देखने की एक दिशा अब भी बची है।
यिर्मयाह 4:17 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह लगभग सातवीं सदी ईसा पूर्व के अंतिम वर्षों की बात है। अश्शूर का साम्राज्य ढह रहा है, बाबुल उठ रहा है, और उत्तर के रास्ते से हर बड़ी सेना यहूदा पर टूटती है, इसलिए "उत्तर की दिशा" यहाँ केवल दिशासूचक नहीं, आतंक का पर्याय है। यरूशलेम में दरबारी नीति मिस्र और बाबुल के बीच झूल रही है, और मंदिर की मौजूदगी लोगों को एक झूठी सुरक्षा देती है: परमेश्वर का भवन यहाँ है, तो नगर कैसे गिरेगा?
यिर्मयाह 4:17 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि न्याय भी रखवाली का एक रूप हो सकता है, तो परमेश्वर आपके जीवन की किस चीज़ को बचाने के लिए आपको रोक रहे होंगे?
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Jeremiah 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

सिय्योन की ओर झण्डा खड़ा करो; भाग जाओ, खड़े मत रहो!" ध्यान दे, जो विपत्ति ला रहा है, वही पहले चेतावनी का झण्डा भी उठवा रहा है। न्याय के बीच भी परमेश्वर का मन यही है कि तू बच जाए। पर एक सवाल रह जाता है: तेरे जीवन में वह कौन सी बात है जिसके बारे में तू जानता है कि भागना चाहिए, फिर भी तू खड़ा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

वे खेत के रखवालों के समान उसको चारों ओर से घेर लेते हैं," यहोवा कहता है, "क्योंकि उसने मुझसे बलवा किया है।" सोच, रखवाले तो फसल की रक्षा के लिए होते हैं, पर यहाँ वही घेरा न्याय बन गया। परमेश्वर से दूरी हमें खुली आज़ादी नहीं देती, वह धीरे धीरे हमारे चारों ओर दीवार बन जाती है। आज तेरे जीवन में कौन सा घेरा तुझे पुकार रहा है कि लौट आ?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 31

प्रसव की पीड़ा आमतौर पर जीवन की ओर ले जाती है, पर यहाँ यरूशलेम की चीख किसी नए जन्म में नहीं, मौत में खुलती है। "हाय मुझ पर! क्योंकि मेरा प्राण हत्यारों के हाथ पड़ने से निर्बल हो चला है।" फिर भी ध्यान दे, परमेश्वर ने यह रोना सुना और लिख रखा। तेरी वह चीख भी, जो किसी फल तक नहीं पहुँची, उसके कानों से छूटी नहीं।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 3

पिता, धन्यवाद कि आप कहते हैं, "अपनी पड़ती भूमि को जोतो, और कँटीले झाड़ों में बीज मत बोओ।" धन्यवाद कि आपने मेरे मन की कठोर, बंजर पड़ी जगहों को दिखाया और उन्हें यूँ ही छोड़ नहीं दिया। आपका वचन काँटों में व्यर्थ नहीं जाता, आप पहले भूमि तैयार करते हैं।

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