बाइबल व्याख्या

न्यायियों 12

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

अम्मोनियों पर मिली जीत की धूल भी नहीं बैठी थी कि एप्रैमी इकट्ठे होकर सापोन पहुँच गए और यिप्तह को धमकी दी: "हम तेरा घर तुझ समेत जला देंगे।" यिप्तह जवाब में अपनी बेबसी गिनाता है, फिर गिलाद के सब पुरुषों को इकट्ठा करके अपने ही भाइयों से लड़ता है। यरदन के घाटों पर एक शब्द की परीक्षा खड़ी की जाती है, और बयालीस हजार एप्रैमी मारे जाते हैं। इसके बाद अध्याय अचानक ठंडा पड़ जाता है: यिप्तह छह वर्ष न्याय करके मर जाता है, और इबसान, एलोन तथा अब्दोन की छोटी-छोटी सूचियाँ रह जाती हैं, बेटे, बेटियाँ, गदहे, कब्रें।

मर्म

ध्यान दीजिए, इस पूरे अध्याय में परमेश्वर एक बार बोलते नहीं। "यहोवा" का नाम केवल यिप्तह के मुँह में आता है, और वहाँ भी अपनी सफ़ाई देने के लिए: "यहोवा ने उनको मेरे हाथ में कर दिया।" उद्धार को तर्क बना लेना, यही इस अध्याय की बीमारी है। न्यायियों की पुस्तक का ढाँचा हम जानते हैं: इस्राएल भटकता है, पुकारता है, परमेश्वर छुटकारा देते हैं। पर यहाँ छुटकारा पाकर भी हृदय नहीं बदलता। जो हाथ अम्मोनियों से लड़ा, वही अपने भाइयों पर उठता है। परमेश्वर का बचाव मनुष्य को स्वतः नम्र नहीं बनाता; कृपा पाकर भी हम उसे अपने अहंकार का हथियार बना सकते हैं। यही इस अध्याय की चुभने वाली सच्चाई है।

सूत्र

यही झगड़ा गिदोन के साथ भी हुआ था। एप्रैमी तब भी शिकायत लेकर आए थे कि उन्हें बुलाया नहीं गया, और गिदोन ने नरम उत्तर देकर आग बुझा दी थी (न्यायियों 8)। यिप्तह के पास वैसा उत्तर नहीं है, और परिणाम लाशों के ढेर हैं। न्यायियों की पुस्तक इसी ढलान पर उतरती है, बिन्यामीन के विरुद्ध गृहयुद्ध तक। सूत्र यह है: छुड़ानेवाले स्वयं छुड़ाए जाने की आवश्यकता रखते हैं। अब्दोन के सत्तर बेटे-पोते गदहों पर सवार होकर एक राजवंश का सपना दिखाते हैं, पर इस्राएल को गदहे पर सवार उस राजा की प्रतीक्षा करनी है जिसकी घोषणा जकर्याह करता है और जो यरूशलेम में आकर बँटवारे की दीवार तोड़ता है, न कि घाटों पर पहरा बिठाता है।

दर्पण

एप्रैम की शिकायत झूठी नहीं थी, और यिप्तह का घाव भी असली था; उसने सचमुच सहायता माँगी थी और सचमुच अकेला छोड़ा गया था। यही इस कहानी को हमारे इतना निकट ले आता है। हमारी सबसे खतरनाक लड़ाइयाँ झूठ पर नहीं, आधे-सच पर खड़ी होती हैं: वह भाई जिसने बीमारी में फोन नहीं किया, वह सहकर्मी जिसने श्रेय बाँटा नहीं, वह कलीसिया जिसने आपको मंडली के बाहर समझा। हमारे पास भी अपने "शिब्बोलेत" हैं, बोलने का ढंग, गाने की शैली, राजनीतिक राय, जिनसे हम पल भर में तय कर लेते हैं कि कौन अपना है और कौन पार जाने लायक नहीं। आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसे आपने मन में "हमारे जैसा नहीं" कहकर किनारे किया है, और उस नाम को ज़ोर से बोलकर परमेश्वर से उसके लिए आशीष माँगिए।

मुख्य पात्र

यिप्तह के मुँह से निकला वाक्य याद रखिए और एप्रैम का ताना भी: "तुम तो एप्रैम और मनश्शे के बीच रहनेवाले एप्रैमियों के भगोड़े हो।" भगोड़ा! यही शब्द यिप्तह की पूरी ज़िंदगी का नाम है। वेश्या का बेटा, भाइयों द्वारा घर से निकाला हुआ, तोब देश में डाकुओं का सरदार, और फिर ज़रूरत पड़ने पर बुलाया गया। जिस अपमान से वह भागा था, वही अपमान उस पर फिर फेंका जाता है, और वह उसे सहन नहीं कर पाता। अनचंगा घाव सत्ता पाकर तलवार बन जाता है। पहले उसकी जल्दबाजी में मानी हुई मन्नत ने उसकी बेटी ली, अब उसकी चोट बयालीस हजार लेती है। छह वर्ष, और "गिलाद के किसी नगर" में एक बेनाम कब्र।

