बाइबल व्याख्या

यशायाह 43

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

बेबीलोन की नहरों के किनारे, एक हारी हुई क़ौम के बीच, परमेश्वर की आवाज़ उस नाम से शुरू होती है जो किसी और को याद नहीं रहा: "मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है।" इसके बाद अध्याय तीन लहरों में आगे बढ़ता है। पहले वादा: पानी और आग में से गुज़रना पड़ेगा, पर डुबोएँगे नहीं; बिखरे हुए बेटे-बेटियाँ पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से लौटाए जाएँगे। फिर अदालत का दृश्य: जातियाँ इकट्ठी हों, अपने देवताओं के गवाह लाएँ, और इस्राएल स्वयं परमेश्वर का गवाह बनकर खड़ा हो। और अंत में एक चुभती हुई शिकायत: तूने बलिदान नहीं लाए, पर अपने पापों का बोझ मुझ पर लाद दिया, फिर भी "मैं वही हूँ जो अपने नाम के निमित्त तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ।"

मूल बात

यहाँ परमेश्वर अपने लोगों को इसलिए नहीं बचाते कि वे बचाने लायक हैं। यही इस अध्याय की धार है। जिन लोगों से वे कहते हैं "मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है," वही लोग हैं जिनके बारे में वे कुछ ही पंक्तियों बाद कहते हैं कि उन्होंने अपने अधर्म के कामों से उन्हें थका दिया। मूल्य यहाँ वस्तु में नहीं, प्रेम करनेवाले की दृष्टि में है। और इसीलिए क्षमा का आधार इस्राएल का पश्चाताप नहीं, बल्कि परमेश्वर का अपना नाम है, उनकी अपनी प्रतिष्ठा, उनका अपना चरित्र। एक निर्वासित जाति के लिए यह सुनना कि "मुझसे पहले कोई परमेश्वर न हुआ और न मेरे बाद कोई होगा" केवल धर्मशास्त्र नहीं था; यह इस बात का ऐलान था कि जिस साम्राज्य ने उन्हें कुचला है, वह अंतिम शब्द नहीं बोलता।

जोड़नेवाला सूत्र

पद 16 और 17 में परमेश्वर अपना परिचय समुद्र में मार्ग बनानेवाले के रूप में देते हैं, रथ और घोड़े जहाँ सन की बत्ती की तरह बुझ गए। हर यहूदी जानता था कि यह किसकी बात है। और फिर तुरंत वे कहते हैं: "अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो।" यह चौंकानेवाला है। जिस निर्गमन पर पूरी क़ौम की पहचान टिकी थी, उसे भूल जाने को कहा जा रहा है, क्योंकि एक नया निर्गमन आ रहा है, इस बार समुद्र में नहीं बल्कि जंगल में, जहाँ नदियाँ बहेंगी। यही परमेश्वर का ढंग है: वे अपने पुराने काम को दोहराते नहीं, बड़ा करते हैं। और जब यरदन के किनारे यीशु पर आवाज़ उतरती है, "तू मेरा प्रिय पुत्र है," तो वही स्वर सुनाई देता है जो यहाँ पद 1 में है, नाम लेकर बुलाना और अपना कहना। मसीह में वह छुड़ौती किसी और देश से नहीं, स्वयं परमेश्वर के भीतर से चुकाई जाती है।

दर्पण

निर्वासन में सबसे पहले नाम छिनता है। दानिय्येल बेलतशस्सर बन जाता है। आज यह उतना नाटकीय नहीं होता, पर होता है: दफ़्तर में आप एक कर्मचारी संख्या हैं, अस्पताल में एक फ़ाइल, परिवार में शायद "जिसने वह ग़लती की थी।" इस अध्याय की चुभन यह है कि परमेश्वर उन लोगों को अनमोल कहते हैं जिनका रिकॉर्ड बुरा है। यानी आपकी कीमत आपके प्रदर्शन से नहीं आँकी जा रही। यह राहत भी है और चोट भी, क्योंकि इसका मतलब है कि आपकी मेहनत, आपकी धार्मिकता, आपका सुधरा हुआ चेहरा, इनमें से कुछ भी आपको खरीद नहीं रहा। पानी और आग हटाए नहीं जाते; बस उनके भीतर कोई साथ चलता है।

