मत्ती 18:22
पाठ
पतरस ने गिनती लेकर यीशु के सामने रखी थी। "सात बार?" उसने पूछा, और शायद उसे लगा कि वह उदारता की हद तक पहुँच गया है। उसके ज़माने में तीन बार क्षमा करना ही काफ़ी समझा जाता था; सात तो दोगुने से भी ज़्यादा है। उसके चेहरे पर वह हल्की-सी उम्मीद रही होगी कि गुरु सिर हिलाकर कहेंगे, "शाबाश, पतरस।" पर यीशु ने उसकी गिनती को सराहा नहीं, तोड़ दिया: "मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन् सात बार के सत्तर गुने तक।" यानी गिनना बंद करो। जिस पल तुम बहीखाता खोलकर अपराधों पर निशान लगाने लगते हो, उसी पल तुम क्षमा के राज्य से बाहर खड़े हो।
मूल बात
पतरस की असली समस्या संख्या नहीं, सोच का ढाँचा है। वह क्षमा को एक लेन-देन समझता है, जिसमें एक सीमा होनी चाहिए, वरना अन्याय हो जाएगा। यीशु उस ढाँचे को ही गिरा देते हैं। "सात बार के सत्तर गुने" कोई नया हिसाब नहीं है जिसे आप डायरी में लिखकर चार सौ नब्बेवीं बार पर रुक जाएँ; यह हिसाब के अंत की घोषणा है। और इसकी जड़ परमेश्वर के स्वभाव में है। जो पिता भटकी हुई एक भेड़ के लिए निन्यानवे छोड़कर पहाड़ों पर जाता है, वह अपने बच्चों से यही माँगता है कि वे भी लौटने वाले के लिए दरवाज़ा खुला रखें। क्षमा करना परमेश्वर जैसा बनना है, और इनकार करना यह कहना है कि आपका अपना कर्ज़ कभी माफ़ ही नहीं हुआ था।
सूत्र
लेमेक के गीत से यीशु के वचन तक एक सीधी रेखा खिंचती है। उत्पत्ति के चौथे अध्याय में कैन का वंशज लेमेक अपनी पत्नियों के सामने डींग मारता है कि कैन का बदला सात गुना लिया जाएगा, पर उसका सतहत्तर गुना। यह मनुष्य के इतिहास का पहला गणित है: चोट का ब्याज समेत हिसाब। यीशु ठीक उसी आँकड़े को उठाकर उलट देते हैं। जहाँ लेमेक ने प्रतिशोध को असीम किया, वहाँ मसीह क्षमा को असीम करते हैं। और यह केवल नैतिक उपदेश नहीं है; यह उस राज्य का संविधान है जो क्रूस पर स्थापित होगा, जहाँ परमेश्वर का पुत्र अपने मारने वालों के लिए क्षमा माँगेगा। बदले की गिनती टूटती है क्योंकि एक दिन एक व्यक्ति सारा कर्ज़ अपने ऊपर ले लेगा।
दर्पण
आप जानते हैं कि आपके भीतर कौन-सी बहीखाता खुली है। वह ससुराल वाला ताना जो आठ साल पुराना है पर आज भी ताज़ा चुभता है। वह सहकर्मी जिसने मीटिंग में आपका श्रेय ले लिया और आपने तय किया कि अब कभी उसकी मदद नहीं करेंगे। वह भाई जिससे ज़मीन के बँटवारे के बाद बात बंद है, और आप खुद को समझाते हैं कि आपने तो बहुत बार माफ़ किया, अब बस। पतरस भी यही कह रहा था। ध्यान दीजिए, यीशु ने यह नहीं कहा कि अपराध कोई बात नहीं; उन्होंने अभी-अभी समझाया था कि जाकर अकेले में बात करो। क्षमा सच्चाई को दबाती नहीं, बदला छोड़ती है।
आज ही एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिसकी गलतियों की गिनती आपने मन में रखी है, और उस कागज़ को फाड़ते हुए ज़ोर से कहिए: "मैं अब इसका हिसाब नहीं रखूँगा।"
बारीकी
