बाइबल व्याख्या

न्यायियों 15

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

गेहूँ की कटनी का मौसम है, और शिमशोन बकरी का एक बच्चा लेकर तिम्ना में अपनी पत्नी के पास लौटता है, पर दरवाज़ा बन्द मिलता है: ससुर ने उसकी पत्नी किसी और को दे दी है और छोटी बहन का प्रस्ताव रखता है। इसके बाद बदले की एक ऐसी शृंखला चलती है जो हर कदम पर भयानक होती जाती है, तीन सौ लोमड़ियों की पूँछों में बँधी मशालें, जली हुई फ़सल और जैतून की बारियाँ, फिर पलिश्तियों द्वारा उस स्त्री और उसके पिता को आग में जला देना, फिर शिमशोन का "अति निष्ठुरता के साथ" प्रहार। अन्त में यहूदा के तीन हज़ार लोग स्वयं उसे बाँधकर सौंपते हैं, यहोवा का आत्मा उस पर उतरता है, गदहे के जबड़े की हड्डी से हज़ार लोग मारे जाते हैं, और प्यास से मरते हुए उसे परमेश्वर पानी देते हैं।

मूल बात

इस अध्याय की सबसे असुविधाजनक बात यह है कि परमेश्वर का आत्मा किसी सन्त पर नहीं, बल्कि एक अपमानित, क्रोधित आदमी पर उतरता है जो साफ़ शब्दों में कहता है, "जैसा उन्होंने मुझसे किया था, वैसा ही मैंने भी उनसे किया है।" यह उद्धार का धर्मशास्त्र है, चरित्र का नहीं। परमेश्वर अपने लोगों को उस समय भी छुड़ाते हैं जब उनके पास कोई योग्य पात्र नहीं है, और उससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि लोग स्वयं छुटकारा नहीं चाहते; यहूदा के तीन हज़ार पुरुष हथियार पलिश्तियों पर नहीं, अपने ही उद्धारक पर उठाते हैं। दासता इतनी सामान्य हो चुकी है कि उसे तोड़ने वाला ही समस्या लगता है। और जब शिमशोन प्यास से पुकारता है, वह पहली बार स्वीकार करता है कि यह विजय उसकी नहीं थी: "तूने अपने दास से यह बड़ा छुटकारा कराया है।" अनुग्रह यहाँ इनाम नहीं, हस्तक्षेप है।

सूत्र

न्यायियों की किताब में हर उद्धारक कुछ कमी छोड़ जाता है, पर शिमशोन में यह कमी सबसे नंगी है, और यही उसे एक अजीब तरह से भविष्य की ओर इशारा करने वाला बना देती है। यहूदा के अपने ही लोग अपने छुड़ानेवाले को बाँधकर विदेशी शासकों के हाथ सौंपते हैं, यह वाक्य पढ़ते समय ठिठकना पड़ता है, क्योंकि सदियों बाद यहूदा के ही अगुवे एक और को बाँधकर विदेशी हाकिम के हाथ सौंपेंगे। पर अन्तर उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी समानता: शिमशोन रस्सियाँ तोड़कर हज़ार को मारता है, यीशु मसीह रस्सियाँ नहीं तोड़ते और स्वयं मारे जाते हैं। और फिर वह गड्ढा, जिसमें से प्यासे के लिए पानी फूट पड़ता है, वही चित्र जो मरुभूमि में चट्टान से निकले जल का था। परमेश्वर अपने अयोग्य दास को भी प्यासा मरने नहीं देते, क्योंकि छुटकारा उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न है, शिमशोन की योग्यता का नहीं।

दर्पण

"जैसा उन्होंने मुझसे किया था, वैसा ही मैंने भी उनसे किया है।" यह दुनिया का सबसे स्वाभाविक वाक्य है। हम इसे दफ़्तर में उस सहकर्मी के बारे में सोचते हैं जिसने मीटिंग में हमें नीचा दिखाया, परिवार में उस भाई के बारे में जिसने ज़मीन के बँटवारे में चालाकी की, उस रिश्तेदार के बारे में जिसने शादी में हमारा अपमान किया। और शिमशोन का अध्याय ईमानदारी से दिखाता है कि इस वाक्य का अन्त कहाँ होता है: जली हुई फ़सल, जली हुई स्त्री, ढेर के ढेर लाशें। बदला कभी बराबरी पर नहीं रुकता, वह हमेशा एक कदम आगे बढ़ता है, और अन्त में वह उन्हीं को भस्म करता है जिन्हें हम बचाना चाहते थे। यहूदा के लोग भी दर्पण हैं: हम भी अक्सर एक असुविधाजनक सच्चाई से ज़्यादा एक आरामदायक गुलामी चुनते हैं।