विवरण

"शिब्बोलेत" कोई जादुई शब्द नहीं था; इब्रानी में इसका अर्थ है बहती धारा या अनाज की बाल। सोचिए इसकी विडंबना: यरदन के घाट पर, बहते पानी के किनारे, "बहती धारा" कहने का ढंग जीवन और मृत्यु तय करता है। एक व्यंजन का अंतर, और मनुष्य मारा जाता है। मत्ती के सुसमाचार में आँगन में खड़े पतरस को भी उसकी बोली पकड़वाती है, "तेरी बोली तुझे प्रकट करती है।" पर वहाँ पहचान के बाद तलवार नहीं, आँसू और फिर भोर की क्षमा आती है। दोनों दृश्यों में लहजा आदमी को नंगा कर देता है; फ़र्क इसमें है कि पकड़नेवाला कौन है, यरदन का पहरेदार या पुनरुत्थित प्रभु।

संदर्भ

राजाओं से पहले का समय है, बारह गोत्र ढीले-ढाले संघ में बँधे हैं और कोई केंद्रीय अधिकार नहीं। गिलाद यरदन के पूर्व में, सीमांत का इलाका, हमेशा अम्मोनियों के दबाव में; एप्रैम यरदन के पश्चिम पहाड़ी हृदयभूमि में, यूसुफ का वारिस, जो स्वयं को नेतृत्व का स्वाभाविक हक़दार मानता था। यह मान-सम्मान की संस्कृति है, जहाँ युद्ध में न बुलाया जाना अपमान है और अपमान का बदला ज़रूरी। यरदन के घाट सैनिक दृष्टि से निर्णायक थे; जिसने घाट पकड़ा, उसने आवागमन पकड़ा। और न्यायियों की छोटी सूचियाँ, तीस बेटे, तीस बेटियाँ, सत्तर गदहे, केवल आँकड़े नहीं; ये सम्पत्ति, विवाह-गठजोड़ और वंश बढ़ाने की महत्वाकांक्षा की भाषा हैं।

आपके जीवन में कौन-सा "शिब्बोलेत" है, वह छोटा-सा अंतर जिससे आप तय करते हैं कि कौन भीतर है और कौन बाहर?

यिप्तह का घाव असली था। आपके किस असली घाव को आपने अब तक परमेश्वर के सामने नहीं, बल्कि दूसरों के विरुद्ध हथियार बनाकर रखा है?

Judges में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Judges For You

Timothy Keller

Keller shows how this dark book shines light on grace for flawed people.

Judges: Such a Great Salvation

Dale Ralph Davis

Brings the judges to life without taming the rough edges of the text.

The Message of Judges

Michael Wilcock

Steady guidance through the darkest chapters of Israel's story.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Judges, Ruth

K. Lawson Younger

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Judges 12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

