बाइबल व्याख्या

मरकुस 2

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

कफरनहूम के एक घर में इतनी भीड़ है कि द्वार तक जगह नहीं; छत खोली जाती है और एक लकवे का मारा हुआ आदमी खाट पर लटकाकर यीशु के सामने उतारा जाता है, और यीशु उसके पाप क्षमा करते हैं, जिससे शास्त्री भड़क उठते हैं। इसके बाद वे एक चुंगी लेनेवाले को बुलाते हैं, पापियों के साथ भोजन करते हैं, उपवास के सवाल का जवाब दूल्हे की उपमा से देते हैं, और सब्त के दिन बालें तोड़ने पर अपने चेलों का बचाव करके कहते हैं कि मनुष्य का पुत्र सब्त का भी स्वामी है।

मूल बात

सोचिए उस क्षण को: मिट्टी और टहनियों की धूल नीचे गिर रही है, लोग सिर ऊपर उठाकर देख रहे हैं, और एक आदमी रस्सियों पर काँपता हुआ उतर रहा है। सब यही सोच रहे हैं, अब पैर ठीक होंगे। पर यीशु कहते हैं, "हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।" यह उत्तर सवाल से बड़ा है। यीशु उस आदमी की सबसे गहरी बीमारी को पहले छूते हैं, उसे जो वह खुद नहीं माँग रहा था। शास्त्रियों की तर्कबुद्धि सही है: परमेश्वर के सिवा कौन पाप क्षमा कर सकता है? पर उनका निष्कर्ष गलत है। यीशु परमेश्वर का अधिकार चुरा नहीं रहे; वे उसे धारण करते हैं। चंगाई उस दावे का सबूत है, मुख्य बात नहीं।

जोड़ने वाला धागा

इस अध्याय में यीशु बार-बार कुछ नया खोलते हैं: छत खुलती है, एक चुंगी चौकी छूट जाती है, मशकें फट जाती हैं। "नये दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं रखता" केवल बुद्धिमानी की बात नहीं, यह घोषणा है कि परमेश्वर का राज्य आ गया है और पुराने ढाँचे उसे सँभाल नहीं सकते। पुराने नियम में परमेश्वर ने अपने लोगों से विवाह की भाषा में बात की थी; अब दूल्हा मेज़ पर बैठा है, और पापी उसके साथ खा रहे हैं। पर वचन 20 में एक छाया गिरती है: "दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा।" मरकुस के दूसरे अध्याय में ही क्रूस की पहली रेखा खिंच जाती है। क्षमा मुफ़्त है, मगर मुफ़्त में नहीं मिली।

आईना

जिस व्यक्ति को छत से उतारा गया, वह कुछ नहीं बोलता। चार लोग उसे उठाते हैं, चार लोग छत उधेड़ते हैं, और यीशु "उनका विश्वास" देखते हैं, उसका नहीं। यह बात हमें चुभती भी है और राहत भी देती है। हम विश्वास को निजी उपलब्धि मानना चाहते हैं, अपनी ही कमाई। यहाँ एक आदमी दूसरों के विश्वास पर यीशु तक पहुँचता है। और शास्त्रियों को देखिए: वे बैठे हैं, कुछ नहीं कहते, मन ही मन विचार करते हैं। कितनी बार हमारा सबसे कड़ा विरोध ऐसा ही होता है, चुप, सभ्य, मन के भीतर। आज एक काम करें: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखें जो खुद प्रार्थना नहीं कर पा रहा, और उसके लिए नाम लेकर दो मिनट प्रार्थना करें।

पहले सुनने वाले

मरकुस के पहले पाठक ज़्यादातर रोमी संसार के गैर-यहूदी मसीही थे, जिन पर संदेह और दबाव था। उनके लिए यह अध्याय राहत की साँस था। जो लोग "धर्मी" नहीं गिने जाते थे, जिनका पेशा गंदा था, जिनकी मेज़ पर कोई शास्त्री नहीं बैठता, उन्हीं को यीशु बुलाते हैं। लेवी चुंगी की चौकी पर बैठा है, अपने ही लोगों से रोमी कर वसूलता हुआ, गाँव का सबसे नफ़रत किया जाने वाला आदमी। यीशु उसे सुधरने का समय नहीं देते, बस कहते हैं, "मेरे पीछे हो ले।" पहले हाँ, फिर जीवन बदलता है। जो सुनने वाले खुद अपने समाज के किनारे पर थे, उन्हें इसमें अपना नाम सुनाई देता था।

शास्त्र की गूँज

वचन 7 के पीछे यशायाह 43:25 खड़ा है, जहाँ परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि वे ही अपराध मिटाते हैं। शास्त्री यह आयत जानते थे; इसीलिए उनकी घबराहट धार्मिक थी, मूर्ख नहीं। यीशु उस आयत को झुठलाते नहीं, उसे अपने ऊपर ले लेते हैं। दूसरी गूँज वचन 25-26 में है: दाऊद और भेंट की रोटियाँ। यीशु नियम तोड़ने का बहाना नहीं बना रहे; वे याद दिला रहे हैं कि व्यवस्था का मकसद भूखे को मारना नहीं था। और अगर दाऊद की ज़रूरत ने नियम के भीतर जगह बनाई, तो दाऊद से बड़े की उपस्थिति क्या करेगी?

