लैव्यव्यवस्था 18
पाठ
परमेश्वर मूसा से कहते हैं कि इस्राएल न मिस्र की रीतियों पर चले, न कनान की, बल्कि केवल उनकी विधियों पर। फिर एक लम्बी सूची आती है: कौन-कौन से निकट सम्बन्धी यौन सम्बन्ध के लिए वर्जित हैं, माता, सौतेली माता, बहन, पोती, फूफी, मौसी, चाची, बहू, भाभी; साथ ही ऋतुकाल, पड़ोसी की पत्नी, मोलेक को बच्चे चढ़ाना, पुरुषगमन और पशुगमन। अध्याय का अन्त चेतावनी से होता है: इन्हीं कामों से कनान की भूमि अशुद्ध हुई, और "वह देश अपने निवासियों को उगल देता है" (पद 25)। बार-बार लौटती हुई एक ही पंक्ति पूरी सूची को थामे रखती है: "मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।"
पृष्ठभूमि
कल्पना कीजिए: सीनै के नीचे तम्बुओं की कतारें, जहाँ तीन पीढ़ियाँ एक ही कपड़े की दीवार के भीतर सोती हैं। कोई अलग कमरा नहीं, कोई ताला नहीं। विधवा बहू ससुर के तम्बू में लौट आती है; अनाथ भतीजी चाचा के पास पलती है। ऐसी निकटता में शक्ति का असन्तुलन घातक है, क्योंकि कुल का मुखिया ही न्यायाधीश भी है और प्रबन्धक भी। पीछे मिस्र है, जहाँ फ़िरौन का घराना बहन-भाई के विवाह को पवित्र मानता था। आगे कनान है, जहाँ उर्वरता के मन्दिर, धूप की गन्ध, और बालक की राख वाली वेदियाँ धर्म का हिस्सा थीं। यह अध्याय किसी सभा-भवन में नहीं, उस भीड़ भरे तम्बू में पढ़ा गया जहाँ हर नाम का एक चेहरा था।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि सूची किससे घिरी है। आरम्भ में और अन्त में परमेश्वर अपना नाम रखते हैं, और बीच में छह बार दोहराते हैं। यही इस अध्याय का धर्मशास्त्र है: नैतिकता कोई स्वतंत्र नियमावली नहीं, वह उस परमेश्वर की पहचान से निकलती है जिसने छुड़ाया। इसलिए पद 3 में आज्ञा का रूप सांस्कृतिक है, न मिस्र की तरह, न कनान की तरह; इस्राएल को एक अलग किस्म की देह-संस्कृति में जीना है। और पद 5 चौंकाता है: जो इन्हें माने "वह उनके कारण जीवित रहेगा।" ये नियम बाँध नहीं रहे, वे जीवन की दिशा दिखा रहे हैं, खासकर उनके लिए जिनके पास इनकार करने की ताकत नहीं थी।
मुख्य सूत्र
पद 25 में भूमि एक जीवित प्राणी बन जाती है जो अपने निवासियों को "उगल" देती है। यह अदन से निकाले जाने की गूँज है और निर्वासन की भविष्यवाणी भी; इस्राएल ने स्वयं बाद में यही अनुभव किया। नया नियम इस अध्याय को भूलता नहीं। पौलुस कुरिन्थ की कलीसिया में सौतेली माता के साथ सम्बन्ध पर यही पद 8 लागू करते हैं, और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला हेरोदेस से "यह तुम्हारे लिए उचित नहीं" कहकर पद 16 पर अपनी जान गँवाता है। पर जहाँ लेवीय 18 "नष्ट किए जाएँ" कहता है, वहाँ मसीह उस निष्कासन को अपनी देह में लेते हैं, नगर के बाहर, ताकि उगल दिए गए लोग लौट सकें।
दर्पण
यह अध्याय उस जगह पर हाथ रखता है जहाँ हम सबसे कम जाँच चाहते हैं: घर की चारदीवारी। जहाँ कोई देख नहीं रहा, जहाँ भरोसा सुरक्षा भी है और अवसर भी। आज के शब्दों में: फोन की निजी स्क्रीन, रिश्तेदार का वह मज़ाक जिस पर कोई कुछ नहीं कहता, वह बच्चा जो किसी खास चाचा के साथ अकेला रहने से कतराता है और हम उसे शर्मीलापन कह देते हैं। लेवीय 18 कहता है कि परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए चुप रहना स्वयं एक अशुद्धता है। सबसे कमज़ोर व्यक्ति की सुरक्षा परमेश्वर के नाम से जुड़ी है। आज ही, दस मिनट में: अपने घर या मण्डली के उस एक बच्चे या किशोरी का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके साथ कुछ ठीक नहीं लगता, और उसके लिए नाम लेकर प्रार्थना कीजिए।
प्रश्न