आज ही, कहीं अकेले में, अपना पूरा नाम ज़ोर से बोलिए और उसके बाद पद 1 के शब्द बोलिए: "मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है… तू मेरा ही है।" सुनकर बोलिए, मन में नहीं।

मुख्य पात्र

इस अध्याय का परमेश्वर अजीब तरह से खुला हुआ है। वे अपनी शक्ति की घोषणा करते हैं, "मेरे हाथ से कोई छुड़ा न सकेगा," और कुछ ही पंक्तियों बाद स्वीकार करते हैं कि वे थक गए हैं: "अपने अधर्म के कामों से मुझे थका दिया है।" यह वह भाषा है जो इंसानी रिश्तों से उधार ली गई है, और जानबूझकर। परमेश्वर यहाँ ठंडे न्यायाधीश नहीं, बल्कि वह निकट संबंधी हैं जिसका फ़र्ज़ है क़र्ज़ में बिके हुए रिश्तेदार को छुड़ाना। उनकी थकान गुस्से से नहीं, लगाव से आती है। और उनका निर्णय, "तेरे पापों को स्मरण न करूँगा," भूलने की कमज़ोरी नहीं बल्कि इच्छा का काम है, एक चुनाव कि अब यह हिसाब खोला नहीं जाएगा।

संदर्भ

छठी शताब्दी ईसा पूर्व, बेबीलोन। मंदिर जल चुका है, यरूशलेम खंडहर है, और जो बचे वे एक ऐसे शहर में रहते हैं जहाँ हर वसंत में मर्दूक की मूर्ति जुलूस में निकाली जाती है, ढोल, धूप, राजा का हाथ देवता के हाथ में। बगल में विजेता की भीड़, और तुम एक हारे हुए देवता के लोग। पड़ोसी का तर्क सीधा था: जिसका देवता जीता, वही सच्चा। इसीलिए पद 9 का अदालती दृश्य इतना तीखा है, जातियाँ अपने गवाह लाएँ जो साबित करें कि उनके देवताओं ने कभी कुछ पहले से कहा हो। और इस्राएल, जो सबसे कमज़ोर पक्ष है, गवाही के कठघरे में खड़ा किया जाता है। कसदियों के जहाज़ जिन पर वे बड़ा बोल बोलते थे, नदी में लंगर डाले खड़े हैं; परमेश्वर कहते हैं, उन्हीं पर उन्हें भगोड़ों की तरह ले जाया जाएगा।

एक बारीकी

पद 3 पर ठहरिए: "तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरे बदले कूश और सबा को देता हूँ।" यह व्यापारिक भाषा है, गुलाम बाज़ार की भाषा। किसी को छुड़ाने के लिए बदले में कुछ चुकाना पड़ता है, और परमेश्वर कहते हैं कि वे नील नदी के पूरे इलाके को तराज़ू पर रख देंगे। सुननेवालों के लिए यह लगभग असभ्य रहा होगा: मिस्र, वह महाशक्ति जिसने कभी उन्हें गुलाम रखा था, अब सिर्फ़ एक कीमत। पर बात कीमत की नहीं, अनुपात की है। परमेश्वर यह बता रहे हैं कि उनके इस टूटे हुए, बदनाम, निर्वासित झुंड का मोल उनकी नज़र में कितना है। साम्राज्य बिकाऊ हैं; यह क़ौम नहीं।

चिंतन के प्रश्न

"अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो" उस क़ौम से कहा गया जिसकी पहचान ही उसकी स्मृति थी। आपके जीवन में कौन-सी सच्ची, पुरानी बात आपको उस नए काम से अंधा कर रही है जो परमेश्वर अभी कर रहे हैं?

यदि आपकी क्षमता या धार्मिकता आपको परमेश्वर की दृष्टि में अनमोल नहीं बनाती, तो जब वह क्षमता घट जाए, आप किस पर खड़े होंगे?