एक छोटी बात

"हे पुत्र" शब्द पर ठहरिए। यीशु उसे "मनुष्य" या "रोगी" नहीं कहते। वह अजनबी है, छत से टपका हुआ, धूल से ढका, शर्मिंदा। और पहला शब्द जो वह सुनता है, वह रिश्ते का शब्द है, जैसे पिता बिस्तर के किनारे बैठकर बोलता है। क्षमा यहाँ कोई कानूनी कागज़ नहीं, किसी के परिवार में लौटना है। मरकुस यह भी बताता है कि वह "सब के सामने से निकलकर" गया, वही भीड़ जिसने उसे रास्ता नहीं दिया था, अब उसे जाते देखती है। जो छत के रास्ते अंदर आया, वह दरवाज़े से बाहर गया, खाट अब उसे नहीं, वह खाट को उठाए हुए।

मनन के प्रश्न

किस व्यक्ति के विश्वास ने आपको यीशु के सामने उतारा, और आपने उसे कभी बताया?

आपके भीतर कौन सी "पुरानी मशक" है जो यीशु के नये दाखरस को सँभाल नहीं पा रही?

Mark में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

King's Cross

Timothy Keller

Keller walks through Mark to show the life of Jesus as one great story.

Mark For Everyone

N.T. Wright

Wright's punchy guide through the fastest moving Gospel.

The Message of Mark

Donald English

A clear companion to Mark's urgent good news.

Mark: An Introduction and Commentary

R. Alan Cole

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Mark

David Garland

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Mark 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

मरकुस 2 का क्या अर्थ है?
कफरनहूम के एक घर में इतनी भीड़ है कि द्वार तक जगह नहीं; छत खोली जाती है और एक लकवे का मारा हुआ आदमी खाट पर लटकाकर यीशु के सामने उतारा जाता है, और यीशु उसके पाप क्षमा करते हैं, जिससे शास्त्री भड़क उठते हैं। इसके बाद वे एक चुंगी लेनेवाले को बुलाते हैं, पापियों के साथ भोजन करते हैं, उपवास के सवाल का जवाब दूल्हे की उपमा से देते हैं, और सब्त के दिन बालें तोड़ने पर अपने चेलों का बचाव करके कहते हैं कि मनुष्य का पुत्र सब्त का भी स्वामी है।
मरकुस 2 किस विषय में है?
इस अध्याय में यीशु बार-बार कुछ नया खोलते हैं: छत खुलती है, एक चुंगी चौकी छूट जाती है, मशकें फट जाती हैं। "नये दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं रखता" केवल बुद्धिमानी की बात नहीं, यह घोषणा है कि परमेश्वर का राज्य आ गया है और पुराने ढाँचे उसे सँभाल नहीं सकते। पुराने नियम में परमेश्वर ने अपने लोगों से विवाह की भाषा में बात की थी; अब दूल्हा मेज़ पर बैठा है, और पापी उसके साथ खा रहे हैं। पर वचन 20 में एक छाया गिरती है: "दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा।" मरकुस के दूसरे अध्याय में ही क्रूस की पहली रेखा खिंच जाती है। क्षमा मुफ़्त है, मगर मुफ़्त में नहीं मिली।
मरकुस 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मरकुस के पहले पाठक ज़्यादातर रोमी संसार के गैर-यहूदी मसीही थे, जिन पर संदेह और दबाव था। उनके लिए यह अध्याय राहत की साँस था। जो लोग "धर्मी" नहीं गिने जाते थे, जिनका पेशा गंदा था, जिनकी मेज़ पर कोई शास्त्री नहीं बैठता, उन्हीं को यीशु बुलाते हैं। लेवी चुंगी की चौकी पर बैठा है, अपने ही लोगों से रोमी कर वसूलता हुआ, गाँव का सबसे नफ़रत किया जाने वाला आदमी। यीशु उसे सुधरने का समय नहीं देते, बस कहते हैं, "मेरे पीछे हो ले।" पहले हाँ, फिर जीवन बदलता है। जो सुनने वाले खुद अपने समाज के किनारे पर थे, उन्हें इसमें अपना नाम सुनाई देता था।
मरकुस 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"हे पुत्र" शब्द पर ठहरिए। यीशु उसे "मनुष्य" या "रोगी" नहीं कहते। वह अजनबी है, छत से टपका हुआ, धूल से ढका, शर्मिंदा। और पहला शब्द जो वह सुनता है, वह रिश्ते का शब्द है, जैसे पिता बिस्तर के किनारे बैठकर बोलता है। क्षमा यहाँ कोई कानूनी कागज़ नहीं, किसी के परिवार में लौटना है। मरकुस यह भी बताता है कि वह "सब के सामने से निकलकर" गया, वही भीड़ जिसने उसे रास्ता नहीं दिया था, अब उसे जाते देखती है। जो छत के रास्ते अंदर आया, वह दरवाज़े से बाहर गया, खाट अब उसे नहीं, वह खाट को उठाए हुए।
मरकुस 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके भीतर कौन सी "पुरानी मशक" है जो यीशु के नये दाखरस को सँभाल नहीं पा रही?
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Mark 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्हें उपदेश देने लगा।"

ध्यान दो, यीशु कहाँ पढ़ाते हैं। आराधनालय में नहीं, खुले किनारे पर, जहाँ मछुआरे, मज़दूर और चुंगी लेनेवाला लेवी भी खड़ा हो सकता था। जो भीतर आने से डरते थे, उनके लिए वे बाहर निकल आए।

आज भी वे तुम्हारे उसी कोने में आते हैं जहाँ तुम्हें लगता है तुम्हारी जगह नहीं है।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

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