पद 22 और 23 आज के पाठक के गले से आसानी से नहीं उतरते, और पद 29 का "नष्ट किए जाएँ" तो और भी कठिन है। ईमानदारी से: यह पाठ अपनी भाषा में कठोर है और इसे मुलायम करना उसके साथ अन्याय होगा। पर दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, यह सूची व्यक्ति की पहचान पर नहीं, कामों पर बोलती है, और उसी साँस में अपने ही कुल के पुरुषों की हवस को भी उतनी ही कठोरता से तोड़ती है। दूसरी, दण्ड का अधिकार यहाँ समुदाय के हाथ में था, हमारे हाथ में नहीं। कठिनाई बनी रहती है। परन्तु जिस परमेश्वर ने यह कहा, उसी ने देह लेकर पापियों के साथ भोजन भी किया; दोनों को एक साथ थामे बिना हम उसे नहीं जानते।
मुख्य पात्र
इस अध्याय में असली पात्र वह परमेश्वर है जो अपने लोगों के शयनकक्ष तक जाने से नहीं हिचकता। यह शर्मनाक लग सकता है, पर सोचिए: कोई और देवता कनान में उस दासी या उस विधवा बहू के लिए नहीं बोल रहा था। यहोवा बोलते हैं, और नाम लेकर बोलते हैं। उनकी पवित्रता दूरी नहीं, निकटता है; वह उस भूमि तक को महसूस करती है जो अन्याय से भर गई हो। और वे अपने लोगों से अलग रहने की माँग इसलिए करते हैं क्योंकि वे उन्हें मिस्र से निकालकर अपने लिए ले आए हैं। हर वर्जना के पीछे वही वाक्य धड़कता है: मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
चिंतन
आपके घर या मण्डली में वह कौन है जिसके पास "नहीं" कहने की ताकत सबसे कम है, और क्या आपकी उपस्थिति उसके लिए सुरक्षा बनती है?
"मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ" को आप किस स्वर में सुनते हैं, धमकी के रूप में या उस मालिक के रूप में जिसने आपको छुड़ाया है, और यह अन्तर आपके आज्ञापालन को कैसे बदलता है?
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Leviticus 18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
लैव्यव्यवस्था 18 का क्या अर्थ है?
लैव्यव्यवस्था 18 किस विषय में है?
लैव्यव्यवस्था 18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
लैव्यव्यवस्था 18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लैव्यव्यवस्था 18 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Leviticus 18 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, आपने परिवार को सुरक्षित जगह बनाया है, जहाँ किसी का फ़ायदा न उठाया जाए। मेरे मन की इच्छाओं को शुद्ध कीजिए, और मुझे सीमाओं का आदर करना सिखाइए। जो कमज़ोर हैं, उन्हें मेरे व्यवहार से चोट नहीं, बल्कि सुरक्षा मिले।
तू अपनी सन्तान में से किसी को मोलेक के लिये होम करके न चढ़ाना।" कनान के लोग मानते थे कि बच्चे की बलि से खेत लहलहाएंगे, धंधा चलेगा। परमेश्वर इसे अपने नाम का अपमान कहता है। आज कोई आग नहीं जलाता, पर क्या तेरी सफलता की वेदी पर तेरे बच्चे का समय, उसकी शांति धीरे धीरे चढ़ रही है? किसके लिए, यह पूछने लायक सवाल है।
तू अपने पड़ोसी की पत्नी से संभोग करके उसके साथ स्वयं को अशुद्ध न करना।" ध्यान दे, परमेश्वर यह नहीं कहता कि तू सिर्फ दूसरे का घर तोड़ेगा। वह कहता है, तू स्वयं अशुद्ध होगा। पाप जिसे हम छिपा लेते हैं, वह भीतर से हमें ही मैला करता है। जिस चीज़ को तू आज छोटी बात समझ रहा है, वह तेरे मन के उस कोने को गंदा कर रही है जहाँ परमेश्वर बसना चाहता है।
अपनी बहू का तन न उघाड़ना, वह तो तेरे बेटे की पत्नी है" (लैव्यव्यवस्था 18:15)। बहू घर में सबसे कमज़ोर जगह पर होती है, अपने माता पिता से दूर, नए लोगों के बीच। परमेश्वर उसे नाम लेकर सुरक्षा देता है। जिस घर में सबसे कमज़ोर सदस्य सुरक्षित नहीं, वहाँ पवित्रता की बातें खोखली हैं। आपके घर में कौन असुरक्षित महसूस करता है?
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