"वरन्" शब्द पर रुकिए। यीशु पतरस के सवाल का जवाब बड़ा करके नहीं देते, वे उसे रद्द करते हैं: "मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार।" पहले इनकार, फिर नया वचन। यदि वे केवल संख्या बढ़ाते, तो पतरस राहत की साँस लेकर नई डायरी खरीद लेता। पर "सात बार के सत्तर गुने" ऐसी संख्या है जिसे कोई वास्तव में गिन नहीं सकता। कौन याद रखेगा कि यह तीन सौ बारहवीं बार थी? और वही तो बात है। जिस क्षण आप गिनती भूल जाते हैं, आप क्षमा करना सीख चुके होते हैं। यीशु ने पतरस को ऊँचा लक्ष्य नहीं दिया, उन्होंने उसका नापने का फ़ीता छीन लिया।
अन्तर्पाठ
इस वचन के ठीक बाद यीशु एक कहानी सुनाते हैं, और वह संयोग नहीं है। "दस हजार तोड़े" का कर्ज़दार दास घुटनों पर गिरकर कहता है, "हे स्वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूँगा।" यह असंभव वादा है; वह रकम कई जन्मों में नहीं चुकती। फिर वही आदमी बाहर निकलकर सौ दीनार के लिए अपने संगी का गला घोंटता है। यीशु पतरस के गणित का उत्तर गणित से ही देते हैं: तुम्हारा माफ़ किया गया कर्ज़ और तुम्हें चुकाया जाने वाला कर्ज़, इन दोनों के बीच का अनुपात देखो। स्वामी का प्रश्न पूरे अध्याय की धुरी है: "जैसा मैंने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?"
मुख्य व्यक्ति
पतरस को दोष देना आसान है, पर उसकी ईमानदारी सराहने लायक है। वह अकेला था जो पास आकर पूछ बैठा, जबकि बाकी चेले शायद मन ही मन वही सोच रहे थे। उसके सवाल में एक घायल आदमी की थकान छिपी है: प्रभु, कहाँ तक? कब तक मैं वही चोट सहूँ और मुस्कुराकर आगे बढ़ूँ? यह सवाल उस आदमी का है जो अभी-अभी "बड़ा कौन है" की बहस में शामिल था, और जो कुछ महीनों बाद खुद तीन बार अपने गुरु को नकारेगा। पतरस नहीं जानता कि वह जिस असीम क्षमा से डर रहा है, एक दिन वही उसे झील किनारे वापस जीवन में लाएगी। यीशु उसे सख़्ती से उत्तर देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि पतरस को सबसे ज़्यादा ज़रूरत इसी वचन की होगी।
चिंतन
आपके मन की बहीखाते में अभी किसका नाम लिखा है, और उस नाम को वहाँ बनाए रखने से आपको क्या मिलता है?
यदि परमेश्वर ने आपके साथ वैसा ही व्यवहार किया होता जैसा आप उस व्यक्ति के साथ कर रहे हैं, तो आज आप कहाँ खड़े होते?
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Matthew 18:22 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 18:22 का क्या अर्थ है?
मत्ती 18:22 किस विषय में है?
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मत्ती 18:22 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 18:22 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 18 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि तू वह राजा है जिसने "अपने दासों से लेखा लेना चाहा", और मेरा भारी कर्ज़ अनदेखा नहीं किया, बल्कि उसे अपने ऊपर ले लिया। धन्यवाद कि तेरे राज्य में हिसाब सच्चाई से होता है और दया से चुकाया जाता है।
जो कुछ तुम पृथ्वी पर बाँधोगे, वह स्वर्ग में बँधेगा और जो कुछ तुम पृथ्वी पर खोलोगे, वह स्वर्ग में खुलेगा।" यह बात यीशु ने भटके हुए भाई को खोजने की बात के बीच कही। यह अधिकार निन्दा करने के लिए नहीं, किसी को वापस लाने के लिए मिला है। सोच, जो दरवाज़ा तू आज किसी के लिए खोलता है, स्वर्ग उसे बन्द नहीं करता। और जो तू बन्द रखता है?
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