आज ही वह एक वाक्य, जिसे आप महीनों से मन में दोहरा रहे हैं और किसी दिन उस व्यक्ति के मुँह पर मारना चाहते हैं, काग़ज़ पर लिखिए, फिर उसके नीचे उस व्यक्ति का नाम लिखकर ज़ोर से कहिए, "इसका हिसाब मेरा नहीं है," और काग़ज़ फाड़ दीजिए।

कठिन प्रश्न

तिम्ना की वह स्त्री, जिसका नाम तक हमें नहीं मालूम, दो बार सौदेबाज़ी का माल बनती है और अन्त में उसी आग में जल जाती है जिसकी धमकी से वह पहले भी डराई गई थी। और उसकी मौत का बदला लेने के लिए और हज़ार लोग मरते हैं। इस पूरे चक्र के बीचोंबीच लिखा है कि "यहोवा का आत्मा उस पर बल से उतरा।" यह वाक्य पचता नहीं। किताब शिमशोन की तारीफ़ नहीं करती, वह सिर्फ़ रिपोर्ट करती है, और यह अन्तर महत्वपूर्ण है; पर आत्मा का उतरना सचमुच होता है। बाइबल अपने औज़ारों को साफ़ करके पेश नहीं करती। परमेश्वर टेढ़े हाथों से सीधी लकीर खींचते हैं, और हम पूरी तरह समझ नहीं पाते कि इस प्रक्रिया में वे स्वयं टेढ़े क्यों नहीं हो जाते। यह रहस्य बना रहता है, और इसे जल्दबाज़ी में सुलझाना बेईमानी होगी।

एक बारीकी

"गदहे के जबड़े की एक नई हड्डी।" दो शब्द जो आसानी से छूट जाते हैं। "नई" का अर्थ है ताज़ी, सूखी नहीं, यानी टूटने वाली नहीं, यानी किसी हाल ही में मरे हुए जानवर की। और यहीं काँटा है: शिमशोन नाज़ीर है, और नाज़ीर का सबसे कड़ा नियम यही था कि वह लाश को न छुए। वह अशुद्ध पशु की, अभी-अभी मरी हुई देह की हड्डी उठाता है, उससे हज़ार लोगों को मारता है, और फिर लाशों के ढेर पर खड़े होकर तुकबन्दी में अपनी जीत का गीत गाता है। हिब्रू में यह और तीखा है, क्योंकि "गदहा" और "ढेर" लगभग एक ही शब्द हैं, एक शब्दखेल। और ठीक इस अहंकार के गीत के बाद, अगली ही आयत में, वह प्यास से मरने लगता है।

पहले श्रोता

पहले सुननेवालों की नाक में जलते गेहूँ की गन्ध थी। शेफेला की उपजाऊ ढलानों पर कटनी का मौसम साल का सबसे बड़ा उत्सव भी था और सबसे बड़ा जोखिम भी; एक रात की आग पूरे साल का भोजन, तेल और कर चुकाने की क्षमता खा जाती थी। जैतून के पेड़ जलाना तो और भी भारी था, क्योंकि नया पेड़ फल देने में एक पीढ़ी लेता है। ये लोग जानते थे कि पलिश्ती लोहे और तटीय व्यापार पर बैठे थे और यहूदा उनका करदाता था। इसलिए "क्या तू नहीं जानता कि पलिश्ती हम पर प्रभुता करते हैं?" उनके कानों में शर्मिन्दगी की तरह गूँजता था, अपनी ही तस्वीर। और आख़िरी आयत, "बीस वर्ष तक इस्राएल का न्याय करता रहा," उन्हें बताती थी कि यह जीत अधूरी रही, क्योंकि पूरा छुटकारा अभी आना बाकी था।

चिंतन के प्रश्न

आपके जीवन में वह कौन-सा "हिसाब" है जिसे आप बराबर करना चाहते हैं, और अगर आप उसे सच में बराबर कर दें तो अगला कदम किसका होगा?

यहूदा के लोगों की तरह क्या आपने भी कोई ऐसी गुलामी स्वीकार कर ली है जो अब आपको सामान्य लगती है, और उसे तोड़नेवाला ही आपको परेशानी लगता है?

Judges में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Judges For You

Timothy Keller

Keller shows how this dark book shines light on grace for flawed people.

Judges: Such a Great Salvation

Dale Ralph Davis

Brings the judges to life without taming the rough edges of the text.

The Message of Judges

Michael Wilcock

Steady guidance through the darkest chapters of Israel's story.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Judges, Ruth

K. Lawson Younger

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Judges 15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

न्यायियों 15 का क्या अर्थ है?
गेहूँ की कटनी का मौसम है, और शिमशोन बकरी का एक बच्चा लेकर तिम्ना में अपनी पत्नी के पास लौटता है, पर दरवाज़ा बन्द मिलता है: ससुर ने उसकी पत्नी किसी और को दे दी है और छोटी बहन का प्रस्ताव रखता है। इसके बाद बदले की एक ऐसी शृंखला चलती है जो हर कदम पर भयानक होती जाती है, तीन सौ लोमड़ियों की पूँछों में बँधी मशालें, जली हुई फ़सल और जैतून की बारियाँ, फिर पलिश्तियों द्वारा उस स्त्री और उसके पिता को आग में जला देना, फिर शिमशोन का "अति निष्ठुरता के साथ" प्रहार। अन्त में यहूदा के तीन हज़ार लोग स्वयं उसे बाँधकर सौंपते हैं, यहोवा का आत्मा उस पर उतरता है, गदहे के जबड़े की हड्डी से हज़ार लोग मारे जाते हैं, और प्यास से मरते हुए उसे परमेश्वर पानी देते हैं।
न्यायियों 15 किस विषय में है?
न्यायियों की किताब में हर उद्धारक कुछ कमी छोड़ जाता है, पर शिमशोन में यह कमी सबसे नंगी है, और यही उसे एक अजीब तरह से भविष्य की ओर इशारा करने वाला बना देती है। यहूदा के अपने ही लोग अपने छुड़ानेवाले को बाँधकर विदेशी शासकों के हाथ सौंपते हैं, यह वाक्य पढ़ते समय ठिठकना पड़ता है, क्योंकि सदियों बाद यहूदा के ही अगुवे एक और को बाँधकर विदेशी हाकिम के हाथ सौंपेंगे। पर अन्तर उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी समानता: शिमशोन रस्सियाँ तोड़कर हज़ार को मारता है, यीशु मसीह रस्सियाँ नहीं तोड़ते और स्वयं मारे जाते हैं। और फिर वह गड्ढा, जिसमें से प्यासे के लिए पानी फूट पड़ता है, वही चित्र जो मरुभूमि में चट्टान से निकले जल का था। परमेश्वर अपने अयोग्य दास को भी प्यासा मरने नहीं देते, क्योंकि छुटकारा उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न है, शिमशोन की योग्यता का नहीं।
न्यायियों 15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही वह एक वाक्य, जिसे आप महीनों से मन में दोहरा रहे हैं और किसी दिन उस व्यक्ति के मुँह पर मारना चाहते हैं, काग़ज़ पर लिखिए, फिर उसके नीचे उस व्यक्ति का नाम लिखकर ज़ोर से कहिए, "इसका हिसाब मेरा नहीं है," और काग़ज़ फाड़ दीजिए।
न्यायियों 15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"गदहे के जबड़े की एक नई हड्डी।" दो शब्द जो आसानी से छूट जाते हैं। "नई" का अर्थ है ताज़ी, सूखी नहीं, यानी टूटने वाली नहीं, यानी किसी हाल ही में मरे हुए जानवर की। और यहीं काँटा है: शिमशोन नाज़ीर है, और नाज़ीर का सबसे कड़ा नियम यही था कि वह लाश को न छुए। वह अशुद्ध पशु की, अभी-अभी मरी हुई देह की हड्डी उठाता है, उससे हज़ार लोगों को मारता है, और फिर लाशों के ढेर पर खड़े होकर तुकबन्दी में अपनी जीत का गीत गाता है। हिब्रू में यह और तीखा है, क्योंकि "गदहा" और "ढेर" लगभग एक ही शब्द हैं, एक शब्दखेल। और ठीक इस अहंकार के गीत के बाद, अगली ही आयत में, वह प्यास से मरने लगता है।
न्यायियों 15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में वह कौन-सा "हिसाब" है जिसे आप बराबर करना चाहते हैं, और अगर आप उसे सच में बराबर कर दें तो अगला कदम किसका होगा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Judges 15 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जब अपने ही हाथ मुझे बाँधने आते हैं और डर के मारे मुझे सौंप देते हैं, तब मेरा मन टूट जाता है। मुझे कड़वाहट से बचा और यह भरोसा दे कि रस्सियों के बीच भी तू मेरे साथ है। तेरी पकड़ इंसानों की पकड़ से कहीं मजबूत है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

यहूदा के तीन हज़ार आदमी हथियार लेकर निकले, पर पलिश्तियों से लड़ने नहीं, अपने ही छुड़ानेवाले को बाँधने। उनकी शिकायत सुनिए: "क्या तू नहीं जानता कि पलिश्ती हम पर प्रभुता करते हैं?" गुलामी उन्हें इतनी आदत हो गई थी कि आज़ादी की कोशिश ही उन्हें खतरा लगी। सोचिए, कौन सी बात आपके जीवन में इतनी पुरानी हो गई है कि अब आप उससे लड़ना ही छोड़ चुके हैं?

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