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Isaiah 43 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यशायाह 43 का क्या अर्थ है?
बेबीलोन की नहरों के किनारे, एक हारी हुई क़ौम के बीच, परमेश्वर की आवाज़ उस नाम से शुरू होती है जो किसी और को याद नहीं रहा: "मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है।" इसके बाद अध्याय तीन लहरों में आगे बढ़ता है। पहले वादा: पानी और आग में से गुज़रना पड़ेगा, पर डुबोएँगे नहीं; बिखरे हुए बेटे-बेटियाँ पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से लौटाए जाएँगे। फिर अदालत का दृश्य: जातियाँ इकट्ठी हों, अपने देवताओं के गवाह लाएँ, और इस्राएल स्वयं परमेश्वर का गवाह बनकर खड़ा हो। और अंत में एक चुभती हुई शिकायत: तूने बलिदान नहीं लाए, पर अपने पापों का बोझ मुझ पर लाद दिया, फिर भी "मैं वही हूँ जो अपने नाम के निमित्त तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ।"
यशायाह 43 किस विषय में है?
पद 16 और 17 में परमेश्वर अपना परिचय समुद्र में मार्ग बनानेवाले के रूप में देते हैं, रथ और घोड़े जहाँ सन की बत्ती की तरह बुझ गए। हर यहूदी जानता था कि यह किसकी बात है। और फिर तुरंत वे कहते हैं: "अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो।" यह चौंकानेवाला है। जिस निर्गमन पर पूरी क़ौम की पहचान टिकी थी, उसे भूल जाने को कहा जा रहा है, क्योंकि एक नया निर्गमन आ रहा है, इस बार समुद्र में नहीं बल्कि जंगल में, जहाँ नदियाँ बहेंगी। यही परमेश्वर का ढंग है: वे अपने पुराने काम को दोहराते नहीं, बड़ा करते हैं। और जब यरदन के किनारे यीशु पर आवाज़ उतरती है, "तू मेरा प्रिय पुत्र है," तो वही स्वर सुनाई देता है जो यहाँ पद 1 में है, नाम लेकर बुलाना और अपना कहना। मसीह में वह छुड़ौती किसी और देश से नहीं, स्वयं परमेश्वर के भीतर से चुकाई जाती है।
यशायाह 43 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही, कहीं अकेले में, अपना पूरा नाम ज़ोर से बोलिए और उसके बाद पद 1 के शब्द बोलिए: "मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है... तू मेरा ही है।" सुनकर बोलिए, मन में नहीं।
यशायाह 43 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
छठी शताब्दी ईसा पूर्व, बेबीलोन। मंदिर जल चुका है, यरूशलेम खंडहर है, और जो बचे वे एक ऐसे शहर में रहते हैं जहाँ हर वसंत में मर्दूक की मूर्ति जुलूस में निकाली जाती है, ढोल, धूप, राजा का हाथ देवता के हाथ में। बगल में विजेता की भीड़, और तुम एक हारे हुए देवता के लोग। पड़ोसी का तर्क सीधा था: जिसका देवता जीता, वही सच्चा। इसीलिए पद 9 का अदालती दृश्य इतना तीखा है, जातियाँ अपने गवाह लाएँ जो साबित करें कि उनके देवताओं ने कभी कुछ पहले से कहा हो। और इस्राएल, जो सबसे कमज़ोर पक्ष है, गवाही के कठघरे में खड़ा किया जाता है। कसदियों के जहाज़ जिन पर वे बड़ा बोल बोलते थे, नदी में लंगर डाले खड़े हैं; परमेश्वर कहते हैं, उन्हीं पर उन्हें भगोड़ों की तरह ले जाया जाएगा।
यशायाह 43 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो" उस क़ौम से कहा गया जिसकी पहचान ही उसकी स्मृति थी। आपके जीवन में कौन-सी सच्ची, पुरानी बात आपको उस नए काम से अंधा कर रही है जो परमेश्वर अभी कर रहे हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Isaiah 43 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 19

पिता, धन्यवाद कि आप जंगल में मार्ग और निर्जल देश में नदियाँ बहाने वाले परमेश्वर हैं। जहाँ मुझे कोई रास्ता नहीं दिखता था, वहाँ आपने राह खोली। धन्यवाद कि आप आज भी नया काम कर रहे हैं, और वह प्रगट होने पर है। मेरी सूखी जगहों पर आपकी नदियाँ बहती हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊँगा और पश्चिम से इकट्ठा करूँगा।"

गौर कर, पहले "मैं तेरे संग हूँ" कहा, फिर बिखरे हुओं को लाने का वादा किया। परमेश्वर हालात बदलने से पहले तेरे पास आ खड़ा होता है।

तेरा अपना कोई दूर छिटक गया है? जिस दिशा में वह गया है, वह दिशा भी परमेश्वर के हाथ में है।

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