न्यायियों 12 का क्या अर्थ है?
अम्मोनियों पर मिली जीत की धूल भी नहीं बैठी थी कि एप्रैमी इकट्ठे होकर सापोन पहुँच गए और यिप्तह को धमकी दी: "हम तेरा घर तुझ समेत जला देंगे।" यिप्तह जवाब में अपनी बेबसी गिनाता है, फिर गिलाद के सब पुरुषों को इकट्ठा करके अपने ही भाइयों से लड़ता है। यरदन के घाटों पर एक शब्द की परीक्षा खड़ी की जाती है, और बयालीस हजार एप्रैमी मारे जाते हैं। इसके बाद अध्याय अचानक ठंडा पड़ जाता है: यिप्तह छह वर्ष न्याय करके मर जाता है, और इबसान, एलोन तथा अब्दोन की छोटी-छोटी सूचियाँ रह जाती हैं, बेटे, बेटियाँ, गदहे, कब्रें।
न्यायियों 12 किस विषय में है?
यही झगड़ा गिदोन के साथ भी हुआ था। एप्रैमी तब भी शिकायत लेकर आए थे कि उन्हें बुलाया नहीं गया, और गिदोन ने नरम उत्तर देकर आग बुझा दी थी (न्यायियों 8)। यिप्तह के पास वैसा उत्तर नहीं है, और परिणाम लाशों के ढेर हैं। न्यायियों की पुस्तक इसी ढलान पर उतरती है, बिन्यामीन के विरुद्ध गृहयुद्ध तक। सूत्र यह है: छुड़ानेवाले स्वयं छुड़ाए जाने की आवश्यकता रखते हैं। अब्दोन के सत्तर बेटे-पोते गदहों पर सवार होकर एक राजवंश का सपना दिखाते हैं, पर इस्राएल को गदहे पर सवार उस राजा की प्रतीक्षा करनी है जिसकी घोषणा जकर्याह करता है और जो यरूशलेम में आकर बँटवारे की दीवार तोड़ता है, न कि घाटों पर पहरा बिठाता है।
न्यायियों 12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यिप्तह के मुँह से निकला वाक्य याद रखिए और एप्रैम का ताना भी: "तुम तो एप्रैम और मनश्शे के बीच रहनेवाले एप्रैमियों के भगोड़े हो।" भगोड़ा! यही शब्द यिप्तह की पूरी ज़िंदगी का नाम है। वेश्या का बेटा, भाइयों द्वारा घर से निकाला हुआ, तोब देश में डाकुओं का सरदार, और फिर ज़रूरत पड़ने पर बुलाया गया। जिस अपमान से वह भागा था, वही अपमान उस पर फिर फेंका जाता है, और वह उसे सहन नहीं कर पाता। अनचंगा घाव सत्ता पाकर तलवार बन जाता है। पहले उसकी जल्दबाजी में मानी हुई मन्नत ने उसकी बेटी ली, अब उसकी चोट बयालीस हजार लेती है। छह वर्ष, और "गिलाद के किसी नगर" में एक बेनाम कब्र।
न्यायियों 12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
राजाओं से पहले का समय है, बारह गोत्र ढीले-ढाले संघ में बँधे हैं और कोई केंद्रीय अधिकार नहीं। गिलाद यरदन के पूर्व में, सीमांत का इलाका, हमेशा अम्मोनियों के दबाव में; एप्रैम यरदन के पश्चिम पहाड़ी हृदयभूमि में, यूसुफ का वारिस, जो स्वयं को नेतृत्व का स्वाभाविक हक़दार मानता था। यह मान-सम्मान की संस्कृति है, जहाँ युद्ध में न बुलाया जाना अपमान है और अपमान का बदला ज़रूरी। यरदन के घाट सैनिक दृष्टि से निर्णायक थे; जिसने घाट पकड़ा, उसने आवागमन पकड़ा। और न्यायियों की छोटी सूचियाँ, तीस बेटे, तीस बेटियाँ, सत्तर गदहे, केवल आँकड़े नहीं; ये सम्पत्ति, विवाह-गठजोड़ और वंश बढ़ाने की महत्वाकांक्षा की भाषा हैं।
न्यायियों 12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यिप्तह का घाव असली था। आपके किस असली घाव को आपने अब तक परमेश्वर के सामने नहीं, बल्कि दूसरों के विरुद्ध हथियार बनाकर रखा है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Judges 12 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

युद्ध खत्म हो चुका था, जीत मिल चुकी थी, और तब एप्रैमी आए। मदद करने नहीं, शिकायत करने: "जब तू अम्मोनियों से लड़ने को गया तब हमें संग चलने को क्यों नहीं बुलवाया?" लड़ाई के समय वे कहीं नहीं थे, पर श्रेय बँटने के समय हाज़िर थे।

अपने मन से पूछो: मेरा गुस्सा सचमुच अन्याय पर है, या सिर्फ़ इस बात पर कि मुझे नहीं पूछा गया?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

उसके बाद पिरातोनी हिल्लेल का पुत्र अब्दोन इस्राएल का न्याय करने लगा।" बस इतना ही। न कोई युद्ध, न कोई चमत्कार, न कोई यादगार वचन। फिर भी परमेश्वर ने उसका नाम अपनी पुस्तक में लिखवा दिया। तेरी सेवा भी शायद किसी को दिखाई न दे, कोई तालियाँ न बजें। पर जो तुझे बुलाता है, वह भूलता नहीं। एक पंक्ति भी उसके हाथ से लिखी हो तो काफ़ी है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 14

पिता, आपने अब्दोन को चालीस बेटे और तीस नाती दिए, और आठ वर्ष तक इस्राएल का न्याय करने की सेवा भी सौंपी। धन्यवाद कि आप घर भी भरते हैं और हाथों को काम भी देते हैं। मेरे परिवार की पीढ़ियों और मुझे मिली छोटी सी सेवा के लिए आपका आभार।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 8

हे प्रभु, कुछ नाम बस एक पंक्ति में रह जाते हैं, फिर भी आपने उन्हें याद रखा। मेरा काम भी छोटा और अनदेखा लगता है, पर आप देख रहे हैं। मुझे नाम की भूख से बचाइए और जहाँ आपने रखा है, वहीं ईमानदारी से सेवा करने की शक्ति दीजिए।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें