अय्यूब 8:7
पाठ
बिल्दद अपनी पूरी दलील का सार एक ही वाक्य में समेट देता है: "चाहे तेरा भाग पहले छोटा ही रहा हो परन्तु अन्त में तेरी बहुत बढ़ती होती।" ध्यान दीजिए, यह वाक्य अकेला खड़ा नहीं है; यह पिछले दो पदों की शर्त से बँधा हुआ है। यदि अय्यूब परमेश्वर को यत्न से ढूँढ़ता, यदि वह निर्मल और धर्मी रहता, तब जाकर यह होता। यानी बिल्दद कह रहा है: तेरा छोटा-सा आज एक विशाल कल में बदल सकता है, बशर्ते तू अपने आप को ठीक कर ले। यह सांत्वना नहीं, एक सौदा है, जो राख पर बैठे हुए एक टूटे आदमी के सामने रखा जा रहा है।
मर्म
विडंबना यह है कि बिल्दद का वाक्य अपने आप में झूठ नहीं है। अय्यूब का अंत सचमुच उसके आरम्भ से बड़ा होगा। परमेश्वर छोटे आरम्भ से बड़ा अंत गढ़ने में ही आनंद लेते हैं; यह उनके काम करने का ढंग है, सृष्टि से लेकर क्रूस तक। गड़बड़ी वाक्य में नहीं, उस "यदि" में है जो इसके आगे लगा है। बिल्दद बढ़ती को धार्मिकता की मजदूरी बना देता है, एक हिसाब जिसमें परमेश्वर देनदार हैं और मनुष्य लेनदार। परन्तु अय्यूब की कहानी का पूरा बोझ ही यह है कि वह पहले से ही खरा था, और फिर भी उजड़ गया। इसलिए यह पद हमें एक तीखे सवाल के सामने खड़ा करता है: क्या अंत की बढ़ती हमारी निर्मलता का प्रतिफल है, या परमेश्वर की उस दया का फल जो हमारी योग्यता से कहीं आगे जाती है? पूरा सुसमाचार इसी अंतर पर टिका है।
जोड़ने वाला सूत्र
"छोटा आरम्भ, बड़ा अंत" बाइबल का एक सचमुच का सूत्र है। बाँझ स्त्री से एक राष्ट्र, चरवाहे लड़के से राजा, बन्धुए लोगों से लौटी हुई मंडली, और आखिर में एक जन्मस्थान की चरनी से संसार का उद्धार। अय्यूब की पुस्तक के आखिरी अध्याय में सचमुच वही होता है जो बिल्दद कह रहा है: अय्यूब का पिछला समय उसके पहले समय से बड़ा हुआ। परन्तु बिल्दद की शर्त पूरी नहीं होती; अय्यूब न तो अपनी निर्मलता सिद्ध करता है, न गिड़गिड़ाकर सौदा करता है, वह तो परमेश्वर के सामने मुँह पर हाथ रखकर चुप हो जाता है। और यहीं से रास्ता क्रूस की ओर मुड़ जाता है। फिलिप्पियों 2 में पौलुस उसी आकार का वर्णन करता है: जो दीन बना, मृत्यु तक झुका, और इसलिए ऊँचा उठाया गया। अंतर यह है कि यीशु मसीह वही एकमात्र व्यक्ति थे जो सचमुच निर्मल और धर्मी थे, और उन्हें बढ़ती नहीं, कुचला जाना मिला। बिल्दद का हिसाब क्रूस पर पूरी तरह टूट जाता है, और उसी टूटे हिसाब के मलबे से पुनरुत्थान उठता है, इनाम के रूप में नहीं, दान के रूप में।
दर्पण
हमारे भीतर बिल्दद बड़े आराम से बैठा रहता है। जब किसी सहकर्मी की नौकरी छूटती है, जब किसी परिवार का बेटा भटक जाता है, जब किसी की बीमारी लम्बी खिंचती है, तो मन चुपचाप कारण खोजने लगता है। वह कारण खोजना दया नहीं, अपनी सुरक्षा है: यदि उसके साथ किसी वजह से हुआ, तो मेरे साथ बिना वजह नहीं होगा। और उसी तर्क का उलटा सिरा हमें भीतर से काटता है, जब हमारा ही कुछ बिखरता है और हम रात में हिसाब लगाने बैठते हैं कि कौन-सा पाप इस नुकसान की कीमत था। यह पद हमसे पूछता है कि हमारी आशा किस पर टिकी है, अपनी निर्मलता के रिकॉर्ड पर या परमेश्वर के चरित्र पर।
आज ही किसी ऐसे व्यक्ति को संदेश भेजिए जिसका जीवन इस समय टूटा हुआ है, और उस संदेश में एक भी सलाह, एक भी "यदि तुम ऐसा करते" न लिखिए, केवल इतना कि आप उसे याद कर रहे हैं और उसके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
पहले श्रोता
जिन लोगों ने यह पुस्तक पहली बार सुनी, उनके कानों में बिल्दद की बात बिल्कुल सही सुनाई देती थी। वे व्यवस्था के आशीष और शाप के ढाँचे में जीते थे, और नीतिवचनों की उस बुद्धि में पले थे जहाँ परिश्रम और भय मानने से जीवन फलता है। बिल्दद कोई नास्तिक नहीं, वह उनका सबसे भरोसेमंद पड़ोसी है, जो पुरानी पीढ़ियों की जाँच-पड़ताल का हवाला देता है। इसलिए यह पुस्तक उनके लिए इतनी बेचैन करने वाली थी: यह उनकी धर्मशास्त्रीय सुविधा पर हाथ रखती है। और जो लोग बन्धुआई में सब कुछ खोकर बैठे थे, जिनका मंदिर जल चुका था, उनके लिए यह प्रश्न किताबी नहीं था। उन्हें यह सुनना पड़ा कि परमेश्वर की धार्मिकता उनके हिसाब की किताब से बड़ी है।
मुख्य पात्र
बिल्दद परम्परा का आदमी है। वह अपनी बात नहीं कहता, वह पुरखाओं की आवाज़ बनकर बोलता है, और इसी में उसकी ताकत और उसकी क्रूरता दोनों छिपी हैं। उसकी शुरुआत ही बेरहम है, वह अय्यूब के मरे हुए बच्चों को दलील का सबूत बना देता है। परन्तु उसके नीचे, मुझे लगता है, डर बैठा है। यदि अय्यूब निर्दोष है और फिर भी उजड़ गया, तो बिल्दद का अपना घर भी किसी सुरक्षित नींव पर नहीं है। इसलिए वह परमेश्वर की रक्षा करने के बहाने असल में अपनी दुनिया की व्यवस्था बचा रहा है। धर्मशास्त्र जब डर से बोलता है, तो वह सच्चा भी हो सकता है और फिर भी घायल को कुचल सकता है।
एक बारीकी
"चाहे तेरा भाग पहले छोटा ही रहा हो।" यह शब्द ध्यान से देखिए, क्योंकि यह गलत है। अय्यूब का आरम्भ छोटा नहीं था; वह पूरे पूर्व देश का सबसे बड़ा आदमी था। बिल्दद उससे इस तरह बात कर रहा है जैसे वह जीवन शुरू करने वाला कोई जवान हो, जिसे भक्ति में निवेश करके भविष्य बनाना है। यह वाक्य अय्यूब की वास्तविकता को छूता ही नहीं। और फिर दूसरा शब्द, "अन्त में"। बिल्दद के लिए इसका अर्थ अगले दस साल हैं, फिर से भरे हुए खलिहान। पवित्रशास्त्र में यही शब्द धीरे-धीरे उस अंतिम भविष्य की ओर खिंचता जाता है जिसे अय्यूब आगे खुद पकड़ेगा, जब वह कहेगा कि मेरा छुड़ाने वाला जीवित है। बिल्दद हिसाब के अंत की बात कर रहा है; परमेश्वर पुनरुत्थान के अंत की।
चिंतन
आपके भीतर जो चुपचाप हिसाब लगाता रहता है कि किसके साथ क्यों हुआ, वह किस डर से बोलता है?
यदि आपकी बढ़ती आपकी निर्मलता का इनाम नहीं, तो आपकी आशा आज किस नींव पर खड़ी है?
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Job 8:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
अय्यूब 8:7 का क्या अर्थ है?
अय्यूब 8:7 किस विषय में है?
अय्यूब 8:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
अय्यूब 8:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
अय्यूब 8:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Job 8 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
बिलदद कहता है, "क्योंकि हम तो कल ही के हैं और कुछ नहीं जानते, और पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान हैं।" बात सच है, पर ध्यान दे, यही आदमी अय्यूब के दुख का कारण बड़े भरोसे से बता रहा है। अपनी कमज़ोरी मानना आसान है, उसे अपने फैसलों पर लागू करना मुश्किल। तू किसी के दर्द को समझाने से पहले रुकता है या नहीं?
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